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देखते ही देखते माँ दुर्गा के विदाई का समय भी आ गया: कन्या पूजन कब करनी है, पारण कब करना है और नवरात्रि के कलश का क्या करना है।

नवरात्रि के दिनों में अष्टमी और नवमी तिथि कन्या पूजन के लिए शुभ होता है। वैसे तो नवरात्रि का पर्व पूरे 9 दिनों का होता है। लेकिन इस बार अष्टमी, नवमी और दशमी तिथि को लेकर लोगों में कुछ भी स्पष्ट नहीं है। आज हम आपको बताने वाले हैं कि इस साल 2020 में नवरात्रि के पावन पर्व का अष्टमी, नवमी और दशमी तिथि किस किस दिन यानी के किस समय से शुरू होगी और कब समाप्त होगी। साथ ही नवरात्री के पवन अवसर पर आपने जो कलश स्थापना किया है उस कलश के बारे में भी कुछ जानकारी देने वाले हैं।  इसके अलावा हम आपको यह भी बताएंगे कि आपने जो कलश स्थापना किया है उस कलश के जल को आपको क्या करना है। इन सभी जानकारियो के बारे में आज हम आपको बताने वाले है।

नवरात्रि के नौ दिन

नवरात्री के नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा की जाती है। शास्त्रों में माना जाता है कि मां दुर्गा शक्ति की देवी होती हैं इसीलिए दुर्गा माता का यह पर्व शक्ति की उपासना का पर्व कहलाता है। हर साल नवरात्रि सितंबर के महीने में ही होती है लेकिन अधिक मास लगने के कारण इस बार तिथियों में बदलाव हुए है यानि नवरात्रि तिथि आगे बढ़ गई है। साल 2020 में नवरात्रि की कलश स्थापना हुई है 17 अक्टूबर को। तो इस हिसाब से कन्या पूजन, नवमी यानी कि नवरात्रि का नौवां दिन 25 अक्टूबर को पड़ता है। लेकिन इस साल ऐसा नहीं है। इस साल 25 अक्टूबर को नवमी तिथि नहीं रहेगी यानि 25 अक्टूबर को दशमी की तिथि रहेगी। 

तो आइए जानते हैं कि इस साल 2020 अष्टमी, नवमी और दशहरा यानी की दशमी तिथि कब से शुरू होगी और कब समाप्त होगी।   

* साल 2020 में अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी 23 अक्टूबर शुक्रवार के दिन सुबह 6:00 बजकर 57 मिनट से और अष्टमी तिथि समाप्त होगी 24 अक्टूबर शनिवार सुबह 6:00 का 58 मिनट पर।

* नवमी तिथि प्रारंभ होगी 24 अक्टूबर सुबह 6:00 बजकर 58 मिनट पर और समाप्त होगी 25 अक्टूबर सुबह 7:00 बजकर 41 मिनट पर।

* 25 अक्टूबर रविवार सुबह 7:00 बजकर 41 मिनट से दशहरा यानी की दशमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी जो 26 अक्टूबर सोमवार सुबह 9 बजे तक रहेगी। इसीलिए अष्टमी और नवमी कन्या पूजन एक ही दिन किया जा सकता है।

* दशहरा पूजन का समय रहेगा दोपहर 1:52 से 2:38 तक 

कन्या पूजन कब कर सकते हैं  

कुछ लोग अष्टमी तिथि को ही मां दुर्गा का हवन पूजन करते हैं और कन्या पूजन करके मां दुर्गा को विदाई करते हैं। तो वहीं कुछ लोग यह शुभ कार्य नवमी तिथि को करते हैं यानी कि लोग अष्टमी और नवमी दोनों तिथियों को माता दुर्गा के नौ रूपी कन्याओं की पूजन करते हैं। पंचांग के अनुसार चंद्र तिथि के अनुसार त्योहार मनाए जाते हैं। ऐसे में कोई तिथि 9 घंटों की होती है तो कोई तिथि 12 घंटों की होती है। इस वजह से लोगों के बीच तिथियों को लेकर भ्रम पैदा हो जाता है और ऐसा बहुत बार होता है तो लोग समझ नहीं पाते हैं कि किस तिथि को अष्टमी तिथि होगी और किस तिथि को नवमी तिथि होगी।

अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पड़ने के कारण आप लोगों को कन्या पूजन में कोई दुविधा नहीं होगी क्योंकि कन्या पूजन अष्टमी और नवमी दोनों तिथियों में कराई जाती है। जो लोग अष्टमी के दिन कन्या पूजन करते हैं वे लोग सप्तमी को कन्या पूजन नहीं कर सकते और ना ही नवमी के दिन कन्या पूजन करने वाले सप्तमी को कन्या पूजन कर सकते हैं क्योंकि अष्टमी और नवमी एक साथ युक्त होते हैं। लेकिन सप्तमी और अष्टमी या सप्तमी या नवमी एक साथ युक्त नहीं होते हैं इसी कारण अष्टमी और नवमी दोनों दिन कन्या पूजन करने वाले लोग 24 अक्टूबर शनिवार के दिन कन्या पूजन कर सकते हैं और दुर्गा मां का हवन पूजन कर सकते हैं।

नवरात्री कलश का महत्व

देखते ही देखते माँ दुर्गा के विदाई का समय भी आ गया: कन्या पूजन कब करनी है, पारण कब करना है और नवरात्रि के कलश का क्या करना है।

नवरात्रि पर आप लोग कलश की स्थापना करते हैं, 9 दिनो तक माता की आराधना करते हैं और फिर अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करके आप लोग अपने व्रत का पारण कर लेते हैं। ऐसे में आप लोग शायद सोच रहे होंगे कि आप लोगों को कलश के जल का क्या करना है तो सुनिए नवरात्रि शक्ति की आराधना का पर्व होता है इस पर्व में एक ओर जहां मंदिरों में मां की पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो जाता है तो वहीं दूसरी ओर लोग अपने अपने घरों में कलश की स्थापना करते हैं और मां का आवाहन करके उनकी पूजा आराधना करते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि कलश पूजन का एक खास महत्व होता है कलश को सुख समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। जो भी व्यक्ति अपने घर में कलश स्थापना करते हैं, नौ दिन माता दुर्गा की उपासना करते हैं, उनकी पूजा आराधना करते हैं, उनको साल भर के लिए माता का आशीर्वाद मिलता है। जिससे उनके घर में सुख समृद्धि बनी रहती है कलश को सुख समृद्धि का प्रतीक माना जाने के कारण ही सभी तरह के मांगलिक कामों में कलश स्थापना होती है।

प्राचीन कथाओं को मानें तो तो पुराने धर्म ग्रंथो के अनुसार कलश के मुख में विष्णु जी का वास होता है, कंठ में महेश तथा मूल में ब्रह्मा जी का निवास होता है और कलश के मध्य में समस्त  देवीय  शक्तियों का निवास होता है। कलश की ऐसी मान्यताओं के कारण ही शास्त्रों के अनुसार कभी भी कलश की स्थापना बिना जलके नहीं करनी चाहिए। सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के लिए हमेशा ही कलश में जल के साथ-साथ कुछ अन्य चीजें जैसे कि सिक्का, अक्षत, हल्दी, दूभ, आम या अशोक के पत्ते इत्यादि डालने की मान्यता है।

नवरात्रि व्रत का पारण कब करें 

जब आप 9 दिन माता रानी की पूजा अर्चना करते हैं उपवास रखते है यह बहुत ही शुभ होता है मां दुर्गा आपको हमेशा खुश रखती हैं। आपकी हर विपत्ति में मां दुर्गा आपके साथ रहती है। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि अगर आप 9 दिन माता रानी का व्रत करेंगे तभी माता रानी आपको आशीर्वाद देगी। पूजा करने के लिए तो बस श्रद्धा की जरुरत होती है। नवरात्री व्रत के पारण विधि के बारे में बहुत लोगों को यह आशंका होता है कि नवरात्रि के 9 दिन के व्रत के बाद आखिर पारण किस तिथि को किया जाता है। कुछ लोग अष्टमी को पारण करते हैं तो कुछ लोग नवमी को पारण करते हैं और कुछ लोग दशमी के दिन भी पारण करते हैं। यानि की लोग अपने अपने अनुसार करते हैं। लेकिन शास्त्रों में कहा गया है कि अगर आप अष्टमी के माता रानी की पूजा अर्चना करके पारण कर लेते हैं तो यह शुभ होता है। और आप नवमी के दिन भी माता रानी की पूजा अर्चना करके पारण कर सकते हैं। लेकिन दशमी के दिन आपको पारण नहीं करना चाहिए कभी भी आपको नौ दिन के व्रत करने के बाद दशमी को पारण करना शुभ नहीं होता है। क्योंकि शास्त्र कहते हैं कि अगर आप दसवीं के दीन पारण करते हैं तो ऐसे में आप के नौ दिनों का व्रत भी नष्ट हो जाता है। यानी कि शास्त्र के अनुसार अष्टमी या नवमी के दिन पारण करना शुभ माना जाता है। आप लोग जिस तरह सुबह शाम माता रानी की उपासना करते हैं उसी तरह आपको पारण करने के बाद भी माता रानी की उपासना करना है। यानि की नवरात्री का व्रत रखने पर नवरात्री के नौवें दिन तक माता की पूजा करते रहना चाहिए।

नवरात्री में स्थापित कलश को क्या करे

अष्टमी नवमी के अवसर पर कन्या पूजन करने के बाद आपको मां भगवती का ध्यान करना है और फिर मंदिर में स्थापित कलश को ध्यान करें। उसके बाद मंदिर में स्थापित कलश के जल को हाथ में लेकर अपने घर के हर कोने या दिशा में छिड़क दें। माना जाता है कि नौ दिन स्थापित कलश के जल में सभी देवी देवतायो का आशीर्वाद होता है जो आपको सुख समृद्धि प्रदान करता है। उसके बाद कलश में जो जल बचाते हैं और जो अन्य सामग्री होते हैं उन सब को तुलसी के पौधे पर या किसी अन्य हरे पौधे पर डालना चाहिए। लेकिन ध्यान रहे अपने जो शिक्का कलश में रखा था उसे आपको अपने तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर हमेशा के लिए रख देना है। उससे आपको मां लक्ष्मी जी का आशीर्वाद प्राप्त होते हैं और साथ ही जीवन में हर समय सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

नवरात्रि के अखंड को कब तक चलाएं

नवरात्रि में अखंड दीप बहुत महत्वपूर्ण होता है जिस तरह नवरात्रि का कलश महत्वपूर्ण है उसी तरह नवरात्रि में जलने वाला अखंड दीप माता रानी के विद्यामान होने का प्रतिक होता है। नवरात्र के प्रथम दिन से ही माता रानी कलश, अखंड दीप और पूजा से जुड़ी हर सामग्री में विद्यमान हो जाती है। और इसीलिए हमें हर एक चीज को सम्मान देना चाहिए उन सब की पूजा पूजा करनी चाहिए। अखंड दीप की बात करें तो आपको अखंड दीप नौ दिन तक जलने देना है। यह तो आप लोग जानते ही होंगे की नवरात्रि के नौ दिनों के बीच में अखंड दीप का बुझना सही नहीं होता है। इसीलिए आपको हमेशा अखंड दीप का ख्याल रखना चाहिए।


आपको अगर अभी भी कोई तिथि या किसी और विषय मे डाउट है तो हमे comment करके अवश्य पूजे। इस नवरात्रि माता रानी आप लोगो की जिंदगी में ढेर सारी खुशियां लेकर आए और जाने अनजाने में हुई हमारी हर गलती को माता रानी माफ कर दे।

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Jhuma Ray
नमस्कार! मेरा नाम Jhuma Ray है। Writting मेरी Hobby या शौक नही, बल्कि मेरा जुनून है । नए नए विषयों पर Research करना और बेहतर से बेहतर जानकारियां निकालकर, उन्हों शब्दों से सजाना मुझे पसंद है। कृपया, आप लोग मेरे Articles को पढ़े और कोई भी सवाल या सुझाव हो तो निसंकोच मुझसे संपर्क करें। मैं अपने Readers के साथ एक खास रिश्ता बनाना चाहती हूँ। आशा है, आप लोग इसमें मेरा पूरा साथ देंगे।

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