Wednesday, May 18, 2022
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विजय दिवस: साल 1971 के युद्ध के शहीदों को पीएम नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि, अगले एक साल तक इस विजय का जश्न मनाया जायेगा।

विजय दिवस: साल 1971 के युद्ध के शहीदों को पीएम नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि, अगले एक साल तक इस विजय का जश्न मनाया जायेगा। भारतीय सेना हमारे देश की शान है। इतिहास गवांह है कि भारतीय सेना ने हमेशा ही अपना सब कुछ न्योछावर कर के देश की रक्षा की है और हर समय देश को जीत दिलाई है। और सबसे बड़ी जीत साल 1971 में दिलाई थी, जब पाकिस्तान ने भारत पर किए हमले का भारतीय जवानों ने मुंह तोड़ जवाब दिया था। 16 दिसंबर भारत-पाकिस्तान की उसी विजय को मनाया जाता है, जब पाकिस्तान ने भारत के सामने घुटने टेक दिए। इस दिन उन महान शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है जिन्होंने देश की खातिर अपने आप को कुर्बान कर दिए । 

भारतीय सेना के शौर्य की मशाल हुई रौशन

भारतीय सशस्त्र बलों के ऐतिहासिक शौर्य, वीरो व पराक्रम सैनिको के सम्मान में कल का दिन बहुत महत्वपूर्ण था। यह दिन याद दिलाती है उन महान वीर सेनानियों को जिन्होंने हंसते हंसते अपनी जान पर खेलते हुए देश को विजय दिलाने की खातिर न्योछावर हो गए। हमारे भारतीय सैनिको ने साल 1971 में हुए भारत पाकिस्तान के युद्ध में भारत को विजय दिलाई। इसीलिए हर साल 16 सितंबर को “विजय दिवस” के रूप में मनाया जाता है। इस दिन हुए युद्ध के परिणाम स्वरूप पाकिस्तान ने भारत के सामने हार मान लिया। पीएम नरेंद्र मोदी ने साल 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारत के जितने के 50 साल पूरे होने के अवसर पर 16 सितंबर साल 2020 को राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की अमर ज्योति पर “स्वर्णिम विजय मशाल” प्रज्वलित कीए। 

नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचे PM नरेंद्र मोदी और  राजनाथ सिंह व तीनों सेना के प्रमुख्य  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के में हुए शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित किए। इस मौके पर उनके साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद थे। रक्षा मंत्री ने नेशनल वॉर मेमोरियल पर PM नरेंद्र मोदी की अगुवानी की। इसके अलावा वहां चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ(CDS) बिपिन रावत और सेना के तीनों अंगों के प्रमुख मौजूद सभी ने साल 1971 के युद्ध में हुए जवान शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

नेशनल वॉर मेमोरियल में प्रज्वलित स्वर्णिम विजय मशाल   

विजय दिवस: साल 1971 के युद्ध के शहीदों को पीएम नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि, अगले एक साल तक इस विजय का जश्न मनाया जायेगा।
विजय दिवस: साल 1971 के युद्ध के शहीदों को पीएम नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि, अगले एक साल तक इस विजय का जश्न मनाया जायेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल वर मेमोरियल की अखंड ज्योति से विजय मशाल को प्रज्वलित किया और फिर विजय ज्योति यात्रा की शुरुआत की। विजय ज्योति यात्रा में चार विजय मसाले शामिल है। यह विजय ज्योति यात्रा एक साल में पूरे देश की भ्रमण करती है विजय ज्योति यात्रा साल 1971 युद्ध के पश्चात परमवीर, महावीर चक्र विजेताओं के गांव भी जाएगी उसके बाद साल 1971 का युद्ध जिन क्षेत्रों में लड़ा गया था  उन क्षेत्रों में भी विजय ज्योति यात्रा जाएगी और एक साल बाद यह यात्रा दिल्ली में पूरी होगी।

भारतीय शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “विजय ज्योति यात्रा” निकाली यह यात्रा देश के कोने कोने में जाएगी। 16 दिसंबर साल 1971 के दिन ही पाकिस्तानी सेना के तत्कालीन प्रमुख जनरल खान नियाजी ने 93000 सैनिकों के साथ भारतीय सेना के सामने बिना कोई शर्त रखे आत्मसमर्पण कर दिया था। इस ऐतिहासिक घटना ने ही पाकिस्तान के दो टुकड़े और एक नए बांग्लादेश के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया।    

विजय दिवस पर रवाना हुई विजय ज्योति यात्रा 

रक्षा मंत्रालय राजनाथ सिंह की ओर से जारी किए एक बयान में कहा गया कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर लगातार जलती रहने वाले जोत से प्रज्वलित इन चार विजय मसालों को साल 1971 के युद्ध के परम वीर चक्र और महावीर चक्र विजेताओं के गांव के साथ देश के विभिन्न भागों में ले जाया जाएगा। इसके अलावा साल 1971 के युद्ध स्थलों की मिट्टी को नई दिल्ली के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में लाया जाएगा। ताकि सबको यह याद रह सके कि 16 सितंबर के दिन भारत में विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन पाकिस्तान के विरुद्ध साल 1971 में भारतीय वीरों ने भारत को जीत दिलाई थी और एक देश के रूप में बांग्लादेश अस्तित्व में आया था।

भारतीय के विजय का एक ऐतिहासिक दिन

विजय दिवस: साल 1971 के युद्ध के शहीदों को पीएम नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि, अगले एक साल तक इस विजय का जश्न मनाया जायेगा।
विजय दिवस: साल 1971 के युद्ध के शहीदों को पीएम नरेंद्र मोदी ने दी श्रद्धांजलि, अगले एक साल तक इस विजय का जश्न मनाया जायेगा।

भारत के इतिहास में विजय दिवस सबसे बड़ी विजय है क्योकि साल 1971 में पाकिस्तान के 93000 सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था इस अवसर के 50 साल पुरे होने पर उत्सव का आयोजन किया गया । द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यह देश के दुश्मनों का सबसे बड़ा समर्पण रहा। और जीन देश के जवानों, पराक्रमी वीरों के कारन यह संभव हुवा उनके शहीद होने के 50 साल बाद “विजय ज्योति यात्रा” निकाल कर उन जवानों को श्रद्धांजलि दी गयी। ताकि युद्ध से जुड़ी जानकारियों को देश के कोने कोने तक पहुंचाया जाए। यह एक कार्यक्रम है ताकि युद्ध में हुए देश के जवानो के बलिदान व साहस उनके शौर्य की गाथा अगली पीढ़ी तक पहुंच सके और आने वाली पीढ़ी देश के महान योद्धाओं को ना भूल पाए।

पाकिस्तान कैसे भूलेगा सबसे बड़ी पराजय 

पाकिस्तान ने जब जब भारत से टकराने की कोशिश की तब भारतीय सेना ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है और उन्हें उनकी औकात बताई है। पाकिस्तान ने बंटवारे के बाद से ही भारत के साथ चार युद्ध लड़े और हर बार भारतीय सेना ने पाकिस्तान को हार का स्वाद चखाया है। और साल 1971 का भारत से टकराव पाकिस्तान को सबसे ज्यादा भारी पड़ा। इस युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बांट दिया आज ही के दिन पाकिस्तान के 93000 सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था इस ऐतिहासिक विजय को 50 साल पूरे होने पर भारत एक यादगार वर्ष के तौर पर मनाया जा रहा है।

क्यों हुवा था साल 1971 भारत-पाक का युद्ध 

लाखों की तादाद में पूर्वी पाकिस्तान के बंगला भाषी लोग भारत के तरफ आने लगे और भारत में शरण मांगने लगे। यह लोग भारत के पश्चिम बंगाल, असम, उड़ीसा जैस स्थानों में शरण लेने लगे। भारत के लिए इतनी बड़ी संख्या में लोगों को शरण देना मुश्किल हो गया तब उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी यह सोचने पर मजबूर हो गई कि इतनी बड़ी संख्या में आने वाले शरणार्थियों को उनकी स्थाई सदन दिलानी होगी। उस समय पाकिस्तान का जनरल इक्का खान वहां के लोगों पर इस कदर जुल्म कर रहा था कि उसे वहां के लोग बंगाल का कसाई कहने लगा।  

साल 1971 भारत-पाक  लड़ाई की शुरुआत  

3 दिसंबर साल 1971 शाम के 5:00 बजे पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने भारत के 11 एयरवेसो पर एक ही साथ हमला कर दिया। भारत और पाकिस्तान के बीच 25 साल के अंदर ही तीसरा सबसे बड़ा युद्ध शुरू हो गया। इस युद्ध की सबसे बड़ी वजह थी पाकिस्तानी सेनाओं का पूर्वी पाकिरविस्तान के लोगों पर जुल्म . साल 1971 में लाखों की संख्या में बांग्लाभाषी लोग भारत में शरण लेने लगे। तब इंदिरा गांधी ने पूर्वी पाकिस्तान के आजादी को समर्थन किया। और पूरा पूर्वी पाकिस्तान पाकिस्तानी  फौजोके के जुल्मों के खिलाफ हो गया। बंगालियो की जनसेना मुक्तिवाहिनी का साथ देने के लिए मित्र वाहिनी यानी कि भारतीय सेना मैदान में उतर गई। दिल से युद्ध शुरू करने के राजनीतिक दबाव होने के बावजूद भी आर्मी चीफ सैम मानेकशॉ ने पाकिस्तान पर हमले करने के लिए सही समय का इंतजार किया और लड़ाई शुरू होने के पहले 3 दिनों में ही भारत ने पूर्वी पाकिस्तान की वायुसेना और नौसेना दोनों को तबाह कर दिया था।

इंडियन एयर फोर्स के विमानों ने पाकिस्तान पर 4000 से ज्यादा उड़ानें भरी और नुकसान से बचने के लिए पाकिस्तान एयर फोर्स ने अटैक करना ही बंद कर दिया। भारतीय नौ सेना ने भी पाकिस्तान पर दो घातक हमले किए 3 और 4 दिसंबर को पाकिस्तानी पनडुब्बी गाजी को विशविशाखापत्तनम बंदरगाह में डूबा दिया। करांची में पाकिस्तानी नेवी हेड क्वार्टर में हमला इतना घातक था कि तेल डिपो में लगी आग 7 दिनों तक जलती रही। इससे पहले पाकिस्तान साल 1947 और 1961 की लड़ाई हार चुका था फिर भी इस गलतफैमी में था कि भारत इस लड़ाई के लिए तैयार नहीं है।

फिर क्या पाकिस्थान का यह भ्रम भी भारत ने दूर कर दिया। उस समय पूर्वी पाकिस्तान सरकार की एक मीटिंग ढाका के गवर्नमेंट हाउस में होने वाली थी जिसकी खबर भारतीय सेना को मिल गई। लेकिन उस समय भारतीय सेना के पास ना तो हमले की तैयारी करने के लिए समय था और ना ही कोई नक्शा, बस एक टूरिज़्म मैन था। इसके बावजूद भी भारतीय वायु सेना का टारगेट इतना सही हुआ कि पूर्वी पाकिस्तान के गवर्नमेंट हाउस की छत तक उड़ गई और कई महीनों से भारतीय सेना के साथ लड़ने की डींग हांकने वाले जनरल लियाज़ी का हौसला भी उसी के साथ चूर हो गया। पूर्वी पाकिस्तान को आजादी दिलाने की लड़ाई में भारत के 3 हज़ार 851 जवान शहीद हो गए और वही पाकिस्तान के 9 हज़ार से भी ज्यादा सैनिक मारे गए थे। भारत ने पाकिस्तान को लगातार तीसरी बार युद्ध में हरा दिया और पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए।

विजय दिवस इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि हमारी आने वाली पीढ़ी आने वाली जनरेशन को हमें यह सौगात देनी चाहिए ताकि भारतीय सेना के अदम्य साहस, अदम्य बलिदान की कहानी से वे अवगत हो सके। उस महा विजय के स्वर्ण कथा के बारे में आने वाली पीढ़ी को जानकारी होनी चाहिए। इस देश के सेना ने ना केवल दूसरों की मदद की बल्कि अपना बलिदान देकर दूसरों को न्याय दिलाया है।

केवल उस समय की भारतीय सेना ही बहादुर नहीं थी बल्कि आज भी हमारे देश के भारतीय सेना इस तरह ही अदम्य साहस के साथ हर एक परेशानी का सामना करते हैं और जरूरत पड़ने पर बलिदान भी देती हैं।

विजय दिवस बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐसा कभी इतिहास में नहीं हुआ कि विरुद्ध सेना के 93 हज़ार सैनिक युद्ध बंदी हुए हो। साल 1971 की लड़ाई इसीलिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि दो फंड पर लड़ाई हो रही थी। जहां एक तरफ भारतीय सेना बांग्लादेश जो कि पहले पाकिस्तान में ही था वहां पर जाकर पाकिस्तानी सेना से लड़ाई कर रही थी। उतने में ही पाकिस्तानी सेना ने भारत के पश्चिमी सीमा पर आक्रमण कर दिया। उन्हें यह लगा कि दो तरफ से आक्रमण होने पर भारतीय सेना लड़ाई लड़ना छोड़ देगी और उनके सामने हार मान जाएगी। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ भारतीय सेना ने दोनों फंड की लड़ाई 14 दिनों में ही निपटा कर जीत हासिल कर ली।

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Jhuma Ray
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नमस्कार! मेरा नाम Jhuma Ray है। Writting मेरी Hobby या शौक नही, बल्कि मेरा जुनून है । नए नए विषयों पर Research करना और बेहतर से बेहतर जानकारियां निकालकर, उन्हों शब्दों से सजाना मुझे पसंद है। कृपया, आप लोग मेरे Articles को पढ़े और कोई भी सवाल या सुझाव हो तो निसंकोच मुझसे संपर्क करें। मैं अपने Readers के साथ एक खास रिश्ता बनाना चाहती हूँ। आशा है, आप लोग इसमें मेरा पूरा साथ देंगे।
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