Thursday, May 19, 2022
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(World Leprosy Day) क्यों मनाया जाता है विश्व कुष्ठ दिवस, आइए जानते हैं विश्व कुष्ठ दिवस से जुड़ी कुछ जानकारी के बारे में।

जनवरी महीने के आखिरी रविवार को विश्व कुष्ठ दिवस(World Leprosy Day) मनाया जाता है लेकिन भारत में यह दिवस 30 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन की शुरुआत साल 1954 में फ्रांस के समाजसेवी राउल फोलेरो द्वारा की गई थी। ताकि इस घातक बीमारी के बारे में बेसिक स्तर पर जागरूकता फैलाई जाए। साथ ही लोगों तक इस तथ्य को पहुंचाया जा सके कि इस रोग को रोकने के साथ ही इसका इलाज भी संभव है। भारत में विश्व कुष्ठ दिवस को भारत को स्वतंत्रता दिलाने वाले श्री महात्मा गांधी जी के हत्या के वर्षगांठ यानि 30 जनवरी साल 1948 के दिन पर रखा गया है। और ऐसा इसलिए क्योंकि महात्मा गांधीजी ने जीवन काल के दौरान कुष्ठ रोग से बचाव के प्रयास किए गए थे।

भारत में हर साल महात्मा गांधी की पुण्यतिथि यानी कि 30 जनवरी को विश्व कुष्ठ दिवस वर्ल्ड लेप्रसी डे के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन को महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए चुना गया था जिन्होंने कुष्ठ रोगों से पीड़ित लोगों की सहायता की थी। विश्व कुष्ठ दिवस कुष्ठ रोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हर साल जनवरी के आखिरी रविवार को मनाया जाता है।

प्राचीन हिंदू धर्म ग्रंथों के जानकारी इस बात से भलीभाति अवगत है कि द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के बेटे शाम को भी होने का श्राप मिला था। यानी कि कुष्ठ रोगी बन जाने का श्राप इसीलिए हमारे सोसाइटी में लंबे समय तक इस बीमारी को श्राप या भगवान द्वारा दिया गया दंड माना जाता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कुष्ठ रोग या कोड़ की बीमारी ठीक हो सकती है। यह हर व्यक्ति के कंडीशन पर निर्भर करता है कि उसे ठीक होने में कितना समय लगेगा या उसकी बीमारी लाइलाज होने की स्तर पर पहुंच चुकी है कि नहीं।

विश्व कुष्ठ दिवस मनाने का उद्देश्य — दुनिया भर में विश्व कुष्ठ दिवस(World Leprosy Day) को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने और इसके रोकथाम के लिए मनाया जाता है। यह दिन फ्रांस के समाजसेवी राउल फोलेरो के द्वारा साल 1954 में स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य कुष्ठ रोग के बारे में जागरूकता बढ़ाने और लोगों को इस प्राचीन बीमारी के बारे में बताना है जिसका आज आसानी से इलाज संभव है। दुनिया भर में आज भी ऐसे कई लोग अच्छे चिकित्सा व देखभाल तक नहीं पहुंच पाए हैं। ऐसे में सरकार के साथ ही आम आदमी की भी इसके रोकथाम के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी बनती है।   

लेप्रसी डे कुष्ठ रोग को समर्पित दिन होता है। ताकि लोगों के बीच इस बीमारी को लेकर जागरूकता फैले और लोग इसके इलाज को महत्व दे। इस रोग को कोई श्राप या कोई बुरे कर्म का नतीजा ना समझे।   

लेप्रसी किस तरह की बीमारी है

दरअसल लैप्रेसी यानि कुष्ठ रोग एक ऐसी बीमारी है, जो हवा के जरिए फैलती है। लेप्रसी को हैनसेन रोग भी कहा जाता है। यह बीमारी बहुत धीमी रफ्तार से फैलती है। इसीलिए पूर्ण रूप से इसके लक्षण सामने आने में कई बार 4 से 5 साल का समय भी लग जाता है। जिस बैक्टीरिया के कारण यह बीमारी फैलती है उसे माइक्रोबैक्टेरियम लेप्रै भी कहा जाता है। इसीलिए इस बीमारी का इंग्लिश नाम लेप्रसी रखा गया है।

क्या लेप्रसी कॉमन डिसिज़ है

लेप्रसी एक ऐसी बीमारी है जिस पर आज पूरी दुनिया के अधिकतम देश कंट्रोल कर चुके हैं। लेकिन केन्या जैसे कुछ देशों में आज भी लैप्रसी भयावह स्थिति में देखने को मिलती है। एक समय में यह दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारी मानी जाती थी। लेकिन अब इस देश में मेडिकली कई सावधानियां और वैक्सीन्स हैं, जो बॉडी में इस बीमारी को फैलने से रोकती है।

क्या यह बीमारी छुआछूत की होती है

लैप्रसी ऐसी बीमारी है, जो कि हवा में मौजूद बैक्टीरिया के जरिए फैलती है। किसी भी बीमार व्यक्ति के जरिए यह बेक्टीरिया हवा में आती है, इसीलिए इसे संक्रामक रोग भी कहा जाता है। यानी कि यह संक्रमण या सांस के जरिए फैलने वाली बीमारी होती है। यह छुआछूत की बीमारी बिल्कुल ही नहीं है। अगर आप इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति से हाथ मिलाएंगे या छू लेंगे तो आपको यह बीमारी बिल्कुल नहीं होगी।

(World Leprosy Day) क्यों मनाया जाता है विश्व कुष्ठ दिवस, आइए जानते हैं विश्व कुष्ठ दिवस से जुड़ी कुछ जानकारी के बारे में।

लेकिन अगर इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति के खांसने, छींकने से लैप्रे बैक्टीरिया हवा में मौजूद नमी के साथ खुद को घोल लेती है। और आप उस हवा में सांस लेकर नमी के उन कणों को अपने अंदर ले लेते हैं तो इस तरह की स्थितियां बन जाती है कि आप बीमारी से संक्रमित हो सकते हैं। वैसे तो आमतौर पर इस बीमारी को संक्रमण यानि इंफेक्शन, छुआछूत, टचेबिलिटी की एक रोग के तौर पर जाना जाता है। लेकिन इसमें जो हेयरलाइन डिफरेंस यानी के बहुत तरीके के अंतर होते हैं।

जैसे कि संक्रामक रोग सांस और हवा के जरिए फैलते हैं तो वहीं छुआछूत की बीमारी एक दूसरे को छूने और एक दूसरे के इस्तेमाल की गई चीजों को उपयोग में लाने से होती है। जबकि कुछ रोग ऐसे होते हैं जो सांस और छुआछूत दोनों से फैलते हैं। यह तभी होता है जब बीमारी फैलाने वाला बेक्टीरिया उस सामान पर अपनी पकड़ बना लेते हैं। यह ग्रो कर चुके होते हैं, जिसे एक स्वस्थ व्यक्ति इस्तेमाल में ले रहा है।

लेप्रसी के लक्षण 

लेप्रेसी बीमारी के दौरान हमारे शरीर में सफेद चकते यानि निशान पड़ने लगते हैं। यह निशान सुन्न होते हैं यानि इनमें किसी तरह का सेंसेशन नहीं होता है। अगर आप इसे जगह पर कोई नुकीली वस्तु चुभो कर देखेंगे तो आपको किसी भी प्रकार के दर्द का एहसास नहीं होगा। शरीर पर धब्बे भी हो जाते हैं धब्बे शरीर के किसी एक हिस्से पर होने से शुरू होते हैं। जो ठीक से इलाज ना करने पर धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैलने लगते हैं।

सिर्फ चुभन ही नहीं बल्कि अगर आप इस बीमारी के संपर्क में आते हैं तो शरीर के विभिन्न अंगों और खास तौर पर हाथ पैर के हिस्सों में ठंडा, गर्म या किसी वस्तु का एहसास नहीं होता। ईस रोग संक्रमण से प्रभावित अंग पर चोट लगने से, जलने से या कटने का भी पता नहीं चलता। जिससे यह बीमारी अधिक भयानक रूप ले लेती है और शरीर को धीरे धीरे गलाने लगती है।

लेप्रसी के मरीज को पलक झपकाने में भी दिक्कत होती है। क्योंकि लैप्रसी बैक्टीरिया मरीज की आंखों की नसों पर हावी होकर उनके सेंसेशन और सिग्नल्स को प्रभावित करते हैं। ऐसे में पेशेंट को पलक झपकाने की याद नहीं आती और पलक झपक भी नहीं पाती। इससे हर समय आंखें खुले रहने के कारण आंखें ड्राई होने लगती है, और हमारी देखने की क्षमता भी प्रभावित होने लगती हैं आंखों से संबंधित कई रोग पनपने लगते हैं।

कुष्ठ रोग निवृत्ति की बीमारी से सावधानी

अगर आपके घर में या आसपास कोई इस तरह का व्यक्ति है, जिसकी आंखों में लगातार पानी आ रहे हैं। हाथ पैर में छाले हो रहे हैं, शरीर के कुछ हिस्से में गर्म, ठंडे का एहसास नहीं हो रहा या शरीर में सुन्नता बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। अगर कुष्ठ रोग का पता आरंभिक अवस्था में ही चल जाता है और इसका सही तरीके से इलाज करना शुरू कर दिया जाए। तो 6 महीने से लेकर 1,2 साल के अंदर इस बीमारी को पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है।

कुष्ठ रोग का इलाज 

कुष्ठ रोग का इलाज संभव है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा साल 1995 में विकसित ड्रग थेरेपी इस संक्रमण के इलाज में बेहद प्रभावी पाई गई। भारत सरकार कुष्ठ रोग पर निशुल्क इलाज उपलब्ध कराती है। लेकिन बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो समाज में होने वाले भेदभाव समाज में फैली गलत धारणाओं के कारण अपना इलाज नहीं करवाते। इस रोग का इलाज तो संभव है लेकिन घर पर नहीं, इसका इलाज किसी अच्छे डॉक्टर से कराना चाहिए।

जान लीजिए कि अच्छे डॉक्टर का मतलब मोटी फीस वसूलने वाला डॉक्टर जरूरी नहीं है आपको ऐसा डॉक्टर चुनना चाहिए जो आपकी बीमारी को ठीक कर सके। किसी भीं बीमारी को लेकर अपनी जानकारी को बढ़ाए . बीमारी से उठने वाले हर एक सवाल को अपने डॉक्टर से सवाल पूछ कर दूर करें। एक अच्छा डॉक्टर वही होता है जो अपने मरीज की बीमारी दूर करने के साथ ही उनकी आशंका और भावनाओं को समझते हैं और उनका इलाज करते हैं।

कुष्ठ रोग कोई पाप या श्राप नहीं है 

पुराने जमाने में होने वाले कुष्ठ रोग आधुनिक कुष्ठ के समान नहीं है। पुराने और धार्मिक ग्रंथों में पाए जाने वाले कुष्ठ रोग में दर्द होता था। जो त्वचा में सूजन तक की स्थितियां बनाती थी जिससे बहुत ज्यादा संक्रामक माना जाता था। जो की हैनसेन की बीमारी के लिए सही नहीं है यानि की हैनसेन की बीमारी के कुछ सबसे स्पष्ट लक्षण नहीं है। जैसे कि अंधापन, दर्द और संक्रमण। अगर आप ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं तो शायद आपको यह जानकर हैरानी नहीं होगी कि इस बीमारी का जिक्र होते ही लोग इसे किसी पाप या बुरे कर्म का नतीजा समझते हैं लेकिन यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है। 

पुराने जमाने में लोग यह मानते थे कि जिन्होंने बूरे कर्म किए होते हैं उन्हें कुष्ठ रोग होता है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है लोगों को यह समझने की जरूरत है कि इसके पीछे एक साइंस है। जिन लोगों को कुष्ठ रोग होता है उन्हें एंटीबायोटिक उपचार से ठीक किया जा सकता है। लेकिन जब तक इलाज शुरू ना हो तब तक यह संक्रामक हो सकता है। और एक बार इलाज शुरू हो जाए, तो यह कंट्रोल में आने लगता है। हालांकि उपचार को निर्धारित किया जाना चाहिए।

Jhuma Ray
Jhuma Ray
नमस्कार! मेरा नाम Jhuma Ray है। Writting मेरी Hobby या शौक नही, बल्कि मेरा जुनून है । नए नए विषयों पर Research करना और बेहतर से बेहतर जानकारियां निकालकर, उन्हों शब्दों से सजाना मुझे पसंद है। कृपया, आप लोग मेरे Articles को पढ़े और कोई भी सवाल या सुझाव हो तो निसंकोच मुझसे संपर्क करें। मैं अपने Readers के साथ एक खास रिश्ता बनाना चाहती हूँ। आशा है, आप लोग इसमें मेरा पूरा साथ देंगे।
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