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National Farmers Day: क्यों मनाया जाता है किसान दिवस, जानिए किसान दिवस के बारे में।

किसान इस देश के वह लोग हैं जो हमारे लिए खाना उगाते हैं। हमें कभी भी इस बात को नहीं भूलना चाहिए, कि वह किसान है जो दिन रात मेहनत करके अनाज उगाते हैं और वही अनाज खाकर हम अपना जीवन व्यतीत करते हैं। इसीलिए हमें किसानों को कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। राष्ट्रीय किसान दिवस पूरे राष्ट्र भर में बहुत ही उत्साह, जोश, हौसला, रुचि, आनंद के साथ मनाया जाता है। और मनाना भी चाहिए इस दिन हर जगह नए नए कार्यक्रम का आयोजन होता है, और जश्न मनाने के लिए कृषि के ऊपर कई कार्यक्रम जैसे समारोह प्रतियोगिता, सेमिनार का आयोजन किया जाता है। आज के इस पोस्ट में हम आपको किसान दिवस के बारे में जानकारी देने वाले हैं। किसान दिवस क्यों मनाया जाता है, किसान दिवस के पीछे का क्या इतिहास है, किसान दिवस कैसे मनाया जाता है, इस दिन यह दिवस क्यों मनाया जाता है और हमें किस तरह किसानों का सम्मान करना चाहिए इस सबके बारे में भी कई बातें जानेंगे।

कब और क्यों मनाया जाता है किसान दिवस

भारत में राष्ट्रीय स्तर पर हर साल 23 दिसंबर के दिन किसान दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रीय किसान दिवस भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के सम्मान में मनाया जाता है। चौधरी चरण सिंह भारत के पांचवें प्रधानमंत्री थे किसान दिवस वह राष्ट्रीय अवसर है जीस अवसर पर किसान जगह जगह किसान दिवस के कई कार्यक्रम किए जाते हैं और इस दिन पर बड़े ही उत्साह के साथ विभिन्न तरह के जश्न मनाए जाते हैं। किसान को हम भारत की रीढ़ की हड्डी कह सकते हैं इसीलिए किसान दिवस मनाया जाता है, ताकि हमारे देश के किसानों के द्वारा किए गए महान काम को सम्मान दिया जा सके कृषि भूमि के लिए प्रसिद्ध हमारे देश में हर साल 23 दिसंबर को राष्ट्रीय किसान दिवस इसीलिए मनाया जाता है ताकि लोग दो वक्त का खाना खा पाते हैं उन्हें यह याद रह सके कि ऐसे महान लोग हैं जो जिन रात म्हणत करके अनाज उगाते हैं।

चौधरी चरण सिंह बहुत विनम्र और दयालु स्वभाव के थे। और अपने किए गए कई प्रयासों से किसानों में बहुत लोकप्रिय हुए, इस तरह उन्हें किसानों का नेता भी कहा जाने लगा। क्योंकि वह किसानों के हर वक्त किसानों के हित के लिए उनके समस्याओं के लिए काम करते थे। और इसीलिए चौधरी चरण सिंह जयंती आने की चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन 23 दिसंबर को किसान दिवस के रूप में घोषित किया गया। इसीलिए हर साल चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन पर किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। किसान हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है, जिसे तोड़ने पर हमारा देश लूट जाएगा इसीलिए हमारा राष्ट्र चौधरी चरण सिंह की याद में किसान दिवस को मनाता है।

किसान दिवस का इतिहास 

भारत के पांचवें प्रधानमंत्री थे चौधरी चरण सिंह और उन्हीं के सम्मान में पूरे भारतवर्ष में राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जाता है। साल 1979 में 28 जुलाई से साल 1980 के 14 जनवरी तक भारत के प्रधानमंत्री बने चौधरी चरण सिंह बहुत ही छोटे कार्यकाल के लिए भारत के प्रधानमंत्री रहे थे। चौधरी चरण सिंह बहुत ही साधारण और सरल दिमाग वाले व्यक्ति थे उन्होंने बहुत ही सरल जीवन व्यतीत किया था। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भारतीय किसानों के जीवन में सुधार करने के लिए कई नीति की शुरुआत किए थे।

चौधरी चरण सिंह ने भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के द्वारा दिए गए प्रसिद्ध नारा “जय जवान जय किसान” का पालन करते हुए किसानों के हित के लिए कई नीतियों का आरंभ किया था। चौधरी चरण सिंह ने किसानों के पक्ष में विभिन्न लाभकारी नीतियां अपनाई और इसी कारण उनके व्यक्तित्व से बहुत लोग प्रभावित हुए, भारत के सभी किसानों को एक जुट करके बेईमान जमीदारों और धनियों के खिलाफ खड़ा किया था। चौधरी चरण सिंह सरल साधारण थे होने के साथ वह एक सफल लेखक भी थे। उन्होंने कई किताबें भी लिखी है और यह किताबे किसान और उनकी समस्याओं पर अपने विचारों को दर्शाती है। किसानों के जीवन में होने वाले परेशानियों को सुधार करने के लिए उन्होंने विभिन्न साधनों के रूप में बहुत प्रयास किया था।

चौधरी चरण सिंह एक किसान परिवार के थे। इसीलिए उन्होंने भारत के एक सम्मानीय प्रधानमंत्री होने के बावजूद भी बहुत ही सरल जीवन जिया था। आपको तो पता ही है कि हमारा भारतवर्ष गांव की भूमि है जहां अधिकांश लोग गांव में रहते हैं और किसान का काम करके अपना जीवन बसर करते हैं। कृषि ही उनके आय का प्रमुख स्रोत होता है। अभी भी भारतीय आबादी का 70% खेती के जरिए ही होने वाली आए पर निर्भर करता है। भारत वर्ष एक ऐसी भूमि है जहां दिलचस्प कृषि यात्रा देखने को मिलती है। 60 के दशक के दौरान पंजाब और हरियाणा में विकसित हरित क्रांति ने देश की कृषि की तस्वीर को ही बदल कर रख दिया। इससे उत्पादकता में वृद्धि हुई और इस  हमारा भारतवर्ष कृषि में उत्पादित कृषि वस्तुओं पर आत्मनिर्भर हो गया।

National Farmers Day: क्यों मनाया जाता है किसान दिवस, जानिए किसान दिवस के बारे में।

चौधरी चरण सिंह एक आदर्श जाट नेता थे और किसान परिवार से थे यही कारण है कि वे खुद को किसानों से, उनकी समस्याओं से जुड़ा हुआ सोचते थे। और उनके समस्याओं को समाधान करने के लिए उनके समर्थन के लिए भरपूर प्रयास करते थे। जब वे साल 1979 में भारत के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने किसानों के जीवन में सुधार करने के लिए कई बदलाव किए आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत के प्रधानमंत्री के रूप में चौधरी चरण सिंह ने कभी भी भारत के प्रधानमंत्री के रूप में लोकसभा का दौरा नहीं किया। उन्होंने भारत के उप प्रधानमंत्री के रूप में भी काम किए थे जब मेराराजी देसाई का शासन काल था।

साल 1979 में उन्होंने बजट को पेश किया। जिसे किसानों की सभी तरह की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया था। भारतीय किसानों के पक्ष में की गई नीतियां थी महान किसान नेता की पहल उन सभी किसानों के आत्मविश्वास को आज भी बढ़ाती है और उन्हें जमींदार और धनियों के खिलाफ एकजुट होने की शक्ति प्रदान करती है। यही नहीं उन्होंने विधानसभा में प्रसिद्ध बाजार विधेयक भी पेश किया था। विधेयक का उद्देश्य यही था कि जमीदारों के लालच और उनके अत्याचारों के खिलाफ किसानों की सुरक्षा की जाए।

चौधरी चरण सिंह के जन्म दिवस पर हर साल किसान दिवस मनाया जाता है। यह दिवस खासकर उन राज्यों में मनाया जाता है जहां मुख्य रूप से खेती होती है, जैसे कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब इत्यादि। इस दिन किसान परिवार और ग्रामीण समुदाय के सारे सदस्य अपने प्यारे नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए विभिन्न प्रकार के कृषि समारोहों का आयोजन करते हैं। विभिन्न प्रकार की बहस होती है, वाद विवाद कार्यक्रम होते हैं, चर्चा होती है, प्रश्नोत्तरी कंपटीशन होता है, कई तरह की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। किसानों से संबंधित कई मुद्दों पर भी चर्चाए किए जाते हैं और इसमें भाग लेने वाले व्यक्ति को सुझाव और समाधान साझा करने के लिए आमंत्रित किए जाते हैं। वहीं राज्य सरकार इस दिन का उपयोग किसानों के पक्ष में नए जिलों को लागू करने के लिए करती है। इसके अलावा किसानों के प्रतिनिधियों को भी समारोह में आमंत्रित किया जाता है ताकि अपने मुद्दों और समस्याओं को सामने रखने के लिए प्रेरित किया जा सके।

इसके अलावा किसान दिवस के समारोहों को मनाने के दौरान कृषि वैज्ञानिक और कृषि के विशेषज्ञों से किसानों के लाभ के लिए खेती के क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के सूचना कार्यक्रमों का भी आयोजन करते हैं। कृषि के महान विशेषज्ञ विभिन्न तरह के अलग-अलग सुझाव देते हैं, ताकि किसान उत्पादन मैं वृद्धि कर सके। कम लागत देकर अधिक मुनाफा ले सके। कृषि विशेषज्ञ कृषि उत्पादन में खराब नतीजे को रोकने के लिए सुझाव साझा करते हैं। ऐसे कार्यक्रमों में किसानों का भाग लेना किसानों के लिए ही बहुत फायदेमंद होता है। खेती के क्षेत्र में विकास को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार के साथ ग्रामीण विकास संघ द्वारा भी विभिन्न प्रकार के कार्यशाला होते है जिसमें सेमिनार, प्रदर्शनी आयोजित किए जाते हैं। साथ ही कृषि विभाग के अधिकारी कृषि वैज्ञानिक गांव का दौरा करके किसानों और उनसे संबंधित मुद्दों को समझते हैं। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के बीमा योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं, ताकि पैसे लेकर खेती कर सके।

केवल 1 दिन के लिए पूरे भारतवर्ष में मनाया जाने वाला यह दिवस केवल किसानों को उनके हौसले नहीं बनाते। बल्कि हर एक व्यक्ति के मन में किसानों के प्रति सम्मान पैदा करती है। उनके कामों को दिखाती है उनके महत्व को बताती है,जो लोग आसानी से पैसों से खाना खरीद कर खा लेते हैं लेकिन कभी यह नहीं सोचते कि यह खाना आखिर आया कहां से है। जरूरत पड़ने पर वह खाना वेस्ट भी कर देते हैं यह सोचकर की पैसे देकर वे फिर से खरीद लेंगे। लेकिन किसानों के उस मेहनत का कोई नहीं सोचता जो किसान दिन-रात मेहनत करके खेतों में उगाते हैं। किसान हर एक अनाज के साथ हर एक व्यक्ति की भूख मिटाते हैं।

किसान भोजन और अन्य विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों को उगाते हैं, जो पूरे देश में वितरित होता है। शहरी आबादी भी ज्यादा हद तक पूरे भारत में किसानों के द्वारा की गई खेती पर ही निर्भर करती है। इस तरह से यह बहुत महत्वपूर्ण है कि सरकार स्वस्थ और समृद्धि से भरपूर खेती के लिए पूरे भारत में रह रहे किसानों के लिए अधिक उत्पादक परिस्थितियों का विकृत करें। सरकार को खेती के उन्नत तकनीकी के बारे में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।

राष्ट्रीय किसान दिवस उस दिन मनाया जाता है जब मिट्टी के पुत्र माने जाने वाले चौधरी चरण सिंह का जन्म हुआ था। क्योंकि वह किसानों के हित की चिंता करते थे, हर समय के लिए काम करना पसंद करते थे। इसीलिए राष्ट्रीय किसान दिवस को एक स्वतंत्र और मजबूत भारतीय किसानों का सम्मान करने के दिन के रूप में घोषित किया गया। ताकि पूरा राष्ट्र महान उत्साह के साथ इस दिन को मना सके, और चौधरी चरण सिंह के मन को शांति मिल सके। इस दिन सोशल मीडिया पर कई तरह के संदेश शेयर किए जाते हैं, आज की युवा पीढ़ी को भी देखा जाए तो वे भारतीय किसानों के होने वाली समस्याओं से परेशान रहते हैं उनकी हालात को सुधारने की कोशिश करते हैं। और करनी भी चाहिए आप और हम जैसे सब लोगों को किसानों के हित के लिए हमेशा खरा होना चाहिए। आखिर किसान ही तो वह हैं जिनके महान मेहनत के वजह से हम दो वक्त का खाना खा पाते हैं। ऐसे में सरकार भी समय-समय पर किसानों को दिए गए ऋणों को माफ कर देती है और विभिन्न प्रकार के लोन भी उपलब्ध कराती है।

 लेकिन  हम सरकार और किसान के भरोसे नहीं बैठ सकते, हमें भी कुछ ना कुछ करना चाहिए। लेकिन अगर आप पूछेंगे कि हम क्या कर सकते हैं तो हम आपसे यही कहेंगे कि आप जो भी खाना लेते हैं उसे जरूरत के हिसाब से ही उपयोग करें। क्योंकि हर एक अनाज को किसान बहुत मेहनत के साथ उगाते हैं। हमें कभी भी अनाज का अपमान नहीं करना चाहिए। जरूरत के अनुसार बनाना चाहिए और जरूरत के अनुसार खाना को प्लेट में लेना चाहिए। खाना वेस्ट करके हम हर उस किसान का अपमान करते हैं। जो रात दिन मेहनत करके धूप और बारिश से जुंझ कर परिश्रम करके अनाज उपजाती है। इसीलिए हमें अनाज का सम्मान करना चाहिए, भोजन को या किसी भी तरह के खाद्य पदार्थो को फेंकना नहीं चाहिए। दुनिया में ऐसे कितने ही लोग हैं जो भूखे पेट सो जाते हैं, हमारी किस्मत अच्छी है कि हम दो वक्त का खाना खा पाते हैं। हमें इस चीज का सम्मान करते हुए भोजन का और अन्य किसी भी खाद्य पदार्थ का सम्मान करना ही हमारा बहुत बड़ा योगदान होगा, हर उस किसान के लिए जो साल भर दिन रात मेहनत करते हैं।

क्योंकि सरकार द्वारा कई नीतियों की घोषणा करने और खेती के सुधार करने के लिए प्रौद्योगिकी में सुधार करने के बावजूद भी हमारे भारत में कृषि का हालत अभी भी बहुत खराब है। हर साल भारतीय किसानों को प्राकृतिक संकटों का सामना करना पड़ता है। जैसे, कि सुखा, खराब मौसम, खराब गुणवत्ता वाले बीज आदि से लड़ना पड़ता है। हालांकि भारत के किसानों को सरकार से पिछले कुछ सालों में बहुत राहत मिल रही है। जैसे कि उत्पादन के लिए उचित मूल्य प्राप्त करना खेती के लिए नैतिक तकनीकी का उपयोग करने की सुविधा देना, कृषि ऋणों पर छूट देना इत्यादि। लेकिन अभी भी भारतीय किसान और उनकी कृषि पद्धतियों की स्थिति में सुधार करने के लिए बहुत कुछ किया जाना चाहिए। तभी हमारा देश सही तरह से विकसित हो पाएगा।

Jhuma Ray
नमस्कार! मेरा नाम Jhuma Ray है। Writting मेरी Hobby या शौक नही, बल्कि मेरा जुनून है । नए नए विषयों पर Research करना और बेहतर से बेहतर जानकारियां निकालकर, उन्हों शब्दों से सजाना मुझे पसंद है। कृपया, आप लोग मेरे Articles को पढ़े और कोई भी सवाल या सुझाव हो तो निसंकोच मुझसे संपर्क करें। मैं अपने Readers के साथ एक खास रिश्ता बनाना चाहती हूँ। आशा है, आप लोग इसमें मेरा पूरा साथ देंगे।

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