भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस: आइए जानते हैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना व कांग्रेस के नेताओं के बारे में।

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस: आइए जानते हैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना व कांग्रेस के नेताओं के बारे में।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस: आइए जानते हैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना व कांग्रेस के नेताओं के बारे में।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत के दो प्रमुख राजनीतिक दलों में से एक है। जिनमें एक और भारतीय जनता पार्टी(BJP) है। सबसे पहले साल 1884 में ऐलान ऑक्टेवियन ह्यूम ने ही भारतीय राष्ट्रीय संघ(Indian National Union) की स्थापना की थी और यही संघ आगे चलकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में बदल दिया गया। एलन ऑक्टोवियन ह्यूम(A.O ह्यूम)ने भारतीय सिविल सेवा के सेवा निवृत ब्रिटिश अधिकारी थे।
 

उसके बाद साल 1885 में 28 दिसंबर के दिन ब्रिटिश राज के दौरान देश में भारतीय राष्ट्रीय संघ नाम को बदलकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की गयी। यानि की साल 1885 में 28 दिसंबर के दिन भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस की स्थापना हुई थी। इसके संस्थापकों में ए.ओ ह्यूम, दादा भाई नौरोजी और दिनशा वाचा शामिल थे।

19वीं सदी के आखिरी में और 20वीं सदी के शुरुआत से लेकर मध्य में कांग्रेस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपने डेढ़ करोड़ से भी अधिक सदस्यों और सात करोड़ से भी अधिक प्रतियोगियों के साथ, ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरोध में एक केंद्रीय भागीदार बना।

15 अगस्त साल 1947 में देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद कांग्रेस भारत की प्रमुख राजनीतिक पार्टी बन गई। साल 1947 यानी देश आजाद होने से लेकर साल 2014 तक 16 आम चुनावों में से कांग्रेस ने 6 में पूर्ण बहुमत जीता है। और 4 में सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व किया और कुल 49 वर्षों तक वह केंद्र सरकार का हिस्सा रही।

भारत में कांग्रेस के सात प्रधानमंत्री रह चुके हैं। जिसमें सबसे पहले जवाहरलाल नेहरू थे जिन्होंने साल 1947 से 1965 तक कार्यभार सम्भाला और आख़िरी में डॉ मनमोहन सिंह जो साल 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे थे। साल 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस ने आजादी से अब तक का सबसे खराब आम चुनावी प्रदर्शन किया है और 546 सदस्य लोकसभा में केवल 44 सीटें जीती। तब से लेकर अब तक कांग्रेस कई विवादों से घिरी हुई है।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना

राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना साल 1885 में 28 दिसंबर को मुंबई की गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय में 72 प्रतिनिधियों की उपस्थिति के साथ हुई थी। इसके संस्थापक जनरल सेक्रेटरी ए ओ ह्यूम थे जिन्होंने कोलकाता के व्योमेश चंद्र बनर्जी को इसका अध्यक्ष चुना था।

अपने शुरुआती दिनों में कांग्रेस का दृष्टिकोण कुलीन वर्ग की संस्था का था। मुख्य रूप से इसके शुरुआती सदस्य बॉम्बे और मद्रास प्रेसीडेंसी से लिए गए थे। और सबसे पहले बाल गंगाधर तिलक ने कांग्रेस में स्वराज का लक्ष्य अपनाया था।

शुरुआती वर्ष

साल 1907 में कांग्रेस में दो दल बन चुके थे, गरम दल और नरम दल। गरम दल का  का नेतृत्व बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल कर रहे थे। इन तीनों को एक साथ लाल-बाल-पाल भी कहा जाता है।

तो वहीं नरम दल का नेतृत्व फिरोजशाह मेहता, गोपाल कृष्ण गोखले और दादा भाई नौरोजी कर रहे थे। गरम दल पूर्ण स्वराज की मांग कर रहा था लेकिन नरम दल ब्रिटिश राज में स्वशासन चाहता था। प्रथम विश्वयुद्ध छिड़ने के बाद साल 1916 की लखनऊ बैठक में दोनों दल फिर एक हो गए और होमरूल आंदोलन की शुरुआत हुई। जिसके तहत ब्रिटिश राज में भारत के लिए अधिराज्य पद यानी कि “डोमिनियन स्टेटस) की मांग की गई।

साल 1915 में  गांधी के भारत आगमन के साथ कांग्रेस में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला। चंपारण और खीरा में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को जनसमर्थन से के साथ अपनी पहली सफलता प्राप्त हुई। साल 1919 में जालियाँवाला बाग हत्याकांड के बाद गांधी कांग्रेस के महासचिव बने। उनके मार्गदर्शन में कांग्रेस कुलीन वर्गीय संस्था से बदलकर एक जन समुदाय संस्था में रूपांतरित हो गई।

उसके बाद राष्ट्रीय नेताओं की एक नई पीढ़ी आई जिसमें सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेंद्र प्रसाद, महादेव देसाई और सुभाष चंद्र बोस शामिल थे। गांधी के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस कमिटीयों का निर्माण हुआ। कांग्रेस में सभी पदों के लिए चुनाव की शुरुआत हुई और कार्यवाही के लिए भारतीय भाषाओं का प्रयोग हुआ। कांग्रेस के तरफ़ से कई प्रांतों में सामाजिक समस्याओं को हटाने की प्रयास कि गई जैसे कि पर्दा प्रथा, मद्यपान और छुआछूत जैसे समस्याएं थी।

कॉंग्रेस ने जब राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने की कोशिश की तो आर्थिक समस्या जैसे कि धन की कमी का सामना करना पड़ा था। तब गांधी जी ने 1 करोड़ रुपए से भी अधिक धन जमा करके इस धन को बाल गंगाधर तिलक के “स्मरणार्थ तिलक स्वराज कोष” का नाम दिया और तब 8 आना का नाम मात्र सदस्यता शुल्क भी शुरू किया गया।

स्वतंत्र भारत में कांग्रेस पार्टी

1947 में जब देश आजाद हुआ तब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारत के मुख्य राजनीतिक दलों में से एक रही। इस दल के कई प्रमुख नेता भारत के प्रधानमंत्री रह चुके हैं जैसे कि जवाहरलाल नेहरू जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री रहे। लाल बहादुर शास्त्री भी भारत के प्रधानमंत्री रहे, जवाहरलाल नेहरु की पुत्री इंदिरा गांधी और उनके नाती राजीव गांधी भी कांग्रेस पार्टी से ही थे जो देश के प्रधान मंत्री रहे। राजीव गांधी के बाद सीताराम केसरी कांग्रेस के अध्यक्ष बने जिन्हें सोनिया गांधी के समर्थकों ने निकाल दिया और सोनिया को हाईकमान बनाया गया। राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष और यूपीए की चेयरपर्सन भी रह चुकी हैं। तो वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे कपिल सिब्बल, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह, अहमद पटेल, राशिद अल्वी, राज बब्बर, मनीष तिवारी आदि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह भी कांग्रेस से ताल्लुक रखते थे।

देश की नीतियों का विरोध

समय-समय पर कई नेताओं द्वारा कांग्रेस की नीतियों का विरोध भी किय जाता था। और उसे हटाने के लिए संघर्ष भी किया जाता था जिसमें राम मनोहर लोहिया का नाम अग्रणी है, जो जवाहरलाल नेहरू के संपूर्ण कट्टर विरोधी थे। इसके अलावा जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी की सत्ता को भी उखाड़ फेंका और एक नया रूप दिया। विश्वनाथ प्रताप ने भी बोफोर्स दलाली कांड को लेकर राजीव गांधी की सत्ता को हटा दिया।

राम मनोहर लोहिया का कांग्रेस हटाओ आंदोलन

राम मनोहर लोहिया लोगों से आग्रह करते आ रहे थे कि देश की हालात को सुधारने में कांग्रेस नाकाम रही है। नए समाज की रचना करने में सबसे बड़ा रोड़ा है कांग्रेस शासन।  उसका सत्ता में बने रहना देश के लिए हितकर नहीं है इसीलिए लोहिया ने कांग्रेस हटाओ और देश बचाओ का भी नारा दिया।

साल 1967 के आम चुनावों में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिला। देश के 9 राज्य — बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में गैर काँग्रेसी सरकार गठित हो गई और लोहिया इस परिवर्तन के प्रणेता और सूत्रधार बने।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस: आइए जानते हैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना व कांग्रेस के नेताओं के बारे में।

साल 1974 में जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी के सत्ता को हटाने के लिए “संपूर्ण क्रांति” का नारा दिया था। और इस आंदोलन को भारी जनसमर्थन भी मिला इससे निपटने के लिए इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगाई थी।

सभी विरोधी नेताओं को जेल में डाल दिया गया था इसका आम जनता पर भी जमकर विरोध हुआ। जनता पार्टी की स्थापना हुई और साल 1977 में कांग्रेस पार्टी बुरी तरह हार गई। पुरानी कांग्रेस नेता मेराराजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी। लेकिन चौधरी चरण सिंह की महत्वाकांक्षा के कारण वह सरकार ज्यादा दिनों तक ना चल सकी।

भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन

साल 1987 में एक बात सामने आई की स्वीडन की हथियार कम्पनी बोफोर्स ने भारतीय सेना को सप्लाई करने का सौदा हथियाने के लिए 80 लाख डॉलर की दलाली चुकाई थी। उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और उसके प्रधान मंत्री थे राजीव गाँधी। और साल 1987 में स्वीडन रेडियो ने पहली बार इसका खुलासा किया और इसे ही बोफोर्स घोटाला या बोफोर्स कांड के नाम से जाना जाता है। यह खुलासा होने के बाद सरकार के खिलाफ विश्वनाथ प्रताप सिंह ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन चलाया। जिसके परिणाम स्वरुप विश्वनाथ प्रताप सिंह देश के प्रधानमंत्री बने।

कांग्रेस के अधिवेशन

“कांग्रेस अधिवेशन” भारतीयों के सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा समय-समय पर आयोजित किए गए थे। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना साल 1885 के 28 दिसंबर को की गई थी। जिसका पहला अधिवेशन बॉम्बे में कोलकाता हाईकोर्ट के वरिष्ठ बनर्जी की अध्यक्षता में हुआ था। साल 1884 से लेकर साल 1888 तक रहने वाले उस समय के वायसराय लॉर्ड डफ़रिन ने कांग्रेस की स्थापना का अप्रत्यक्ष रीति से समर्थन किया था। लेकिन ए.ओ. ह्यूम एक अवकाश प्राप्त अंग्रेज अधिकारी और कांग्रेस के जन्मदाता माने जाते हैं। साल 1912 में उनकी मृत्यु हो जाने पर कांग्रेस ने अपना जन्मदाता और संस्थापक इन्हें ही घोषित किया था।

गोपाल कृष्ण गोखले के अनुसार साल 1885 में ही उनकी सीवा और कोई व्यक्ति कांग्रेस की स्थापना नहीं कर सकता था। लेकिन राजनीतिक उद्देश्य से राष्ट्रीय सम्मेलन का विचार कई व्यक्तियों के मन में उठा जरूर था और वह साल 1885 में चरितार्थ हुआ।

कांग्रेस का लक्ष्य

मूल रूप से जब एलन ऑक्टेवियन ह्यूम ने राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन किया तब इस पार्टी का उद्देश्य भारत की आजादी की लड़ाई लड़ना नहीं था। बल्कि कांग्रेस का गठन देश के प्रबुद्ध लोगों को एक साथ एक मंच पर लाने के उद्देश्य से किया गया था। जिससे कि देश के लोगों के लिए नीतियों के निर्माण में मदद मिल सके। साल 1915 जब महात्मा गांधी भारत लौटे तब उन्हें इस पार्टी की अध्यक्षता सौंपी गई और साल 1919 में गांधी जी कांग्रेस के एक प्रतीक पुरुष बन गए थे। जिसके बाद कांग्रेस पार्टी ने भारतीय स्वाधीनता के संग्राम में भाग लेना शुरू कर दिया।

देश का बंटवारा

पुरानी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस काफ़ी साल पुराना होते हुए भी आज तक कई बार टूटी है और इसके प्रमुख नेताओं ने कई बार इससे नाता भी तोड़ लिया है। जब देश में इमरजेंसी लगाई गई थी, उसके बाद पार्टी ने इंदिरा गांधी को अनुशासन के आरोप में पार्टी से बाहर निकाल दिया था। तब उन्होंने “कांग्रेस आई” नाम से नई पार्टी का गठन किया और इस का चुनाव चिन्ह रखा गया था “पंजा” और इस पार्टी का नाम भी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से बदलकर इंडियन नेशनल कांग्रेस कर दिया गया। कांग्रेस में सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष बनी रहने वाली महिला है सोनिया गांधी। उन्होंने 19 साल तक कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष का पद संभाला है।

आइए जानते हैं साल 1947 जब देश आजाद हुआ उस समय से लेकर अब तक भारत के कौन कौन काँग्रेसी नेता देश के प्रधानमंत्री रहे हैं —

  • साल 1947 में जब देश स्वाधीन हुआ तब से लेकर साल 1964 तक यानि 17 वर्षों तक जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री बने।
  • उसके बाद साल 1964 और साल 1966 में कार्यभार सम्भाला जो सबसे कम था। गुलजारी लाल नन्दा केवल 26 दिन के लिए ही देश के प्रधानमंत्री रहे।
  • इसके बाद साल 1964 से लेकर साल 1966 तक 2 वर्ष लाल बहादुर शास्त्री देश के प्रधानमंत्री रहे।
  • फिर देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी साल 1966 से लेकर 1977 तक और साल 1980 से लेकर साल 1984 तक देश की प्रधानमंत्री रहीं।
  • उसके बाद इंदिरा गांधी के नाती राजीव गांधी साल 1984 से लेकर साल 1989 तक यानि 5 वर्ष भारत के प्रधानमंत्री रहे।
  • उसके बाद साल 1991 से लेकर साल 1996 तक पी.वी.नरसिम्हा राव ने 5 वर्ष भारत में प्रधानमंत्री का कार्यकाल किया।
  • और फिर आखिरी कांग्रेस के प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह थे जो साल 2004 से लेकर साल 2014 तक करीब 10 वर्ष भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।
  • इस तरह से भारत को आजादी मिलने के बाद से भारत में काँग्रेसी नेताओं का कार्यकाल रहा है।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारि —

  • कांग्रेस की पहेली बैठक पूणा (जो अब पुणे हो चूका है) में होने वाली थी, लेकिन वहां पर उस समय हैजा का प्रकोप देखा गया। जिस कारण इस कार्यक्रम को बॉम्बे जो कि अब मुंबई है वहां पर स्थानांतरित किया गया।
  • व्योमेश चंद्र बनर्जी को उमेश चंद्र बनर्जी के रूप में भी जाना जाता है। इनको कांग्रेस की पहली बैठक के पहले अध्यक्ष के रूप में चुना गया था।
  • भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में कांग्रेस पार्टी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कांग्रेस पार्टी ने 15 मिलियन से भी अधिक सदस्य और 70 मिलीयन प्रतिभागियों के साथ मिलकर भारत से शाही ऊप निवेश वादियों को बाहर निकलने का रास्ता दिखाया।
  • स्वतंत्र भारत की सबसे पुरानी सत्ताधारी पार्टी है कांग्रेस पार्टी। ईस पार्टी ने 49 वर्षों तक केंद्र सरकार का नेतृत्व किया है।
  • देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे जनवादी नेता कांग्रेस पार्टी के सदस्य के रूप में ही भारत की बेहतर भविष्य के लिए लगातार संघर्ष किए थे।
  • स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस ने 15 आम चुनावों में जीत हासिल की और चार बार सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व किया।
  • दादाभाई नौरोजी के सुझाव पर ए.ओ. ह्यूम के द्वारा स्थापित भारतीय राष्ट्रीय संघ को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में परिवर्तित किया गया।
  • साल 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में कुल 72 सदस्यों ने हिस्सा लिया था। जिसकी अध्यक्षता व्योमेश चंद्र बनर्जी ने की थी।

भारत के स्वाधीन होने के बाद से इस तरह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने देश का कार्यभार संभाला। इस पोस्ट में हमने आपको भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ी महत्वपूर्ण कई जानकारियां दी है अगर आपको यह पोस्ट अच्छा लगा तो इस पोस्ट को लाइक करें और शेयर करें।

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