Tuesday, May 17, 2022
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World Girl Child Day: अन्तराष्ट्रीय वालिका दिवस का उद्देश्य, इतिहास और कारण।

हर साल 11 ऑक्टूबर के दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बालिका दिवस के रूप में मनाया जाता है। वर्तमान में लड़कियों को उनके अधिकार को दिलवाने और उनके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। बेटियों के प्रति भारत सरकार भी काम कर रही है। और उनके अच्छे भविष्य के लिए कई योजनाएं भी लागू कर रही है। आए दिन दुनिया भर में लड़का और लड़की के बीच में भेदभाव की घटनाएं सामने आती है। हर एक कदम पर लड़कियों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जाता है। बालिकाओं को उनके पालन पोषण के दौरान उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव अधिकार जैसी हर एक अधिकार से वंचित रखा जाता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बालिका दिवस के रूप में मनाने का उद्देश्य  

 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बालिका दिवस के रूप में मनाने का मूल उद्देश्य समाज में वर्षों से चली आ रही दहेज और कन्या भ्रूण हत्या जैसी रूढ़िवादी प्रथाओ पर रोक लगाना है।   

ऐसे में सरकार ने हर व्यक्ति की आंखें खोलने के लिए और बेटियों के प्रति होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए 11 अक्टूबर के दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बालिका दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया है। ताकि लोगों तक यह संदेश पहुंचाया जा सकें की बेटीयां भी समाज में बेटो के बराबर की हकदार है।

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 2012 से मनाया जा रहा है ताकि लोग समझ सके की बेटियां किसी से कम नहीं है और उनका मूल अधिकार कोई उनसे छीन ना सके। महिला सशक्तिकरण की तरफ आधुनिक युग में कई प्रयास किए जा रहे हैं।  

World Girl Child Day: अन्तराष्ट्रीय वालिका दिवस का उद्देश्य, इतिहास और कारण।

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का मनाने का कारण व इतिहास

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत पहली गैर सरकारी संगठन “प्लांट इंटरनेशनल प्रोजेक्ट” के रूप में की गई थी। इस संगठन ने एक अभियान शुरू किया था जिसका नाम था “क्योंकि मैं एक लड़की हूं”। इसके बाद से इस अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने के लिए कनाडा के सरकार से संपर्क किया गया था। और फिर कनाडा सरकार ने 55 वे आम सभा में इस प्रस्ताव रखा था और संयुक्त राष्ट्र ने 19 दिसंबर 2011 के दिन इस प्रस्ताव को पारित किया। इसके लिए 11 अक्टूबर का दिन चुना गया। इस प्रकार पहला अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 11 अक्टूबर 2012 के दिन मनाया गया था। उस समय इसका थीम रखा गया था “बाल विवाह उन्मूलन” यानि बाल विवाह को समाप्त करना।

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 2020 का थीम

इस साल अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का थीम रखा गया है “हमारी आवाज और हमारा समान भविष्य” । इस थीम का उद्देश्य समाज में यह संदेश देना है कि कैसे छोटी बालिकाएं समाज में एक मार्ग दिखाने का प्रयास कर रही है।

जब 11 october 2012 को पहली बार अन्तराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया गया था तब इसकी थीम रखी गयी थी “बाल विवाह उन्मूलन”। हालाकी आज इतने सालों बाद भी कभी-कभी बाल विवाह जैसी घटनाएं देखने को मिल जाती है। लेकिन ऐसा नहीं है कि इस गंदी और घिनौनी प्रथा को रोकने के लिए प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। हर स्तर पर प्रयास जारी है लेकिन अशिक्षा और गरीबी जैसे कुछ कारणों के वजह से आज भी ऐसी प्रथा समाज में जारी है। अगर हमें इस प्रथा को रोकनी है तो सबसे पहले अशिक्षा, गरीबी और पिछड़ेपन जैसे कुछ कारकों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। क्योंकि जब समाज शिक्षित होगा, समाज में गरीबी नहीं रहेगी तभी आम लोग इन मुद्दों की गंभीरता को समझ पाएंगे और इस तरह की घिनौनी प्रथा को रोकने में अपना सहयोग दे पाएंगे।

इस बालिका दिवस हम क्या कर सकते हैं

इस बालिका दिवस हम, कम से कम अपने घर की बेटियों को सुरक्षित होने का एहसास दिला सकते हैं। हम अपनी बेटियों को यह बता सकते हैं कि हमारे परिवार में वह पूरी तरह से सुरक्षित है, पूरी तरह से आजाद है। उनके ऊपर किसी काम के लिए कोई दबाव नहीं डाला जायेगा। वह अपने जीवन में जो करना चाहे कर सकती है। शादी-विवाह से लेकर Career तक किसी भी पड़ाव में उनके हर फैसले को सम्मान दिया जाएगा और हमारे इच्छा अनुसार कुछ भी करने के लिए उन्हें उन पर जोर नहीं डाला जाएगा।

अपनी बेटीओ को हम यह भी ऐसा दिला सकते हैं कि वे कमजोर नहीं है और बाहर जाते समय उन्हें डरने या घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि उनका परिवार उनके साथ हैं। उनको जब भी जरूरत पड़ेगी वह अपने परिवार को अपने साथ खड़ा पाएंगी। हालांकि अभी समाज में बेटियों के साथ कुछ हिंसा जनक घटनाएं तेजी से घट रही है। लेकिन हम अपनी बेटियों को इतना सांत्वना दे सकते हैं कि इन घटनाओं पर रोक लगाने का प्रयास निरंतर जारी है और भविष्य में पूर्ण रूप से इस तरह की घटनाओं पर रोकथाम करके ऐसी घटनाओं को समाज से खत्म किया जा सकेगा। और केवल इस वजह से की नारी जाति के साथ आए दिन हिंसाजनक घटनाएं घटती रहती है उनको अपने किसी भी फैसले में कदम पीछे हटाने की जरूरत नहीं है। हमारी बेटियां जो चाहे बन सकती है, जो भी दुनिया से हासिल करना चाहे उसके लिए खुलकर प्रयास कर सकती है।

हमें अपनी बेटियों को निडर बनाकर दुनिया में खुलकर जीने के लिए प्रेरित करना चाहिए क्योंकि जब बेटीया अपने ऊपर हो रहे जुल्म और अपमान का जवाब देने के लिए अंदर से साहसी बन जाएंगी तभी उनके साथ हो रहे अपराधो में कमी आएगी। जब तक बेटियां खुद को कमजोर समझती रहेंगी और उनको यह लगता रहेगा कि वह अपने साथ हो रहे अपराधों का सामना करके उनसे जीत नहीं सकती, तब तक उनके साथ हो रहे यह जुल्म, अपराध होते रहेंगे। इसीलिए हम सब इस बालिका दिवसीय संकल्प ले सकते हैं कि हम अपनी बेटियों को निडर बनाएंगे और हर परिस्थिति का सामना करने के लिए अंदर से सशक्त और मजबूत बनाएंगे।

आज के पोस्ट में हमने अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के बारे में बताया और इस बालिका दिवस हम अपनी बेटियों के लिए क्या-क्या कर सकते हैं उस बात पर भी प्रकाश डाला। बेटियां कुदरत की देन एक अनमोल तोहफा है और हमें उनकी इज्जत और उनसे जितना हो सके प्यार करना चाहिए। बहुत अफसोस होता है यह सोचकर कि आज 21वी सदी में भी कुछ जगह ऐसे हैं जहां पर कन्या भ्रूण हत्या जैसी घटनाएं आए दिन घटती है। हालांकि कोई इन बातों को उजागर नहीं करना चाहता लेकिन यह सच है कि यूपी-बिहार जैसी जगहों में खासकर ग्रामीण इलाकों में लिंग परीक्षण और बेटियों को गर्भ में ही खत्म कर देने की परंपरा लगातार जारी है। महिला के गर्भवती होते ही शहर ले जाकर लिंग परीक्षण करवाना और गर्भ में बेटी होने का पता चलते ही उसको तुरंत मार देना जैसे एक प्रथा बन चुकी है। इस कठोर और शर्मनाक प्रथा को खत्म करने के लिए प्रशासन का कठोर निरीक्षण और कड़ी कार्यवाई जरूरी है। साथ ही बेटियों को अंदर से सशक्त बनाना भी जरूरी है ताकि एक सुंदर समाज का निर्माण हो सके। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

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Jhuma Ray
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नमस्कार! मेरा नाम Jhuma Ray है। Writting मेरी Hobby या शौक नही, बल्कि मेरा जुनून है । नए नए विषयों पर Research करना और बेहतर से बेहतर जानकारियां निकालकर, उन्हों शब्दों से सजाना मुझे पसंद है। कृपया, आप लोग मेरे Articles को पढ़े और कोई भी सवाल या सुझाव हो तो निसंकोच मुझसे संपर्क करें। मैं अपने Readers के साथ एक खास रिश्ता बनाना चाहती हूँ। आशा है, आप लोग इसमें मेरा पूरा साथ देंगे।
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