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क्या सरदार वल्लभ भाई पटेल के बारे में इतना सबकुछ आपको पता है: जानिए एक लौह पुरुष की कहानी।

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर साल 1875 में गुजरात के नडियाद में एक जमींदार परिवार में हुआ था।सरदार बल्लभ भाई पटेल जी ने लंदन जाकर बैरिस्टर की पढ़ाई की थी और वहां से वापस भारत में आकर अहमदाबाद में महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर भी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में आत्मा नियोग करने लगे। आज जो हमारे भारतवर्ष की जो छवि है इसमें सरदार पटेल जी का विशेष योगदान है। उनके जन्मदिन पर उनके जयंती के रूप में मौके पर उनको पूरा देश याद करता है। सरदार वल्लभ भाई पटेल पेशे से एक वकील थे और  भारतीय संघ में उन्होंने 562 छोटी बड़ी रियासतों का विलीनीकरण करके भारतीय एकता का निर्माण किया था। भारत को एक राष्ट्र बनाने में वल्लभभाई पटेल का विशेष योगदान है। उनके विचार आज भी लोगों को अंदर से प्रेरणा देती हैं और उनके विचारों पर चलकर लोग अपना जीवन बदल सकते हैं। आज हम आपको सरदार वल्लभभाई से जुड़ी कुछ बातें बताएंगे और साथ ही उनके कुछ अनमोल विचारों के बारे में भी बताएंगे। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विचार

सरदार वल्लभ भाई के पटेल के जयंती 2020 पर देश के प्रधानमंत्री वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहां “आज हम एक तिरंगे के अंदर कश्मीर से कन्याकुमारी तक की एकता देख रहे हैं हिमालय से लेकर सागर तक जो एक हिंदुस्तान देख रहे हैं उसका एकमात्र श्रेया जाता है सरदार वल्लभभाई पटेल को। सरदार वल्लभ भाई पटेल के कारण आज हम एकता से हिंदुस्तान में रह रहे हैं।

सरदार वल्लभ भाई पटेल का पारिवारिक जीवन

वल्लभभाई के माता-पिता धर्म परायण व्यक्ति थे। वल्ल्लभ भाई के 5 भाई और एक बहन थी उनका विवाह केवल 16 वर्ष की आयु में ही हो गई थी। फिर भी उन्होंने अपनी पढाई जारी रखी 22 साल की उम्र में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास किया, और जिला अधिवक्ता के परीक्षा में भी उत्तीर्ण हुए। जिससे उन्हें आगे वकालत करने की अनुमति मिली। उसके बाद साल 1908 में सरदार पटेल की पत्नी का देहांत हो गया जिस समय उनके दो बच्चे थे एक लड़की और एक लड़का पत्नी के मृत्यु के बाद उन्होंने एक विधुर का जीवन व्यतीत किया।

फिर साल 1910 में वल्लभ भाई लन्दन गए और वहां से वकालत की पढ़ाई पूरी करके साल 1913 में वे वापस लंदन से भारत लौटे। उसके बाद तेजी से उन्नति करते हुए सरदार पटेल अहमदाबाद अधिवक्ता बार में अपराध कानून के अग्रणी वरीस्टर बन गए। तब तक सरदार वल्लभभाई पटेल अपने अंग्रेजी तौर तरीके और अंग्रेजी पहनावे के लिए जाने जाते थे।

क्या सरदार वल्लभ भाई पटेल के बारे में इतना सबकुछ आपको पता है: जानिए एक लौह पुरुष की कहानी।

सरदार वल्लभ भाई पटेल का राजनिति और आंदोलन से जुड़ाव 

साल 1917 तक तो सरदार पटेल राजनीतिक मामले में उदासीन थे लेकिन 1917 में महात्मा गांधी के बातो और कामो से प्रभावित होने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनके रास्ते अब बदल चुके हैं। तब वल्लभ भाई पटेल महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन में जुड़ गए और तब तक जुड़े रहे जब तक यह भारतीय लोगों को अंग्रेजों से छुटकारा दिलाने के लिए सक्षम था। वल्लभ भाई पटेल महात्मा गांधी के नैतिक विचारों और विश्वास के साथ जुड़े रहे उसके बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल ने अपने जीवन शैली और वेशभूषा में भी परिवर्तन ले आए। वे अहमदाबाद के गुजरात क्लब में चैंपियन के लिए भी विख्यात थे लेकिन देश के लिए सत्याग्रह में जुड़ने के बाद उन्होंने गुजरात क्लब को भी छोड़ दिया और भारतीय किसानों के समान सफेद वस्त्र पहनने लगे साथ ही भारतीय खानपान भी अपना लिए।

स्वतंत्रता आंदोलन में सरदार वल्लभ भाई पटेल का पहला योगदान।

सरदार वल्लभभाई पटेल का पहला और सबसे बड़ा योगदान साल 1918 में खेड़ा संघर्ष में रहा था। साथ ही उन्होंने साल 1928 में हुए बारदोली सत्याग्रह किसान आंदोलन का भी सफल नेतृत्व किया था। सरदार वल्लभ भाई पटेल के योगदान भुलाए नहीं जा सकते स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी देशी रियासतों का एकीकरण करके भारत को अखंड भारत के रूप में निर्माण करने में उन्होंने विशेष महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्हें व्यवहारिक निर्णायक माना जाता था और अंग्रेज उन्हें अपना एक बड़ा दुश्मन समझते थे। एक समय जब सरकार किसानों से 30% लगान वसूल करती थी ऐसे में सरदार वल्लभभाई पटेल ने किसानों के तरफ से सरकार को 30% लगान से 6% लगान लेने के लिए मजबूर किए थे। 

स्टेचू ऑफ यूनिटी (STATUE OF UNITY) 

31 अक्टूबर साल 2013 को सरदार वल्लभ भाई पटेल के 137 वी जन्म तिथि यानी जयंती पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने गुजरात के नर्मदा जिले में बल्लभ भाई पटेल के स्मारक का शिलान्यास किया था। इसका नाम रखा गया था एकता की मूर्ति (Statue of Unity) स्टैचू ऑफ यूनिटी और यह मूर्ति स्टैचू ऑफ लिबर्टी (Statue of Liberty) से दोगुनी ऊंचाई पर बनाई गई है। स्टैचू ऑफ लिबर्टी 46 मीटर 151 फीट की है जबकि स्टैचू ऑफ यूनिटी 182 मीटर 597 फीट ऊंची है। गुजरात में नर्मदा के सरदार सरोवर बांध के सामने सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर 597 फीट ऊंची प्रतिमा निर्माण किया गया है जिसे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के नाम से जाना जाता है। आपको बता दें कि यह स्टैचू ऑफ यूनिटी विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा कहलाती है और इस प्रतिमा को एक 31 अक्टूबर साल 2018 को समर्पित किया गया था। क्योंकि 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती होती है।

वल्लभ भाई पटेल को मिली थी सरदार की उपाधि

सरदार वल्लभ भाई पटेल ने साल 1928 में बारदोली के बड़े हुए भूमि कर के खिलाफ वहां के भूमि पतियों के संघर्ष का सफल नेतृत्व किया था। सरदार वल्लभ भाई पटेल का नाम वल्लभ भाई पटेल था उनको सरदार की उपाधि दी गई थी और यह उपाधि उन्हें महिलाओं ने दिया था। दरअसल बारदोली सत्याग्रह आंदोलन के सफल होने के बाद वहां की महिलाओं ने वल्लभ भाई पटेल उनके सफल नेतृत्व के कारण  उनको सरदार की उपाधि प्रदान की थी जिसके बाद उन्हें सरदार वल्लभ भाई पटेल के रूप में लोग जानने लगे। जिसके बाद से पूरे देश में एक राष्ट्रवादी नेता के रूप में उनकी पहचान बनती चली गई। उन्हें व्यवहारिक निर्णायक माना जाता था और अंग्रेज उन्हें उनका एक बड़ा दुश्मन समझते थे।

क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय एकता दिवस (NATIONAL UNITY DAY) 

सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्म दिवस पर राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि किसी भी देश का आधार उसकी एकता और अखंडता से बनी होती है और उसी एकता पर देश का भविष्य टिका होता है। सरदार वल्लभभाई पटेल देश की एकता के सूत्रधार थे इसी कारण 31 अक्टूबर उनके जन्मदिन पर राष्ट्रीय एकता दिवस (NATIONAL UNITY DAY) के रूप में मनाया जाता है। राष्ट्रीय एकता दिवस पहली बार साल 2014 में वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर मनाई गई थी।

सरदार वल्लभ भाई पटेल को भारत रत्न से सम्मानित किया गया

सरदार वल्लभ भाई पटेल का निधन 15 दिसंबर साल 1950 को मुंबई में हुआ था और उनके मरणोपरांत यानी परलोक प्राप्ति के बाद साल 1991 में वल्लभ भाई पटेल को भारत का सर्वोत्तम पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। साथ ही अहमदाबाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा रखा गया था। गुजरात के वल्लभनगर में सरदार पटेल यूनिवर्सिटी भी उन्हीं के नाम पर है।

(IRONMAN OF INDIA)भारत के लौह पुरुष


 

क्या सरदार वल्लभ भाई पटेल के बारे में इतना सबकुछ आपको पता है: जानिए एक लौह पुरुष की कहानी।

सरदार वल्लभभाई पटेल को उनके नीतिगत दृढ़ता के लिए भारत के लौह पुरुष की उपाधि दी गई थी। और यह उपाधि उन्हें भारत के बापू महात्मा गांधी ने प्रदान की थी लोह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल केवल स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले और भारत को एक राष्ट्र बनाने वाले व्यक्ति ही नहीं वह भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री भी रह चुके हैं।

सरदार वल्लभ भाई पटेल के कुछ अनमोल वचन

  •  आपको अपना अपमान सहने की कला आनी चाहिए।
  • आज हमें ऊंच-नीच, अमीर गरीब, जाति पंथ के भेदभाव को समाप्त कर देना चाहिए।
  • अगर हमारी करोड़ों की दौलत भी चली जाए या फिर हमारा पूरा जीवन बलिदान हो जाए फिर भी हमें ईश्वर में विश्वास और उनके सत्य पर विश्वास रखकर हमेशा प्रसन्न रहना चाहिए।
  • कठोर से कठोर ह्रदय को भी प्रेम से वाश में किया जा सकता है। क्योंकि प्रेम तो प्रेम है माता को अपना काना-कूबड़ा बच्चा भी सुंदर लगता है और उससे वह असीम प्रेम करती है।
  • संस्कृति समझ बूझकर शांति पर रची गई है। मरना होगा तो वे अपने पापों से मरेंगे जो काम प्रेम, शांति से होता है ,वह भेदभाव से नहीं हो पाता।
  • अधिकार मनुष्य को तब तक अंधा बनाए रखेगा, जब तक मनुष्य इस अधिकार को प्राप्त करने के लिए मूल्य ना चुका दे।
  • जब जनता एक हो जाती है तब उसके सामने क्रूर से क्रूर शासन भी नहीं टिक पाता, अगर जात पात के, ऊंच-नीच के भेदभाव को भूलाकर सब एक हो जाए 
  • आपकी अच्छाई आपके मार्ग में बाधक है इसीलिए अपनी आंखों को क्रोध से लाल होने दीजिए और अन्याय का सामना मजबूत हाथों से कीजिए।
  • शक्ति के अभाव में विश्वास व्यर्थ है होता है विश्वास और शक्ति दोनों किसी महान काम को करने के लिए आवश्यक होते हैं।
  • मनुष्य को ठंडा रहना चाहिए क्रोध नहीं करना चाहिए। लोहा भले ही गर्म हो जाए हथौड़े को तो ठंडा ही रहना चाहिए नहीं तो वह स्वयं अपना हत्या जला डालेगा। कोई भी राज्य प्रजा पर कितना ही गर्म क्यों ना हो जाए अंत में तो उसे ठंडा होना ही पड़ेगा।

15 दिसंबर साल 1950 में 75 साल की उम्र में सरदार वल्लभभाई पटेल की मृत्यु हो गई। लेकिन भारत के प्रति उनके योगदान और उनकी विचारधारा हमेशा ही हम सब भारतीयों के मन में जिंदा रहेगी। सरदार बल्लभ भाई पटेल का विचार था कि भारतीय प्रशासनिक सेवाएं देश को एक रखने में अहम भूमिका निभाएगी उन्होंने भारत के प्रशासनिक सेवाओं को मजबूत बनाने में काफी जोड़ दिया था और उन्होंने ही सिविल सेवाओं को स्टील फ्रेम कहा था।

Jhuma Ray
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