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क्रिप्टो-करेंसी क्या है, क्रिप्टो करेंसी की सारी जानकारी 

एक जमाने में लोग अपनी जरूरतों को पूरी करने के लिए पैसो की नही बल्कि चीजों का इस्तेमाल करते थे। आज भी गांव एरिया में जाकर आप देख सकते हो कि लोग पैसे नहीं बल्कि गेंहू धान इत्यादि अनाजो को बदलकर जरूरत का सामान खरीदते हैं। बहुत जगह यहबप्रथा आज भी चलती आ रही है। लेकिन धीरे-धीरे लोग अनाज की जगह पैसे रखने लगे क्योंकि पैसे को इधर से उधर ले जाना आसान होता था। आप इतिहास के पन्नों को पलट कर भी देख लीजिए, पुराने जमाने में लोग अनाज का इस्तेमाल करते थे पैसों की रूप में और खरीदारी करने अगर मंडी जाते तो भी साथ में अनाज लेकर जाते थे। 

क्रिप्टो-करेंसी क्या है, क्रिप्टो करेंसी की सारी जानकारी 

खैर अब तो हर किसी के पास पैसे रहते हैं। लोग पैसे देकर कुछ भी खरीद सकते हैं। जैसे जैसे समय आगे बढ़ा बहुत सारी नई तकनीक, बहुत सारी नई सुविधाओं के आविष्कार होते गयें। 21वी सदी एक ऐसा समय है, जब सबसे ज्यादा बदलाव हुए। लोगों की जिंदगियों को आसान बनाने के लिए जितना अधिक संभव हुआ उतने बदलाव इस युग में किए गए। ऐसा ही एक खास बदलाव है आभासी मुद्रा यानी Virtual Currencyका प्रचलन। लेकिन ध्यान रखना जरूरी है कि आभासी मुद्रा की लाइन में रिस्क बहुत है और हाल ही में आर्थिक केंद्रीय मंत्रालय ने भी यह आदेश जारी किया है कि लोग बिटकॉइन और बाकी क्रिप्टो करेंसी मुद्राओ में Invast से बचें। आज के पोस्ट में हम क्रिप्टो-करेंसी और इसके सारे पहलुओं को समझेंगे।
क्रिप्टो-करेंसी क्या है

क्रिप्टो करेंसी के बारे में सरल भाषा में कहें तो यह क्रिप्टोग्राफी प्रोग्राम पर आधारित वर्चुअल करेंसी या ऑनलाइन मुद्रा है, जो पियर टू पियर Cash System है।जैसा कि हमने कहा यह ऑनलाइन मुद्रा है, इसको हम डिजिटल वॉलेट में ही रख सकते हैं और वहीं से इस मुद्रा को इस्तेमाल कर सकते हैं। इस मुद्रा को रखने के लिए हमें बैंक के किसी अन्य वित्तीय संस्थान की जरूरत नहीं पड़ती है। क्रिप्टो-करेंसी दो तरह के होते हैं। फिएट क्रिप्टोक्रिप्टो-करेंसी और नॉन फिएट क्रिप्टो-करेंसी।

फिएट और नॉन फिएट क्रिप्टो-करेंसी क्या है

आप इतना समझिए कि नॉन फिएट क्रिप्टो-करेंसी निजी क्रिप्टो-करेंसी है जैसे कि बिटकॉइन। वही फिएट क्रिप्टो-करेंसी एक डिजिटल मुद्रा है, जिसे केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किया जाता है। अगर भविष्य में भी रिजर्व बैंक कोई आभासी मुद्रा जारी करती है तो उसको फिएट क्रिप्टो करेंसी कहा जायेगा। 

बिटकॉइन और क्रिप्टो-करेंसी में कंफ्यूजन 

क्रिप्टो-करेंसी क्या है, क्रिप्टो करेंसी की सारी जानकारी 

कुछ लोगों को लगता है कि क्रिप्टो-करेंसी सिर्फ बिटकॉइन ही है। काफी लोग क्रिप्टो-करेंसी और बिटकॉइन को एक ही समझते हैं। लेकिन यहा पर थोड़ी सी समझने की जरूरत है। आप लोग बस इतना समझ ले कि सभी क्रिप्टो-करेंसी बिटकॉइन नहीं है लेकिन सभी बिटकॉइन क्रिप्टो-करेंसी है। बिटकॉइन के अलावा भी बहुत सारे क्रिप्टो-करेंसी है जैसे कि एथेरेम(Ethereum), रिप्पल(Ripple) इत्यादि।

क्रिप्टो करेंसी के लाभ या सुविधाएं

◆ यह मुद्रा ने निजता बनाए रखने में मददगार है। क्रिप्टो-करेंसी के द्वारा लेनदेन के दौरान छद्म नाम एवं पहचान बताएं जाते हैं। जो लोग अपनी निजता को लेकर काफी ज्यादा संवेदनशील है, उनके लिए लेन-देन का यह विकल्प काफी संतोषजनक और सुलझा हुआ है।

◆ क्रिप्टो-करेंसी मे लेनदेन की लागत बहुत ही कम है, जो इसकी लोकप्रियता का एक मुख्य कारण है। घरेलू हो या अंतरराष्ट्रीय दोनो प्रकार की लेनदेन में लागत समान ही लगती हैै।

◆ क्रिप्टो करेंसी के जड़िये लेनदेन में किसी भी थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन की जरूरत नहीं पड़ती है, जिसके कारण पैसे और समय दोनों की काफी बचत हो जाती है।

◆ इस माध्यम में प्रवेश जनक बाधाएं न के ही बराबर है। अगर हम लोग बैंक द्वारा लेनदेन करते हैं तो अकाउंट खोलने से लेकर पैसों की लेनदेन करने तक हर कदम पर नए-नए प्रमाणपत्र की जरूरत पड़ती है, जो कभी कभी काफी irritating हो जाता है। लेकिन क्रिप्टो-करेंसी में प्रमाण पत्रों का कोई झंझट ही नहीं है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेनदेन के मामलों में भी काफी औपचारिकता से गुजरना पड़ता है। लेकिन क्रिप्टो-करेंसी के माध्यम से लेनदेन करने पर यह सब काम आसानी से हो जाता है।

◆ बैंकों के माध्यम से लेनदेन करने पर, सरकार के पास यह अधिकार होता है कि वह हमारे बैंक खाते को फ्रीज या जब्द कर सकती है। लेकिन क्रिप्टो-करेंसी के मामले में सरकार ऐसा नहीं कर सकती। यह पद्धति पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण से बाहर है।
क्रिप्टो-करेंसी के नुकसान और समस्या

◆ यह एक असुरक्षित लेन-देन व्यवस्था है इसकी पूरी प्रक्रिया और लाइन होने के कारण इसकी सुरक्षा पर सवाल उठते हैं इसके हैक होने का खतरा बना रहता है।

◆ इस व्यवस्था के साथ देश की सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी जुड़ी हुई है। यह मुख्य वित्तीय सिस्टम और बैंकिंग प्रणाली से पूरी तरह बाहर रहकर काम करती है, जिससे इसके स्रोत और सुरक्षा पर सवाल उठते हैं। जानकारी के लिए बता दें, इस डिजिटल मुद्रा को फ्रॉड, हवाला मनी और आतंकी गतिविधियों को पोषित करने वाली मुद्रा के रूप में संबोधित किया जाता आ रहा है।

◆  क्रिप्टो-करेंसी का एक और नेगेटिव पॉइंट इसके नियंत्रण को प्रबंधन के साथ जुड़ा हुआ है। भारत देश जैसे कई देशों ने अभी तक इसको मुद्रा के रूप में स्वीकृति नहीं दी है। जिससे इसका प्रबंधन और नियंत्रण एक बड़ी समस्या बनी हुई है।

◆ क्रिप्टो-करेंसी के लेनदेन के साथ पर्यावरण संबंधी चिंताएं भी जुड़ी हुई है। गौरतलब है कि एक बिटकॉइन के लेन-देन में 237 किलोवाट बिजली खपत होती है, जिससे प्रति घंटा लगभग 92 किलो कार्बन का उत्सर्जन होता है।

लेकिन फिर भी क्रिप्टो-करेंसी की जनप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसके सरल लेनदेन पद्धति के कारण लोग लेन-देन के इस माध्यम को ज्यादा पसंद करते हैं। सरकार भी इन पर नियंत्रण करने में सफल नहीं हो पा रही हैं। विश्व के केंद्रीय बैंकों को यह आभास होने लगा है कि आभासी मुद्रा पर नियंत्रण लगाने का प्रयास निरर्थक है। इसी कारण देश और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वित्तीय संस्थानों ने खुद का क्रिप्टो-करेंसी जारी करने की दिशा में कदम बढ़ाया है और विचार कर रही हैं।

Bitcoin क्या है: जानिए बिटकॉइन के बारे में सबकुछ।

Bitcoin एक virtual currency है जैसे कि बाकी करेंसीज Rupee, Dollar इत्यादि। बाकी Currencies तरह बिटकॉइन एक Digital currency है। बिटकॉइन को डिजिटल वॉलेट में रखा जाता है। यह एक open-source है, जिसे कोई भी यूज कर सकता है। virtual currency का मतलब होता है कि यह पैसे तो है और इसका यूज भी हम हर जगह कर सकते हैं। लेकिन इसे हम ना तो छू सकते हैं और ना ही देख सकते हैं। जी हां दोस्तों! फिर आप यह कह सकते हैं कि यह एक तरह का पॉइंट्स होता है, जो हमें मिलता है और जिसे हम बाद में अपने देश की मुद्रा के हिसाब से कन्वर्ट कर सकते हैं।

आप लोग यह जरूर सोच रहे होंगे कि यह कैसी मुद्रा है। जो कि ना हम छू सकते हैं और ना ही देख सकते हैं। तो हम इसे कैसे हमेशा अपने पास रखेंगे और कैसे इसका यूज करेंगे। तो आपको हम बता दे कि यह एक वर्चुअल करेंसी है, जिसे आप बाद में अपने बैंक अकाउंट में भेज करके अपने देश का करेंसी बना सकते हैं। यानी कि आपके देश में जो करेंसी चलती है आप उस देश के करेंसी के हिसाब से उसे बना सकते हैं। अब तो आप लोग समझ गए होंगे कि बिटकॉइन क्या है।

Bitcoin क्या है: जानिए बिटकॉइन के बारे में सबकुछ।

1 बिटकॉइन की कीमत आप जानकर हैरान रह जाएंगे। इंडिया में एक बिटकॉइन की आज की कीमत लगभग Rs 7,86,750.53 रुपए हैं। लेकिन इसमें एक बात यह है कि बिटकॉइन की कीमत घटती और बढ़ती रहती है। क्योंकि इसे कंट्रोल करने के लिए कोई अथॉरिटी नहीं है। और इसीलिए इसकी वैल्यू इसके डिमांड के हिसाब से चेंज होती रहती है। अगर आप वर्तमान में एक बिटकॉइन की कीमत जानना चाहते हैं। तो आप गूगल पर 1 Bitcoin to inr लिखकर सर्च करें वर्तमान में बिटकॉइन की जो कीमत है वह आपको पता चल जाएगा।

बिटकॉइन को ट्रांजेक्शन में इस्तेमाल किया जाने वाला सबसे तेज और कुशल माध्यम माना जाता है। आजकल बहुत से लोग बिटकॉइन को अपना रहे हैं। जैसे कि Online developers, entrepreneurs, non-profit organisations इत्यादि। आज की डेट में बिटकॉइन का इस्तेमाल पूरी दुनिया में ग्लोबल पेमेंट के लिए किया जा रहा है।

बिटकॉइन का यूज आप कहां कर सकते हैं –

  • * बिटकॉइन को आप ऑनलाइन शॉपिंग के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • * दुनिया में आप किसी को भी पैसे भेजने या किसी से पैसे रिसीव करने के लिए बिटकॉइन का यूज़ कर सकते हैं।
  • * आप किसी को पेमेंट भेजने के लिए बिटकॉइन का उपयोग कर सकते हैं।
  • * बिटकॉइन का प्रयोग आप पैसे कमाने के लिए कर सकते हैं।
  • * साथ ही आप बिटकॉइन को खरीद और बेच भी सकते हैं।

आशा करती हूं अभीतक आपको बिटकॉइन के बारेे में सारी जानकारी मिल गयी होगी। और आप लोग यह समझ चुके होंगे कि बिटकॉइन क्या है और इसका इस्तेमाल कहांं कहां किया जा सकता है। मैने बहुत ही सरल भाषा में आप लोगोंं को बिटकॉइन के बारे में समझाया है, जो आशाा करती हु आपको पसंद आया होगा।

Kidney Stone का इलाज:  जानिए गुर्दे में पथड़ी क्यों होता है, इसके उपचार कौन कौन से है।

एक जमाना था जब, बीमारियां काफी कम थी। इतने बीमारियों के नाम भी लोगों को पता नहीं थे और बीमारी होती भी थी तो लोग देसी इलाज करके ही उन्हें ठीक कर लेते थे। दरअसल पहले का खानपान अलग था, खानपान में कोई मिलावट नहीं थी। लोग प्रकृति से जुड़ी चीजों का सेवन करते थे और स्वस्थ रहते थे। लेकिन आज की लाइफ स्टाइल और खानपान दोनों एकदम बदल गया है। लोग 24 घंटे Busy रहने लगे हैं, खाने-पीने का कोई सही समय नहीं है आज। साथ ही साथ खानपान में भी मिलावट आ गई है। इसी कारण नई नई बीमारियां आए दिन लोगों को जकड़ रही हैं। ऐसी ही एक बीमारी है गुर्दे में पथरी। Research से यह पता चला है कि हर 100 में से 15 लोगों को गुर्दे में पथरी है। इसीसे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह बीमारी कितनी गंभीर रूप लेती जा रही है दिन प्रतिदिन। लेकिन सवाल यह है कि ये बीमारी लगती कैसे हैं। चलिए पहले इसी बारे में जानते हैं।

किडनी में पथड़ी का कारण

दोस्तों! आज की लाइफ स्टाइल को देखते हुए ऐसा कोई निश्चित कारण नहीं बता सकते, जिसके कारण किडनी में पथरी होती है। बहुत से ऐसे वजह है जिससे पथरी होने का खतरा बढ़ जाता है। कुछ वजह सामने आई है तो कुछ वजह अभी तक अनजान है। लेकिन  सबसे ज्यादा जिस वजह से गुर्दे में पथरी होती है, वह यह कि किडनी के फिल्टर मेकेनिज्म  खराबी आ जाती है। जब उसमें खराबी आ जाती है तो यूरिन में कुछ रसायन अधिक हो जाते है। जो जमा होकर गुर्दे में पथरी का रूप ले लेते है। किडनी में पथरी होने के कुछ कारण इस प्रकार है।

Kidney Stone का इलाज:  जानिए गुर्दे में पथड़ी क्यों होता है, इसके उपचार कौन कौन से है।

प्रोटीन, नमक और ग्लूकोजयुक्त पदार्थ का अधिक मात्रा में सेवन

हम सभी को पता है कि प्रोटीन और ग्लूकोज हमारी सेहत के लिए जरूरी है। लेकिन अगर इसकी मात्रा अधिक हो जाए तो बीमारी लगते देर नहीं लगती। प्रोटीन, ग्लूकोज और नमक के ज्यादा सेवन से गुर्दे में पथरी होने का खतरा रहता है।
थाइरॉएड से ग्रस्त होने पर

थाइरॉएड की दिक्कत  होने से भी पथरी होने का खतरा रहता है। इसीलिए थाइरॉएड से ग्रस्त रोगी को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए, साथ ही उन्हें बीच-बीच में जांच कराते रहना की कही उनके गुर्दे में भी पथरी तो नहीं हो गयी।
वजन अधिक होना 

कम या ज्यादा वजन हमारे शरीर के लिए घातक होता है। जिन लोगों का वजन ज्यादा है, उन्हें बाकी बिना बीमारियों के साथ किडनी स्टोन होने का भी खतरा रहता है। इसी कारण वजन को नियंत्रित रखना बहुत जरूरी होता है।
बाईपास सर्जरी का होना 

जिन लोगों ने हालही में अपना बाईपास सर्जरी करवाया है, उनको भी किडनी में पत्थर होने का खतरा रहता है। ज्यादातर यह बाईपास सर्जरी के साइड इफेक्ट के कारण होते हैं।
पानी कम पीना 

कुछ लोग को पानी कम पीने की आदत होती है। वह लोग ज्यादा पानी नहीं पी पाते। लेकिन ऐसा करना सही नहीं। पानी कम पीने से हमारे शरीर में बहुत सी बीमारी लगने का खतरा रहता है। पानी कम पीने से हमारा शरीर पूरी तरह से साफ नहीं हो पाता और हमारे गुर्दे में पथरी बनने की संभावना रहती है।

गुर्दे में पथरी कितने प्रकार के होते हैं

कैल्शियम स्टोंस (Calcium stones) — अधिकांश लोगों को कैल्शियम स्टोंस होते हैं। यह आमतौर पर कैलशियम ऑक्सलेट के रूप में होती है। ऑक्सलेट एक प्राकृतिक रूप से पाया जानेवाला पदार्थ है जो भोज्य पदार्थों में मिलने के साथ-साथ लीवर में भी इसका निर्माण होता है। बात करें भोज्य पदार्थों की तो कुछ फल-सब्जियां,अनाज, चॉकलेट इत्यादि में ऑक्सलेट पाए जाते हैं।

स्रावित स्टोंस(Secreted stones) — यह स्टोंस आमतौर पर संंक्रमण के कारण होते हैं। अगर यह स्टोन हो जाए तो ये काफी जल्दी बड़े हो सकते हैं।

यूरिक एसिड स्टोंस(Uric acid stones)– यह पथरी महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज्यादा होती हैं। यह उन लोगों को खासतौर पर होती है जो, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ या पानी का सेवन नहीं करते और जिनके मूत्र में एसिड की मात्रा अधिक होती है। 

सिस्टीन स्टोंस(Cysteine stones)– यह काफी कम लोगो मे होता है। यह स्टोन खासतौर पर उन लोगों के शरीर में होती है, जिनको कोई अनुवांशिकी विकार है। इस स्थिति में सिस्टीन एसिड, किडनी से लीक होकर मूत्र में आ जाता है।

Kidney stone का इलाज 

किडनी स्टोन के इलाज के लिए बहुत से विकल्प मौजूद है जैसे कि –

Homeopathy Treatment — काफी लोग जो खास करके ज्यादा खर्च करने के लिए सक्षम नहीं है या फिर ऑपरेशन से डरते हैं या फिर ज्यादा अंग्रेजी दवाइयों का सेवन नहीं कर सकते उनके लिए होम्योपैथिक बेस्ट उपाय है। अगर शुरुआती दिनों में ही बीमारी का पता लग जाए होम्योपैथिक ट्रीटमेंट बहुत कारगर साबित होता है और जल्दी ही पथरी को खत्म कर देता है।

अंग्रेजी दवाइयों का सेवन — अंग्रेजी दवाइयां किडनी स्टोन को बढ़ने नहीं देती और बाकी दिक्कतें भी नहीं आने देती। जिससे हम किडनी स्टोन को निकालने का पर्याप्त इलाज ढूंढ सकते हैं। 

थेरेपी — थेरेपी भी बहुत कारगर इलाज है किडनी स्टोन को बाहर निकालने के लिए लेकिन ज्यादातर लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं है या साइड इफेक्ट के डर से लोग थेरेपी लेने से कतराते हैं। लेकिन इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है और यह 100% सच है।

ऑपरेशन — जब कोई विकल्प नहीं बचता तो हमारे पास आखिरी विकल्प ऑपरेशन ही बच जाता है। लेकिन अगर आप लोगों के पत्थर का साइज ज्यादा बड़ा नहीं है और आपको ज्यादा दिक्कत नहीं है तो आप पहले बाकी इलाज को ट्राई करें, तभी ऑपरेशन के बारे में सोचे। क्योंकि ऑपरेशन में खर्चा भी आपको 50 हजार से 1 लाख के करीब पर जाएगा और आपके शरीर को भी कष्ट होगा। इसीलिए बाकी दूसरा कोई विकल्प ना बचने पर ही ऑपरेशन के बारे में सोचें आप लोग।

देसी इलाज या घरेलू नुस्खा भी ट्राई किया जा सकता है — अगर आपके किडनी में स्टोन है तो देसी इलाज इलाज अपना सकते हैं। बार-बार पानी पीना और पेशाब करना एक महत्वपूर्ण इलाज है, इससे किडनी की पथरी अपने आप निकल जाती है। बहुत सारे ऐसे घरेलू नुस्खे हैं, जो गुर्दे की पथरी निकालने में कारगर साबित हुए हैं। नींबू का रस, सेव का सिरका इत्यादि का सेवन करना काफी फायदेमंद होता है इस बीमारी मे। कुछ अन्य देसी और घरेलू उपाय है —

अनार जूस — अगर आपके गुर्दे में पथरी की समस्या हो गई है तो आपको रोज सुबह एक गिलास अनार का जूस पीना चाहिए। अनार के जूस के सेवन से पथरी में होने वाले दर्द से आपको काफी राहत मिलेगी और पथरी का साइज बड़ा नहीं होगा। साथ ही आप पथरी को निकालने के लिए जिन दवाइयों का सेवन कर रहे हैं उन दवाइयों का असर भी झटपट होगा और आपको पथरी की समस्या से निजात मिल जाएगा

इलाइची — एक चम्मच इलायची, दो चम्मच मिश्री और थोड़े से खरबूज के बीज की गिरी ले। उनको आधा कप पानी में अच्छी तरह उवाले और सुबह शाम उस पानी को पी लें। ऐसा करने से आप की पथरी के निकलने में काफी मदद मिलेगी और दर्द से भी आप को राहत मिलेगी। साथ ही पथरी के बाकी लक्षणों से भी आपको निजात मिलेगी।

राजमे का पानी — आप थोड़े से राजमे को भिगो लें। उसके बाद उसको पानी में अच्छी तरह उबाले। फिर राजमें को निकाल ले और जो पानी बच जाए उसको दिन भर में थोड़ा-थोड़ा करके कई बार पिए। पथरी के रोगियों के लिए यह पानी किसी दवाई से कम नहीं है।

प्याज का रस —  दो प्याज ले और उनको छोटे-छोटे टुकड़ों में काट ले। अब उस प्याज के टुकड़ों को थोड़ा सा पानी में डालकर धीमी आंच पर थोड़ी देर के लिए पकाए। पकने के बाद गैस बंद कर दे और उस प्याज को अच्छी तरह से पीसकर प्याज का रस निकाल ले। अब उस रस को पी जाए। ऐसा आप एक-दो दिन के अंतराल पर करें ।आपको काफी फायदा होगा।

मकई(Corn) — पथरी के रोगियों के लिए मकई का सेवन भी काफी फायदेमंद होता है। मकई खाने से पेशाब ज्यादा लगता है और पथरी छोटे-छोटे कणों के रूप में बाहर निकल आते हैं। आप कुछ दिन तक मकई खाकर देखे आपको किडनी के पथरी से अवश्य निजात मिलेगा।

व्हीट ग्रास — सिर्फ किडनी की पथरी ही नहीं किडनी कि किसी भी प्रकार के रोग के लिए व्हीटग्रास काफी फायदेमंद है। आप व्हीटग्रास को थोड़ा सा पानी में उबालें और फिर उस पानी को पिए। ऐसा करने से आपकी पथरी तो निकलेगी ही साथ ही आपके किडनी के बाकी बीमारियों से भी आप को राहत मिल जाएगी। आपकी किडनी स्वस्थ रहेगी।

खजुर — खजूर में फाइबर की अच्छे मात्रा होती है जो किडनी में पथरी होने के खतरे को कम कर सकता है। अगर आपकी किडनी में पथरी नहीं भी है तो भी आप इसका सेवन करें। इससे आपकी किडनी स्वस्थ रहेगी और पथरी होने के चांसेस कम रहेंगे। आप रातभर थोड़े से खजूर को भिगोकर रख दे। सुबह उठकर खजूर को चबा चबा कर खाए बचा हुआ पानी भी पी ले। आपको काफी फायदा होगा। अगर आपकी किडनी में पथरी हो भी गयी है, फिर भी आप इसका सेवन करें। किडनी की पथरी धीरे-धीरे बाहर निकलेगी और दर्द से भी आप को राहत मिलेगी।

आशा है आपको यह जानकारी अच्छी लगी।

एक अच्छा राइटर कैसे बने — जानिए लेखक बनने के लिए जरूरी टिप्स।


हैल्लो दोस्तो, आज का हमारा टॉपिक है “लेखक कैसे बने और “बेस्ट राइटर बनने के टिप्स”। हर किसिके लाइफ में कोई ना कोई उद्देश्य जरूर होता है जो की जरूरी भी है। किसी उद्देश्य के बिना, किसी Passion के बिना लाइफ अधूरी अधूरी सी लगती है। जिसमें जी कर कोई मजा नहीं आता। कोई डॉक्टर बनना चाहता है, तो कोई इंजीनियर, कोई बिजनेसमैन बनना चाहता है तो कोई लॉयर। लेकिन कुछ लोगो का Passion सबसे हटकर होता हैं। वह लोग कुछ खास और अलग करना चाहते हैं। ऐसी ही एक हॉबी हैं राइटिंग। कुछ लोगो को लिखने का बहुत शौक होता हैं। वो अपने मन की हर बात कागज पर लिख डालते हैं। ऐसा करते करते एक दिन उनके मन में प्रोफेशनल राइटर बनने की चाह पैदा हो जाती है और वो प्रोफेशनल राइटर बनने की तैयारी में लग जाते हैं।

तो जो लोग रियल में एक राइटर बनना चाहते हैं उनके लिए हम कुछ ऐसे टिप्स लेकर आए हैं, जिसे पढ़ने के बाद उनका माइंड काफी डेवलप हो जाएगा। एक अच्छा राइटर बनने के लिए क्या क्या क्वालिटी होना चाहिए यह आज के हमारे इस लेख को पढ़ने के बाद आप लोगो को समझ में आ जाएगा। तो चलिए जान लेते हैं की एक अच्छा राइटर बनने के लिए हमारे अंदर किस किस क्वालिटी का होना जरूरी है।

भाषा पर ध्यान दे 

आप अगर कुछ लिख रहे हैं और आप चाहते है की ज्यादा से ज्यादा लोग आपके उस लेख को पढ़े तो आप अपने भाषा पर थोड़ा ध्यान दीजिए। अगर आप अपने लेख में सरल और सिंपल भाषा का इस्तेमाल करेंगे तो लोगो को आपका लेख आसानी से समझ में आएगा और आपका लेख हर कोई पढ़ेगा। धीरे-धीरे आपके लेख के साथ ज्यादा से ज्यादा लोग जूड़ जाएंगे और एक बार आपके लेख के साथ ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ने लगे फिर आपका लेख और आप दोनो को फेमस होने से कोई नहीं रोक सकता।

कुछ रोमांचक लिखे 

हम कोई भी किताब जब पढ़ते हैं, तो यह देखकर पढ़ते हैं की उस किताब में कुछ रोमांचक है या नहीं। अगर आप भी अपने लेख के साथ ज्यादा से ज्यादा लोगो को जोड़ना चाहते हैं तो कोशिश करें की जितना हो सके आप कुछ रोमांचक लिखे। आप कहानी, कविता जो भी लिखे बस ध्यान रखे की बीच बीच में कुछ रोमांचक लिखा हो ताकि लोगो को आपकी बुक पढ़ने में इंटरेस्ट बढ़े और वे लोग आपकी बुक को पढ़े।

दिल से लिखे 

जब कोई बात हम दिलसे बोलते हैं तो सीधे जाकर वो सुननेवाले के दिल को छूता है उसी तरह जब हम कुछ दिल से लिखते हैं तो वो भी सीधे जाकर पढ़ने वाले के दिल को छूता हैं। अगर आप चाहते हैं की आप जो भी लिखे वो सबके दिल को जाकर छुए तो आप जो भी लिखे वो पूरे दिल से और ईमानदारी से लिखे।

एक अच्छा राइटर कैसे बने — जानिए लेखक बनने के लिए जरूरी टिप्स।

नयी नयी बातो को सामने लाए 

हम सब लोग नयी नयी बाते जानना चाहते हैं। जिस बुक या ब्लॉग को पढ़ने से हमें नयी नयी बातो की जानकारी मिलती है उस बुक के प्रति हमारी चाह दिन प्रतिदिन बढ़ती जाती है। आप भी अगर अपने लेख के प्रति लोगो की चाहत को बढ़ाना चाहते हैं तो कुछ ऐसा लिखे जो बिल्कुल नया हो और सीखने लायक हो। धीरे धीरे आपके लेख के प्रति लोगो की चाहत बढ़ने लगेगी और आप भी धीरे-धीरे फेमस होने लगेंगे।

अपने काम को समय दे 

आप अगर लिखने में शौकीन हैं तो आप अपने राइटिंग को जितना possible हो उतना समय दे। अगर आप थोड़े से समय में ज़्यादा लिखने की कोशिश करेंगे तो कुछ भी नहीं लिख पाएंगे और अगर लिख भी लिया तो आपकी राइटिंग में वो बात नहीं होगी। क्योंकि राइटिंग एक ऐसा काम है जो शांति से ही हो सकती है, हरबरी में नहीं। इसलिए आप अपने इस काम के लिए समय निकाले और मन को शांत करके लिखना स्टार्ट करे। अगर लिखते लिखते बीच में आपका मन लिखने को ना करे तो उसी वक़्त लिखना बंद कर दें। फिर जब आप अपना माइंड फ्रेश कर ले और आपको लिखने का मन करे तभी आप फिरसे लिखना स्टार्ट करें।

राइटिंग कैरियर की शुरुआत कैसे करें —

जब हमारी हॉबी, हमारा कैरियर बन जाए तो उससे अच्छी बात कुछ हो ही नहीं सकती। अगर लिखना आपकी हॉबी है तो आपको राइटिंग में अपना करियर जरूर तलाशना चाहिए। राइटिंग में करियर बनाने के बहुत सारे विकल्प मौजूद है। आजकल क्योंकि जमाना डिजिटल हो गया है,सब कुछ ऑनलाइन ही होने लगा है यहां तक की पढ़ाई लिखाई भी ऑनलाइन होने लगी है। किसी को कोई भी खास जानकारी चाहिए हो तो, कोई खास  बुक पढ़नी हो तो लोग लाइब्रेरी जाने के बजाय ऑनलाइन सर्च करते है और बुक पढ़ने के बजाय लैपटॉप में ही पीडीएफ डाउनलोड करके पढ़ लेते है। इसी तरह लोग जानकारी के लिए ब्लॉग या वेबसाइट पर जाते हैं। ऐसे में ऑनलाइन, आप लोगों के लिए बहुत बड़े बड़े स्कोप है। आप लोग ऑनलाइन माध्यम से ही  राइटिंग में अपना करियर बना सकते हैं। ऑनलाइन राइटिंग करने के लिए आप लोगो के पास बहुत सारे विकल्प मौजूद है। जैसे कि –

अपना वेबसाइट बनाकर 

आप लोग अपना वेबसाइट बनाकर, उस पर राइटिंग कर सकते हैं और ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने वेबसाइट पर लाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं। कुछ फेमस राइटर्स ऐसे भी हैं जो महीने में सात से आठ लाख तक की कमाई करते हैं। लेकिन आपकी राइटिंग में दम होना चाहिए तभी आप कमाई कर पाएंगे।

दूसरा तरीका है फेसबुक 
 

आजकल Facebook account लगभग हर किसी की पास होता है। ऐसे में आप लोग अपनी स्टोरीज, कविताएं, शायरी फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट कर सकते हैं। जब लोग उनको पड़ेंगे और अगर उनको आपकी राइटिंग पसंद आएगी तो वह आपकी पोस्ट को लाइक करेंगे। इस तरह जितने ज्यादा लाइक्स आपके पोस्ट को मिलेंगे आप उतना ज्यादा फेमस होंगे। ईस तरह बाद में आप ऐडसेंस अप्लाई करके फेसबुक के माध्यम से भी अर्निंग कर सकते हैं। और भगवान ने चाहा तो अगर किसी बड़ी हस्ती की नजर आपके पेज पर पड़ गई तो समझ लीजिए आपकी किस्मत खुल गई।

यूट्यूब के माध्यम से

अगर आप अच्छे कंटेंट लिखने की क्षमता रखते हैं तो आप उनका उन बातों को शब्दों में पिरो कर वीडियो बना सकते हैं। आजकल बहुत से लोग जानकारी के लिए youtube पर जाते हैं। जब लोगों को आपके बोलने का तरीका पसंद आएगा तो ज्यादा से ज्यादा विजिटर आपको मिलेंगे और ज्यादा से ज्यादा कमाई आपकी होगी।इनके अलावा और भी बहुत सारे विकल्प मौजूद है ऑनलाइन आजकल बहुत सारे राइटिंग कंपटीशन होते रहते हैं। आप उन Compititions में भी हिस्सा ले सकते हैं। अगर आप जीते तो आपको ना सिर्फ पैसा मिलेगा साथ ही आपको शोहरत भी हासिल होगी। 

अपनी किताब छपवाकर 

ऑनलाइन तरीकों के अलावा अगर आप चाहे तो पुराना परंपरागत तरीके को भी अपना सकते हैं। अगर आपके पास कविताओं का एक भंडार है या फिर आपके दिमाग में एक बड़ी सी कहानी है तो आप उसको लिख कर पब्लिश करा सकते हैं। वैसे तो इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आपकी किताब पब्लिश होने के बाद आप एक सफल लेखक बन जाएंगे, लेकिन कहते हैं ना सफलता आपके सिर्फ एक बुक पर ही निर्भर करती है। कुछ लोग पहला बुक लिखकर ही सक्सेसफुल राइटर बन जाते हैं तो कुछ लोग 10, 15, 20 किताब लिखने के बाद भी फेमस और सफल नहीं हो पाते। इसका कारण है क्वॉलिटी। अगर आप क्वॉलिटी राइटिंग करेंगे तो आप जरूर सफल होंगे।

राइटर की नौकरी 

इन तरीकों के अलावा आप ‘As a writer’ किसी कंपनी में नौकरी भी कर सकते हैं। आजकल बहुत सारे ऐसी कंपनी है जो राइटर्स को हायर करती है। आप लोग उन कंपनीस में फुल टाइम या पार्ट टाइम जॉब कर सकते हैं। अगर आप ऑफिस में जाकर नहीं बल्कि घर से ही काम करना चाहते तो भी यहां पर आपके लिए मौके है। ज्यादातर वेबसाइट के ओनर्स, जिनकी कमाई अच्छी खासी है उनके पास ज्यादा आर्टिकल लिखने का टाइम नहीं होता। तो वह लोग कुछ राइटर्स को हायर कर लेते हैं। आपको बस सोशल मीडिया वगैरा के माध्यम से ऐसे क्लाइंट की तलाश करनी है और फिर उनके वहां जॉब की अर्जी डालनी है। अगर आपकी लिखावट उन्हें पसंद आ गयी तो आप घर बैठे ही रोज हजारों की कमाई कर सकते हैं।

इसके अलावा आप freelance पर अकाउंट बनाकर भी ‘As a writer’  घर बैठे ही पैसे कमा सकते हैं। इनके अलावा भी और बहुत सारे विकल्प मौजूद है, राइटर्स के लिए। बस आपके पास हौसला होना चाहिए और विकल्प को तलाशने का धैर्य होना चाहिए और सबसे जरूरी बात आपकी राइटिंग में वह बात होनी चाहिए जो किसी की सोच को बदल सके, किसी को सोचने पर मजबूर कर सकें।

उम्मीद है आज के इस लेख को पढ़कर आप लोगो को फायदा हुआ। राइटिंग ही जिन लोगो का सपना है, उनके लिए इस लेख को पढ़ना बहुत जरूरी है क्योंकि जरा सी गलती और लापरवाही हमारे सपने को तोड़ सकती है। इसलिए जब हम कोई सपना देखते हैं तो हमें उस सपने को लेकर काफी जिम्मेदार होना चाहिए और हमें हर बार यह कोशिश करनी चाहिए की हमसे कोई भी गलती ना हो जिसके कारण हमें बाद में पछताना परे। इसलिए आप लोग आज के इस लेख को ध्यान से पढ़िए और फॉलो करिए। मुझे पूरी उम्मीद है कि आप एक दिन एक बड़े राइटर जरूर बनेंगे।

बेटी दिवस 2020: इस बेटी दिवस अपनी बेटी को अनमोल होने का एहसास दिलाये।

ऐसे तो बहुत से दिवस मनाए जाते हैं। Father’s Day, Mother’s Day और भी बहुत सारे त्योहार। ऐसे ही एक दिन बेटी दिवस के रुप में मनाया जाता है। लेकिन आपको बता दें, इस दिवस की कोई खास तारीख नहीं होती है। इसको हर साल, सितंबर के हर चौथे रविवार को मनाया जाता है। चाहे वह कोई भी डेट क्यों न हो। जो रविवार सितंबर महीने में चौथा होता है उसी डेट को बेटी दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस तीन बेटियों को समर्पित होता है। इस दिन को अलग-अलग देशों में अलग अलग दिन पर मनाया जाता है। लेकिन भारत में खासकर सितंबर के चौथे रविवार को बेटी दिवस के रूप में मनाते हैं। इस साल 2020 में, चौथा रविवार 27 सितंबर को पड़ा है। इसीलिए आज यानी 27 सितंबर के दिन बेटी दिवस के रूप में मनाया जाएगा। आइये जानते हैं, बेटी दिवस क्यों मनाया जाता है।

बेटी दिवस 2020: इस बेटी दिवस अपनी बेटी को अनमोल होने का एहसास दिलाये।

बेटी दिवस क्यों मनाया जाता है

दरअसल में बेटियों को प्यार जताने के लिए बेटी दिवस का दिन मनाया जाता है। इसके अलावा भी भारत में बेटी दिवस मनाने का एक खास वजह है। दुनिया में ऐसे बहुत से जगह होते है जहाँ के लोग बेटियो को पढ़ने नहीं देते हैं। उन्हें जन्म देने से पहले ही मार देते हैं। साथ ही बहुत से जगहों पर घरेलू हिंसा का भी शिकार बेटियां ही बनती है और दहेज से लेकर हर एक दुष्कर्म का भी शिकार बेटियों को बनाया जाता है। ऐसे में इन सब से बेटियों को बचाने व छूटकारा दिलाने के लिए हर एक भारतीय को जागरूक करना इस दिवस का मुख्य उद्देश्य होता है। इस दिवस पर उन्हें यह समझाया जाता है कि बेटियां किसी पर बोझ नहीं होती है, बल्कि वह भी आपके आंगन का एक अहम हिस्सा होती हैं।

बेटी दिवस कैसे मनाया जाता है

बेटी दिवस के अवसर पर उन्हें खुश करने के लिए उनको उपहार, गिफ्ट दिया जाता है। उन्हें बाहर खाना खिलाने और फिल्म दिखाने ले जा सकते हैं। उनकी इच्छाओ को पूरा कर सकते हैं और सबसे जरूरी और अहम उन्हें यह महसूस करा सकते हैं कि आपकी बेटियां आपके लिए बोझ नहीं है बल्कि वे बहुत स्पेशल है ।

उन्हें आप ऐसा फील करा सकते हैं कि बेटीया आपके ऊपर बोझ नहीं है बल्कि आपके घर की लक्ष्मी है। यह दिन बेटियों के लिए होता है, उन्हें प्यार जताने के लिए होता है जिसे राष्ट्रीय बेटी दिवस के रूप में मनाया जाता है। पहले के समय में लोग बेटियों पर जो जुल्म करते थे, उस बात से हर कोई वाकिप है लेकिन आज के समय में ऐसा बिल्कुल नहीं है और कुछ जगह है भी तो उसे मिटाने की हर संभव कोशिश की जा रही है। आजकल लोग बेटियों को भी उतना मान देते हैं जितना मान वह अपने बेटों देते हैं। ओर जब-जब बेटियों को मौका मिला है उन्होंने अपना, अपने परिवार का और इस देश का हर कदम पर नाम रोशन किया है और कर रही है। बेटियों ने यह साबित करके दिखा दिया है कि वह किसी से कम नहीं है। बेटी भी वह सब कर सकती है जो कि बेटे कर सकते हैं ।

आशा करते हैं, बेटी दिवस के ऊपर यह लेख आपको पसंद आया और इस Daughter Day आप भी अपनी बेटी को खुश करने का हर संभव प्रयास करेंगे और उसे स्पेशल होने का एहसास जरूर दिलाएंगे। आर्टिकल को पूरा पढ़ने के लिए आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद। इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, लाइक करें और कमेंट करें। हमें आपके Comments का इंतजार रहेगा।

एक Journalist होने का सम्मान पाएं: जानिए, पत्रकारिता में करियर कैसे बनायें।

पत्रकारिता में करियर विकल्प की बात करें तो वर्तमान के समय में जर्नलिज्म यानी कि पत्रकारिता के क्षेत्र में आप चाहे तो बहुत अच्छा करियर बन सकता है। आज के समय में हर दिन नए-नए टीवी चैनल और न्यूज़पेपर लांच हो रहे हैं। और इनके owners बड़े-बड़े शहर में अपने जर्नलिस्ट नियुक्त करते हैं। इन सब में आप आसानी से नौकरी पा सकते हैं। साथ ही आप पत्र – पत्रिकाओं में भी जर्नलिस्ट के तौर पर अपनी सेवा दे सकते हैं। इस समय के दौड़ में तो ज्यादातर ऑनलाइन मीडिया का ही बोलबाला है। इसे डिजिटल मीडिया या न्यूज़ मीडिया कहा जाता है और इसके अंतर्गत न्यूज़ पोर्टल, न्यूज़ वेबसाइट etc आते हैं। आजकल देखा जाए तो आए दिन न्यूज पोर्टल लॉन्च होते रहते है और इन न्यूज पोर्टल्स में आप आसानी से नौकरी ले सकते हैं।

इतनी तेजी से, इतना ज्यादा संख्या में न्यूज़ पोर्टल्स बनने के पीछे कारण यही है कि इस मीडिया के माध्यम में खर्च बहुत कम होता है। कोई भी चाहे तो 10 हज़ार की लागत में न्यूज़ पोर्टल डिजाइन करके इसे शुरू कर सकता है।

एक Journalist होने का सम्मान पाएं: जानिए, पत्रकारिता में करियर कैसे बनायें।

इन सब में आप नौकरी तलाश कर सकते हैं। इन सभी के अलावा आप सरकारी न्यूज़ चैनल मीडिया हाउस में भी नौकरी कर सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया या ऑनलाइन मीडिया इन सभी में जर्नलिस्ट की बहुत डिमांड रहती है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में न्यूज़ चैनल्स आते हैं, प्रिंट मीडिया में न्यूज़पेपर, पत्र, पत्रिकाएं आते हैं और ऑनलाइन मीडिया में न्यूज़ पोर्टल  और वेबसाइट इत्यादि आते हैं। अगर आप में एक अच्छे जर्नलिस्ट का टैलेंट आ जाता है तो आपको किसी अच्छे खासे चैनल में नौकरी मिल जाएगी। 

आईए अब जानते हैं जर्नलिस्ट बनने के कोर्स के बारे में

जर्नलिस्ट या पत्रकार बनने के लिए आप डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, पीजी डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बैचलर इन मास कम्युनिकेशन, मास्टर इन मास कम्युनिकेशन, डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिग्री इत्यादि कोर्स कर सकते हैं।

डिप्लोमा कोर्स

Diploma course के अन्दर डिप्लोमा इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन, डिप्लोमा इन जर्नलिज्म, डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, डिप्लोमा इन ब्राउन फास्ट, डिप्लोमा इन वेब मीडिया या ऑनलाइन मीडिया, डिप्लोमा इन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, डिप्लोमा इन प्रिंट मीडिया इत्यादि कोर्स आते हैं। आप अपने इच्छानुसार, इन मे से बेस्ट कोर्स को कर सकते हो और जॉर्नलिस्ट बनने के अपने सपने को साकार कर सकते हैं।

डिग्री कोर्स

डिग्री कोर्स में बैचलर इन मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म, बैचलर इन मास कम्युनिकेशन, बैचलर इन जर्नलिज्म, बैचलर इन ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म इत्यादि कोर्सेज को किया जा सकता है, जॉर्नलिस्ट बनने के लिए।

PG डिप्लोमा कोर्स

PG डिप्लोमा इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन, PG डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, PG डिप्लोमा इन ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म, PG डिप्लोमा इन जर्नलिज्म।

मास्टर डिग्री कोर्स

मास्टर्स इन मास कम्युनिकेशन,  मास्टर्स इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन, एमएससी मास कम्युनिकेशन इत्यादि। अब जानते है, जॉर्नलिस्ट का कोर्स करने के लिए हमारे पास क्या क्या योग्यताए होनी चाहिए।

जर्नलिस्ट कोर्स के लिए योग्यता

जर्नलिस्ट का कोर्स करने के लिए आपको किसी भी स्ट्रीम से 12वीं पास होना पड़ेगा। इसके बाद आप जर्नलिस्ट में  डिप्लोमा या डिग्री कोर्स कर सकते हैं।

पत्रकारिता में मास्टर डिग्री लेने के लिए आपसे जर्नलिज्म में बैचलर डिग्री मांगी जाती है। लेकिन कुछ कॉलेजों में BA या BSc के बाद मास्टर डिग्री कोर्स कर सकते हैं।  

किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला ले

अगर आप पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना भविष्य उज्जवल बनाना चाहते हैं, अपना करियर बनाना चाहते हैं। तो आपको किसी जाने-माने कॉलेज से इसका कोर्स करना चाहिए। क्योंकि आजकल के समय में ऐसे बहुत से कॉलेजेस हैं, जहां जर्नलिज्म कोर्स कराए तो जाते हैं लेकिन उन कॉलेजों में ना तो इनकी अच्छी फैसिलिटी होती है और ना ही वह स्टूडेंट को सारे चीजों की प्रैक्टिकली जानकारी दे पाते हैं। इस तरह से आपका ही नुकसान होगा क्योंकि किसी भी चीज को करने में जो सबसे जरूरी होता है, वह होता है टैलेंट। जिस फील्ड में आप जाना चाहते हैं उस फील्ड की पूरी जानकारी होनी बहुत जरूरी है। अगर आपके पास जानकारी ही नहीं होगी तो आप उसमें कुछ भी अच्छा नहीं कर पाएंगे। इसीलिए किसी भी कॉलेज में एडमिशन लेने से पहले आप वहां की फैसिलिटी और केंपस प्लेसमेंट की सारी जानकारी जरूर हासिल कर लें।

जर्नलिस्ट बनने के लिए कुछ खास क्वालिटी, जो आपमें होनी चाहिए –

* भाषा पर आपकी अच्छी पकड़ होनी चाहिए।

* आपकी लिखावट भी अच्छी होनी चाहिए।

* टाइपिंग, कंप्यूटर नॉलेज आपके पास होना चाहिए।

* किसी भी न्यूज़ को जल्दी से समझने की क्षमता आपके अंदर होनी चाहिए।

* न्यूज़ को विश्लेषण करने की क्षमता भी होनी चाहिए।

* आपको निडर होना पड़ेगा।

* साथ ही आपको साहसी और ईमानदार होना पड़ेगा।

* विषम परिस्थितियों में भी काम करने की क्षमता।

* न्यूज़ रिपोर्ट, न्यूज़ राइटिंग, न्यूज़ एडिटिंग,फोटोग्राफी की कला।

* समय का पाबंद होना पड़ेगा।

* करेंट मुद्दों की सारी जानकारी।

* न्यूज़ को शार्ट बनाने की योग्यता।

आप चाहे तो किसी गवर्नमेंट कॉलेज या यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन का कोर्स कर सकते हैं। बहुत से न्यूज़ चैनल के भी मीडिया कॉलेज होते हैं। आप चाहे तो वहां से भी इस कोर्स को कर सकते हैं। नीचे हम आपको कुछ कॉलेज के नाम बता रहे हैं, जहां से आप यह कोर्स कर सकते हैं।

★दिल्ली यूनिवर्सिटी

★अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी 

★इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी 

★इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन, दिल्ली ★भारतीय विद्या भवन, दिल्ली

★गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़

★माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल

★गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी, बिलासपुर छत्तीसगढ़

★व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल, मुंबई

★सिंबोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, पुणे

★चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी

★मनोरमा स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन, केरल

★हैदराबाद यूनिवर्सिटी
फीस कितनी लगती है

अगर फीस की बात करें तो प्राइवेट कॉलेज में अगर आप पढ़ने जाते हैं, तो आपको 50 हजार से लेकर लगभग एक लाख तक फीस प्रतिवर्ष लग सकता है। अगर आप ज्यादा फीस देने में  सक्षम ना हो तो आप सरकारी कॉलेज से जर्नलिज्म का कोर्स कर सकते हैं। सरकारी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में इसकी फीस बहुत कम होगी। सरकारी कॉलेज में, 10 हजार से लेकर 30 हजार रुपए प्रति वर्ष लग सकता है।

जर्नलिज्म कोर्स में एडमिशन कैसे ले

सरकारी कॉलेजों में एडमिशन, एंट्रेंस टेस्ट के माध्यम से होता है। लेकिन कुछ सरकारी कॉलेजों में मेरिट के आधार पर ही एडमिशन मिल जाती है। वही प्राइवेट कॉलेजों में डायरेक्ट भी एडमिशन हो जाता है।

कोर्स करने के बाद जरूरत पड़ती है नौकरी ढूंढने की।

जर्नलिस्ट का कोर्स करने के बाद आपको किसी अच्छे मीडिया हाउस में इंटर्नशिप करनी चाहिए। अगर आप इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में जाना चाहते हैं तो आप किसी न्यूज़ चैनल में इंटर्नशिप कर सकते हैं। अगर आप प्रिंट मीडिया में नौकरी करना चाहते हैं तो आप किसी अच्छे न्यूज़पेपर में इंटर्नशिप कर सकते हैं। अगर आप वेब मीडिया में काम करना चाहते हैं तो आपको किसी न्यूज़ पोर्टल में इंटर्नशिप करना चाहिए। लोग अक्सर यही गलती कर बैठते हैं उनको जाना कही और रहता है और इंटर्नशिप कही और कर बैठते हैं।

जर्नलिस्ट के काम

किसी भी पत्रकार का काम बहुत चुनौतीपूर्ण होता है। किसी भी रिपोर्टर को बाढ़, तूफान, टेरेरिस्ट अटैक इत्यादि सब की रिपोर्टिंग करनी होती है, साथ ही सरकार के काम-काज पर भी नजर रखनी होती है। किसी भी पत्रकार का मुख्य कार्य होता है न्यूज़ तलाशना और उन्हें इकट्ठा करना। इस काम को करने के लिए उन्हें फील्ड में जाना पड़ता है। फिर उस न्यूज़ को कंप्यूटर पर लिखना होता है। उसके बाद ही वह न्यूज़ समाचार, टेलीविजन, रेडियो, न्यूज़ पोर्टल इत्यादि के माध्यम से लोगों के पास पहुंचती है। न्यूज़ में कैमरामैन, एडिटर, फोटोग्राफर सब का योगदान होता है।

हर एक परिस्थिति में एक रिपोर्टर को बिना डरे, फील्ड में उतरना होता है। जान की परवाह किए बिना न्यूज़ हासिल करना होता है। चाहे वह कोई भी जगह हो उस जगह पर  जर्नलिस्ट को पहुंचना होता है। और न्यूज़ हासिल करनी होती है। ऐसे में अगर आपके अंदर पत्रकारिता का जुनून है तो ही आप इस फील्ड में कदम रखें। नहीं तो आप अपना पैसा और टाइम बर्बाद ना करें। पत्रकारिता करना आसान बात नहीं होता है। क्योंकि यहां पर आपकी जान जोखिम में रहती है। आपको बड़े बड़े क्रिमिनल, बेईमान, भ्रष्टाचारी नेता, डाकू के खिलाफ भी समय आने पर लिखना होता है। भयंकर से भयंकर परिस्थिति में भी आपको काम करना पड़ सकता है। इसीलिए अगर आप मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से पत्रकारिता के लिए तैयार हैं। तो ही आप इस फील्ड में कदम रखें। अगर आपके पास कोई न्यूज़ है तो आप पैसे लेकर इसे कभी भी मत दबाइए हमेशा मेहनत और ईमानदारी के साथ काम करते रहिए। समाज में भ्रष्टाचार को उजागर करने में जर्नलिस्ट का बड़ा हाथ होता है। इसीलिए अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार रहिए आपको अवश्य सफलता मिलेगी। आशा है आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी और अगर आप एग्जाम लिस्ट बनने का सपना रखते हैं तो अब आपको इस बारे में सारी जानकारी मिल गई होगी और आपका सारा डाउट क्लियर हो गया होगा अगर आपका कोई सवाल है सुझाव है तो कमेंट करके जरूर बताएं

जानिए वकील बनने का सही Process: अपने नाम के आगे Advocate कैसे जोड़े।

आज के दौर में हर कोई करियर के लिए भागता है और चाहता है कि वह लाइफ में कुछ अच्छा और बड़ा करके अपना नाम रोशन करें। बहुत से लोग ऐसे हैं जो लॉयर बनने का सपना रखते हैं लेकिन समझ नहीं पाते हैं कि लॉयर कैसे बने। आज हम आपको इसी बारे में बताएंगे। आज के इस पोस्ट हम आपको वकील बनने के बारे में सारी जानकारी देंगे।

ऐसे कितने ही लोग हर साल वकालत की पढ़ाई पूरी करते हैं। लेकिन उनमें से कुछ ही वकील बन पाते हैं और बेहतर एडवोकेट कहलाते हैं। इसीलिए इस बारे में पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी है।

दोस्तों, LLB का फुल फॉर्म होता है “Lagum Baccalaureus” जो लेटिन भाषा का शब्द है। अपने भाषा में इसको बैचलर ऑफ लॉ (Bachelor of Laws) बोलते हैं। यह एक बैचलर डिग्री होता है, जो हम 12वीं पास करने के बाद कर सकते हैं। इसमें कानून के बारे में पढ़ाया जाता है। अगर आपको लगता है कि पुलिस ने जिस अपराधी को पकड़ा है वह अपराधी नहीं है तो आप उसके तरफ से लड़कर उसे बचा सकते हैं। उसे ही वकील कहते हैं, किसी भी देश के वकील को अपने देश के कानून के बारे में सब कुछ पता होना चाहिए। वेसे भी अगर किसी को कानूनी किसी चीज की जानकारी चाहिए होती है, तो हम वकील को ही बुलाते हैं। यानी कि जब आप LLB की पढ़ाई पूरी कर लेते हैं तो आप एक वकील बन जाते हैं। यानी कि आपको कानून के बारे में सब कुछ पता होता है। उसके बाद आप अपनी मेहनत से कोर्ट में जज भी बन सकते हैं।

★ वकील बनने के लिए कोर्स

वकील का कोर्स दो तरह का होता है। एक 5 साल का होता है और दूसरा 3 साल का होता है। अगर आप 12वीं कक्षा पास करने के बाद सीधे Law की पढ़ाई करना चाहते हैं तो आपको 5 साल का कोर्स पढ़ना पड़ेगा। और अगर आप 3 साल का कोर्स करते हैं तो आपको पहले ग्रेजुएशन पूरा करना होगा। फिर आपको 3 साल का LLB का कोर्स पूरा करना होगा।

जानिए वकील बनने का सही Process: अपने नाम के आगे Advocate कैसे जोड़े।

★ वकील बनने के लिए योग्यता

* अगर आप वकालत की पढ़ाई करना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको किसी भी स्ट्रीम(Arts /science) से 12वीं पास करना पड़ेगा।

* अगर आप 12वीं के बाद वकालत की पढ़ाई करना चाहते हैं तो आपको 5 साल का कोर्स करना पड़ेगा। 12वीं में आप हो कम से कम 50% मार्क लाने होंगे।

* अगर आप 3 साल के वकालत का कोर्स करना चाहते हैं तो आपके पास किसी भी स्ट्रीम Arts /science से ग्रेजुएशन का डिग्री होना पड़ेगा। ग्रेजुएशन में आपको कम से कम 50% मार्क्स लाने होंगे।

★ लॉ की पढ़ाई करने के लिए 12वीं के बाद (CLAT) एंट्रेंस एग्जाम

12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद आपको वकील बनने की पढ़ाई करनी पड़ती है। इसके लिए आपको एंट्रेंस एग्जाम देना पड़ता है। ऑल इंडिया लेवल पर भारत में CLAT एग्जाम बहुत पॉपुलर है। जिसका पूरा नाम होता है (कॉमन लॉ ऐडमिशन टेस्ट)। इस एग्जाम को देने के बाद आपको लॉ कॉलेज में एडमिशन लेना पड़ता है, जो पूरे 5 साल का कोर्स होता है। CLAT एग्जाम में एक कॉमन टेस्ट लिया जाता है,जिसमें आपसे इंग्लिश, रीजनिंग, मैथ, जनरल नॉलेज के बारे में पूछा जाता है।

★ पढ़ाई पूरी करने के बाद

जब आप लॉ की पढ़ाई खत्म कर लेंगे। उसके बाद आपको इंटर्नशिप करनी होगी। इंटर्नशिप के दौरान आपको कोर्ट-कचहरी के बारे में सब कुछ सिखाया जाता है। जैसे कि कोर्ट की hearing कैसे होती है, दो वकील कैसे बहस करते हैं, इन सब जानकारी के लिए आपको इंटर्नशिप करनी होती है।

जब आप इंटर्नशिप कर लेते हैं। उसके बाद आप किसी भी स्टेट बार काउंसिल (State bar council) में जाकर अपने आप को Enroll करना होता है। Enroll करने के बाद आपको ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (All India bar Examination) से गुजरना होगा। यह एग्जाम बार काउंसिल ऑफ इंडिया (bar council of India) के द्वारा कंडक्ट कराया जाता है। जब इसे पास कर लेते हैं, तो आपको एक प्रैक्टिस का सर्टिफिकेट मिलता है और इसके बाद आपकी LLB कोर्स यानी कि वकील बनने की पढ़ाई पूरी हो जाती है। ऐसा करने के बाद आपको अपनी प्रैक्टिस को जारी रखना पड़ती है।

★ लॉयर बनने के लिए कुछ जरूरी गुण जो आप में होने चाहिए

* याददाश्त शक्ति! आपकी याददाश्त शक्ति थोड़ी तेज होनी पड़ेगी।

* आसपास हो रहे घटनाओं के बारे में थोड़ा-बहुत जानकारी रखना पड़ेगा।

* हर एक बात को ध्यान से सक्रिय होकर सुनने की कला।

* समय प्रबंधन।

* इंग्लिश में मजबूत पकड़।

* हमेशा सही फैसला लेने की क्षमता।

* तार्किक और विश्लेषणात्मक व्यक्तित्व।

* बहुत सोचने की क्षमता, लेखन की कला।

* दूसरों के साथ बातचीत करने का तरीका और अपना पक्ष रखने का तरीका।

* तत्काल सोच।

अगर आपके अंदर यह सब क्वॉलिटी नहीं है या थोड़ी बहुत है तो, आप समय के अनुसार इन सब पर ध्यान देकर इन सारे क्वालिटी को अपने अंदर डेवलॅप कर सकते हैं।

★ एलएलबी के पढ़ाई के दौरान आप को  इन विषयों की शिक्षा दी जाती है।

* Human Rights law

* Environnemental law

* Banking Law

* business law

* International Trade

* company law

* family law

* criminal law

* constitutional law

* intellectual property law

* information technology Law

* Law of taxation

* insurance law

* Administrative law

* Humanitarian and Refugee law

* labour and industrial law

* law Relating to women and children

★ भारत के कुछ Top law colleges

* नेशनल लॉ स्कूल आफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बैंगलोर 

* नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली 

* नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, भोपाल 

* NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद 

* WB नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ जुडिशल साइंस, कोलकाता 

* फैकल्टी ऑफ लॉ यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली

* सिंबोसिस लॉ स्कूल, पुणे 

* नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर 

* गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, गांधीनगर

* राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ  

* अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ 

* जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल, सोनीपत 

* नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ एडवांस्ड लीगल स्टडीज, कोच्चि

* बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी

आशा है आपको वकील बनने केे प्रोसेस के बारे में स्टेप बाय स्टेप पता चल गया होगा। साथ ही आपने यह भी डिसाइड कर लिया होगा कि आपको Law कैसे और किस कॉलेज में करनी है। अगर यह पोस्ट आपको पसंद आई तो इसको एक लाइक जरुर करें।

कोरोना मरीजों के लिए बहुत कारगर हैं ये मशीनें, जानिए कैसे बचाई जा सकती है कोरोना मरीजों की जान

कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या से अस्पतालों में बेड की समस्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में ऑक्सीजन थेरेपी होम आइसोलेट मरीजों के लिए काफी कारगर साबित हो सकती है। इस सुविधा के बाद से अस्पतालों में बेड की समस्या भी दूर होगी। साथ ही होम आइसोलेट में अगर मरीजों को सांस लेने में परेशानी होगी तो उनका तत्काल इलाज भी घर पर ही शुरू हो सकेगा। आईएमए ऑक्सीजन थेरेपी की सुविधा के लिए प्रयासरत भी है, जिससे की मरीजों की जान बचाई जा सके।

होम आइसोलेशन की सुविधा जब से शुरू हुई है, तब से प्रशासन को काफी हद तक राहत मिली है। डॉक्टरों का मानना है कि अगर लेवल-टू और थ्री के मरीजों की स्क्रीनिंग सही तरीके से घर पर हो जाए, तो करीब 20 प्रतिशत बेड और खाली हो जाएंगे। लेकिन इसके लिए ऑक्सीजन थेरेपी की सुविधा शुरू करनी होगी।

आईएमए के अध्यक्ष डॉ. एसी कौशिक ने बताया कि होम ऑक्सीजन थेरेपी से अस्पतालों में कम बेड से भी काम चलाया जा सकता है। इसके लिए मेडिकल छात्रों और नर्सिंग छात्रों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है। बताया कि इस सुविधा के लिए प्रयासरत हैं। इससे काफी हद तक मरीजों को राहत मिलेगी और ऑक्सीजन लेवल कम होने से मरीजों की जान नहीं जाएगी।

ऑक्सीजन थेरेपी के लिए इन मशीनों की होगी जरूरत

होम आइसोलेट मरीजों के शरीर में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया को ऑक्सीजन थेरेपी कहते हैं। इसके लिए ऑक्सीमीटर मशीन और ऑक्सीजन कंसट्रेट मशीन की जरूरत होगी। यह मशीन बिजली और बैटरी दोनों से चलते हैं। इन मशीनों से ऑक्सीजन का लेवल शरीर में नापा जा सकता है। जरूरत के अनुसार ऑक्सीजन दिया भी जा सकता है।

इस स्थिति में जा सकती है मरीज की जान

बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि जिन मरीजों को पहले से कोई बीमारी है। जैसे शुगर, बीपी या फिर ह्रदय रोग से संबंधित, तो ऐसे मरीजों पर कोरोना का असर सबसे ज्यादा है। ऐसी स्थिति में फेफड़ों का काम करना कम हो जाता है और धमनी रक्त में ऑक्सीजन का दबाव भी कम हो जाता है। इसकी वजह से शरीर के दूसरे हिस्से में जाने वाले रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है और मरीजों की जान भी चली जाती है। ऐसी स्थिति में मरीजों को तत्काल ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। आनन-फानन में परिजन अस्पताल ले जाने की कोशिश करते हैं, लेकिन तब तक केस बिगड़ जाता है।

उन्होंने बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर और ऑक्सजीन नापने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर सहारा है। यह मशीनें बाजार में उपलब्ध भी हैं। आइसोलेट मरीज इसे जरूर रखें।

90 से कम हो तो तत्काल डॉक्टर के पास ले जाएं

डॉ अश्वनी मिश्रा ने बताया कि उम्रदराज लोगों में ऑक्सीजन की जरूरत ज्यादा होती है। सामान्य तौर पर पल्स ऑक्सीमीटर यदि ऑक्सीजन लेबल 95 से 100 तक दिखाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह 95 से 80 तक है तो हाइपोक्योसोमिया या ब्लड टिश्यू में ऑक्सीजन की कमी है। ऐसे में ऑक्सीजन देना जरूरी है। कोरोना के मरीजों में 90 से कम होते ही डॉक्टर के पास तत्काल जाएं।

डॉक्टरों एवं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) द्वारा कोरोना मरीजों हेतु सुझाये गए उपरोक्त सभी जरूरी उपकरण और ऑक्सीजन सिलिंडर कम्पलीट सेट के साथ श्री बालाजी ट्रेडर्स, गांधी गली, गोलघर, गोरखपुर में उचित दाम पर उपलब्ध हैं।

बता दें कि श्री बालाजी ट्रेडर्स, पूर्वांचल के सबसे बड़े मेडिकल गैस निर्माता और सप्लायर हैं। जिनकी मेडिकल गैस की फैक्ट्री मयूर गैसेस प्रा0लि0 संतकबीरनगर में स्थित है।

श्री बालाजी ट्रेडर्स गोलघर, गोरखपुर में सभी प्रकार के ऑक्सीजन गैस सिलिंडर, किराए पर या बिक्री हेतु उपलब्ध हैं। यहां से पूर्वांचल के लगभग सभी अस्पतालों एवं एम्बुलेंस हेतु मेडिकल गैस की निरतंर सप्लाई की जाती है। यहाँ पर मरीजों के निजी इस्तेमाल हेतु ऑक्सीजन गैस स्टैण्डर्ड या पोर्टेबल साइज में भी उपलब्ध है।

मालूम हो कि कोरोना महामारी के इस संक्रमण के दौर में भी श्री बालाजी ट्रेडर्स गोरखपुर का मैनेजमेंट एवं स्टाफ कोरोना वारियर्स की तरह अपनी जान की परवाह किये बिना विगत 4 माह से पूर्वांचल के सभी अस्पतालों, एम्बुलेंस व मरीजों को ऑक्सीजन गैस की लगातार आपूर्ति कर रहा है।

श्री बालाजी ट्रेडर्स, गोलघर, गोरखपुर पर आपको कोरोना महामारी से बचाव हेतु निम्न सभी उपकरण उपलब्ध हैं-

1. सभी प्रकार के मेडिकल गैस सिलिंडर, स्टैण्डर्ड व पोर्टेबल साइज में कम्पलीट सेट (FA Valve+Regulator+Spanner+Oxygen Mask (adult+child)

2. ऑक्सीजन कॉन्सन्ट्रेटर (Rent या Sell)

3. पल्स ऑक्सिमीटर

4. टेम्परेचर स्कैनर

5. नैनो मिस्ट स्प्रे

6. आटोमेटिक सेनिटाइजर डिस्पेंसर

7. सभी प्रकार के प्रोटेक्शन मास्क

8. बीपी मॉनिटर

9. शुगर टेस्टिंग किट

10. फेस शील्ड

11. पीपीई किट

12.सेनिटाइजर

ये जरूर पढ़ें- घर पर ऑक्सीजन सिलिंडर कैसे इस्तेमाल करें?

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गर्भ संस्कार क्या है। पूरी जानकारी।

गर्भ संस्कार। दोस्तों! क्या इससे पहले आप लोगों ने कभी गर्भ संस्कार शब्द सुना है या इसके बारे में जानते हैं? अगर हां, फिर तो बहुत अच्छी बात है लेकिन अगर नहीं तो आज आपको गर्भ संस्कार के बारे में सब कुछ इस आर्टिकल के माध्यम से पता चलने वाला  है। गर्भ संस्कार क्या है। पूरी जानकारी।

दुनिया में आज भी ऐसे बहुत लोग हैं जिनको गर्भ संस्कार के बारे में पता होना तो दूर यह शब्द भी कभी उन लोगों ने सुना नहीं होगा। लेकिन एक हिंदू होने के नाते हम लोगों को शास्त्र ज्ञान का पूरा Knowledge ना सही, लेकिन थोड़ा बहुत ज्ञान तो होना ही चाहिए।

दोस्तों गर्भ संस्कार शब्द भी हमारे शास्त्रों के साथ ही जुड़ा हुआ है हमें आशा है कि आप भी गर्भ संस्कार के बारे में जानने को इच्छुक हैं और इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़ेंगे। आज के इस पोस्ट में हम ना सिर्फ गर्भ संस्कार क्या है, यह बताएंगे बल्कि गर्भ संस्कार का महत्व क्या है एक बच्चे के जीवन में यह भी आप लोगों को सरलता के साथ समझाएंगे। उसी के साथ हम यह भी बताएंगे की गर्भ संस्कार के लिए जरूरी बातें कौन सी है। अब ज्यादा समय ना गवांते हुए चलिए गर्भ संस्कार के बारे में जानते हैं। आर्टिकल शुरू करने से पहले हम आप सभी से यह कहेंगे कि गर्भ संस्कार के बारे में पूरा ज्ञान लाभ करने के लिए आप लोग इस लेख को ध्यानपूर्वक पढ़िए।

गर्भ संस्कार क्या है। पूरी जानकारी।

गर्भ संस्कार क्या है :

दोस्तों, हम सभी को पता है कि हर मा- बाप अपने बच्चों को एक अच्छे इंसान बनते देखना चाहते हैं। और एक बच्चा आगे चलकर कैसा इंसान बनेगा यह बात पूरी तरह से निर्भर करता है इस बात पर कि बच्चे को कैसे संस्कार दिए जाए। लेकिन हम सभी को सिर्फ इतना ही पता है कि बच्चे को बचपन से ही संस्कार दिए जाते हैं क्या लेकिन क्या हम इस बात से अवगत है कि बच्चे को माता के गर्भ ने आने से पूर्व से ही संस्कार दिए जाते हैं। जी हां, दोस्तों! सुनने में थोड़ा अजीब लगता है लेकिन यह बात पूरी तरह से सच है कि बच्चे को गर्भ से ही संस्कार दिए जाते हैं और उसी को गर्भ संस्कार कहा जाता है। 

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारे शास्त्रों में भी सोलह संस्कार का वर्णन किया गया है। और उन्हीं में से एक गर्भ संस्कार भी है।एक शिशु आगे चलकर अपने जीवन में कैसा आदमी बनेगा, समाज मे कैसा उदाहरण प्रस्तुत करेगा, इसके लिए काफी हद तक गर्भ संस्कार की भी जिम्मेदारी होती है। हम सभी जानते हैं कि एक बच्चे को संस्कार देने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार माता होती है।  जब एक बच्चा मा के गर्भ में रहता है तब उसकी मा कैसा आचरण करती है, कैसी विचारधारा अवलंबन करती है, क्या सोचती है, कैसा खान-पान अपनाती है, किस तरह के सोच मन में लाती है यह सभी बातें गर्भ में पल रहे बच्चे की मानसिकता निर्माण के लिए जिम्मेदार होते हैं। 

गर्भ संस्कार क्या है। पूरी जानकारी।

गर्भ संस्कार की शुरुआत कब से करनी चाहिए :

आपको बता दें कि गर्भ संस्कार गर्भधारण के 3 महीने पहले से ही शुरू हो जाती है। जब कोई दंपत्ति संतान प्राप्ति के लिए मन बना रहा हो, तभी से उनको अपने मनोदशा, विचार ,खानपान इत्यादि में सावधानी लानी चाहिए। जब बच्चा गर्भ में आ जाता है तो शुरू के 3 महीने तक माता का खानपान और मनोदशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि बच्चे का विकास पूरी तरह से हो सके। और प्रसव के 6 महीने पहले से माता को ऐसी चीजों में मन लगाना चाहिए जो धार्मिक हो, अच्छा हो, नैतिक हो, सभ्य हो। इस समय माता को कोई गलत विचार मन में नहीं लाना चाहिए क्योंकि जिस तरह से मा सोचती है, करती है बच्चा अपना चरित्र उसी तरह से Build कर लेता है और आगे चलकर उसका असर बच्चे पर देखने को मिलता है। कुल मिलाकर कहे तो गर्भ में आने से 3 महीने पूर्व से लेकर प्रसव तक हम अपने विचार आचरण द्वारा बच्चे को जिस दिशा में ढालते हैं, जो संस्कार उसको देते हैं। उसी को गर्भ संस्कार कहा जाता है।

What is pregnancy? complete information.

एक गर्भवती मां के लिए ध्यान रखने लायक कुछ खास बातें 

खानपान का रखें ध्यान :

जब कोई औरत गर्भवती होती है तो उसको सबसे ज्यादा ध्यान अपने खान-पान का रखना होता है। क्योंकि खानपान सही तरह से ना होना बच्चे की शारीरिक विकास में रुकावट पैदा कर सकता है। जिससे आगे चलकर बच्चे को आजीवन परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए होने वाली मा को अपने खान-पान का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।

कोई भी तनाव मन में ना आने दे :

जब कोई औरत गर्भवती हो तो उसको तनाव में भी मुस्कुराने की आदत डाल लेनी चाहिए। और कुछ ना सही फिर भी अपने बच्चे के लिए उसको अपने मन से तनाव को जितना हो सके दूर रहना चाहिए। क्योंकि गर्भवती मा के तनाव का असर बच्चे पर काफी बुरा पड़ता है जिसका अंदाजा उस समय तो नहीं होता लेकिन बच्चे के पैदा होने के बाद बच्चे का स्वास्थ्य अच्छी तरह से एहसास दिला देता है।

बच्चे से बात करते रहे समय समय पर :

क्या आपको पता है कि जब गर्भ में बच्चा 6 महीने का हो जाता है तब वह बाहर की आवाज सुनने और समझने लगता है। इसीलिए मा का फर्ज है कि वह अपने बच्चे से बात करें और उसे अच्छी-अच्छी बातें कहें। इससे उसके दिमाग का विकास तेजी से होगा और जिस तरह की बातें उस time पर मा अपने बच्चे से करेगी, बच्चे की मानसिकता उसी तरह से बनति जाएगी।

पूजा पाठ करें :

इस समय पर गर्भवती औरत के लिए पूजा पाठ करना उसके और उसके बच्चे दोनों के लिए काफी सकारात्मक साबित होगा। क्योंकि हम सभी को पता है कि पूजा पाठ करने से हमारे अंदर आध्यात्मिक भावना की उन्नति होती है और नकारात्मक सोच हम से कोसों दूर चली जाती है। इसीलिए ऐसे  समय पर पूजा पाठ करने से मां और बच्चे दोनों के विचार और शारीरिक स्वास्थ्य पर काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा ।

ग्रंथो का अध्ययन करें, जीवनी पढ़े :

गर्भधारण के समय नारी को समय निकालकर ग्रंथों को अध्ययन करना चाहिए, महान पुरुषों की जीवनी पढ़नी चाहिए। ऐसा करने से बच्चा ना सिर्फ स्वस्थ और तंदुरुस्त रहेगा बल्कि उसका दिमाग भी अपने आपको इसी तरह से ढालने की कोशिश करेगा। हमने आपको पहले ही बताया कि गर्भ में आने के 3 महीने बाद से ही बच्चा बाहरी आवाज सुनने और समझने लगता है। तो इस तरह से जीवनी और ग्रंथों का पढ़ना बच्चे के दिमाग के विकास में काफी सकारात्मक परिणाम लाएगा।

दोस्तों यह तो हो गई गर्भ संस्कार के लिए एक मा की भूमिका लेकिन जब बच्चा माता-पिता दोनों का है, तो पिता का भी तो कुछ फर्ज बनता है अपने बच्चे के प्रति। तो आइए अब जानते हैं कि गर्भ संस्कार में एक पिता की क्या भूमिका होनी चाहिए।

गर्भ संस्कार में एक पिता की जिम्मेदारी

अपने बच्चे की माता का रखें पूरा ध्यान 

जब एक औरत मा बनने वाली होती है या बनती है तो हजारों परेशानी उसके इर्द-गिर्द घूमती रहती है। उसको काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, एक जीव को इस दुनिया में लाने के लिए। ऐसे में अगर अपने जीवन साथी का साथ मिल जाए, तो यह मुश्किल वक्त भी आसानी से गुजर जाते हैं। और अगर गर्भवती होने के समय औरत खुश रहे तो बच्चा भी healthy पैदा होता है यह हम सभी को पता है। 

ऐसे में एक पति का फर्ज है कि वह अपनी पत्नी का पूरा ध्यान रखें। ध्यान रखने से मतलब सिर्फ उसकी जरूरतों को पूरा कर देना ही नहीं है, उसके मानसिक अवस्था का भी पूरा ध्यान रखने की कोशिश करें। अपने आचरण और व्यवहार से अपनी पत्नी को पूरी तरह से खुश रख, अपनी पत्नी को कहीं घुमाने ले जाए, अच्छी बातें करें, प्यार दें,  उसको हर पल अपने साथ होने का एहसास दिलाये। तभी बच्चा दुनिया में खुशी खुशी आ पाएगा।

बच्चे को अपने होने का भी एहसास दे

 जब बच्चा गर्भ में होता है तो उसके अंदर भी एक छोटा सा प्राण होता है, जो हर बात को समझ सकता है। ऐसे में होने वाले माता के गर्भ पर हाथ रखना, अपने बच्चे से बातें करना, उस बच्चे को अपने पिता के साथ होने का एहसास दिलाता है। इससे बच्चे पे काफी अच्छा असर पड़ता है। समय-समय पर अपने बच्चे से बात करें, उसकी धड़कनों को सुनें और उसको अपने होने का एहसास दिलाये। आपका यह छोटा सा कदम आपके बच्चे के विकास के लिए काफी मददगार साबित होगा।

आज हमने क्या सीखा

उम्मीद करते हैं, इस पोस्ट को पढ़कर आप लोगों को गर्भ संस्कार के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी। साथ ही यह आर्टिकल (गर्भ संस्कार क्या है। पूरी जानकारी।) एक होने वाली मा को काफी help करेगा यह समझने के लिए की गर्भवती होने के बाद उनको किस तरह की सावधानियां अपनानी चाहिए ताकि बच्चा पूरी तरह से सुरक्षित रह सके।

 अंत में बस यही कहेंगे कि अगर आप लोगों को यह आर्टिकल पसंद आया और वाकई में इस आर्टिकल से आप लोगों को कुछ सीखने को मिला तो इसको लाइक जरूर करें और अपने दोस्तों के साथ ज्यादा से ज्यादा शेयर भी कर दें। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसके बारे में जानकारी मिल सके। अगर फिर भी इस टॉपिक (गर्भ संस्कार क्या है। पूरी जानकारी।) को लेकर आपके मन में कोई सवाल है या कुछ सुझाव आप हमको देना चाहते हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में हमसे जरूर जुड़े।

author : Madhuwati ray

भारत की परंपरा और सोने का महत्व

भारत अपनी विभिन्न  रीति रिवाज़ ,सांस्कृतिक परम्पराओ के लिए लोकप्रिय है। भारत अपनी सांस्कृतिक परम्पराओ के लिए पूरे विश्व भर में जाना जाता है। इस देश में लोग विभिन्न प्रकार की  भाषाएं बोलते है और सबकी अपनी विशेष परंपरा है। यह परम्पराएं पीढ़ीओं से चली आ रही है। भारत को पहले सोने की चिड़िया कहा जाता था। भारतीय इतिहास में सोने का गहरा महत्व है जो दुनिया के विभिन्न हिस्सों से लोगो को अपनी ओर आकर्षित करता है। सोने की भारतीय परम्पराओ ,रीति रिवाज़ो में अपनी अलग ही पहचान है। भारत में हज़ारो शादियों से  सोने के आभूषणों का आदान प्रदान होता आ रहा  है। आप  अपने पसंद और समार्थ्य के अनुसार 22 ,24  और 18  कैरट का सोना खरीद सकते है।

sona sab ko akarshit karta hai.

पिछले कुछ वर्षो में भारत में लोगो के दिलो में सोने की चाहत बढ़ रही है। भारत के खाते में दुनिया भर में सोने की सबसे अधिक खपत है। सांस्कृतिक रूप से सोना एक महत्वपूर्ण धातु है जिसके बैगर भारतीयों की परम्पराएं अधूरी है। सोने जैसे धातु ने भारतीयों के दिलों और घरो में एक महत्वपूर्ण स्थान पाया है। भारतीय आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा संसाधनों पर जीवित है लेकिन इन सबके बावजूद वो सोना खरीदने के हर संभव तरीके ढूँढ़ते है। सोना इनके ज़िन्दगी और भारतीय परंपरा का अभिन्न अंग है। दिल्ली से चेन्नई और अहमदाबाद से कोलकाता तक सोने की मांग हमेशा दिखती है। देशवासियों में सोने को लेकर दीवानगी हमेशा देखी जाती है। सोने की कीमत ज़्यादा हो या कम इसके खरीदार हमेशा मौजूद है।

सोने को खरीदने और जिसके पास जितना अधिक सोना वह समाज में अंहकार के साथ जीता है। सोने का उनके पास होना जैसे उनके रुतबे का उनके पास होना। भारतीय शादी तो जैसे सोने के बिना अधूरी और फीकी है। शादी में दुल्हन हमेशा सोने के आभूषणों से लदी हुयी पायी जाती है। अक्षय तृतीया और धनतेरस में सोना खरीदना भारतीयों की ख़ास परंपरा है। धनतेरस में सोना खरीदने के लिए लोगो की  लम्बी कतारे देखी जा सकती है।

सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार सोना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। सास अपने बहु को गृह प्रवेश के वक़्त सोना उसके नए जीवन की शुरुआत के लिए देती है। सोना परम्पराओ के अनुसार शुभ वस्तु है जो हर रस्मो रिवाज़ो को पावन बना देती है। महिलाओं को सोना से बेहतर कोई उपहार नहीं लगता है। महिलाएं हर महीने थोड़े पैसे बचाती है ताकि वह सोना खरीद सके। सोने की कीमत पीढयों दर चली आ रही है।

सोने की मांग हमेशा से देश में थी और हमेशा रहेगी। भारत में हर धर्म के लोग चाहे हिन्दू , सिख ,ईसाई सभी के लिए सोना प्रमुख सम्पत्ति है। सम्पन्न धनवान  लोग मंदिरो में अपने सुखद जीवन के आगमन की प्राथना के लिए सोने का दान देते है। विभिन्न धार्मिक अवसरों पर लोगो के लिए सोना खरीदना आम बात है। सोना हर भारतीय घर का हिस्सा है जिससे लोग जुड़े रहते है। यह देश के हर घर पर पारिवारिक विरासत के रूप में माना जाता है। पारिवारिक विरासत को जीवित रखने हेतु सोने के आभूषण पढ़ी दर पीढ़ी चले आ रहे है।

ज़्यादातर घरो में शादियों में दुल्हन की माँ दुल्हन को गहने पहनाकर विदा करती है। सोना परम्पराओं का एक अत्यंत भावुक हिस्सा है। सोने को उपहार में देना भारतीय रीति रिवाज़ो के अनुसार शुभ माना जाता है। सोना ना केवल महत्वपूर्ण धन  का स्रोत है बल्कि सोना भारतीयों के लिए भाग्यशाली होता है ऐसी मान्यता है। शादियों के दौरान अक्सर रिश्तेदार उपहार में दुल्हन को सोना देते है। दुल्हन भारी मात्रा में सोना अपने नए घरो में लाती है जिसे परम्पराओ के अनुसार शुभ माना जाता है।

kya app jante hai …ek dulhan wida hote waqt 1 kg tak sona phene rahte hai.

सोने का एक उपहार शायद देश में उपहार देने का एक सर्वोच्च रूप है। शहरों में जन्मदिन और बच्चे के जन्म होने पर परिवार अक्सर सोने के उपहार देते है। भारत में सोने से बड़ा कोई स्टेटस सिंबल नहीं है। राजनेता ,व्यवसायी ,अभिनेता ,बड़े अधिकारी सभी को अपना सोना दिखाना बेहद पसंद है। सोना एक प्रतिष्ठित होने का चिह्न है और भारत में युगों से चला आ रहा एक समाजिक स्थिति का प्रतीक है।

सोना के दिन प्रतिदिन बढ़ती हुयी दरों के बावजूद लोग सोना खरीदने की क्षमता रखते है। सोने को भारतीय परंपरा के अनुसार एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। ज़्यादातर भारतीय लोग इसी भावना को पीढ़ियों से मानते हुए चले आ रहे है।भारतीय लोग सोने को अपनी सम्पति समझते है जो उनके बुरे वक़्त में काम आता है। सोने का निवेश करना हर एक भारतीय की चाह होती है।

सोना लोगो को दिखाना बेहद अच्छा लगता है। हर बड़े छोटे अवसर पर महिलाएं खासकर  सोने के गहने दिखाए बिना रह नहीं सकती है।  सोने का दक्षिण भारत में अपना महत्व होता है। 2017 को एक रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण भारत में दुल्हन अपने विवाह में जो  गहने पहनती है उनका वजन सामान्यत 320  ग्राम होता है। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में दुल्हन लगभग 300 ग्राम सोना पहनती है। भारत सोने के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाज़ारो में से एक है। भारतीय परम्पराओं के अनुसार नागरिक सोने के सिक्के और सोने के आभूषण खरीदना बेहद पसंद करते है। सोना भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

भारत में अधिकांश अनुष्ठान को सोने से जोड़कर देखा जाता है। इसमें सबसे प्रमुख है शादी। दुनिया भर की कई संस्कृतियों का मानना है कि सोना सूरज का प्रतिनिधत्व करता है।  सोने को शुभ और पवित्र माना जाता है। सोना शादियों से जुड़े संस्कारों और अनुष्ठानो का एक अभिन्न हिस्सा है। नयी यात्रा की शुरुआत के लिए और सम्पति के रूप में सोने को देखा जाता है। सोने की मान्यता पीढ़ियों से चली आ रही है और भविष्य में भी सोने के दबदबे से कोई इंकार नहीं कर सकता है।

शादी के समय परिवार वाले गहने के दुकानों पर  सोना खरीदने के लिए कतारे लगा देते है। एक अलग ही दृश्य जैसे देखने को मिलता है। लोग अलग अलग तरीके के नक्काशी वाले आभूषण पहनना पसंद करते है। चाहे कोई अमीर हो या मध्यमवर्गीय परिवार सोना खरीदने में किसी को परेशानी नहीं होती है। सोने से जड़ी हुयी दुल्हन को लक्ष्मी के रूप में देखा जाता है। सोना एक लम्बे वक़्त का निवेश बन जाता है जो रिटायरमेंट के बाद और बुरे समय में बेहद काम आता है।

निष्कर्ष

लोग भविष्य में बच्चे की शादी के लिए बहुत पहले से किश्तों में सोने के आभूषणों की खरीदारी कर लेते है। सोने की कीमत दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है।  इसलिए लोग भविष्य के बारे में सोचकर पहले से ही सोने की खरीदारी करना पसंद करते है। सोने की बढ़ती कीमत की वैल्यू बच्चे की शादी के वक़्त आपको मुनाफे में रखेगी। सोने के यूनिवर्सल वैल्यू को हम सब जानते है और उसे झुटलाया नहीं जा सकता है। सोने के दिन प्रतिदिन बढ़ते हुए दरों के बावजूद लोगो के दिलो में इसकी विशेष जगह है।

लड़को में पाई जानेवाली लड़कियों जैसी 10 आदतें।

Hello दोस्तों! इस blog पर आपका एक बार फिर से बहुत बहुत स्वागत है। आज का हमारा Title थोड़ा सा अलग है. our topic today is लड़को में पाई जानेवाली लड़कियों जैसी 10 आदतें। हम जानते हैं  काफी सारे लोग अक्सर इस बात को लेकर confused रहते हैं, जिसका एक perfect और सही जवाब शायद ही किसी को मिल पाया हो। हम सभी जानते हैं और बुजुर्गों के मुंह से हमेशा ही सुनते आए हैं कि औरत और मर्द एक सिक्के के दो पहलू होते हैं, एक वाहन के दो पहिए होते हैं। जब तक यह दोनों पहिए सही तरह से काम ना करें तब तक जिंदगी की गाड़ी ठीक से आगे नहीं बढ़ सकती।

लड़को में पाई जानेवाली लड़कियों जैसी 10 आदतें।

लेकिन interesting बात तो यह है कि औरत और मर्द दोनों सारा जीवन एक साथ गुजारते हैं, एक के बिना दूसरे का कोई अस्तित्व नहीं है, हर किसी को एक मोड़ पर जाकर अपने जीवन साथी की जरूरत तो पड़ती ही है लेकिन इतना सब कुछ होने के बावजूद भी औरत और मर्द के चरित्र और व्यवहार एक जैसा नहीं है। दोनों के काम करने के अलग-अलग अपने तरीके हैं, अपने हाव-भाव है। और शायद इस विपरीत चरित्र ही वजह है दोनों के बीच आकर्षण का। लेकिन आज का हमारा टॉपिक यह नहीं है। मतलब की हम आज थोड़ा हटकर सोचने वाले हैं। 

आपका confussion ज्यादा ना बढ़ाते हुए आपको बता देते हैं कि आज हम इस टॉपिक पर बात करेंगे कि ऐसी कौन सी 10 आदतें है, जो मर्द और औरत दोनों के बीच similar है या एक जैसा है।लड़को में पाई जानेवाली लड़कियों जैसी 10 आदतें। तो है ना यह Interesting टॉपिक। अब बिना समय गवाएं चलिए जानते हैं कि वह 10 आदतें कौन-कौन सी है।

लड़को में पाई जानेवाली लड़कियों जैसी 10 आदतें।

मर्द और औरत दोनो में पाई जाने वाली 10 आदतें :

झगड़ा करना

वह दिन गए दोस्तों, जब सिर्फ औरतें ही झगड़ालू कहलाती थी और झगड़ा करने में पीएचडी हासिल की हुई थी। आजकल झगड़ालू होने का तमका सिर्फ औरतों को ही नहीं मर्द को भी दिया जा रहा है। वक्त के साथ औरत और मर्द के बीच का फासला इतना कम हो गया है कि औरतें, मर्द की आदतें अपनाने लगी है और  मर्द औरतों की। आज कल तो जितना जल्दी औरतें क्रोधित नहीं होती उतना जल्दी लड़के हो जाते हैं। और बिना किसी की परवाह किए किसी के साथ भी लड़ पड़ते हैं। अरे यह तो कुछ भी नहीं, अब तो यहां तक देखने को मिल जाता है कि लड़के इस बात पर भी ध्यान नही देते की सामने औरत खड़ी है या मर्द । बस अपना हक मिलना चाहिए और किसी के सामने झुकना नहीं है।

आंसू बहाना

हम सभी को पता है कि रोने के मामले में औरतें काफी मास्टर है और छोटी-छोटी बात पर भी आंसू बहा देना जैसे औरतो की फितरत है। लेकिन वो Diologue पुराना हो चुका है कि “मर्द को दर्द नहीं होता”। दरअसल लड़के पहले भी रोते थे लेकिन पहले छुप छुप कर रोते थे। क्योंकि किसी के सामने रोने से उनके Ego को ठेस पहुंचती थी। क्योंकि पहले औरत और मर्द के बीच काफी फासला था मर्द का रुतबा ही अलग हुआ करता था। और रोना उनके शान के खिलाफ था। लेकिन अब लड़के भी किसी बात को इतना Mind नहीं करते। इसकी वजह शायद यह भी है कि वक्त के साथ लड़के औरतों को अपने बराबर समझने लगे हैं। जो करने की इजाजत उनको पहले का जमाना नहीं देता था। खैर जो भी हो लेकिन बात यह है कि और लड़कियों की तरह लड़के भी छोटी-छोटी बातों को बर्दाश्त नहीं कर पाते और रो पड़ते हैं।

लंबे बाल और कान की बाली 

आप लोगों Notice किया होगा कि आजकल काफी लड़के अपने बालों को लंबा करते हैं। यहां तक कि फिल्मी हीरो लोग भी अपने बालों को थोड़ा लंबा करके पीछे जुड़ा बांध लेते हैं। ठीक इसी तरह कानों में भी काफी लड़के बालियां पहनने लगे हैं। खासकर अपने दाहिने कान में एक बाली पहन लेते हैं। अब उनके ऐसा करने के पीछे logic क्या है यह तो हमें भी नहीं पता। लेकिन जिस तेजी से लड़के बाल बढ़ाना और कान की बालियां पहनने का रिवाज अपना रहे हैं, वह दिन दूर नहीं जब इस काम मे वह औरतों को भी पीछे छोड़ देंगे। वैसे भी आजकल काफी  कम लड़किया ही बालियां पहनना  और लंबे बाल रखना पसंद करती है।

पूजा पाठ करना 

पहले के जमाने में पूजा पाठ करने में सिर्फ औरतें ही आगे रहती थी और मर्द के नाम पर सिर्फ कुछ चुनिंदा ब्राम्हण पंडित ही पूजा-पाठ में मन लगाते थे। लेकिन अब ऐसा समय आ गया एक औरतों के मुकाबले मर्द ही ज्यादा पूजा-पाठ और ध्यान करते हैं। इसका कारण शायद struggling life style और depression भी है। इसी वजह से कोई और रास्ता ना पाकर आजकल लड़कियों के साथ लड़के भी पूजा में बहुत ज्यादा ध्यान लगाने लगे हैं।

खाना पकाना 

लड़कों का खाना पकाने के शौक से तो हम सभी वाकिफ हैं ।आजकल टीवी में भी ऐसे बहुत से shows आते हैं, जहां लड़के काफी उत्सुकता से भाग लेते हैं। और अलग-अलग तरह के dishes बनाकर competition में जी जान लगा देते हैं। सिर्फ competition में ही नहीं, घर पे भी आजकल लड़के खाना बनाने के काफी शौकीन हो गए हैं। इसके पीछे के कारण की बात करें तो हम यही कहेंगे कि आजकल successfull होने की race में हम घर पर कम ही रहते हैं।हमें अपनी जिंदगी का ज्यादातर समय अकेले किसी hostel या rent वाले रूम में रहना पड़ता है। इसी मजबूरी के वजह से लड़के खाना पकाना सीख गए हैं। धीरे-धीरे खाना पकाने की आदत उनका शौक बन गया है।

गाने सुनना

नए पुराने गाने सुनना किसे पसंद नहीं होता। यह भी एक ऐसी आदत है जो लड़के और लड़कियां दोनों में ही मौजूद है। लड़कियां तो शुरु से ही टीवी देखने और गाने सुनने में famous रह चुकी है, लेकिन लड़के भी इस race में कम नहीं है। पूरा दिन earphone लगाकर मोबाइल से गाने सुनना तक तो ठीक है, लेकिन आजकल तो घर पर फ्री टाइम में serials भी देखना शुरू कर दिए हैं। जिस काम पर एक वक्त तक सिर्फ औरतों का ही copyright था।

सुंदर दिखना

सुंदर दिखना कौन नहीं चाहता। खासकर अगर लड़कियों की बात करें तो यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि सुंदर दिखने के लिए लड़की कुछ भी कर सकती है। घंटों पार्लर में बैठकर हजारों रुपए खर्च करने से लेकर सुंदर दिखने की शर्त पर काफी लड़किया अपना शारीरिक नुकसान भी कर देती है। लेकिन फिर भी महंगे महंगे chemical वाले cosmetic और oil का इस्तेमाल करना नहीं छोड़ती। उसी तरह लड़के भी बताते और जताते भले ही ना हो लेकिन लेकिन अंदर ही अंदर dashing और handsome दिखने के लिए हर वह चीज करते हैं जो उनके बस में हो। हमने तो यहां तक भी देखा है कि सुंदर और गोरा दिखने के लिए लड़के, लड़कियों के क्रीम भी use करते हैं और तो और वह लोग लड़कियों के oil और body lotion use करने से भी बाज नहीं आते हैं।

खट्टा खाने के शौकीन

जब कोई महिला गर्भवती होती है तो उसको खट्टा खाने का बड़ा जी करता है। फिर उसका पति उसके लिए बाजार से खटाई लेकर आते हैं। ऐसी story आपने बहुत बार सुनी होगी और यह भी जानते होंगे कि लड़कियां खट्टा खाने की कितनी दीवानी होती है। लेकिन शायद आप लोगों को यह पता ना हो कि लड़के भी खट्टा खाने की उतने ही दीवाने होते हैं । यार लड़कियों की तरह वह भी बहुत ज्यादा खट्टा खाते हैं। अगर आप लोगों को यकीन ना हो तो आप अपने आसपास के किसी Male Friend या Family Member से इस बात की तहकीकात कर सकते हैं। लेकिन यह सौ फीसदी सच है कि लड़के भी खटाई खाने के शौकीन होतें हैं।

 jealous होना

अपने पति या बॉयफ्रेंड के साथ किसी और लड़की को देखने मात्र से ही जल भूनकर राख हो जाना तो औरतों की फितरत में ही है। लेकिन जिस बात के लिए औरतें इतने दिनों से बदनाम है,  क्या आपको पता है कि वह आदत लड़कों में भी है। अपनी गर्लफ्रेंड या पत्नी के साथ किसी और लड़के को बात करते हुए भी देखना लड़के बिल्कुल पसंद नहीं करते। उनको यह बात बिल्कुल भी गवारा नहीं कि उनकी बीवी या गर्लफ्रेंड के साथ कोई हंस कर बात करें या ग जरा पास बैठे हैं या भी मजाक में भी उनका हाथ तक पकड़े। खुद लड़के भले ही बाहर कुछ भी करें लेकिन अपनी बीवी को या गर्लफ्रेंड को हमेशा सब से बचा कर रखना चाहते हैं और जरा सी भी किसी और लड़के के साथ कदेखते ही जल कर काले कोयले हो जाते हैं।

सबकी फिक्र करना

सारी आदतों में यह सबसे sweet आदत है जो लड़कियों की तरह लड़कों में भी होते हैं। बेटी अपने परिवार के हर सदस्य की फिक्र करती है, बहु अपने पूरे परिवार को एक धागे में पिरो कर रखती है, मां पूरे फैमिली का ख्याल खुद से ज्यादा रहती है, यह सब diologue तो हम सब ने सुने हैं ।लेकिन ये किसी ने नहीं सुना की लड़के अपने फैमिली की फिक्र करते हैं। लड़कों का image तो बस घूमना फिरना सैर-सपाटे में ही सिमट कर रह गया है। लेकिन वह भले ही दिखाते नहीं, जताते नहीं फिर भी अपने परिवार के हर सदस्य की छोटी-मोटी जरूरतों का ख्याल रखते हैं। अगर पुरा ना भी कर पाय फिर भी कोशिश जरूर करते हैं, बिना जताए।

दोस्तों तो यह थे लड़को में पाई जानेवाली लड़कियों जैसी 10 आदतें। लड़कों में पाए जाने वाले वो 10 आदतें, जो लड़कियों की तरह है। काफी कम लोगों को इन आदतों के बारे में पता है। वैसे तो यह topic कुछ ज्यादा खास नहीं है लेकिन किसी लड़के को अपने जीवनसाथी या दोस्त के रूप में चुनने से पहले उसको समझना बहुत ज्यादा जरूरी है।और किसी लड़के को समझने के लिए उसके बारे में जानना बहुत जरूरी है। इसी बात पे चलिए हम लड़को के 5 खास बातें भी आपको बताते हैं।

Boys की 5 खास बातें :

1.  Maximum लड़के लड़कियों की तुलना में बहुत ज्यादा  मासूम होते हैं। वो किसी भी माहौल को आसानी से अपना लेते हैं। यू कह लो कि नखरा उनके अंदर नही होता।
2. अगर percentage के हिसाब से देखा जाए तो लड़कियों के मुकाबले लड़के काफी कम शक्की होते हैं। वह आसानी से किसी पर trust कर लेते है।
3. लड़कियों की तुलना में लड़के ज्यादा खर्चीले होते हैं। आप लोगों ने notice किया होगा कि कोई सामान खरीदने पर लड़कियों की तुलना में  लड़के बहुत कम मोलभाव  करते हैं।
4. लड़कियों के मुकाबले लड़के काफी दानवीर type के होते हैं। अगर किसी को कुछ देना पड़े, किसी के लिए कुछ करना पड़े तो हो सकता है कि लड़की एक बार के लिए सोचे। लेकिन लड़के किसी को कुछ देने से पहले बिल्कुल भी नहीं सोचते। हम यह नहीं कह रहे कि सब लड़के ऐसे होते हैं लेकिन maximum लड़के ऐसे ही होते हैं।
5. काफी कम लड़के ही ऐसे होते हैं जो जिद्दी होते हैं। लेकिन ज्यादातर लड़के जिद्दी नहीं होते। जबकि आप लोगों को पता ही होगा कि लड़कियां अपने जिद्दी और नकचढ़ी स्वभाव के लिए ही लड़को को जीतने नही देती घर में ऊंचे औंधे पे रहती है।

हमें उम्मीद है कि यह आर्टिकल आपको काफी मदद करेगा एक लड़के को समझने के लिए उसके प्रति कोई नकारात्मक राय कायम करने से पहले उसकी गहराई को जानने के लिए। अगर आप को यह आर्टिकल अच्छा लगा तो अपनी फैमिली के सभी ladies के साथ और अपनी सभी girls दोस्तों के साथ जरूर से जरूर शेयर करें ताकि उनके दिमाग का ताला भी थोड़ा खुल जाए और लड़कों का और ज्यादा कचूमर ना बने। अगर आपके मन में कोई भी सवाल या सुझाव हो तो हमें कमेंट करके जरूर पूछें। धन्यवाद।

Author : Jhumawati ray

लॉकडाउन का बच्चो पर असर

आज हम कवर करने जा रहे हैं, लॉकडाउन का बच्चो पर असर। लॉकडाउन के कारण बच्चे घर पर रह रहे हैं और इसके परिणामस्वरूप टीवी और मोबाइल फोन के साथ बहुत समय व्यतीत हो रहा है। बहुत सारे बच्चे चुपचाप टीवी और मोबाइल फोन के आदी हो रहे हैं। बच्चों के साथ कोई समस्या नहीं है। हम माता-पिता को ध्यान रखना होगा और स्थिति को सुधारने के लिए समाधान तलाशना होगा।

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आज की डेट में अगर कोई ब्रेकिंग न्यूज़ है तो वह है कोरोना वायरस। आज हर न्यूज़ चैनल पर बस एक ही न्यूज़ है, हर जुबान पर बस एक ही बात है, हर दिल में बस एक ही खौफ है और वह है कोरोना वायरस का डर। इस डर न लोगों के दिल में इस तरह से जगह बना लिया है कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से काफी प्रभावित हो रही है इसकी वजह से। सिर्फ इतना ही नहीं दोस्तों, इस वायरस ने काफी जाने भी ले चुकी है और अभी भी ले रही है। लेकिन इस वायरस के लिए कोई न कोई उपाय तो निकालना ही था।


तो यह वायरस लोगों की जिंदगी को ज्यादा नुकसान ना पहुंचा सके, इस बात को ध्यान में रखते हुए लगभग हर एक देश के सरकार ने एक फैसला लिया और वह फैसला है लॉक डाउन का। मार्च महीने से ही हर एक देश में lockdown लागू कर दिया गया है। बात करें भारत की तो भारत में भी मार्च से ही लॉकडाउन जारी कर दिया गया। लेकिन इस lockdown ने कोरोना वायरस के प्रभाव को हालांकि बहुत कम किया लेकिन लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर इसके नकारात्मक प्रभाव भी कम नहीं थे। आज के इस लेख में हम लोग उसी प्रभाव के बारे में बात करने वाले है। खासकर बच्चों की जिंदगी को किस तरह से lockdown ने प्रभावित किया उस बारे में हम आज बात करने वाले हैं।


लॉकडाउन का बच्चो पर असर

पढ़ाई पर असर


 Lockdown के प्रभाव में अगर बच्चों की बात करें तो लॉक डाउन का जितना प्रभाव बड़ो पर पड़ा है उतना ही ज्यादा प्रभाव बच्चों पर भी पड़ा है। सबसे ज्यादा बच्चों की पढ़ाई इस lockdown से प्रभावित हुई है। जैसा कि हम सभी को पता है कि lockdown के वजह से सारे स्कूल कॉलेज बंद कर दिए गए थे। इस वजह से बच्चे स्कूल नहीं जा पाए और उनकी पढ़ाई को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा। सिर्फ इतना ही नहीं कुछ जगह तो lockdown के वजह से प्राइवेट ट्यूशन टीचर ने भी ट्यूशन लेना बंद कर दी है। क्योंकि उनके दिल में खौफ था की कहीं उनको भी कोरोना न पकड़ ले। कुल मिलाकर बच्चे घर पर ही पढ़ाई करने पर मजबूर हो गए और कुछ बच्चे अगर अपने पढ़ाई को मेंटेन करने में सफल भी रहे फिर भी काफी अनुपात में बच्चों की पढ़ाई को भारी नुकसान उठाना पड़ा।


खेलकूद पर प्रभाव


सिर्फ पढ़ाई ही नहीं इस lockdown ने बच्चों के खेल कूद पर भी काफी असर डाला है। जब यह लागू नहीं हुआ था तब बच्चे खेलकूद के साथ भी काफी जुड़े हुए थे और इन खेलकूद से उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों ही अच्छे रहते थे। लेकिन लॉकडाउन के वजह से वह बाहर जाकर खेल नहीं पा रहे हैं और जिस वजह से घर पर ही टाइम पास करने पर मजबूर है। और टाइम पास करने के लिए उनके पास कंप्यूटर और मोबाइल गेम्स के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं है।  और क्योंकि उनके पास पढ़ाई लिखाई भी लॉकडाउन में ज्यादा नहीं है करने को तो इस वजह से ज्यादा बोरियत का अनुभव कर रहे हैं बच्चे। इसके वजह से उनको खेलकूद की कमी भी काफी महसूस हो रही है । तो इसर तरह से लॉकडाउन ने बच्चों की खेलकूद को भी काफी बुरी तरह से प्रभावित किया है।


स्वास्थ्य पर असर

लॉक डाउन का सबसे गहरा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर ही पड़ा है। हम सबको पता है कि बड़ों को नहीं लेकिन बच्चों को आए दिन छोटी-मोटी शारीरिक परेशानियां होती रहती है, जिस वजह से आए दिन हमारा डॉक्टर के पास आना जाना हमारा लगा रहता है। लेकिन लॉकडाउन के वजह से हॉस्पिटल और प्राइवेट डॉक्टर के पास जाने के लिए भी काफी सोचना पड़ रहा है। क्योंकि बात बच्चे का है तो उनके लिए बाहर निकलने पर काफी मनाई है। इस वजह से उनकी हेल्थ भी काफी प्रभावित हो रही है। काफी  parents तो घरेलू नुस्खों से इलाज करने पर मजबूर हो गए हैं।


मानसिक अवस्था का बुरा हाल


 जैसा कि हम सभी को पता है कि लोकडाउन के वजह से बाहर जाकर काम करने वाले लोग वही फस जाने पर मजबूर हो गए हैं। जिस वजह से वह घर नहीं आ पाए और और पूरे फैमिली में तनाव का माहौल सा छा गया और इसका असर बच्चों के मानसिक अवस्था पर भी पड़ा। मानसिक रूप से इस बात से बच्चे काफी ज्यादा प्रभावित हुए कि उनके पेरेंट्स बीमारी की वजह से घर नहीं आ पा रहे हैं । और यह डर जितना बड़ो में है कि कहीं बाहर रहकर उनका कोई फैमिली मेंबर कोरोना से संक्रमित ना हो जाए, उतना ही बच्चों को भी यह बात प्रभावित कर रही हैं। जिसके वजह से वह अपने पढ़ाई लिखाई और खेलकूद भी सही तरीके से नहीं कर पा रहे हैं।


 बच्चों के खान-पान पर असर


लगता नहीं है, लेकिन इस लॉकडाउन ने बच्चों के खान-पान को भी काफी प्रभावित किया है। हम सभी को पता है कि लॉकडाउन के वजह से मार्केट बंद हो चुकी है, सारी दुकानें बंद है और इस वजह से उनकी मनपसंद खाने पीने की चीजें भी उपलब्ध होनी बंद हो चुकी है। इस वजह से बच्चे चिड़चिड़े भी हो गए हैं।


आज हमने क्या जाना


 आज के इस लेख में हमने जाना कि लॉकडाउन बच्चों की जिंदगी को किस तरह से प्रभावित किया है। कुछ लोगों को शायद इन बातों के बारे में नहीं पता। लेकिन हमें इन बातों को गहराई से समझना चाहिए क्योंकि हम सभी को पता है कि बच्चे हमारे देश का भविष्य है। और उनके ऊपर इस तरह से लॉकडाउन का असर पड़ना काफी निंदनीय है। तो सरकार के साथ हम सभी को इसके प्रति जागरूक होना चाहिए कि लॉक डाउन का असर बच्चों पर कम से कम पढ़े और अपने बचपन को इस महामारी के संकट पूर्ण समय में भी पूरी तरह से enjoy कर सके।
तो आकर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी तो इसको लाइक करें और अपने दोस्तों के साथ शेयर करें। और lockdown या किसी और टॉपिक को लेकर अगर आपके मन में कोई सवाल है तो कमेंट करके हमसे जरूर पूछें।

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टैक्स कैसे बचाएं – कैसे करें टैक्स सेविंग -tax kaise bachaye





आज प्रस्तुत है एक बहुत महत्वपूर्ण विषय tax ko kaise bachaye. (how to save taxes) लेकिन पहले मुझे पहले टैक्स की व्याख्या करने दें।

Tax क्या है

टैक्स एक अनिवार्य शुल्क या वित्तीय शुल्क है जो सरकार द्वारा किसी व्यक्ति या संस्था पर राजस्व जुटाने के लिए लगाया जाता है। जमा हुए टैक्स की कुल राशि को विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए उपयोग किया जाता है। कानून के मुताबिक, खुद से या गलती से टैक्स भुगतान ना करने पर जुर्माना या सज़ा मिलने सकती है।

Tax is one of the most common financial terms. Taxes are one of the primary sources of income for the government through which it fulfills various projects and initiatives.

No matter where you live in the world, the one thing that you can always count on is that you will be paying taxes to the local government. Taxes come in various forms such as state taxes, central government taxes, direct taxes, indirect taxes and so on.

tax savings is very important tool

Tax के प्रकार

व्यक्ति/ संगठन को विभिन्न तरीकों से टैक्स का भुगतान करना पड़ता है। टैक्स अधिकारियों द्वारा टैक्स भुगतान के तरीके के आधार पर, टैक्स को डायरेक्ट टैक्स और इन-डायरेक्ट टैक्स में बाटा जाता है।

An entity has to pay taxes in various forms. Depending on the manner in which they are paid to the taxation authorities, these taxes are classified into direct and indirect taxes.

चाहे आप दुनिया में कहीं भी रहते हों, पर आपको स्थानीय सरकार को टैक्स का भुगतान करना होता है । टैक्स कई प्रकार के होते हैं जैसे स्टेट टैक्स (राज्य कर), सेण्टर गवर्नमेंट टैक्स (केंद्र सरकार कर), डायरेक्ट टैक्स (प्रत्यक्ष कर), इन-डायरेक्ट टैक्स (अप्रत्यक्ष कर) इत्यादि।

Tax भरने के लाभ

मूलत: टैक्स वह राशि है जिस पर सरकार चलती है और अपने नागरिक को सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करती है। टैक्स का भुगतान करने के लाभ निम्नलिखित हैं।

  • आपका टैक्स भुगतान सुनिश्चित करता है कि सभी नागरिकों के लिए सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं बिना किसी बाधा के चलती रहेंगी।
  • आप लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने के लिए अपने इनकम टैक्स रिटर्न दस्तावेजों का उपयोग कर सकते हैं।
  • इस टैक्स की राशि से सरकार अपने नागरिक के लिए बेहतर सुविधाओं और उपयोगिताओं को निधि दे सकती है जो बदले में लोगों के जीवन स्तर में सुधार करने में मदद करती है।
  • सरकार को बहुत सारे कार्य करने होते हैं और जिसके लिए धन की आवश्यकता होती है। आपके धन का उपयोग सेनाओं, बुनियादी ढांचे के विकास, नागरिकों की सुरक्षा, प्रशासनिक सेवाओं आदि के लिए भी किया जाता है।

इनकम Tax

यह सबसे साधारण टैक्स है जो एक नागरिक सरकार को व्यक्तिगत रूप से चुकाता है। यह बहुत ही सरल है – आपकी इनकम का एक हिस्सा हर साल सरकार को टैक्स के रूप में देना होता है और इस धन का उपयोग सरकार द्वारा देश भर में विकास कार्यों के लिए किया जाता है।

इनकम Tax असेसी

कोई भी व्यक्ति जो इनकम होने के कारण से टैक्स जमा करने के लिए उत्तरदायी है, एक इनकम टैक्स असेसी है। हालांकि, कुछ व्यक्ति जो इनकम होने के बावजूद भी टैक्स देने के लिए बाध्य नहीं होते हैं जैसे किसान आदि। इसके अतिरिक्त, एक असेसी कुछ स्थितियों में किसी अन्य व्यक्ति की ओर से टैक्स रिटर्न जमा करने के लिए बाध्य हो सकता है।

What makes taxsaving exercise an important financial planning tool. It is important to plan one’s finances properly. By proper tax planning, one not only reduces the tax liability but also end up saving towards the various goals one has set at different life stages.

now lets get on to tax ko kaise bachaye.

How to Save Income Tax in India

  • Use up your Rs 1.5 lakh limit under Section 80C.
  • 2) Contribute to the National Pension System.
  • 3) Pay Health Insurance Premiums.
  • 4) Get a deduction on your rent.
  • 5) Get a deduction on the interest on your home loan.
  • 6) Keep some money in your savings account.
  • 7) Contribute to charity.

यदि आप वित्त वर्ष की शुरुआत से ही प्लानिंग करते हैं तो यह बेहतर रणनीति होगी। दरअसल, टैक्स सेविंग की सही रणनीति केवल कर का भार घटाने से जुड़ी हुई नहीं होती है। बल्कि इसकी प्लानिंग में अधिकतम रिटर्न हासिल करने के साथ-साथ जोखिम को एक सीमा के भीतर रखने पर भी ध्यान देना होता है। यही वजह है कि कोई भी व्यक्ति अपने वित्तीय लक्ष्य को ही ध्यान में रखकर टैक्स सेविंग की अपनी योजना बनाता है। यह टैक्स पेयर की उम्र, उसकी जरूरत और जोखिम लेने की उनकी क्षमता पर निर्भर होता है। 

करदाताओं के लिए टैक्स बचाने के कई विकल्‍प उपलब्ध हैं। अपनी टैक्स बचत को बढ़ावा देने के लिए सभी विकल्पों को देखना और तुलना करना आपके लिए फायदेमंद है। 

80 c an important tool in tax saving

पहला और सबसे महत्वपूर्ण विकल्प आयकर अधिनियम के अध्याय 6-ए का अनुच्छेद 80सी है। आप पीपीएफ, एनएससी, पांच साल के सावधि जमा, जीवन बीमा के प्रीमियम के भुगतान, टैक्स बचाने वाले म्युचुअल फंडों में निवेश कर सकते हैं और एक साल में 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का लाभ पा सकते हैं। इन निवेशों के साथ, आप अनुच्छेद 80सी के तहत बच्चों के शिक्षण शुल्क, होम लोन के पुनर्भुगतान जैसे विभिन्न खर्चों का भी दावा कर सकते हैं। 

इसी तरह, आप स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के भुगतान के लिए एक वित्त वर्ष में 25,000 रुपये तक की कटौती का दावा कर सकते हैं। अनुच्छेद 80सी के 1.5 लाख रुपये के अलावा, आप राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) में निवेश कर सकते हैं और अनुच्छेद 80सीसीडी के तहत 50,000 रुपये तक की कटौती का दावा कर सकते हैं। निर्दिष्ट फंड या धर्मार्थ ट्रस्टों को किए गए किसी भी दान का दावा पूरी तरह से या आंशिक रूप से अनुच्छेद 80जी के तहत किया जा सकता है। कई अन्य रास्ते हैं जैसे कि अनुच्छेद 80ईई के तहत शिक्षा ऋण पर दिए गए ब्याज की कटौती, अनुच्छेद 80टीटीए के तहत बचत खाते पर अर्जित ब्याज में कटौती आदि।  

आप एक स्व-अधिकृत संपत्ति के लिए हो लोन पर एक वित्‍त वर्ष के दौरान अधिकतम 2 लाख रुपये तक के ब्याज का दावा भी कर सकते हैं। वर्ष की शुरुआत में सभी उपर्युक्त तरीकों को जानने और समझने से आप अपने टैक्स में बड़े भुगतान की बचत कर सकते हैं। 


कैसे एक कर बचत योजना बनाने के लिए कदम बढ़ाएँ।

चरण 1: आयकर अधिनियम, 1961 की विभिन्न धाराओं के तहत उपलब्ध सभी तरीकों को पहचानें और तुलना करें। 

चरण 2: टैक्स बचाने के अपने लक्ष्यों को अपने विशिष्ट दीर्घकालिक लक्ष्यों जैसे शादी, बच्चों की शिक्षा के साथ अलाइन करें। 

चरण 3: अपनी जोखिम की क्षमता के आधार पर तरीके चुनें और निवेश करें। उदाहरण के लिए, अपने करियर के प्रारंभिक चरण में या उच्च आय संरचना वाला एक व्यक्ति ज्यादा जोखिम लेने के लिए तैयार होता है। वह अपने निवेश का 80% से अधिक टैक्स बचाने वाले म्युचुअल फंड, यूलिप या एनपीएस जैसे बाज़ार से जुड़े विकल्पों में लगा सकता है।

 चरण 4: एकमुश्त निवेश से बचें और व्यवस्थित निवेश योजना की ओर बढ़ें। यह आपको वर्ष के मध्य में नकदी संकट से बचाएगा।

for more information you can visit the income tax portal of government of india.

tax kaise bachaye

नियमित और व्यवस्थित निवेश टैक्स की असमान कटौती को कम करेगा

अपने टैक्स की योजना बनाने का मुख्य उद्देश्य वित्त वर्ष के अंत में टैक्स की एकमुश्त राशि देने से बचना है। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप उस वर्ष के लिए अपनी कर देयता की गणना करें और फिर अपनी मेहनत से कमाए गए धन को मासिक रूप से निवेश करें। इससे मासिक आधार पर स्रोत पर आपकी कर कटौती कम होगी और आपकी कुल आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। यदि आप अंतिम मिनट की प्रतीक्षा करते हैं और वर्ष के अंत में एकमुश्त निवेश करते हैं, तो अंत में स्रोत पर कर की एक बड़ी राशि काट ली जाएगी। इससे आप वित्तीय संकट में भी पड़ सकते हैं। एक नियमित और व्यवस्थित निवेश आपको अंत में भारी टैक्स का भुगतान करने से बचाएगा।  

some important tax saving intruments, discussed in detail.

Kisan Vikas Patra

India Post introduced the Kisan Vikas Patra as a small saving certificate scheme in 1988. Its primary objective is to encourage long-term financial discipline in people. As per the latest update, the tenure for the scheme is now 124 months (10 years & 4 months). The minimum investment is Rs. 1000 and there is no upper limit. And if you invest a lumpsum today, you can get double the amount at the end of the 124th month. Initially, it was meant for farmers to enable them to save for long-term, and hence the name. Now it is available for all. To prevent the possibilities of money laundering, the 2014 government made PAN Card proof compulsory for investments above Rs. 50,000. To deposit Rs. 10 lakhs and above, you must submit income proofs (salary slips, bank statement, ITR document etc.). It is a low-risk savings platform, where you can safely park your money for a certain period. Further, it is also mandatory to submit AADHAAR number as proof of identity of account holder.

invest in PPF Account

Public provident fund is a popular investment scheme among investors courtesy its multiple investor-friendly features and associated benefits. It is a long-term investment scheme popular among individuals who want to earn high but stable returns. Proper safekeeping of the principal amount is the prime target of individuals opening a PPF account.

A minimum of Rs. 500 and a maximum of Rs. 1.5 Lakh can be invested in a provident fund scheme annually. This investment can be undertaken in a lumpsum or installment basis. However, an individual is eligible for only 12 yearly instalment payments into a PPF account. Investment in a PPF account has to be made every year to ensure that the account remains active.

Public provident funds provide the benefit of availing loans against the investment amount. However, the loan will only be granted if it is taken at any time from the beginning of 3rd year till the end of the 6th year from the date of activation of account.

The maximum tenure of such loans against PPF is 36 months. Only 25% or less of the total amount available in the account can be claimed for this purpose.

More information will be updated to this article soon.

till then happy reading – milte hai.

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यह लेख तथ्यों और आंकड़ों पर आधारित है, अगर आपको यह लेख पसंद आया तो कृपया कमेंट और शेयर जरूर करें।

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अब शादी के लिए लड़का या लड़की ढूंढ़ना बहुत ही आसान हे। इस पोस्ट में आप जानेगे शादी के लिए लड़का या लड़की कैसे तलाश करे। हर उम्र हर जाती की लड़की और लड़को से संपर्क करने का तरीका में आपको बताऊंगा। इस पोस्ट को पूरा पड़े इस में आपको शादी के लिए लड़की या लड़का ढूंढ़ना आसान हो जायगा।

शादी करने के लिए नीचे कुछ तरीके हैं जिन्हें अपनाया जा सकता है। in Shadi ke Liye Ladka Ladki Khoje Online. लड़के या लड़की की शादी के लिए ऑनलाइन खोज करें।

  • आपकी अपनी ही कास्‍ट में कई बिचौलिए या शादी करवाने वाली एजेंसीस
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  • या मैट्रिमोनियल साइट्स
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ऑनलाइन लड़का या लड़की या दुल्हन और दूल्हे को खोजने के लिए कुछ वेबसाइटें हैं, जिनमें से कुछ बहुत लोकप्रिय हैं। वैवाहिक वेब साइटों में से कुछ नीचे सूचीबद्ध हैं।

एक पुस्तक के अनुसार, जो दक्षिण एशिया में विवाहों पर केंद्रित है, भारत में 1500 से अधिक वैवाहिक वेब साइटें हैं। एक अलग सर्वेक्षण में बताया गया है कि भारत में 2600 से अधिक वैवाहिक वेब साइटें हैं जिनमें से 700 से अधिक समुदाय निकायों के विस्तार हैं जिन्होंने विशिष्ट समुदायों के बीच व्यवस्थित विवाह में एक प्रमुख भूमिका निभाई है। अगर आप अरेंज मैरिज करना चाह रहे हैं। जब भारत में हजारों ऑनलाइन वैवाहिक साइटों से चुनने की बात आती है, तो आपको बहुत समस्या होती है।

शीर्ष रेटेड भारतीय वैवाहिक वेब साइटों में से कुछ हैं:

  1. Shaadi
  2. Bharat Matrimony
  3. Jeevansaathi
  4. Findiit

ये भारत में अब तक के सबसे अच्छे मैचमेकिंग साइट हैं जिनमें सबसे अधिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं।

तलाक और दूसरी शादी के लिए वैवाहिक वेब साइट।

  1. Divorce Matrimony (Part of Bharat Matrimony)
  2. Second Shaadi (Not affiliated to Shaadi.com)

ये भारत में दूसरी शादी के बाजार को लक्षित करने वाली वैवाहिक साइटें हैं।


NRI के लिए वैवाहिक साइटें

6. NRI Shaadi (Affiliated to Shaadi.com)
7. NRI Matrimony (Affiliated to Bharat Matrimony)
8. NRI Marriage Bureau (NRIMB.com)

यदि आप विदेश में शादी करने का सपना देखते हैं या इसके विपरीत अगर कोई एनआरआई भारत में शादी करना चाहता है तो ऑनलाइन देखना सबसे उपयुक्त तरीका है लेकिन कृपया सावधानी से आगे बढ़ें।

क्षेत्रीय अन्य जातियों के लिए वैवाहिक वेब साइटें विशेष मामले और अधिक वैवाहिक वेब साइटें

9. Chavara Matrimony
10. M4Marry
11. Kalyan Matrimony 12. Eenadupellipandiri
13. Kaakateeya.com 14. Sai Sankara Matrimonials
15. Kammavar Kalyanamalai
16. KM Matrimony 17. Mangalashtak
18. Pavitravivah 19. Muslim Matrimony (Affiliated to Bharat Matrimony)
20. Shaadi.com’s Muslim Matrimony site
21. Nikah.com 22. Christian Matrimony (Affiliated to Bharat Matrimony)
23. Jeevansathi’s Christian Matrimony
24. Shaadi.com’s Christian Matrimony
25. Holy Matrimony
26. Angel Matrimony 27. Medico Life Partner
28. Medical Matrimony 29. Love Vivaah
30. FreeSathi
31. Positive Saathi
32. Idontwantdowry
33. iBlueBottle
34. Life Partner
35. Matrimonials India
36. Bandhan
37. Vivaah
38. Betterhalf.ai

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अब मुख्य भाग आता है कि कैसे इस सभी वैवाहिक वेब साइटों का उपयोग किया जाए। in Shadi ke Liye Ladka Ladki Khoje Online. लड़के या लड़की की शादी के लिए ऑनलाइन खोज करें।

इसके लिए सबसे पहले इसके विभिन्न वेबसाइटों में से एक पर पंजीकरण करना आवश्यक है। प्रारंभिक पंजीकरण अधिकतम वेबसाइटों पर मुफ़्त है। पंजीकरण के बाद वर या वधू का प्रोफाइल बनाना होगा। इसमें सही विवरण और उचित तस्वीरें प्रदान करना सुनिश्चित करें क्योंकि बाद में इसे सत्यापित किया जाएगा।

उपरोक्त चरणों का पालन करने के बाद। एक वेबसाइट पर मौजूद विभिन्न प्रोफाइलों को ब्राउज़ कर सकता है लेकिन अब अगर आप किसी से संपर्क करना चाहते हैं या प्रीमियम प्रोफाइल देखना चाहते हैं तो आपको एक पेड प्लान लेना होगा। बुनियादी पंजीकरण विभिन्न वेब साइटों पर नि: शुल्क है लेकिन आवश्यक सेवाओं की संख्या बढ़ने पर विभिन्न कीमतें कार्रवाई में आ जाती हैं। यह संपर्क की जा रही प्रोफ़ाइल की संख्या पर निर्भर करता है। अन्य सदस्यों को भेजे जा रहे संदेशों की संख्या। और इसी तरह यह बदलता रहता है।

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Why Online Presence is Important for Your Business

So What that great about being online.

here are the 9 reasons for why having an online Presence is Important for Your Business.

In the Digital Age, it is Absolutely Essential for your Business to have an Online Presence. Whether it’s a Website, an E-Commerce Platform, an App, social media page or a Combination of All Four. Getting your Company online will reap major benefits. Even if your Company does not sell its products or services, or do business online. Customers and potential customers are expecting to see you online. If they don’t see you there, you could be losing out on the opportunity to increase your customer base and get the word out about your business.

there are a lot of advantages of having a digital presence, some major one of them we will cover here.

online links are always open

a website or app is open 24 hours without any human support so no need of manual labor to run the store front. orders form night or previous day can easily be catered next day itself. Your physical store may be open 8-12 hours per day. This leaves another 12-16 hours where you could be selling products or providing information to potential customers. A digital presence means that they see your business and your products 24 hours a day, 7 days a week, 365 days per year. This can double your profits and grow your business even while you are sleeping. This will also give a boost to your marketing efforts, which for many SME’s just starting out, are lackluster at best.

Accessibility, its easier to find through online presence

It is essential for both small and large businesses to maximize on the benefits of having a strong web presence. Aspects such as dynamic search algorithms and social networks are influential in the process of making it easier for customers to locate different businesses online. A business that does not have an online PRESENCE is regarded as non-existent in the modern and competitive business environment.

According to Google, 97% CONSUMERS use the web to search for local businesses 

Effective Marketing of products & services

Online presence makes it easier for you to market your business and sell your products. A properly designed and informative website with well written content enables customers to make informed purchasing choices. The web provides a marketing platform that gives you a cost effective way to reach a wider audience than conventional marketing techniques.

scope of reaching a large audience

if the product or service is delivarable, you can reach a huge amount of audiences or get leads and can get sucessful in converting any of them.

the mantra for success ” online presence “

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with all the online this that, a progress well made, results in a stronger brand ultimelty.

Friends in the mean while i would like to discuss something very important with you all then we will continue with the advantages of online presence.

About venture9.in

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But this all dosen’t mean that we are too busy at all, we are always open for quility projects and believe us we dont have any intentions to make a buck out of it rather we are here for the learning part of it.

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One of the funny truth of today’s online world, everybody is a part of it.

Well lets continue on the remaining part of discussing advantages of having a online presence.

why there is a need for a website

All businesses, no matter how small, should have a website. It can be extremely basic, but it should contain the fundamental information customers – both existing and potential – need.

importance of social media

Social media is an important part of your online presence that improves your chances of generating additional revenue and building customer loyalty. It allows customers, potential customers and other interested parties to engage easily via a channel that plays an important role in their everyday lives.

advantage of Review & Ratings in the online world

Offline its always not available but in the online world, people look for it. it’s a must & believe me how much or however you try to fake it. the truth will always come out there.

Having best-in-class consumer-generated ratings and reviews is more important than ever. It’s become an expected and influential part of the purchase journey. Ratings and reviews rank high among the top factors impacting purchasing decisions, coming in at second, just behind price. The reason: Consumers trust them.

Online Shopping is Here and it’s Going to Stay

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सख्त जनसंख्या नियंत्रण कानून है समय की मांग

आज जब मैं यह आर्टिकल लिख रहा हूँ तब तक हमारे देश की जनसंख्या लगभग 1,378,085,550 हो चुकी होगी, जो कि प्रति सेकंड तेजी से बढ़ रही है और अनुमान है कि इस वर्ष के मध्य तक यह 1,380,004,385 होगी।

पूरे विश्व की कुल जनसंख्या का 17.7% जनसंख्या हमारे देश की हो चुकी है जो कि एक गम्भीर चिंता का विषय है। यदि हमारे देश की जनसंख्या इसी तीव्र गति से बढ़ती रही तो एक दिन हमारा देश चीन को पीछे छोड़ते हुए विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश बन जायेगा। जिसके परिणामस्वरूप सिर्फ गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी ही हमारी पहचान होगी।

भयावह जनसंख्या विस्फोट को देखते हुए अब देश में एक कठोर जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग जोरों से उठने लगी है। सांसद सदस्य प्रो राकेश सिन्हा द्वारा 2019 में संसद के सत्र में भी इसी तरह की चिंताओं को उठाया गया था जब उन्होंने राज्य सभा में एक निजी सदस्य विधेयक, जनसंख्या नियमन विधेयक, 2019 पेश किया था। जिसके बाद देश के एक बड़े वर्ग द्वारा इस तरह के जनसंख्या नियंत्रण कानून को लागू करने की मांग जोर पकड़ने लगी।

जनसंख्या वृद्धि और संसाधनों की उपलब्धता पर जारी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत वर्ष 2027 तक दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में चीन से आगे निकलने की ओर अग्रसर है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि, “भारत में 2019 और 2050 के बीच लगभग 273 मिलियन लोगों के और जुड़ने की उम्मीद है और यह वर्तमान सदी के अंत तक दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश रहेगा, लगभग 1.5 बिलियन निवासियों के साथ चीन में 1.1 बिलियन लोग हैं।”

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि भारत की जनसंख्या वृद्धि दर के साथ आबादी का प्रक्षेपण दुनिया में आकार के अनुसार अपनी रैंकिंग को फिर से आदेश देगा जो कि खतरनाक है और सरकार और नागरिक समाज को शामिल करने वाले किसी भी विचार-विमर्श के केंद्र में होना चाहिए। भारत की जनसंख्या के आकार, संरचना और वितरण में इन महत्वपूर्ण परिवर्तनों का भारतीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण की स्थिरता पर गंभीर परिणाम होंगे।

जनसंख्या स्थायी विकास से संबंधित किसी भी कार्य के मूल में है, इस प्रकार जनसंख्या-विकास और शहरीकरण के जनसांख्यिकीय मेगाट्रेड्स स्थिरता के लिए गंभीर चुनौतियां हैं। इसलिए, अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि का परिणामी प्रभाव, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने के लिए नीचे की ओर गति करेगा, जो पर्यावरण की रक्षा करते हुए आर्थिक समृद्धि और सामाजिक कल्याण में सुधार के लिए सार्वभौमिक रूप से सहमत उद्देश्य हैं। इस प्रकार, भारत सरकार की ओर से समय पर हस्तक्षेप न केवल भविष्य की जरूरतों की आशा करने में बल्कि एक कुशल तरीके से जनता की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए नीतियों के विकास और योजना के लिए एक लंबा रास्ता तय करेगा।

जनसांख्यिकीय लाभांश के आख्यानों के आसपास के मिथक का पर्दाफाश किया गया है क्योंकि बेरोजगारी और असमानता के स्तर में वृद्धि हो रही है, जिसे ज्यादातर factors डिजिटल-व्यवधान ’और मशीनीकरण के साथ भूमंडलीकरण के कारकों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। यह आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय क्षेत्रों के लिए एक राष्ट्रीय कार्रवाई नीति ढांचे की आवश्यकता को जनता के जीवन और आजीविका की सुरक्षा के लिए आवश्यक करता है।

रहने योग्य स्थान के लिए लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा के साथ, महत्वपूर्ण संसाधन जैसे पानी, भूमि, आदि, और आर्थिक विकास और आजीविका की संभावनाएं 21 वीं सदी में सबसे बड़ी चुनौती बन गई हैं। इन परिणामी जनसांख्यिकीय परिवर्तनों ने आज भारत के लगभग सभी राज्यों में विभिन्न हितधारकों के संसाधनों और अवसरों के वितरण में असमानताओं को और बढ़ा दिया है।

तथ्य यह है कि अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि और संबद्ध खपत पैटर्न ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन से लड़ने के हमारे प्रयासों को गंभीर रूप से खतरे में डाल रहे हैं। जैसा कि भारत के कई क्षेत्रों में natures संसाधनों के ऐसे अनियंत्रित और निरंतर उपयोग के परिणामों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही के मामले में तमिलनाडु में चेन्नई के लोगों द्वारा पानी की गंभीर कमी का सामना किया जा रहा है।

भारत में दुनिया की आबादी का लगभग 18 प्रतिशत है और इसके निपटान में दुनिया के केवल 4 प्रतिशत जल संसाधन हैं, जो स्थिति को बहुत चिंताजनक बनाता है। सबसे बुरी बात यह है कि इस पानी का 70 फीसदी हिस्सा दूषित है और इसका इस्तेमाल अनियमित है।

NITI Aayog द्वारा प्रकाशित कम्पोजिट वाटर मैनेजमेंट इंडेक्स रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 खत्म होने तक, भारत के 21 प्रमुख शहरों का भूजल तालिका 100 मिलियन से अधिक प्रभावित होने जा रहा है, जो अपने आप में प्रकृति की वहन क्षमता को लेकर चिंता का विषय है। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि सीमित और दुर्लभ वातावरण में खिलाने के लिए बहुत सारे मुंह हैं तो सेवा वितरण कितना कम और कम हो जाएगा।

कृषि मंत्रालय द्वारा किए गए एक अध्ययन से प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है कि जनसंख्या वृद्धि की वर्तमान दरों के साथ, भारत में 2050 तक फ़ीड करने के लिए अतिरिक्त 430 मिलियन मुंह होंगे, और जनसंख्या के साथ तालमेल रखने के लिए, अनाज उत्पाद आयन को प्रति वर्ष कम से कम 4.2% की दर से बढ़ना चाहिए, वर्तमान दर से दोगुना से अधिक जो एक मानवीय कार्य होने जा रहा है, इस तथ्य को देखते हुए कि भारत में विश्व भूमि का केवल 2.4 प्रतिशत हिस्सा है। इसलिए, हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि भारत 2018 के वैश्विक भूख सूचकांक में 119 देशों के बीच 103 वें स्थान पर क्यों है।

अनियंत्रित होने पर जनसंख्या वृद्धि से गरीबी बढ़ती है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और ऑक्सफोर्ड गरीबी और मानव विकास पहल की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 2006-2016 की अवधि के दौरान भारत 271 मिलियन लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकालने में सक्षम रहा है। लेकिन गंभीर चिंता की बात यह है कि भारत में अभी भी 373 मिलियन लोग हैं जो तीव्र अभाव का अनुभव करते हैं।

भारत में वर्तमान में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की सबसे बड़ी संख्या है। अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य पर भारी प्रभाव पड़ता है। भारत की अर्थव्यवस्था वर्तमान में दुनिया में 6 वें स्थान पर है (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, 2017-18) और निकट भविष्य में $ 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था होने की ओर अग्रसर है। लेकिन इस वृद्धि ग्राफ से जो चिंता होती है वह है प्रति व्यक्ति आय का स्तर जो दुनिया में सबसे कम है। भारत सिर्फ 1,983 PCI (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, 2017-17) के साथ प्रति व्यक्ति आय (पीसीआई) जीडीपी में 187 देशों में 139 वें स्थान पर है।

इस प्रकार, ‘जनसंख्या नियमन विधेयक’ जैसे सक्रिय उपाय समय की आवश्यकता हैं। प्रस्तावित विधेयक दंड देने के बजाय प्रोत्साहन के सिद्धांत पर काम करता है। यह सुझाव देता है कि दो से अधिक संतानों वाले लोगों को सभी स्तरों पर चुनाव लड़ने से रोक दिया जाएगा। इसके अलावा, यह सभी सरकारी नौकरियों में एकल बच्चे को वरीयता के लिए प्रोत्साहन (वेतन, ऋण, मुफ्त स्वास्थ्य और शिक्षा) की एक सूची देता है) जिसे सरकार अपने कर्मचारियों को दो बाल नीति का पालन करने के लिए दे सकती है।

जैसा कि आप सब देख रहे हैं कि अनियंत्रित जनसंख्या के कारण ही आज कोरोना महामारी के इस दौर में हमारा देश अनगिनत समस्याओं से जूझ रहा है तथा सरकार द्वारा दी गयी सभी सुविधाएं अपर्याप्त साबित हो रही हैं। अतः एक कठोर जनसंख्या नियंत्रण कानून भारत देश में समय की मांग है।

जनसंख्या पर प्रस्तावित कानून निकट भविष्य में एक वास्तविकता हो सकता है, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने जनसंख्या विस्फोट को वास्तविक चुनौती और भारत की समृद्धि और विकास के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है।

-संजय राजपूत

जोड़ो के दर्द से छुटकारा पाने के लिए अपनाए इन घरेलु उपायो को

जैसे जैसे लोगो की जिंदगी आगे बढ़ती है वैसे-वैसे वह कई प्रकार समस्याओ का भी शिकार होता चला जाता है। लेकिन आज के दौर में लगभग हर दूसरा व्यक्ति किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है। दरअसल हम बात कर रहे हैं शरीर के विभिन्न अंगो में होने वाले दर्द के बारे में हालाकि आजकल जोड़ो में दर्द की समस्या एक आम समस्या हो गई है अब सिर्फ बूढ़े बुजुर्ग ही नहीं जवांन भी इसका शिकार हो रहे हैं। कंधे, घुटने, कोहन और उंगलियो के जोड़ो में होने वाले दर्द की वजह से ज्यादतर लोग परेशान रहते हैं। 

 इसके पीछे कहीं ना कहीं हमारा गलत खान-पान, अनियमित जीवनशैली आदि इसका कारण होता है कुछ लोग ऐसे हैं जो समय पर खाना ठीक से नहीं खाते छोटी छोटी चीजो पर ध्यान देते हैं और यह सब आगे चलकर बड़ा रूप ले लेता है। और यही कारण है कि आज के दौर में केवल बुजुर्ग ही नहीं बल्कि युवा पीढ़ी भी काफी संख्या में इस बीमारी से ग्रसित है।

वैसे तो लोग जोड़ो के दर्द से छुटकारा पाने के लिए कई तरह के दवाइयो का प्रयोग करते हैं लेकिन आज के इस पोस्ट में हम आपको इस दर्द से मुक्ति पाने के कुछ आसान और घरेलू उपाय बताने वाले हैं। लेकिन सबसे पहले ये जानना जरुर है कि इस प्रकार दर्द होने का कारण क्या हैं ?

जोड़ो में दर्द का कारण

जोड़ो में दर्द होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे कि तनाव या किसी प्रकार चोट जो जोड़ो के आसपास के लिगामेंट को प्रभावित करती है। यही नहीं ठंडा, गर्म वजन का ज्यादा या कम होना या फिर कमजोरी होना आदि जैसे कई कारण होते हैं जिस वजह से यह दर्द होते हैं। यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकते हैं लेकिन खासतौर से ये घुटने, कंधे और कूल्हो को ज्यादातर प्रभावित करते हैं।

जोड़ो में दर्द होने के लक्षण

जोड़ो के दर्द के लक्षणो में जोड़ो के आसपास लालिमा, पैरो में सूजन, जोड़ो में कोमलता, गर्मी का एहसास होना, लंगरा लंगरा कर चलना, जोड़ो में जकड़न महसूस होना, जोड़ो में कठोरता महसूस होना आदि शामिल है।

जोड़ो के दर्द को कैसे दूर करें

एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर डाइट लेने से आपको कई प्रकार के दर्द से आराम मिलता है। कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे है जिनका आप नियमित रूप से सेवन कर सकते हैं, और इस सब में मछली, जैतून का तेल, सब्जियां आदि शामिल है, इनमें वह सभी तत्व पाए जाते हैं जो शरीर में सूजन से लड़ सकते हैं।

घुटनो में होने वाले दर्द के घरेलू इलाज

जोड़ो के दर्द से छुटकारा पाने के लिए अपनाए इन घरेलु उपायो को

अदरक

जोड़ो के दर्द से आराम पाने के लिए अदरक कमाल का मसाला होता है। इसके लिए सूखे अदरक को पीसकर पाउडर बना लें, अदरक पाउडर में 6 चम्मच जीरा पाउडर, 3 चम्मच काली मिर्च का पाउडर मिक्स करें और रोजाना आधा चम्मच पाउडर को पानी के साथ सेवन करें। रोजाना इस प्रकार तीन बार सेवन करने से आपको घुटनो में होने वाले दर्द से आराम मिल सकता है।

सेब के सिरके का सेवन करें

कहा जाता है कि सेब के सिरके में मैग्नीशियम, पोटेशियम, कैल्शियम और फास्फोरस पाया जाता है इसके उपयोग से जोड़ो के दर्द से राहत मिलती है। ये जोड़ो से यूरिक एसिड की अधिकता को कम करने में मदद करती है इसके लिए आप एक कप गुनगुना पानी लें और उसमे एक चम्मच विनेगर और एक चम्मच शहद मिलाकर रोजाना सुबह खाली पर प्रतिदिन पिए ऐसा करने से आपको जल्द ही राहत मिलेगी।

फिश ऑयल का प्रयोग करें 

कहा जाता है कि ओमेगा 3, फैटी एसिड से हमें जोड़ो के दर्द से राहत मिलती है क्योंकि इससे सूजन की समस्या कम होती है। इसके लिए आप मछली, बदाम और अन्य ड्राई फ्रूट्स को अपने डाइट में शामिल कर सकते हैं। आप चाहे तो फैटी एसिड कैप्सूल भी ले सकते हैं, लेकिन ऐसा करने से पहले आप डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

हल्दी का प्रयोग करें

प्रतिदिन हल्दी के सेवन करने से सूजन कम होती है गठिया से होने वाले सूजन पर भी काफी ज्यादा असरदार होता है। हल्दी की जो कैप्सूल होती है वह 500 या 1000MG कि ले सकते हैं, आप हल्दी का दूध भी पी सकते हैं। इसके अलावा गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी पाउडर डालकर रोजाना पिए इससे आपको गठिया के रोग से राहत मिलेगी।

गर्म और ठंडी सिकाई

किसी भी प्रकार की सिकाई करने से पहले सावधानी जरूरी होती है कुछ परिस्थितियो में आपके शरीर को गर्म करने के लिए मना किया जाता है जिसमें गर्म पानी से नहाना और मालिश करना भी शामिल होता है। यही बात ठंडी सिकाई के लिए भी लागू होती है इसके अलावा अगर ठंड का मौसम है या हवा चल रही हो तो गर्म कपड़े पहनना ना भूले।

सरसो का तेल

गठिया के रोग में सरसो तेल की मालिश अच्छी मानी जाती है इससे जकड़न और दर्द दोनो से राहत मिलता है। सरसो तेल एक प्राकृतिक उपचार है जिससे शरीर पर मालिश करने से खून का संचार अधिक होता है। इसके लिए सरसो तेल को हल्का गुनगुना करें और इस तेल से अपने दर्द वाले हिस्से पर मसाज करें आप चाहे तो उस तेल में प्याज का रस भी मिला सकते हैं।

जोड़ो के दर्द से छुटकारा पाने के लिए अपनाए इन घरेलु उपायो को

सेंधा नमक

शरीर में किसी भी प्रकार दर्द न हो इसके लिए शरीर के पीएच लेवल का संतुलित होना जरूरी होता है। क्योंकि हाई एसिडिटी से गठिया जैसे रोग को बढ़ावा मिलता है सेंधा नमक में प्रचुर मात्रा में मैग्नीशियम पाई जाती है इसीलिए आधा कप गुनगुने पानी में एक छोटी चम्मच सेंधा नमक और उतनी ही मात्रा में नींबू के रस को अच्छी तरह मिलाकर रात को सोने से पहले पी लें, इससे आपको बहुत आराम मिलेगा।

दालचीनी का सेवन

दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट के गुण मौजूद होते हैं जिससे गठिया के दर्द को दूर करने में मदद मिलती है। इसके लिए आप एक कप गुनगुने पानी में आधा चम्मच दालचीनी पाउडर, एक चम्मच शहद मिलाकर रोजाना सुबह खाली पेट सेवन करें। रोजाना ऐसा करने से आपको गठिया के दर्द से राहत मिलेगा।

अदरक के तेल का प्रयोग 

जोड़ो के दर्द से राहत पाने के लिए आप अदरक के तेल का उपयोग कर सकते हैं अदरक वाली चाय पीने से आपको लाभ मिल सकता है। इसके अलावा आप गर्म पानी में शहद और नींबू के साथ भी अदरक का रस मिलाकर पी सकते हैं अदरक में मोजूद एंटी इन्फ्लेमेटरी कंपाउंड सूजन को कम करने में मदद करती हैं।

तुलसी का प्रयोग 

तुलसी में पाए जाने वाले एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटी स्पष्टमोडिक के गुण जोड़ो के दर्द से राहत दिलाने का काम करते हैं। इसके लिए आप रोजाना तीन से चार तुलसी से बनी चाय का सेवन करें ऐसा करने से आपको लाभ मिलेगा।

विटामिन D 

दरअसल जोड़ो का दर्द मांसपेशियो और हड्डियो के कमजोर होने से होता है। ऐसे में इससे बचने के लिए आप धूप जरूर लें, धूप विटामिन D का सबसे अच्छा स्रोत होता है और इससे हमारी हड्डिया मजबूत होने में मदद मदत मिलती है।

एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर चीजो का सेवन 

आपकी डाइट एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होनी चाहिए जिसके लिए आपको मछली, जैतून का तेल आदि का सेवन करना चाहिए इसके अलावा आप मेथी के दानो को भी पानी में भिगोकर खा सकते हैं इस प्रकार अच्छी डाइट लेने से जोड़ो के दर्द से काफी आराम मिलता है।हरी सब्जियां

जोड़ो के दर्द से छुटकारा पाने के लिए अपनाए इन घरेलु उपायो को

हरी सब्जियां हमारे सेहत के लिए बहुत लाभकारी होता है। हरी सब्जियों के सेवन से हमारे शरीर को कई तरह के विटामिन और खनिज तत्व प्राप्त होते हैं। हरी सब्जियों में कुछ ऐसी सब्जिया भी है जो गठिया के दर्द से राहत दिलाने में भी मदद करती है जैसे कि ब्रोकली।

ब्रोकली

 खाने से भी गठिया में आराम मिलता है, ब्रोकली में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो लंबे समय तक बने रहते हैं। 

ओमेगा-3 और विटामिन E 

विटामिन E जोड़ो के दर्द के लिए फायदेमंद होता है एक गिलास दूध में लहसुन की 10 कलिया मिलाकर पीने से गठिया के दर्द से आराम मिलता है। खासतौर पर बादाम में पाया जाने वाला मेगा 3, फैटी एसिड् गठिया के लक्षणो को कम करने में मदद करता है। इसके लिए आप बदाम, मछली और मूंगफली का सेवन करें इससे आपको पर्याप्त मात्रा में ओमेगा-3 प्राप्त होता है।

पपीता खाएं

पपीते में बड़ी मात्रा में विटामिन C पाया जाता है विटामिन C ना केवल इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाता है बल्कि यह जोड़ो की सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। एक गिलास पानी में एप्पल साइडर विनेगर मिलाकर पीने से जोड़ो के दर्द से राहत मिलती है। 

अखरोट खाएं

एक महीने तक रोजाना 15 से 20 गिरी अखरोट को भिगोकर सुबह खाली पेट खाने से घुटनो के दर्द से आराम मिलता है। दो महीने तक लगातार इस उपाय को करने से गठिया के रोग को जड़ से ठीक किया जा सकता है।

फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के शादी से पहले थे इनके साथ अफेयर

फिल्म इंडस्ट्री में अनुष्का शर्मा अपने शांत स्वभाव खूबसूरती और एक्टिंग कौशल के लिए बहुत प्रसिद्ध है। उनके फैंस हमेशा उनके मुस्कुराते चेहरे और चुलबुले अंदाज को पसंद करते हैं। अनुष्का शर्मा तब से लोगो की और ज्यादा पसंद बन गई जब अनुष्का शर्मा ने भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली से शादी कर ली। पहले से ही अनुष्का के बहुत सारे फैंस तो थे ही लेकिन शादी के बाद उनके फैंस की लिस्ट और लम्बी हो गई।

आज के इस पोस्ट में हम आपको पांच ऐसे लोगो के बारे में बताएंगे जिन्हें अनुष्का शर्मा अपनी शादी से पहले डेट कर चुकी है। हालांकि क्रिकेटर विराट कोहली से शादी करने के बाद दोनो बहुत खुश हैं और इन दोनो के एक बच्चे भी हो चुके हैं। लेकिन उनके ज्यादातर फैंस ये तो जरूर जानना चाहते होंगे कि अनुष्का शर्मा ने पहले किन पांच लोगो को डेट किया था तो चलिए जानते हैं ?

सुरेश रैना

फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के शादी से पहले थे इनके साथ अफेयर

अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के भाई स्टेट लेवल के खिलाड़ी रह चुके हैं। इसीलिए अनुष्का क्रिकेट की दुनिया से पहले से ही जुड़ी हुई थी और क्रिकेटर सुरेश रैना के साथ उनकी दोस्ती भी थी। उस समय अनुष्का और सुरेश दोनो कि दोस्ती का विषय काफी ज्यादा चर्चे में था। यही नहीं उस समय सुरेश रैना ने यह स्वीकार भी किया था कि वह अनुष्का शर्मा से प्यार करते हैं।

रणबीर कपूर

फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के शादी से पहले थे इनके साथ अफेयर

अनुष्का शर्मा और रणवीर कपूर के अफेयर की खबर तब हुई थी जब रणवीर और अनुष्का को एक साथ घूमते देखा गया था। दरअसल वे करण जौहर की पार्टी में मिले थे वहां इन दोनो की दोस्ती शुरू हुई और कुछ दिनो बाद ही अनुष्का और रणबीर को एक साथ अकेले में डिनर करते देखा गया।

रणबीर सिंह

फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के शादी से पहले थे इनके साथ अफेयर

एक समय अनुष्का शर्मा के को एक्टर रणवीर सिंह के साथ रिलेशनशिप के खूब चर्चे थे। इन दोनो ने एक साथ इंडस्ट्री में बहुत दिनो तक काम किया था और इन दोनो ने एक साथ 3 हिट फिल्में भी किए। एक साथ काम करते हुए इन दोनो में फिर शुरू हो गया लेकिन कुछ दिनो बाद ही इन दोनो में ब्रेकअप हो गया। लेकिन ब्रेकअप के बाद भी इन दोनो ने साथ काम करना नहीं छोड़ा और उनकी ऑन स्क्रीन केमिस्ट्री काफ़ी हिट रही।

अर्जुन कपूर

एक्टर अर्जुन कपूर और अनुष्का शर्मा को एक साथ घूमते हुए देखे जाने के बाद उनके डेटिंग की अफवाहे उड़नी शुरू हो गई थी। जिसके बाद इन दोनो को एक बार एक साथ कॉफी शॉप में भी देखा गया था और इन दोनो के अफेयर को लेकर लोगो में काफी ज्यादा बाते होने लगी लेकिन धीरे-धीरे यह मामला दब गया।

जोहेब युसूफ

जोहेब युसूफ एक रैंप मॉडल हैं रिपोर्टर्स के अनुसार अनुष्का शर्मा अपने मॉडलिंग के दिनो में जोहेब युसूफ से बेंगलुरु में मिली थी। इसके बाद दोनो 2 साल से भी ज्यादा समय तक एक सीरियल रिलेशनशिप में थे लेकिन लोंग डिस्टेंस रिलेशनशिप और अनुष्का के स्टार स्टेटस रहने के बाद यह रिश्ता धीरे-धीरे फीका पड़ गया।

कहां और किस तरह से कनखजुरे को देखने का क्या मतलब होता है और इसे भगाने के उपाए 

बारिश के दिनो में बहुत सारे कीट पतंगो की पैदावार बढ़ने लगती है, घर में भी तरह-तरह के कीट पतंग नजर आने लगते हैं। जिनमें से कनखजूरा तो आप लोग जानते ही होंगे कनखजूरा एक प्रकार का कीट है जो सीलन वाली जगह पर पाई जाती हैै और बारिश के मौसम में भी नजर आता है। हालांकि इसे देखकर कुछ लोग डर जाते हैं तो कुछ लोगो को अच्छा महसूस नहीं होता, क्योंकि इसे देखते ही मन में मिचमिची वाली की फीलिंग आती है।

कनखजूरा एक कणकीट है जिसे ठंडक की जरूरत होती है जिस स्थान पर नमी होती है या पानी भरा होता है ऐसे जगहो पर कनखजूरा पनपने लगता है कनखजूरा एक जहरीला जीव है जिसके काटने पर गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।

लेकिन इस कनखजूरे को देखने के कुछ शुभ और अशुभ संकेत भी होते हैं, दरअसल कनखजूरा के बारे में बताया जाता है कि इस कनखजूरे कोवास्तु से जोड़कर देखा जाता है। कनखजुरे को ज्योतिषशास्त्र की दृष्टि से भी से जोड़ा जाता है क्योंकि कनखजूरे को राहु का प्रतीक माना जाता है जिसके अच्छे और बुरे दोनो फल होते हैं।

फर्श पर जिंदा कनखजूरा देखना

अगर आप घर के फर्श पर जिंदा कनखजूरा देखते हैं तो यह इस बात का संकेत है कि आपके घर का वास्तु सही नहीं है ऐसे में कनखजुरे को मारने की जगह उसे घर के बाहर भगा देना चाहिए। अगर आपका राहु कमजोर होगा तो वह आपको घर के शौचालय मुख्य द्वार और दहलीज के साथ सीढ़ियो पर भी रेंगता हुआ नजर आता है। इसके अलावा अगर आप पूजा के घर में कनखजूरा रेंगते हुए देखते हैं तो यह सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है ये इस बात का संकेत है कि आपको अब कोई शुभ समाचार मिलने वाला है।

घर में मरा हुआ कनखजूरा देखना

अगर आप मरा हुआ कनखजूरा देखते हैं तो यह भी एक संकेत देता है। अगर आप घर के फर्श में मरा हुआ कनखजूरा देखते हैं तो यह इस बात का संकेत होता है कि आपके घर पर कोई बड़ी विपदा आने वाली थी जो कि अब टल चुकी है इक प्रकार से आप इसे शुभ संकेत मान सकते हैं। वहीं अगर आपसे भूलवश या अनजाने में कनखजूरा मर जाता है तो इसका सीधा प्रभाव आपके राहु ग्रह पर पड़ता है और आपके जीवन में कोई बड़ी परेशानी आने का संकेत होता है।

भारी बीमारी का संकेत है कनखजूरा सर पर देखना

कहां और किस तरह से कनखजुरे को देखने का क्या मतलब होता है और इसे भगाने के उपाए 

वास्तु शास्त्र के अनुसार कहा जाता है कि कनखजूरे को सेहत के खराब होने का प्रतीक भी माना जाता है। अगर कनखजूरा किसी जातक के सिर पर चढ़ जाए तो इसका यह मतलब होता है कि उसे कोई गंभीर बीमारी होने वाली है या फिर उसे पहले से कोई गंभीर बीमारी है। ऐसे में आपको पूजा-पाठ और अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

किचन में कनखजूरा देखने का मतलब

अगर आप घर के किचन में कनखजूरा देखते हैं तो यह इस बात का संकेत देता है कि किचन का वास्तु ठीक नहीं है ऐसे में उस घर के सदस्यो की सेहत भला कैसे ठीक रह सकती है। इसीलिए आपको कुछ बात पर ध्यान देना चाहिए जैसे कि घर को साफ सफाई रखनी चाहिए, किचन को साफ करना चाहिए। खानपन के बर्तन आदि को भी साफ करके रखना चाहिए, साथ ही अपने राहु दोष को ठीक करने के लिए भी पूजा पाठ करवानी चाहीए।

हाथ या पैर पर कनखजूरा दिखने का मतलब

यदि कनखजूरा आपके हाथ या पैर पर दिख जाए तो यह भी एक अशुभ संकेत होता है। यह इस बात का संकेत है कि आपका कोई बनता हुआ काम बिगड़ने वाला है। लेकिन अगर आपको घर में जिंदा कनखजूरा नजर आ जाए और फिर गायब भी हो जाए तो यह इस बात का संकेत देता है कि आपका कोई बहुत ही महत्वपूर्ण काम बनने वाला है।

कनखजूरे को घर से बाहर जाते हुए देखना

अगर घर के मुख्य द्वार पर कनखजूरा दिख जाए और वह बाहर की ओर जाते हुए दिख जाए तो यह इस बात का संकेत होता है कि वह अपने साथ घर की सारी परेशानिया लेकर जा रहा है और आपकी कुंडली में आपका राहु बहुत मजबूत है। वहीं अगर कनखजूरा मुख्य द्वार से घर के अंदर प्रवेश करता हुआ दिखे तो इसका मतलब यह होता है कि वह अपने साथ परेशानिया लेकर आ रहा है।

लेकिन यह सब वास्तुशास्त्र की बाते हैं जिसे कुछ लोग नहीं मानते और वह चाहते हैं कि उनके घर में कभी भी कनखजूरा देखने को ना मिले। लेकिन ऐसा होता नहीं है बारिश के मौसम में कनखजूरा अक्सर देखने को मिलता है। ऐसे में कुछ घरेलू उपायो से कनखजूरे को घर में आने से रोका जा सकता है तो चलिए जानते हैं।

कनखजूरे को अक्सर गार्डन की मिट्टी और सड़ी हुई पत्तो पर पाया जाता है। घर का कोई ऐसा जगह जहां अंधेरा हो और नमी भी हो वहां कनखजूरा पाया जाता है। जैसे किचन का सिंक, बाथरूम के बेसिन और कमोड के अंदर के पाइप द्वारा कनखजूरा घर में प्रवेश कर सकता है। कणखजूरे से छुटकारा पाने के उपायो के बारे में जाने तो कनखजूरे को घर में आने से रोकने के लिए सबसे बेस्ट तरीका होता है घर के फर्श को गीला न करना और उसे साफ करके सुखाकर रखना। 

लेकिन ऐसा हर बार संभव नहीं होता इसीलिए अगर आपके घर में बार-बार कनखजूरा घुस आए आप कुछ तो आसान उपायो को करके आप इस कार्य को कर सकते हैं।

नमक और सिरके का पानी

दरअसल कनखजूरे को सबसे ज्यादा परेशानी नमक से होती है, जब कनखजूरा काट लेता है या फिर ये हमसे चिपक जाता है तो नमक का उपयोग भी किया जाता है। बेस्ट रिजल्ट के लिए आप नमक के साथ सिरके का प्रयोग भी कर सकते हैं। आप नमक को मिलाकर एक स्प्रे तैयार करें और इसे बनाने के लिए आपको एक लीटर पानी, एक कटोरी सफेद सिरका और तीन बड़ी चम्मच डिटॉल कि जरूरत होगी।

कहां और किस तरह से कनखजुरे को देखने का क्या मतलब होता है और इसे भगाने के उपाए 

सबसे पहले पानी में नमक को अच्छी तरह मिला लें उसके बाद उस मिश्रण में सिरका डिटॉल मिलाएं, अब उस पानी को आप स्प्रे की बोतल में भरकर रख दें। इस स्प्रे की मदद से आप कनखजूरे को घर में आने से रोक सकते हैं। साथ ही इस स्प्रे में भरे जाने वाले मिश्रण से आप नियमित रूप से घर के फर्श पर पोछा लगाएं। इन दोनो ही विधि से आप कान खजूरे से छुटकारा पा सकते हैं।

रिफाइंड ऑयल

अगर आपके घर के गार्डन में ज्यादा कनखजूरा है तो आप इसके लिए एक कटोरी में रिफाइंड ऑयल भरकर रखें। इस काम को आप नालियो के पास भी कर सकते हैं दरअसल कनखजूरे को रिफाइंड ऑयल की महक आकर्षित करती है। अगर घर में कनखजूरा कभी भी छुप कर बैठा हो लेकिन रिफाइंड ऑयल की मदद से आकर्षित होकर उस बर्तन के पास आता है और उसी में डूब जाता है।

पायसीकरण या कीटनाशक 

पायसीकरण या कीटनाशक आसानी से मिल जाता है कनखजूरा को घर से भगाने के लिए पायसीकरण या कीटनाशक का प्रयोग किया जा सकता है। इसके उपयोग से हर तरह के कीड़े मकोड़े मर जाते हैं महीने में एक बार आपको इस कीटनाशक का छिड़काव करना ही चाहिए। अपने घर के अलग-अलग एरिया जैसे गार्डन आदि में तो इसका प्रयोग अवश्य होना चाहिए। इस कीटनाशक दवाई को आप पानी में मिलाकर भी घर के फर्श पर अच्छे से पोछा लगाए, इससे घर में कनखजूरे के साथ और कोई भी कीड़ा प्रवेश नहीं होगा।

नमक का प्रयोग 

आप अपने घर के नालिया, बेसिन के छेद के किनारे रात में नमक का छिड़काव करके रख दें। ज्यादातर कनखजूरा रात के समय अंधेरे का इंतजार करते हैं और शाम होते ही नमी वाले जगह पर जाने की कोशिश करते हैं, इसीलिए नमक का प्रयोग करके इसे रोका जा सकता है।

सुंदरता और अच्छे स्वास्थ के आलावा भी कई बड़े फायदे हैं सरसो तेल के जानिए इन फायदो के बारे में 

सरसो का तेल सिर्फ खाना पकाने के लिए ही नहीं बल्कि कई सारे कमो के लिए प्रयोग होता है। क्योंकि सरसो का तेल सेहत के लिए कई प्रकार से फायदेमंद होता है। अच्छी सुंदरता और अच्छे स्वास्थ्य के लिए सरसों के तेल का उपयोग किसी औषधि से कम नहीं होता सरसो के तेल में ओलिक एसिड और लीनोलिक एसिड पाया जाता है। सरसो का तेल हेल्दी फैट्स का बेहतरीन स्रोत माना जाता है जो कई प्रकार पोषक तत्वो से भरपूर होता है। 

सरसो के तेल में मोनो अनसैचुरेटेड फैटी एसिड, पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड मौजूद होते हैं। साथ ही सरसो के तेल में ओमेगा-3 और 6 जैसे सैचुरेटेड फैट भी मौजूद होते हैं जो हमारे शरीर के लिए बहुत लाभकारी होता है। लेकिन केवल सरसो के तेल का सेवन ही नहीं बल्कि इसे शरीर पर लगाना और भी ज्यादा फायदेमंद होता है। पौराणिक समय से ही सरसो तेल से मालिश करने के फायदे बताए जाते हैं। 

अगर आप सरसो के तेल से अपने शरीर की मालिश करते हैं तो इससे आपके शरीर को बहुत प्रकार के लाभ मिलते हैं। यह हमारे त्वचा के लिए प्राकृतिक मॉइश्चराइजर और स्किन क्रीम के रूप में भी काम करता है। केवल शरीर ही नहीं अगर पैर के तलवो में भी सरसो तेल लगाकर अच्छे से मालिश कि जाए, तो ऐसा करने से हमको स्वास्थ संबंधी अनेक लाभ मिलते हैं। तो चलिए जानते है सरसो के तेल लगाने के फायदे के बारे में साथ ही इस पोस्ट में हम सरसो तेल लगाने के सही तरीके और सही समय के बारे में भी जानेंगे।

अनिद्रा की समस्या से छुटकारा पाने के लिए पैर के तलवो में सरसो के तेल से मालिश करना एक बेहद प्रभावी उपचार होता है। अगर आप रात को सोने से पहले पैर के तलवो में सरसो के तेल से मालिश करते हैं तो इससे थकान दूर होती है, तनाव कम होता है और दिमाग भी शांत रहता है।

सरसो के तेल से पैरो की मालिश करने से महिलाओ में पीरियड के दौरान होने वाले पेट दर्द, आदि से छुटकारा मिलता है और पीरियड केे दिनो मेंं होने वाले ब्लड फ्लो भी बेहतर होता है। 

पैरो में सरसो तेल लगाकर मालिश करने से तनाव, चिंता, अनिद्र जैसी कई समस्याओ से राहत मिलती है। सरसो तेल से पैर के तलवो की मालिश करने से आपको शांति मिलती है और आपका तनाव दूर करके आपको खुश रहने में मदद करती है।

हाथ पैर सुन्न होना और उनमें सनसनी होने की समस्या को दूर करने में सरसो तेल की मालिश बहुत फायदेमंद होती है। यह पूरे शरीर के ब्लड सरकुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है, इसके लिए हाथ और पैर में साथ ही पैर के तलवे में अच्छे से तेल से मालिश करें और नियमित तौर पर अगर आप ऐसा करते हैं तो धीरे-धीरे आपकी समस्या कम हो जाएगी।

सुंदरता और अच्छे स्वास्थ के आलावा भी कई बड़े फायदे हैं सरसो तेल के जानिए इन फायदो के बारे में 

शूद्ध सरसो तेल से पैर के तलवो की मालिश करने से बात दोस को संतुलित करने में मदद मिलती है। साथ ही पेट संबंधी समस्याए भी दूर होती है जैसे कि कब्ज, पेट में सूजन, गैस, आदि जैसे पेट संबंधी समस्याओ को दूर करने में भी मदद करती है।

आयुर्वेद के अनुसार रात को सोने से पहले पैर के तलवो में सरसो तेल से मालिश करना बहुत फायदेमंद होता है। आप रात को सोने से पहले अपने पैर के तलवो में सरसो तेल गर्म करके अच्छे से मालिश करें। आप अपने पैरो के गर्म होने तक अच्छी तरह से मालिश करते रहें।

सरसो के तेल में पर्याप्त मात्रा में विटामिन E पाया जाता है इसीलिए सरसों तेल त्वचा केे लिए बेहद फायदेमंद है। सरसों तेल के सेवन से त्वचा को अंदरूनी पोषण तो मिलता ही है साथ ही इसे चेहरे पर लगाने से त्वचा की नमी बनी रहती हैै। शुद्ध सरसों के तेल से रात को सोने से पहले अपने चेहरे को मसाज करने से कई चेहरे को कई प्रकार अनगिनत फायदे मिलते हैं।

जो लोग अस्थमा से पीड़ित हैं उन लोगो के लिए सरसो का तेल खासतौर पर फायदेमंद होता है। सरसो के तेल में पर्याप्त मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है जो अस्थमा के मरीजो के लिए खास तौर से फायदेमंद होता है।

अगर आपके दांत और मसूड़ो में किसी प्रकार दर्द है या कोई समस्या है तो सरसों के तेल में थोड़ा सा नमक मिलाकर दांत और मसूड़ो में हल्के से मालिश करें। ऐसा करने से दांतो का दर्द और

मसूड़ो में होने वाली कई समस्याएं दूर हो जाती है और दांत भी मजबूत होते हैं। 

सर्दी जुखाम होने पर हमारे सर में असहनीय दर्द होता है और पूरा शरीर तप जाता है बुखार भी हो जाता है।ऐसे में सरसों तेल की मालिश बेहद फायदेमंद होती है सर्दी जुखाम होने पर सरसों तेल से अपने सर की अच्छे से मालिश करने से बेहद आराम मिलता है और सर्दी भी जल्दी ही ठीक हो जाती है।

सरसो का तेल शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफी असरदार होता है। शरीर के अंदरूनी कमजोरी को दूर करने के लिए नियमित रूप से सरसो के तेल का सेवन करें और अपने शरीर पर मालिश भी करें।

हफ्ते में एक या दो बार शुद्ध सरसों तेल से अपने बालों की मालिश करने से बाल रेशमी, घने और मजबूत होते हैं। नियमित रूप से सरसों के तेल से बालो की मालिश करने से बाल बहुत जल्दी लंबे भी होने लगते हैं।

नवजात शिशु के जन्म होने पर शुद्ध सरसो तेल की मसाज बेहद कारगर होती है या शिशु के विकास के लिए अच्छा होता है नवजात शिशु के मांसपेशियों की मजबूती और उनके शरीर के विकास में के लिए सरसों तेल से अच्छी तरह बच्चे की मालिश करनी चाहिए।

सुंदरता और अच्छे स्वास्थ के आलावा भी कई बड़े फायदे हैं सरसो तेल के जानिए इन फायदो के बारे में 

सर्दी के मौसम में शरीर में गर्माहट के लिए सरसों के तेल से मसाज एक रामबाण इलाज होता है। सर्दी के मौसम में त्वचा जिस प्रकार रूखी सूखी हो जाती है उनमें नमी बनाने के लिए सरसो तेल की मालिश बहुत अच्छी होती है, सरसो तेल से मालिश करने से त्वचा मुलायम हो जाती है।

सरसो का तेल विटामिन C का सबसे अच्छा स्रोत होता है जो त्वचा को अल्ट्रावायलेट किरणो और पॉल्यूशन से बचाता है। साथ ही नियमित तौर पर लंबे समय से की गई सरसो तेल की मसाज से उम्र ढलने के साथ चेहरे पर पड़ने वाले झुर्रियो की समस्या भी कम होती है।

भूख ना लगने की समस्या होने पर भी सरसो का तेल फायदेमंद होता है। अगर भूख ना लगे तो ऐसे में खाना बनाते समय सरसों तेल का उपयोग करना लाभकारी होता है, क्योंकि यह शरीर के पाचन तंत्र को दुरुस्त करने में लाभकारी है।

अपने खाने में सरसो तेल का प्रयोग करने से कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा भी कम होता है इसीलिए सरसो के तेल को अपने खाने में शामिल जरूर करें।सरसो के तेल को कई लोग एक टॉनिक के रूप में भी प्रयोग करते हैं यह शरीर की कार्य क्षमता बनाकर शरीर की कमजोरी दूर करता है।

अगर किसी को त्वचा संबंधी किसी भी प्रकार समस्या जैसे कि फंगस आदि हो तो ऐसे में सरसो तेल से की गई मसाज गुणकारी होता है। इसके लिए सरसो तेल से मसाज करने के बाद नहाना और भी अच्छा होता है इससे त्वचा स्वस्थ रहती हैं।

जब हमारे कान में खुजली होती हैं या हमारे कान मैले हो जाते हैं तो ऐसे में सरसो तेल का प्रयोग लाभकारी है। कान में तीन चार बूंद सरसो का तेल डाल लेने के 1 दिन बाद हम अपने आप ही कान को अच्छे से साफ कर सकते हैं और कान की खुजली भी बंद हो जाती है।

पेट में गैस बनता है तो जरूर जान लें इन बातो को नहीं तो पर सकता है आपको पछताना

अपच गैस और कब्ज की समस्या आजकल एक आम समस्या बन गई हैं आजकल ज्यादा से ज्यादा लोगो को गैस की समस्या तो होती ही है और इस समस्या से लोग काफी ज्यादा परेशान रहते हैं। एक तरफ से देखा जाए तो यह एक आम और छोटी सी समस्या लगती है लेकिन अगर दूसरे नजरिए से देखा जाए तो यह समस्या आम नहीं है। बल्कि इस समस्या के कारण हमारे शरीर में कई और खतरनाक बीमारिया जन्म ले लेती है। 

उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति के पाचन शक्ति कमजोर होना आम बात है। लेकिन आजकल तो युवा पीढ़ी में भी यह समस्या काफी बढ़ गई है क्योंकि आजकल के लोगो की जीवनशैली अच्छी नहीं है। कामकाज और भागदौड़ के चक्कर में लोग बाहर का कुछ भी खा लेते हैं साथ ही खाने के टाइम पर फास्ट फूड भी खाते हैं। ऐसे में उनकी स्थिति और भी खराब होती चली जा रही है। पाचन शक्ति कमजोर होना एक बात है लेकिन कम उम्र में ऐसा होने के कारण यह समस्या काफी ज्यादा हानिकारक हो सकती है। 

बच्चो को भी होती है गैस की समस्या

वहीं फास्ट फूड की बात करें तो आजकल ज्यादातर बच्चे घर का खाना छोड़ कर बर्गर, पिज़्ज़ा, सेंडविच, फास्ट फूड का सेवन करते हैं। इन चीजो का ज्यादा सेवन करने से बच्चो के पाचन क्रिया पर काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ता है जो बाद में गैस की समस्या के रूप में उभरने लगती है। ऐसे में बच्चो का खास ध्यान रखना चाहिए फास्ट फूड और बाहर के खाने से बिल्कुल ही दूर रखना चाहिए।

पेट में गैस बनने के लक्षन 

हालांकि अगर किसी को गैस होता है तो हमें काफी आसानी से पता चल जाता है क्योंकि इसके लक्षण सभी को पता होते हैं। जिनमें भूख ना लगना, सांसो को बदबूदार होना, पेट में सूजन होना, उल्टी और बदहजमी होना साथ ही दस्त की समस्या होना, पेट फूलना, छाती या शरीर के किसी अंग जैसे पेट, पीठ,कमर आदि जैसे अंगो में जलन या दर्द महसूस होना आदि शमिल होता है।

गैस बनने से पेट में जलन और दर्द तो आम बात होती है लेकिन कई बार गैस जब हमारे पीठ, छाती या कमर में फंस जाती है तो ऐसे में व्यक्ति की जान निकल जाती है। ऐसा होने पर असहनीय दर्द महसूस होने लगता है यही नहीं ऐसा दर्द लंबे समय तक होने के कारण व्यक्ति को कई प्रकार की समस्याए होने लगती है।

गैस बनने के कुछ सामान्य कारण

गैस बनने के सामान्य कारणो में अत्याधिक भोजन करना, कुछ चटपटा खा लेना, लंबे समय तक भूखे रहना, ऐसे भोजन करना जिसे पचने में कठिनाई हो। भोजन को अच्छी तरह से चबाकर न खाना, ज्यादा सोचना, शराब पीना, कुछ दवाओ का सेवन करना आदि गैस बनने के कारण होते हैं। ज्यादा मात्रा में खट्टा, तीखा और मसाले वाला खाना खाने से रात को देर तक जगे रहने या नींद पूरा ना करने से पेट में गैस बनती है। 

पेट में गैस बनता है तो जरूर जान लें इन बातो को नहीं तो पर सकता है आपको पछताना

वहीं आजकल की पीढ़ी की बात करें तो इनका जीवन पूरी तरह से खराब ही नजर आती है। सुबह देर से उठने से लेकर खराब खानपान और ऐसे कई लापरवाही होती है जो यह लोग खुश होकर करते हैं। लेकिन शायद वह नहीं समझ पाते कि इस कारण वह अपने शरीर को धीरे-धीरे खो रहे हैं। ऐसे में आजकल के नए युवा पीढ़ी को अपने खान-पान और जीवनशैली में खास ध्यान देकर चलना चाहिए। 

इसके अलावा सबसे बड़ा कारण होता है पानी कम पीना जब हम शरीर में आवश्यक अनुसार पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते तो ये सबसे बड़ा कारण बन जाता है हमारे पेट में गैस बनने का। इसके अलावा ज्यादा गुस्सा करने, बहुत देर तक एक ही जगह बैठे रहने और चिंता करने से भी गैस बनता है। 

लोगो के जीवन में कुछ खान पान भी ऐसे होते हैं जिसके वजह से हमारे शरीर में गैस बनता है। ज्यादा चाय पीने से भी गैस बनने की समस्या होती है जिस कारण पेट, पीठ, सीना आदि में दर्द होता है। भूख कम लगती है, डकारे आती है, जलन होती है, उल्टिया होती है साथ ही ज्यादा गैस बनने से चक्कर भी आने लगते हैं ऐसे में कुछ घरेलू नुस्खे करके इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

जब लोगो को कब्ज की समस्या होती है ऐसे में व्यक्ति के शरीर में बनने वाला टॉक्सिन शरीर से अच्छी तरह बाहर नहीं निकल पाता। जिस कारण पेट में गैस बनती है और इससे राहत पाने के लिए रोजाना दिन में व्यक्ति को 8 से 10 गिलास पानी अवश्य ही पीना चाहिए साथ ही अपने खानपान में फाइबर की मात्रा भी बढ़ानी चाहिए।

कई बार जल्दी खाना खत्म करने के चक्कर में लोग अच्छी तरह से चबाकर नहीं खाते और आजकल यह हर किसी में देखा जाता है। इसके अलावा खाना अगर ढंग से चबाकर न खाया जाए तो पेट में गैस बनने की समस्या लाजमी हो जाती है। इस समस्या से बचने के लिए भोजन को आराम से चबाकर खाना बहुत जरूरी होता है।

पेट के गैस से छुटकारा पाने के कुछ घरेलू उपाय

गरम पानी और नमक

अगर आपको कब्ज की समस्या रहती है तो सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म पानी में नमक डालकर पीए, चार-पांच दिन ऐसा करने से आपकी कब्ज की समस्या धीरे धीरे ख़त्म हो जाएगी।

नींबू पानी

जिन लोगो को पता होता है उनमें से ज्यादातर लोग डाइजेशन होने पर नींबू पानी ही पीते हैं। नींबू के रस में एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से पेट में बन रहे गैस से राहत मिलती है। अगर छाती कमर में गैस फंस जाए तो इसके लिए आप एक गिलास गुनगुना पानी लें और उसमें एक नींबू को निचोड़ लें और काला नमक डालकर सेवन करें। गर्म पानी में नींबू डालकर पीने से गैस से छुटकारा मिलता है साथ ही उल्टी आनी बंद हो जाती है। गैस की वजह से छाती में या शरीर के किसी अंग में हो रहे जलन या दर्द से राहत मिलती है।

इलायची का प्रयोग करें 

ज्यादातर लोग अपने खाने में इलायची का प्रयोग करते हैं। अगर आपको छाती और पेट में गैस बनती है और इस कारण दर्द और जलन महसूस होती है तो आप इलायची का सेवन करें। इसके लिए आप इलायची का पानी भी पी सकते हैं, इसके लिए आप एक गिलास पानी को किसी पतीले में डालकर इलायची के साथ अच्छे से उबाल लें और उस पानी को छानकर पी लें, इससे आपको बहुत आराम मिलेगा। रोजाना दिन भर में दो से तीन बार इलायची का सेवन पाचन क्रिया में सहायक होता है और हमारे पेट में गैस की समस्या नहीं होने देती।

पेट में गैस बनता है तो जरूर जान लें इन बातो को नहीं तो पर सकता है आपको पछताना

अजवाइन

बेहतर पाचन के लिए अजवाइन एक बेहतरीन घरेलू नुस्खा होता है। अजवाइन का यह नुस्खा गांव से लेकर शहर के हर एक घर में पेट की किसी भी प्रकार समस्या को ठीक करने के लिए प्रयोग किया जाता है। अगर आपको छाती में गैस की वजह से जलन या दर्द हो रहा है तो ऐसे में आप अजवाइन का सेवन कर सकते हैं। अजवाइन चूर्ण का प्रकार प्रयोग करके अपच और गैस की वजह से हो रहे किसी भी प्रकार तकलीफ को कम कर सकते हैं।

अदरक

अगर गैस की समस्या बड़ जाति है और ये शरीर के किसी भी अंग जैसे पेट, पीठ या छाती में फस जाती है ऐसे में गैस को निकालने के लिए अदरक का सेवन फायदेमंद होता है। किसी भी अंग में गैस फसने से जलन या दर्द जैसा महसूस होता है दरअसल अदरक खाने से पाचन को बढ़ावा मिलता है आप अदरक का सेवन चाय में डाल कर भी कर सकते हैं।

छाछ और काली मिर्च

आप छाछ में भी काली मिर्च मिलाकर पी सकते हैं छाछ में काला नमक और अजवाइन मिलाकर पीने से भी गैस की समस्या से काफी ज्यादा लाभ मिलता है। 

दालचीनी 

गैस की समस्या से निजात पाने के लिए दालचीनी का पानी बहुत फायदा करता है। इसके लिए सबसे पहले आप दालचीनी को पानी में उबालकर ठंडा कर लें और सुबह खाली पेट पीए इस पानी में आप चाहे तो थोड़ा सा शहद भी मिलाकर भी पी सकते हैं।

जानिए गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त और इस अवसर पर किए जाने वाले कुछ खास उपाए 

हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से गणेश चतुर्थी यानी गणेश उत्सव की शुरूआत हो जाती है। जो 10 दिनों तक चलती है और अनंत चतुर्दशी तिथि के दिन गणेश विसर्जन के साथ समाप्त हो जाति है।पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्री गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मध्याह्र काल में, स्वाति नक्षत्र और सिंह लग्न में हुआ था। इस वर्ष गणेश चतुर्थी का त्योहार 31 अगस्त बुधवार के दिन से शुरू होगा। 

सनातन हिन्दू धर्म में गौरी पुत्र भगवान श्री गणेश जी विद्या-बुद्धि के प्रदाता, विघ्ननाशक, मंगलकर्ता, रक्षाकारक, सिद्धिदायक, सुख, समृद्धि, वैभव, शक्ति और सम्मान प्रदान करने वाले देवता माने जाते हैं।मान्यता के अनुसार विधि पूर्वक भगवान श्री गणेश जी की पूजा करने से श्री गणेश जी अपने भक्तो से प्रसन्न होते हैं और उनके सभी कष्टो को हर लेते हैं। गणेश उत्सव के दौरान लोग गणपति बप्पा को प्रसन्न करने के लिए कई प्रकार के चीजें अर्पित करते हैं।

गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त्त- 

गणेश चतुर्थी की तिथि आरंभ: 30 अगस्त, मंगलवार, दोपहर 03:34 मिनट से।

गणेश चतुर्थी की तिथि समाप्त: 31 अगस्त, बुधवार,  दोपहर 03:23 मिनट पर।

गणपति स्थापना का मुहूर्त: 31 अगस्त, बुधवार,

सुबह 11:05 से शुरू होकर 1 सितंबर, रात्रि 01:38 तक रहेगा। 

गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त्त : 31 अगस्त 11:04 मिनट से 13:37 मिनट तक।

गणेश चतुर्थी का महत्व

हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि भगवान श्री गणेश जी को समर्पित होती है। गणेशोत्सव का पर्व 10 दिनो तक चलता है जहां पर घर-घर और बड़े-बड़े पंडालो में भगवान गणपित की स्थापना की जाती है। खास कर महाराष्ट्र में गणेशोत्सव का त्योहार विशेष तौर से मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतु्र्थी तिथि को गणेश चतु्र्थी के रूप में मनाई जाती है। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी गणेश चतुर्थी, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक गणेश चतुर्थी और जब मंगलवार के दिन गणेश चतुर्थी आए तो उसे अंगारक चतुर्थी कहा जाता है। और भाद्रपद माह की गणेश चतुर्थी को कलंक चतुर्थी और डण्डा चौथ के नाम से भी जाना जाता है।

जानिए गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त और इस अवसर पर किए जाने वाले कुछ खास उपाए 

– मान्यता के अनुसार भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन नहीं करना वर्जित होता है। कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने पर कलंक का भागी बनना पड़ सकता है और इसके पीछे एक पौराणिक कथा वर्णित है।

– कहा जाता है कि भगवान श्री गणेश जी की पूजा में कभी भी तुलसी के पत्तो का प्रयोग नहीं करना चाहिए। तो वहीं भगवान श्री गणेश जी को दूर्वा घास चढ़ाना अति शुभ फलदाई होता है क्योंकि दू्र्वा भगवान श्री गणेश को अति प्रिय है।

– भगवान गणेश सभी देवी-देवताओ में प्रथम पूज्य देवता कहलाते हैं क्योंकि गणेश जी को भगवान शिव जी से यह वरदान प्राप्त हुआ था। इसीलिए किसी भी शुभ कार्य और अनुष्ठान में सबसे पहले भगवान गणेश की ही पूजा की जाती है।

गणेश चतुर्थी पर किए जाने वाले कुछ खास नियम

जीवन में उन्नति और सौभाग्य प्राप्ति के लिए गणेश चतुर्थी के दिन कुम्हार के चाक से थोड़ी से मिट्टी लाएं और गणेश की मूर्ति बनाकर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर विधि पूर्वक पूजा-अर्चना करें पुजा के दौरान ‘ॐ ह्रीं ग्रीं ह्रीं’ मंत्र का 108 बार जप करें। कहा जाता है कि ऐसा करने से सभी प्रकार विघ्न दूर होते हैं और सकारात्मक शक्ति बनी रहती है।

अगर आप हमेशा आर्थिक समस्याओ से परेशान रहते हैं तो गणेश चतुर्थी के दिन एक साथ 22 दूर्वा जोड़ लें और 11 जोड़े तैयार कर लें ध्यान रखें कि एक गांठ दो दूर्वा से बनती है। इसके बाद 11 गांठो को भगवान श्री गणेश जी के माथे से छूकर उनके चरणो में अर्पित कर दें। ऐसा करने से भगवान श्री गणेश की कृपा प्राप्त होती है और धन संबंधित सभी प्रकार समस्याओ से मुक्ति मिलती है।

जानिए गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त और इस अवसर पर किए जाने वाले कुछ खास उपाए 

नौकरी और कारोबार में उन्नति के लिए गणेश चतुर्थी के दिन घर में पीले रंग की गणेशजी की प्रतिमा स्थापित कर पूजन करें। गणेश पूजन में हल्दी की पांच गांठ चढ़ाएं और फिर ‘श्री गणाधिपतये नम:’ मंत्र का जप करें। इसके बाद 108 दूर्वा पर गीली हल्दी लगाकर हर दूर्वा को श्री गणेश जी के समक्ष चढ़ाए और ‘श्री गजवक्त्रं नमो नम:’ मंत्र का मन ही मन जप करते करें। ऐसा करने से उन्नति के मार्ग खुलने लगते हैं और सफल होने के रास्ते में आ रही अड़चने भी दूर हो जाती है।

बेटी के विवाह में आ रही अड़चन को दूर करने के लिए गणेश चतुर्थी पर विवाह की कामना करते हुए भगवान गणेश को मालपुए का भोग लगाएं और अगर बेटे के विवाह में अड़चन आ रही है तो पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं। ऐसा करने से गणेश जी की कृपा से शीघ्र विवाह के योग बनते हैं और विवाह में आ रही सभी अड़चने दूर होती हैं।

धन संबंधित समस्याओ से मुक्ति पाने के लिए गणेश चतुर्थी के दिन भगवान श्री गणेश जी के पूजन में घी और गुड़ का भोग लगाएं और गणेश अर्थवशीर्ष का पाठ करें। गणेश जी की पूजा करने के बाद घी और गुड़ गाय को खिला दें और फिर अपने अनुसार जरूरतमंद गरीबो में दान करें। ऐसा करने से कर्ज की समस्या खत्म होती है और धन प्राप्ति के मार्ग प्रशस्त होते हैं।

“Hartalika Teej 2022” हरतालिका तीज के शुभ तिथि पर जरुर करें इन नियमो को और पाएं जीवन के सभी सूख

पंचांग के अनुसार हर साल भाद्रपद मास के तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करती हैं और व्रत भी रखती है। हरतालिका तीज का यह पर्व वैसे तो सुहागिन महिलाओ के लिए होता है लेकिन मनचाहा वर पाने की इच्छा पूर्ति के लिए कुंवारी कन्याएं भी इस व्रत का पालन करती है। मान्यता के अनुसार जो भी सुहागिन स्त्रियां हरतालिका तीज का व्रत रखकर विधि विधान से पूजा करती हैं, उन पर मां पार्वती प्रसन्न होती हैं और उन्हें अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद मिलता है।

ठीक उसी प्रकार जो भी कुंवारी कन्याएं हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं उन्हें माता पार्वती के आशीर्वाद से योग्य वर की प्राप्ति होती है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर सम्पूर्ण विधि विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करती हैं और अपने सुहाग की लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं। हरतालिका तीज का दिन जिस प्रकार सुहागन महिलाओं के लिए खास होता है उसी तरह कुंवारी कन्याओं के लिए भी यह पर्व उतना ही खास होता है।

इस दिन सुखमयी जीवन और सुखी संसार के लिए कुंवारी कन्याओ और सुहागिन महिलाओ द्वारा कुछ उपायो को करना बेहद फायदेमंद माना जाता है। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित हरतालिका तीज 30 अगस्त मंगलवार के दिन मनाई जाएगी। इस व्रत को बहुत कठिन माना जाता है क्योंकि इस व्रत के नियम बहुत कठिन होते हैं। चलिए जानते हैं इस बार हरतालिका तीज व्रत के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।

हरतालिका तीज शुभ तिथि: 

तृतीया तिथि 29 अगस्त दिन सोमवार को दोपहर 03 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 30 अगस्त मंगलवार को दोपहर 03 बजकर 33 मिनट रहेगी। उदयातिथि के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत 30 अगस्त को रखा जाएगा।

हरतालिका तीज पूजा शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त :  सुबह 11ः33 से 12ः24 तक।

विजयी मुहूर्त :  दोपहर 02ः05 से 02ः56 तक।

अमृत काल मुहूर्त :  शाम 05ः38 से 7:17 तक।

गोधूलि मुहूर्त :  शाम 06ः07 से 06ः31 तक।

सायाह्न संध्या मुहूर्त :  शाम 06ः19 से 07ः27 तक।

निशिथ मुहूर्त :  रात्रि 11ः36 से 12ः21 तक।

हरतालिका तीज का व्रत का महत्त्व

सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याए शुभ फल की प्राप्ति के लिए हरतालिका तीज का व्रत करती है। जैसे कि सुहागिन महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ाने के लिए, अपने जीवन साथी के लंबी आयु के लिए, वैवाहिक जीवन को सुखी बनाने के लिए, हर कदम पर एक दूसरे के साथ खड़े रहने के लिए, पति पत्नी के रिश्ते को मजबूत करने के लिए हरतालिका तीज का व्रत रखा भगवान शिव और माता पार्वती से आशीर्वाद लेती है। तो वहीं कुंवारी कन्या सुयोग्य वर प्राप्ति के लिए हरतालिका तीज का व्रत करती है। जिन कन्याओ के विवाह में बाधा विघ्न आ रहे होते हैं वह कन्याए भी हरतालिका तीज का व्रत रखके जल्दी विवाह होने की कामना करती है।

हरतालिका तीज पर कीए जाने वाले कुछ नियम

“Hartalika Teej 2022” हरतालिका तीज के शुभ तिथि पर जरुर करें इन नियमो को और पाएं जीवन के सभी सूख
  • यदि पति-पत्नी के बीच हमेशा छोटी-छोटी बातो को लेकर विवाद होता रहता है और पति पत्नी में दूरिया बढ़ती जाती है तो ऐसे में हरतालिका तीज के दिन सुहागिन स्त्रियो को मां पार्वती को 16 श्रंगार के सामान अर्पित करना चाहिए। 
  • पति और पत्नी में प्रेम बढ़ाने के लिए इस दिन सुहागिन महिलाओ को अपने पति से मांग में सिंदूर भरवाना चाहिए और हो सके तो सुहाग की चीजें अपने पति के हाथों से पहनने चाहिए। 
  • हरतालिका तीज के दिन मां पार्वती और भगवान शिव को खीर का भोग लगाना चाहिए और पति-पत्नी को इस प्रसाद को एक साथ ग्रहण करना चाहिए। ऐसा करने से पति-पत्नी के बीच प्यार बढ़ता है और वैवाहिक जीवन सुखमयी होती है।
  • किसी कन्या के विवाह में हो रही देरी के लिए हरतालिका तीज के दिन कुछ नियम किए जाते हैं।यदि किसी लड़की का विवाह समय से नहीं हो पा रहा और घर वाले शादी को लेकर परेशान हैं तो हरतालिका तीज के दिन पार्थिव शिवलिंग बनाकर 21 बेलपत्र चढ़ाएं।
  • कुंवारी कन्या इस योग्य वर प्राप्ति के लिए देवी कात्यायनी का विवाह मंत्र – ‘कात्यायिनी महामाये महायोगिनीधीश्वरी नन्द गोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः’ का जाप करें। इसके बाद कुंवारी कन्याओ को मीठा भोजन कराकर वस्त्र का दान करें। 
  • हरतालिका तीज की पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती को बेलपत्र, तुलसी, जातीपत्र, सेवंतिका, बांस, देवदार पत्र, चंपा, कनेर, अगस्त्य, भृंगराज, धतूरा, आम पत्ते, अशोक पत्ते, पान पत्ते, केले के पत्ते, शमी के पत्ते आदि खास तौर पर चढ़ाना चाहिए।
  • वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ाने के लिए इस दिन पत्नी को अपने हाथो से पान का बीड़ा लगाकर भगवान शिव जी को चढ़ाना चाहिए और फिर पति को भी खिलाना चाहिए।
  • वैवाहिक जीवन में प्रेम के अभाव को दूर करने के लिए इस दिन दंपति को एक साथ मिलकर भगवान शिव और माता पार्वती का दूध में हल्दी या केसर डालकर अभिषेक करना चाहिए।
  • यदि कुंवारी कन्यायो के विवाह का योग न बन रहा तो इस दिन कन्याओं को देवी पा‌र्वती के समक्ष हल्दी की 11 गांठ अर्पित करनी चाहिए और माता पार्वती से अपने कष्ट निवारण की प्रार्थना करनी चाहिए।
  • यदि किसी लड़की के विवाह में बाधांए आ रही हों तो कुंवारी कन्या को गरीबों में या ब्राम्हण को वस्त्र और मिष्ठान का दान करना चाहिए ऐसा करने से विवाह में आने वाला संकट दूर होगा।
  • यदि पति-पत्नी के बीच प्रेम न हो तो इस दिन पति पत्नी दोनों को मिलकर शाम को भगवान शिव के मंदिर में एक साथ शुद्ध घी के 11 दीया जलाना चाहिए।
  • हरतालिका तीज के दिन गणेश मंदिर में सूखे मालपुए  चढ़ाने चाहिए और गरीबों को भी खिलाना चाहिए ऐसा करने से दांपत्य जीवन में कभी प्यार की कमी नहीं होती।

जानिए गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद शिशु और ऋषि – मुनियो को दफनाया क्यो जाता है

दोस्तो ज्यादातर लोग यह बात नहीं जानते की नवजात शिशु और ऋषि-मुनियो को उनकी मृत्यु के बाद जलाने के बदले दफनाया क्यो जाता है। गरुड़ पुराण में वर्णित कथा के अनुसार कहा जाता है कि पक्षी गरुड जब भगवान विष्णु से पूछते हैं यह बात पूछते हैं तब भगवान विष्णु हमसे कहते हैं की अगर किसी स्त्री का गर्भपात हो जाए या 2 साल के किसी बच्चे की मृत्यु हो जाए तो उसे जलाने के बदले जमीन में गड्ढा खोद कर दफना दिया जाता है और इससे अधिक उम्र के व्यक्ति की मृत्यु होने पर ही जलाना चाहिए। आज के इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि कितने उम्र के बालक बालिकाओ को हिंदू धर्म में के अनुसार दफनाने का वर्णन किया गया है।

गरुड़ पुराण के अनुसार कहा जाता है कि जब कोई बच्चा जन्म लेता है तो 2 साल तक वह दुनियादारी मोह माया से बंधा होता है ऐसी स्थिति में उसके शरीर में मौजूद आत्मा को किसी से मोह नहीं होता। ऐसे में अगर कोई 2 वर्ष से कम उम्र का बच्चा मृत्यु को प्राप्त हो जाता है तो उस बच्चे के शरीर को मिट्टी में दफना दिया जाता है इस तरह दफनाने से आत्मा शरीर का त्याग कर देता है और पुनः उस शरीर में प्रवेश करने का प्रयास नहीं करता।

लेकिन इसके विपरित जैसे-जैसे मनुष्य बड़ा होते जाता है उसमें मोह माया दुनियादारी की समझ बड़ने लगती है। जिस कारण वह मृत्यु के बाद भी उस शरीर में मौजूद आत्मा फिर से उस शरीर में जानेे का प्रयास करता हैै। क्योंकि व्यक्ति की मृत्यु के बाद उस व्यक्ति की आत्मा तब तक उस शरीर में प्रवेश करने का प्रयास करता है जब तक उस शरीर को जला न दिया जाए।

जानिए गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद शिशु और ऋषि – मुनियो को दफनाया क्यो जाता है

मृत्यु के बाद जब शरीर को जला दिया जाता है तो वह अग्नि द्वारा मुक्त हो जाता है जिसके बाद उस आत्मा को किसी के साथ कोई लगाव नहीं रहता। गरुड़ पुराण के अनुसार अग्नि संस्कार यानी कि दाह संस्कार शरीर से आत्मा के अलगाव का ही एक रूप होता है। 

दरअसल हिंदू धर्म में अग्नि को ही प्रवेश द्वार माना गया है मृत्यु के बाद अगर शव को जलाया जाता है तभी वह आध्यात्मिक दुनिया में प्रवेश कर पाता है।लेकिन ऐसे बच्चे जिन्होंने ज्यादा जीवन नहीं देखा है उनकी आत्मा को अपने शरीर से कोई लगाव नहीं रहता। जिस कारण बच्चे की आत्मा शरीर छोड़ने के बाद अपने शरीर को छोड़ने में आसानी से सक्षम हो पाते हैं, इसीलिए उनकी मृत्यु हो जाने पर शव को जलाने के बदले दफनाने का विधान है।

इसके अलावा अगर बात करें संत पुरुष और भिक्षुओ की तो इन्हें भी जलाने के बदले दफनाने का विधान है। ऐसा कहा जाता है कि संत महापुरुष अपने तप और ध्यान के कठोर तपस्या और आध्यात्मिक शक्ति से अपने मन और इंद्रियो को नियंत्रित कर लेते हैं। उन्हें मोह माया काम क्रोध लोभ आदि जैसे किसी भी प्रवृति से लगाव नहीं होता। 

ऐसे में जब मनुष्य की मृत्यु होती है तब शरीर में मौजूद आत्मा को शरीर से कोई लगाव नहीं रहता और वह बिना किसी बाधा के बैकुंठ धाम चले जाते हैं। इसके अलावा गरुण पुराण में भगवान विष्णु ने बताया है कि जब किसी बच्चे की मृत्यु हो जाए तो उसकी आत्मा की शांति के लिए क्या करना चाहिए। 

जानिए गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद शिशु और ऋषि – मुनियो को दफनाया क्यो जाता है

भगवान विष्णु ने बताया है कि जब किसी शिशु की मृत्यु हो जाती है तो उस बच्चे के आत्मा की शांति के लिए दूध का दान करना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे की आत्मा को शांति मिलती है या फिर जितने महीने के बाद वह बच्चा मृत्यु को प्राप्त होता है यानि मरने वाले शिशु की उम्र जितने महीने की हो उतने बच्चों को अपने हाथो से दूध पिलाना चाहिए। 

क्योंकि बच्चे की मृत्यु के बाद उनका श्राद्ध नहीं किया जाता है किसी भी बच्चे का विधि विधान से श्राद्ध तभी किया जा सकता है जब बच्चे का चूड़ाकरण संस्कार यानी कि मुंडन हो गया हो या फिर उसका उपनयन संस्कार हो गया हो। भगवान विष्णु कहते हैं कि मृत्यु को प्राप्त होने वाले बच्चे के माता-पिता को हो सके तो वस्त्र दान करने चाहिए। जितने हो सके उतना दान करने से बच्चे की आत्मा को शांति मिलती है और मृत्यु को प्राप्त हुए बच्चे को जल्दी ही एक नया शरीर प्राप्त हो जाता है। 

इसके आलावा भगवान विष्णु जी ने कहा है कि बच्चे की मृत्यु के बाद बच्चो को जहां दफनाया जाता है उस जगह को साफ सुथरा करके रखना चाहिए। उस जगह को गोबर और गंगाजल की मदद से हमेशा पवित्र करते रहना चाहिए और उस जगह पर एक तुलसी का पौधा भी लगाना चाहिए। मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ऐसा कहते हैं कि जहां तुलसी का पौधा होता है वहां मैं स्वयं निवास करता हूं और ऐसे मे मृत आत्मा को जल्दी ही मुक्ति मिल जाती हैं।

जन्माष्टमी पर जानिए श्री कृष्ण जी के अवतार से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी

भारत के 7 प्राचीन सबसे पवित्र नागरियो में से एक नगरी है मथुरा, मथुरा में भगवान श्री कृष्ण जी का भरपुर रोमांच मिलेगा। मथुरा नामक स्थान का महत्व उसी प्रकार है जिस प्रकार ईसाईयो के लिए बेथलहेम बौद्ध धर्म वालो के लिए लुंबिनी और मुस्लिमो के लिए मदीना। 

भविष्यवाणी के अनुसार भगवान विष्णु को देवकी जी के गर्भ से कृष्ण के रूप में जन्म लेना था तो उन्होंने अपने आठवें अवतार के रूप में कृष्ण बनकर देवकी माता के गर्भ से अवतार लिया। जब भगवान श्री कृष्ण जी के मामा कंस को पता चला कि उनकी बहन देवकी औरवासुदेव की जो संतान होगी वही उसकी मृत्यु का कारण होगा। यह जानते ही कंस ने देवकी और वसुदेव को जेल में बंद कर दिया उसके बाद उन दोनो के जीतने भी संतान होते कंस उन्हें मार देता था।

कृष्ण जन्म होने के साथ ही हुए चमत्कार

जब भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म हुआ तो जेल के सभी लोग गहरी नींद में सो गए जेल के दरवाजे अपने आप खुल गए। उस समय भारी बारिश हो रही थी और उस भारी तूफान में ही वासुदेव जी नन्हे श्री कृष्ण जी को एक टोकरी में रखकर टोकरी लेकर जेल से बाहर निकल आए। कुछ दूरी पर यमुना नदी थी उन्हें वह नदी पार करनी थी तभी चमत्कार हुआ और यमुना के जल भगवान श्री कृष्ण के चरण छूकर अपने आप कमने लगे यमुना का जल दो हिस्सो में बट गया और बीच में से रास्ता बन गया।

कृष्ण जी का लालन-पालन यशोदा ने किया

कहा जाता है कि वासुदेव श्री कृष्ण जी को जमुना के उस पार गोकुल में अपने मित्र नंद गोप के यहां ले गए थे। वहां पर नंद की पत्नी यशोदा को भी एक कन्या हुई थी वासुदेव श्री कृष्ण ने यशोदा के पास कृष्ण जी को सुलाकर कन्या को अपने पास ले आए। गोकुल में मां यशोदा का मायका था और नंद गांव में उनका ससुराल इस प्रकार श्री कृष्ण जी का लालन-पालन यशोदा मैया और नंद जी ने किया था।

जन्माष्टमी पर जानिए श्री कृष्ण जी के अवतार से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी

जमुना के तट पर बसा एक गांव है जिसका नाम है गोकुल वहां सभी नंद के गायो का निवास स्थान था। नंद मथुरा के आसपास गोकुल और नंद गांव में रहने वाले सभी के मुखिया हुआ करते थे। जब यह बात कंस को पता चली की छल पूर्वक वासुदेव और देवकी ने अपने पुत्र को कहीं और भेज दिया है तो उसने चारो दिशा में अपने अनुचरो को पता लगाने के लिए भेज दिया पहली बार में ही कंस के अनुचरो को यह पता चल गया कि हो ना हो बालक को यमुना के उस पार ही छोड़ा गया है। 

वृंदावन कृष्ण जी की लीलाओं का प्रमुख स्थान 

बाल्यकाल से ही श्रीकृष्ण ने अपने मामा के द्वारा भेजे गए अनेक राक्षसो को मार डाला था उसके सभी कुप्रयासो को श्री कृष्ण विफल कर देते थे। सबसे पहले उन्होंने पूतना को मारा उन्होंने उसे नंद बाबा के घर से कुछ दूरी पर ही मारा था। नंद गांव में कंस के अत्याचार बढ़ते जाने के कारण नंद बाबा ने कृष्ण जी को भाई बलराम के साथ दूसरे गांव वृंदावन लेकर चले गए।

वृंदावन मथुरा से 14 किलोमीटर दूर है श्रीमद् भागवत और विष्णु पुराण के अनुसार कंस के अत्याचार से बचने के लिए नंदजी अपने जाति कुटुंबियो के साथ गांव से वृंदावन आकर बस गए। विष्णु पुराण में वृंदावन के कृष्ण की लीलाओ का वर्णन किया गया है जहां श्री कृष्ण ने कालिया का भी दमन किया था।

कालिया और धनुष का वध

भगवान श्री कृष्ण बाल रूप से जब थोड़े बड़े हुए तो उन्होंने कदम भवन में बलराम जी के साथ मिलकर कालिया नाग वध किया। इसी प्रकार वही दैत्य जाति का धनुष नामक का अत्याचारी व्यक्ति रहता था जिसका वध बलदेव ने किया इस घटना से कृष्ण जी और बलदेव की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई।

श्री कृष्ण जी की रासलीला 

मान्यता के अनुसार वहीं पर भगवान श्री कृष्ण जी और राधा एक घाट पर युगल स्थान में स्नान करते थे। इससे पहले कृष्ण जी की राधा से मुलाकात गोकुल के पास संकेत तीर्थ पर हुई थी वृंदावन में ही भगवान श्री कृष्ण और गोपिया आंख मिचोली खेलते थे। यहीं पर श्री कृष्ण जी और उनके सभी शाखा और सखिया मिलकर रासलीला यानी तीज त्योहारो पर नीति उत्सव का आयोजन करते थे। श्री कृष्ण जी बहुत शरारती थे जिस कारण उन्हें बांके बिहारी भी कहा जाता था और वही पर आज बांके बिहारी जी का मंदिर भी है। यही नहीं यमुना का प्रत्येक घाट और वृंदावन कृष्ण की कथा जुड़ी हुई है।

श्री कृष्ण जी ने एक उंगली उठा लिया गोवर्धन पर्वत

वृंदावन के पास ही गोवर्धन पर्वत है जहां पर कृष्ण जी ने लोगो को इंद्र के प्रकोप से बचाया था उस काल में लोग इंद्र से डरकर उनकी पूजा करते थे। भगवान श्री कृष्ण जी उनके इस डर को बाहर निकालें और फिर से परमेश्वर के प्रति ही प्रार्थना करने की शिक्षा दी। यही नहीं इंद्र की पूजा का उत्सव बंद करके कार्तिक मास में अन्नकूट का उत्सव आरंभ कराया। कंस का वध

जन्माष्टमी पर जानिए श्री कृष्ण जी के अवतार से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी

वृन्दावन में कालिया और धनुक का सामना करने के कारण दोनो भाइयो की ख्याति हुई और इस कारण कंस यह बात भली-भांति समझ गया की ज्योतिष भविष्यवाणी के अनुसार इतना शक्तिशाली किशोर तो वासुदेव और देवकी के पुत्र ही हो सकते हैं। तब कंस ने दोनो भाइयो को पहलवानी के लिए निमंत्रण दिया जाता था कि उन्हें पहलवानों के हाथों मरवा दे। लेकिन दोनो भाईयो ने पहलवानो के शिरोमणि चाणूर और मुष्ठिक को मारकर कंस को पकड़ा दिया और तभी देखते देखते ही कंस को भी मार दिया।

कंस के वध के बाद उग्रसेन राजा हुआ

कंस का वध करने के पश्चात श्री कृष्ण और बलदेव ने कंस के पिता उग्रसेन को पुनः राजा बना दिया। उग्रसेन के 9 पुत्र थे उसमें सबसे बड़ा था कंस और उसके पांच बहने भी थी। कृष्ण जी बचपन में ही कई आकस्मिक दुर्घटनाओ का सामना करने और किशोरावस्था में कंस के संयंत्रो को विफल करने के कारण बहुत लोकप्रिय हो गए थे उसके बाद उनका अज्ञातवास वही समाप्त हो गया।

तब उनके पिता और पालको ने दोनो भाइयो के लिए शिक्षा-दीक्षा का इंतजाम हुआ। दोनो भाइयो को अस्त्र शस्त्र और शास्त्री की शिक्षा देने के लिए सांदीपनी के आश्रम भेजा गया था जहां कृष्ण और बलराम ने दीक्षा ली और अन्य शास्त्रों के साथ धनुर्विद्या में भी विशेष दक्षता प्राप्त की वहीं सुदामा ब्राह्मण के गुरु भाई हुआ।

इस आश्रम में कृष्ण जी ने अपने जीवन के कुछ साल बिताकर कई सारी घटना से सामना किया और यहां भी उनको प्रसिद्धि मिली। शिक्षा और दीक्षा हासिल करने के बाद भगवान कृष्ण और बलराम पुनः मथुरा लौट आए और फिर वह मथुरा के सेना और शासन का कार्य देखने लगे उग्रसेन जो मथुरा के राजा थे वे कृष्ण के नाना थे। 

जरासंध का आक्रमण

कंस के मर जाने के बाद उसका ससुर और मगध के सबसे शक्तिशाली सम्राट जरासंध भी क्रोधित हो रहा था। कंस की पत्नी मगध नरेश जरासंध को बार-बार इस बात के लिए उकसाती ही थी कि कंस से बदला लेना होगा। इसीलिए मथुरा कि राज्यों को हराने के लिए 17 बार आक्रमण भी किए गए लेकिन हर बर वह कृष्ण से हार जाते थे।

भगवान श्री कृष्ण और कलियवन का युद्ध 

भगवान श्री कृष्ण जी ने कलियवन से भी युद्ध किया लेकिन इसमें रोचक बात यह हैैै कि इस युद्ध से श्री कृष्ण रणभूमि छोड़कर भागने लगेे और उनके पीछे  कलियवन भी भागने लगेे। भागते भागते भगवान श्री कृष्ण गुफा में चले गए  और उनका पीछा करते हुए जब कलियवन गुफा में गया तब उसने एक दूसरे  व्यक्ति को सोते हुए देखा। 

श्री कृष्ण जी के अवतार से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी

कलियवन ने उसे कृष्ण समझकर जोर लात मार दी और वह मनुष्य उठ गया उसने जैसे ही आंखे खोली तब कलियवन उसके देखने मात्र से ही जलकर भस्म हो गया। दरअसल गुफा में जो सोया हुआ था वह इशवाकू वंशी महाराजा मांधाता के पुत्र राजा मुचूकुंद था जो बहुत तपस्वी और प्रतापी भी था। मुचकुंद को वरदान था कि जो भी उसे उठाएगा वह उसे देखते ही भस्म हो जाएगा।

महाभिनिष्क्रमण

कालियवन के मर जाने के बाद हड़कंप मच गया अब विदेशी भी श्री कृष्ण के शत्रु हो चले थे। कृष्ण जी ने अपने जातियों को मथुरा छोड़ देने पर राजी कर लिया और वे सब मथुरा छोड़कर रैवत पर्वत के समीप  कुशस्थली (द्वारिका) पूरी में जाकर बस गए।

श्री कृष्ण और अर्जुन की पहली मुलाकात

जब पांचाल के राजा द्रुपद द्वारा द्रोपती स्वयंबर का आयोजन किया गया उस समय पांडव के बनवास का में से अज्ञातवास का 1 साल भी चुका था। कृष्ण जी भी उस स्वयंवर में गए थे वहां उनकी बुआ कुंती के लड़के पांडव भी मौजूद थे और यहीं से पांडवो के साथ कृष्ण की घनिष्ठता आरंभ हुई। पांडवो ने द्रौपदी को प्राप्त कर लिया और इस प्रकार अपने धनुर्विद्या का कौशल देश के राजाओ के समक्ष प्रकट किया। श्रीकृष्ण ने वहीं पांडवो से अपनी मित्रता बढ़ाई और बनवास समाप्त होने के बाद पांडवो के साथ हस्तिनापुर पहुंचे।

भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन की मित्रता

कुरुराज धृतराष्ट्र ने पांडवो को इंद्रप्रस्थ के आसपास के प्रदेश दिया था। पांडवो ने कृष्ण के द्वार का निर्माण संबंधी अनुभव का लाभ उठाया और उनकी मदद से उन्हें जंगल के एक भाग को साफ करवा कर अच्छे और सुंदर रूप से इंद्रप्रस्थ नगर बसा दिया जिसके बाद कृष्ण जी फिर से द्वारका लौट गए। फिर 1 दिन अर्जुन तीर्थाटन के दौरान द्वारिका पहुंचे जहां श्री कृष्ण जी की बहन सुभद्रा को देखकर वे मोहित हो गए तब कृष्ण जी ने उन दोनो का विवाह करा दिया और इस प्रकार कृष्ण और अर्जुन के बीच की मित्रता प्रगाढ़ हो गई।

जरासंध का वध 

इंद्रप्रस्त के निर्माण के बाद युधिष्ठिर ने राज सुय यज्ञ का आयोजन किया और आवश्यक परामर्श के लिए श्री कृष्ण जी को बुलाया। फिर कृष्ण जी इंद्रप्रस्थ आए और उन्होंने राज सुय यज्ञ के आयोजन का समर्थन किया। लेकिन उन्होंने युधिष्ठिर से कहा कि पहले अत्याचारी राजा और उनकी सत्ता को नष्ट किए जाने चाहिए, तभी राज सुय यज्ञ का महत्व रहेगा और देश वदेश में प्रसिद्धि मिलेगी। युधिष्ठिर ने कृष्ण के इस सुझाव को स्वीकार कर लिया और तब कृष्ण जी ने युधिष्ठिर को सबसे पहले जरासंध पर चढ़ाई करने की सलाह दी।

इसके बाद भीम और अर्जुन के साथ श्री कृष्ण जी मगध रवाना हुए और कुछ समय बाद मगध की राजधानी गिरीब्रज पहुंच गए। कृष्ण जी के नीति सफल हुई और उन्होंने भीम द्वारा मल्लयुद्ध में जरासंध का वध करवा दिया। जरासंध के वध के बाद कृष्ण जी ने जरासंध के पुत्र सहदेव को मगध का राजा बनाया। फिर उन्होंने गिरी ब्रज के बंदी गृह में बंधे सभी राजाओ को भी मुक्त किया और इस तरह कृष्ण जी ने जरासंध से पूर्व शासको का भी अंत करके बंदी हुए राजाओ को उनका राज्य वापस लौटा कर अपना कार्य सफल किया। जरासंध वध के बाद अन्य सभी क्रूर शासक भयभीत हो गए सभी को झूकने पर विवश कर दिया और इस प्रकार इंद्रप्रस्थ राज्य का विस्तार हुआ।

श्री कृष्ण जी के अवतार से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी

इसके बाद युधिष्ठिर ने राज सूय यज्ञ का आयोजन किया। इस यज्ञ में युधिष्ठिर ने भगवान वेदव्यास जैसे सभी महान पुरषो को आमंत्रित किया। इसके अलावा सभी देशो के राजाधिराज को भी बुलाया गया। इस यज्ञ में कृष्ण जी के शत्रु और जरासंध का मित्र शिशुपाल भी उपस्थित हुआ था जो कृष्ण जी की पत्नी रुक्मणी के भाई का मित्र था और रुक्मणी से विवाह करना चाहता था। लेकिन यह कृष्ण जी की दूसरी बुआ का पुत्र था और इस नाते से वह कृष्ण जी का भाई था। 

कृष्ण जी ने अपनी बुआ को वचन दिया था कि उसके 10 अपराधो को क्षमा करेंगे। इस यज्ञ में शिशुपाल ने श्री कृष्ण जी का 100 बार से भी ज्यादा अपमान किया और वचन के अनुसार श्री कृष्ण जी ने शिशुपाल के सौ अपना अपमानो को माफ करके भरी सभा में ही उसका वध कर दिया।

महाभारत

द्वारिका में जाकर भगवान श्री कृष्ण जी ने धर्म राजनीति नीति आदि के कई पाठ पढ़ाए और धर्म कर्म का प्रचार किया। लेकिन वह कौरव और पांडव के बीच युद्ध को नहीं रोक पाए और महाभारत में अर्जुन के सारथी बने। उनके जीवन की यह सबसे बड़ी घटना थी कृष्ण के महाभारत में भी बहुत बड़ी भूमिका थी। श्री कृष्ण जी ने ही युद्ध से पहले अर्जुन को गीता के उपदेश दिया था।

महाभारत युद्ध में पांडवो के पक्ष की जीत कराने के लिए कृष्‍ण को युद्ध से पहले कई प्रकार के छल, बल और नीति का प्रयोग करना पड़ता था और उन्ही नीतियो के कारण पांडवों ने युद्ध जीत भी लिया। इस युद्ध में भारी संख्या में लोग मारे गए थे सभी कौरवो की लाश पर विलाप करते हुए गांधारी ने शाप दिया कि- ‘हे कृष्‍ण, तुम्हारे कुल का नाश हो जाए।

श्री कृष्ण जी 36 वर्ष तक द्वारिका में थे 

भगवान श्री कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था और उनका बचपन गोकुल, वृंदावन, नंदगाव, बरसाना आदि जगहो पर बीता। अपने मामा कंस का वध करने के बाद उन्होंने अपने माता-पिता को कंस के कारागार से मुक्त कराया और फिर जनता के अनुरोध पर मथुरा का राजभार संभाला। कंस के मर जाने के बाद कंस का ससुर जरासंध श्री कृष्ण का कट्टर शत्रु बन बैठा। जरासंध के कारण कालयवन भी मर गया उसके बाद श्री कृष्ण जी ने द्वारिका में अपना निवास स्थान बना लिया और वहीं रहकर उन्होंने महाभारत युद्ध में भी भाग लिया। महाभारत युद्ध के बाद कृष्ण ने 36 वर्ष तक द्वारिका में राज्य किया था।

गांधारी का श्राप 

धर्म के विरुद्ध में आचरण करने के दुष्परिणाम स्वरूप दुर्योधन आदि मारे गए और कौरव वंश पूर्ण रूप से विनाश हो गया। महाभारत के इस युद्ध के बाद सांत्वना देने के उद्देश्य से भगवान श्री कृष्ण जी जब गांधारी के पास गए उस समय गांधारी अपने 100 पुत्रो की मृत्यु के शोक में अत्यंत व्याकुल हो रही थी। 

श्री कृष्ण जी के अवतार से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी

व्यथित अवस्था में अपने आंखो के सामने भगवान श्री कृष्ण को देखते ही गांधारी पूर्ण रूप से क्रोध में आकर उन्हें शाप दे देती है कि तुम्हारे कारण जिस प्रकार मेरे 100 पुत्रो का नाश हुआ है, उसी प्रकार तुम्हारे वंश का भी आपस में एक-दूसरे को मारने के कारण नाश हो जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण ने माता गांधारी के उस शाप को पूर्ण करने के लिए अपने कुल के यादवो की मति ही फेर दी।

दुर्वासा ऋषि का श्राप 

यदुवंशी को केवल गांधारी से ही नही बल्कि दुर्वासा ऋषि का भी श्राप मिला था। क्योंकि एक दिन अहंकार के वश में आकर कुछ यदुवंशी बालको ने दुर्वासा ऋषि का अपमान कर दिया ऐसे में गांधारी के बाद इस पर दुर्वासा ऋषि ने भी शाप दे दिया कि तुम्हारे वंश का नाश हो जाए।

उनके शाप के प्रभाव से कृष्ण के सभी यदुवंशी भयभीत हो गए। इस भय के कारण ही एक दिन कृष्ण की आज्ञा से वे सभी एक यदु पर्व पर सोमनाथ के पास स्थित प्रभास क्षेत्र में आ गए। पर्व के आनन्द में आकर उन्होंने अति नशीली मदिरा पान कर ली और मतवाले होकर एक-दूसरे को ही मारने लगे। और इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण को छोड़कर कुछ ही जीवित बचे रह गए।

कृष्ण का निर्वाण 

भगवान श्री कृष्ण इसी प्रभाव क्षेत्र में अपने कुल का नाश देखकर बहुत व्यथित हुए और वे वहीं रहने लगे। वहीं कभी कभार उनसे मिलने युधिष्ठिर भी आया करते थे। एक दिन वे इसी प्रभाव क्षेत्र के वन में एक पीपल के वृक्ष के नीचे योगनिद्रा में लेटे थे, तभी ‘जरा’ नामक एक बहेलिए ने भूलवश उन्हें हिरण समझते हुए उनपर विषयुक्त बाण चला दिया।

वह बाण जाकर श्री कृष्ण जी के पैर के तलवे में लग गया और भगवान श्रीकृष्ण ने इसी को बहाना बनाकर अपना देह त्याग दीए। महाभारत युद्ध के ठीक 36 वर्ष बाद उन्होंने अपनी देह इसी क्षेत्र में त्याग दी थी। जब महाभारत का युद्ध हुआ था, तब वे लगभग 56 वर्ष के थे। उनका जन्म 3112 ईसा पूर्व हुआ था और इस मान से 3020 ईसा पूर्व यानि उन्होंने 92 वर्ष की उम्र में देह त्याग की थी।

श्री कृष्ण जी के देह त्याग करने के बाद अंत में उनके प्रपौत्र वज्र अथवा वज्रनाभ द्वारिका के यदुवंश के अंतिम शासक थे, जो यदुओ की आपसी लड़ाई में जीवित बच गए थे। द्वारिका के समुद्र में डूबने पर अर्जुन द्वारिका गए और वज्र तथा शेष बची यादव महिलाओ को हस्तिनापुर ले गए। कृष्ण के प्रपौत्र वज्र को हस्तिनापुर में मथुरा का राजा घोषित किया गया और वज्रनाभ के नाम से ही मथुरा क्षेत्र को आज ब्रजमंडल कहा जाता है।

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