Wednesday, May 18, 2022
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जानिए नवमी पूजन और कन्या पूजन की सही विधि: क्या आप भी पहली बार नवरात्रि कर रहे हैं? तो आपको इन नियमों के बारे में जरूर पता होने चाहिए।

पूरे भारत में कितने ही लोग दुर्गा पूजा यानी कि नवरात्रि के अवसर पर कलश स्थापना करके 9 दिनो का उपवास रखते हैं। और नवमी के दिन कन्या पूजन करके अपने व्रत का समापण करते हैं। अगर आप लोग भी नवरात्रि में कलश स्थापना करते हैं तो आपको कन्या पूजन तो कराना ही होगा क्योंकि नव दुर्गा के नौ स्वरूपों को 9 दिन पूजा करने के बाद अगर आप कुंवारी कन्याओं को भोजन नहीं कराते तो कहीं ना कहीं आपका व्रत अधूरा सा लगता है। इसीलिए आपको अपने समर्थ अनुसार कन्या पूजन कराना ही चाहिए। आज हम आपको नवमी के दिन होने वाले पूजन और कन्या पूजन की सारी जानकारी देंगे।

नवमी पूजन विधि

नवमी के दिन आपको सुबह उठकर माता दुर्गा को भोग लगाने के लिए प्रसाद बनाना होगा। प्रसाद में आपको माता रानी के पसंदीदा लाल पकवान ही बनाने चाहिए जैसे कि आप हलवा, पूरी, चने का भोग लगा सकते हैं और इसके अतिरिक्त आप लड्डू, पेड़े, तरह-तरह की मिठाइयों के साथ दाल, खीर इत्यादि का भोग लगाए ।

भोग लगाने के अलावा आपको नवमी के पूजा के दिन माता रानी को श्रृंगार का सामान भी चढ़ाना आवश्यक होता है। श्रृंगार के सामानों में आपको माता रानी के लिए लाल चुनरी, बिंदी, मेहंदी, चूड़ी, सिंदूर, बाली, नथुनी, काजल, पायल, आलता जितने भी सजने, श्रृंगार के समान होते हैं वह सब अपने समर्थ अनुसार माता रानी के सामने चढ़ाएं।

इसके बाद रोजाना जिस तरह आप पूजा करते हैं उसी तरह उस दिन भी सारे पकवानों का भोग लगा कर माता रानी की विधि विधान से पूजा करें और चालीसा पाठ करके माता की आरती उतारे। उसके बाद अगर आप हवन करना चाहे तो आप हवन भी कर सकते हैं। 

नवमी के दिन आप चाहे तो हवन भी कर सकते हैं हवन करने के लिए आपको कुछ सामग्री की जरूरत पड़ेगी

हवन करने के लिए आपको सूखा नारियल या गोला, लाल रंग का कपड़ा या फिर कलावा, और एक हवन कुंड की आवश्यकता होगी। उसके अतिरिक्त में छोटी मोटी वस्तु जैसे कि आम की लकड़ी, आम का तना और पता, चंदन की लकड़ी, ब्राह्मी, अश्वगंधा, मुलेठी की जड़, पीपल का छाल और तना , गूलर की छाल और नीम, बेल, पलाश, कपूर, गाय का घी, लोंग, इलाइची, जौ, चावल, गुग्गल, शक्कर, लोभान इत्यादि चीजों की आवश्यकता होगी।

नवमी के दिन हवन करने की विधि

महानवमी के दिन माता रानी को भोग लगाकर पूजा अर्चना करने के बाद आपको हवन करना है। हवन करने के लिए पहले हवन सामग्री को किसी बड़े पात्र में ठीक से मिला लें और फिर आम के सूखी लकड़ी को जलाए, ध्यान रखें कि आपको कपूर के द्वारा लकड़ी को जलाना है दूसरे किसी वस्तु का इस्तेमाल ना करें। अग्नि जलाने के बाद आपको मंत्रों का जाप करते हुए हवन के लिए रखे सामग्रियों को आहुति देना है। घर के जितने सदस्य हैं हर कोई बारी-बारी से हवन कुंड की अग्नि में आहुति दे सकता है।

आहुति देते समय आपको इन मंत्रों का जाप करना है

ओम गणेशाय नमः स्वाहा। ओम गौरियाय नमः स्वाहा। ओम नवग्रहाए नमः स्वाहा। ओम दुर्गाय नमः स्वाहा। ओम महाकालीकाय नमः स्वाहा। ओम हनुमते नमः स्वाहा। ओम भैरवाय नमः स्वाहा। ओम कुल देवताय नमः स्वाहा। ओम स्थान देवताय नमः स्वाहा। ओम ब्रह्माय नमः स्वाहा। ओम विष्णुवे नमः स्वाहा। ओम शिवाय नमः स्वाहा। ओम जयंती मंगलाकाली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा। स्वधा नमस्तुति स्वाहा। ओम ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च: गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु स्वाहा। ओम गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवा महेश्वर: गुरु साक्षात् परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: स्वाहा। ओम शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे, सर्व स्थार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते।

इसके बाद आपको नारियल में कलावा या लाल कपड़ा बांध लेना है। और बतासा,पान सुपारी, लोंग,पूरी, खीर पान सुपारी लेके उसे हवन कुंड में डाल देना है। और फिर आप पूर्ण आहुति  मंत्र का उच्चारण करें।

आइए आप जानते हैं कन्या पूजन के विधि के बारे में

माता रानी की पूजा करने के बाद आपको कन्याओं का पूजन करना पड़ेगा कन्या पूजन के लिए आप थोड़े से जगह को पहले ही साफ सुथरा कर ले।और उनके पैरो को थाली में लेकर अपने हाथ से धोए।उसके बाद उनके माथे पर कुमकुम लगाए फिर उनको बिठाकर उनके इच्छा अनुसार भोजन कराएं।और आखिरी में अपने सामर्थ्य अनुसार कन्याओं को दक्षिणा और उपहार देकर उनसे आशीर्वाद ले।आप एक रुमाल या फिर चुनरी में थोड़े से चावल और ₹1 या ₹5 के सिक्के के साथ बांध कर और चुनरी से हर कन्या के सिर को ढक दें फिर उनसे आशीर्वाद लेकर हंसते हुए उनको विदा करें। इस प्रकार आपके कन्या पूजन की पूरी विधि समाप्त होती है।

कन्या पूजन में कन्याओं को क्या खिलाएं

आप अपने यथाशक्ति कन्याओं को भोजन करा सकते हैं। माता रानी को खीर, मिठाई, हलवा, मालपुआ इत्यादि पसंद आता है इसीलिए आप कन्या पूजन के दिन कन्याओं को पूरी, खीर, हलवा, मिठाई खिला सकते हैं। यह तो आपको पता ही होगा कि खाने में लहसुन प्याज का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। यह कहा जाता है कि अगर आप कन्याओं को आलू और कद्दू की सब्जी के साथ भोजन कराते हैं तो आपका कन्या भोज सफल होता है और नवरात्र व्रत का पूर्ण फल आपको प्राप्त होता है। आपको दिल खोलकर अपने समर्थ के अनुसार कन्या पूजन का भोजन कराना चाहिए।

कन्या पूजन करने से पहले जान लीजिए कुछ बातें

  • कन्या पूजन के लिए आपको नौ कन्याओं को बुलाना चाहिए और साथ में एक बालक भी होना चाहिए। कन्या पूजन एक बालक के बिना पूरा नहीं होता है अगर 9 से भी ज्यादा पूजा में आ रही है तो इसमें कोई आपत्ति की बात नहीं है आपको उन सब का स्वागत करना चाहिए।
  • ध्यान रखें कि आपको घर में बुलाई जाने वाली कन्याओं की आयु 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष के भीतर होना चाहिए।
  • कन्याओं को हंसते हुए विदा करना चाहिए आपको ध्यान रखना चाहिए कि कन्या दुखी होकर घर से ना जाए उनको खुश करके विदा करना चाहिए।

कन्या पूजन का महत्व 

जिस तरह हम किसी देवी देवता की पूजा करके उनकी कृपा प्राप्त करते हैं उसी प्रकार मनुष्य प्रकृति रूपी कन्याओं का पूजन करके हम माता की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। कन्याओं में मां दुर्गा का वास होता है शास्त्र कहते हैं 1 वर्ष बीतने के बाद कन्याओ को कुमारी कहा जाता है। जैसे कि 2 वर्ष की कन्या को कुमारी, 3 वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति, 4 वर्ष की कन्या कल्याणी, 5 वर्ष की कन्या को रोहिणी, छह वर्ष की कन्या को कालिका, 7 वर्ष की कन्या को चंडीका, 8 वर्ष की कन्या को शाम्भवी, और 9 वर्ष की कन्या को दुर्गा कहा जाता है। इस तरह अलग-अलग कन्याओं को पूजने से अलग-अलग सुख समृद्धि प्राप्ति होती है। जैसे पुरुषार्थ, राजयोग, बुद्धि, विद्या, स्वास्थ्य, कार्य सिद्धि, ऐश्वर्या इत्यादि सब कन्या पूजन करके देवी की कृपा से प्राप्त कर सकते हैं। 

यह कहा जाता है कि—

2 वर्ष की कन्या का पूजन करने से घर में दुख और दरिद्रता दूर होती है।

3 वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति माना जाता है और त्रिमूर्ति के पूजन करने से घर में धन भर जाता है और परिवार में सुख समृद्धि होती है।

4 साल की कन्या को कल्याणी कहा जाता है इनकी पूजा करने से परिवार का कल्याण होता है।

5 वर्ष की कन्या को रोहिणी माना जाता है रोहिणी के पूजन करने से व्यक्ति रोग मुक्त होते हैं।

6 साल की कन्या को कालिकाय का रूप में माना जाता है काली के रूप के पूजन से विजय, विद्या और राजयोग मिलता है।

7 साल की कन्या चंडिका का रूप होती है। चंडी के रूप के पूजन से घर में ऐश्वर्या की प्राप्ति होती है।

8 वर्ष की कन्या शाम्भवी कहलाती है इनके पूजन करने से विवाद में विजय प्राप्त होता है।

9 साल की कन्या दुर्गा का रूप होती है। इनका पूजन करने से शत्रुओं का नाश होता है और असाध्य कार्य भी पुरे होते हैं।

10 साल की कन्या सुभद्रा कहलाती है। सुभद्रा अपने भक्तों के सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती है।

एक बालक कन्या पूजन को पूरा करता हैं 

नवरात्रि के 9 दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। लेकिन आपका कन्या पूजन तब तक पूरा नहीं होता है जब तक एक बालक यानी एक लड़के का पूजन नहीं किया जाता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बालक को बटुक का रूप माना जाता है असल में हर देवी मां के दरबार में सुरक्षा के लिए भगवान महादेव ने अपने स्वरूप भैरव को बैठाया है। देवी के शक्तिपीठो को स्थापित करने भगवान शिव स्वयं पृथ्वी पर आए थे और जहां जहां देवी के शक्तिपीठों का निर्माण हुआ वहीं पर देवी के साथ महादेव ने अपने स्वरूप में भैरव को भी माता रानी के दरबार में तैनात किया। जिस तरह माता का पूजा भैरव बाबा के दर्शन किए बिना अधूरा होती है उसी प्रकार कन्या पूजन में भी एक भैरव समान बालक को पूजा करना अनिवार्य होता है। इसीलिए कन्या पूजन करते समय एक बालक का भी पूजा करना जरूरी होता है।

जीवन भर पूजे कन्याओं को

कन्या पूजन के अवसर पर लोग कन्याओं को देवी माता का रूप मान कर उनकी पूजा करते है लेकिन क्या वास्तव में हर कोई कन्या को देवी माता का रूप मानता है ? नहीं, बिल्कुल नही। दुनिया में बहुत सी बालिकाओं के साथ बहुत प्रकार के अन्याय होते हैं लेकिन तब भी लोग कुछ नहीं करते। कन्या पूजन तो एक अवसर होता है जब लोग कन्याओं को सम्मान देते हैं उनकी देवी के रूप में पूजा करते हैं क्योंकि यह कहा जाता है कि उन दिनों कन्याओं को पूजने का अलग महत्व होता है। लेकिन क्या यह सच नहीं कि हर कन्या हर महिला देवी मां का ही रूप होती है। शास्त्र भी कहता है कि जिस घर में कन्याओं का सम्मान नहीं होता उस घर में लक्ष्मी सुख शांति किसी भी प्रकार के ऐश्वर्य का बास नहीं होता है। इसीलिए हम सब को केवल कन्या पूजन के अवसर पर ही नहीं बल्कि साल के हर 1 दिन हर एक समय में कन्याओं का सम्मान करना चाहिए कभी भी किसी कन्या के साथ अन्याय नहीं होने देना चाहिए।

विचार

आशा करती हूं आप सभी को नवमी पूजा और कन्या पूजन की सारी विधि अच्छी तरह से समझ में आ गई होगी। अगर आपको यह पोस्ट पसंद है अगर आप वाकई में यहा से कुछ नया सीखने को मिला तो प्लीज हमारे आर्टिकल को एक लाइक कर दीजिए। और आप इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि हर कोई सही विधि की जानकारी ले सकें।  यह नवरात्रि आप सभी के लिए शुभ हो! इसी प्रार्थना के साथ  हम इस अर्टिकल को  यहीं पर खत्म करते हैं।  हैप्पी नवरात्रि।

ये भी पढ़े – Happy Navratri: नवरात्रि के नौ दिनों का महत्व और देवी के नौ रूपो की कहानी।

Jhuma Ray
Jhuma Ray
नमस्कार! मेरा नाम Jhuma Ray है। Writting मेरी Hobby या शौक नही, बल्कि मेरा जुनून है । नए नए विषयों पर Research करना और बेहतर से बेहतर जानकारियां निकालकर, उन्हों शब्दों से सजाना मुझे पसंद है। कृपया, आप लोग मेरे Articles को पढ़े और कोई भी सवाल या सुझाव हो तो निसंकोच मुझसे संपर्क करें। मैं अपने Readers के साथ एक खास रिश्ता बनाना चाहती हूँ। आशा है, आप लोग इसमें मेरा पूरा साथ देंगे।
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