Homeहिन्दीजानकारीसाहित्य का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार: जानिए ज्ञानपीठ पुरस्कार के बारे में सबकुछ।

साहित्य का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार: जानिए ज्ञानपीठ पुरस्कार के बारे में सबकुछ।

साहित्य क्षेत्र में किसी महान उपलब्धि हेतु, भारतीय ज्ञानपीठ न्यास द्वारा ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया जाता है जो साहित्य के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार होता है। ज्ञानपीठ पुरस्कार की स्थापना हुई थी साल 1965 में। देश का हर वह व्यक्ति इस पुरस्कार के लिए योग्य माना जाता है, जो भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में उल्लेखित 22 भाषाओं में से किसी भी एक भाषा में अच्छा लिखता हो और इस पुरस्कार को पाने के लिए योग्यता की बाकी शर्तो को पूरा करता हो। प्रथम जब इसकी शुरुआत हुई थी साल 1965 में, तब पहली बार मलयालम लेखक जी शंकर कुरूप को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

साहित्य का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार: जानिए ज्ञानपीठ पुरस्कार के बारे में सबकुछ।

ज्ञानपीठ पुरस्कार के स्वरुप में 11 लाख रुपए की राशि प्रदान की जाती है। साथ ही एक प्रशस्ति पत्र और वाग्देवी की कास्य प्रतिमा प्रदान की जाती है। जब इस पुरस्कार की शुरुआत हुई थी साल 1965 में, तो इस पुरस्कार के स्वरूप में एक लाख की राशि दी जाती थी। लेकिन साल 2005 में इस राशि एक लाख से बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दिया गया और साल 2012 से वह राशि 11 लाख रुपए हो चुकी है। ज्ञानपीठ पुरस्कार में दी जाने वाली वाग्देवी की कास्य मूर्ति मूलतः धार, मालवा के सरस्वती मंदिर में स्थित प्रतिमा का अनुकृति है। इस मंदिर की स्थापना राजा भोज ने की थी। उस मूर्ति के हाथ में कमंडल, पुस्तक, कमल और अक्ष माला, ज्ञान और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि का प्रतीक होता है।

साहित्य का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार: जानिए ज्ञानपीठ पुरस्कार के बारे में सबकुछ।

ज्ञानपीठ पुरस्कार के संस्थापक श्री साहू शांति प्रसाद जैन के 50 वे जन्मदिवस पर इस पुरस्कार की शुरुआत हुई थी। अब तक सबसे अधिक यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले, हिंदी और कन्नड़ भाषा के लेखक हैं। जो 7-7 बार इस सम्मान को प्राप्त कर चुके हैं। यह पुरस्कार बांग्ला को 5 बार, मलयालम को 4 बार, उड़िया, गुजराती और उर्दू को तीन-तीन बार और असमिया, तेलुगू, पंजाबी, मराठी, तमिल को दो-दो बार मिल चुका है।

ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिए चयन प्रक्रिया

इस पुरस्कार की चयन प्रक्रिया जटिल होती है जो कि कई महीनों तक चलती है। इस चयन प्रक्रिया का आरंभ विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों, समालोचको, अध्यापकों, विश्वविद्यालयों, साहित्य प्रबुद्ध पाठकों तथा भाषाई संस्थाओं से प्रस्ताव भेजने के साथ होता है। जिन भी साहित्यकारों को यह पुरस्कार एक बार प्राप्त होता है, उन प्राप्तकर्ताओं पर 3 साल तक फिर कोई विचार नहीं किया जाता है। यानी कि जिस भी साहित्यकार को एक बार यह पुरस्कार प्राप्त होता है उसे अगले 3 साल के अंदर फिर से यह पुरस्कार प्राप्त नहीं होता है। हर एक भाषा की एक ऐसी परामर्श समिति होती है, जिसमें 3 विख्यात साहित्य समालोचक और विद्वान सदस्य होते हैं। इन समितियों का गठन तीन-तीन वर्ष के लिए किया जाता है। प्राप्त प्रस्ताव संबंधित “भाषा परामर्श समिति” के द्वारा जांच की जाती है। भारतीय ज्ञानपीठ परामर्श समिति से यह अपेक्षा रखती हैं कि संब भाषा का कोई भी पुरस्कार योग्य साहित्यकार विचार परिधि से बाहर न जाएं। उन्हें किसी भी लेखक पर विचार करने की स्वतंत्रता होती है।  

इस तरह से यह पुरस्कार योग्य व्यक्ति को हर साल प्रदान किया जाता है। आशा करते है जानकारी आपको पसंंद आयी।

Jhuma Ray
नमस्कार! मेरा नाम Jhuma Ray है। Writting मेरी Hobby या शौक नही, बल्कि मेरा जुनून है । नए नए विषयों पर Research करना और बेहतर से बेहतर जानकारियां निकालकर, उन्हों शब्दों से सजाना मुझे पसंद है। कृपया, आप लोग मेरे Articles को पढ़े और कोई भी सवाल या सुझाव हो तो निसंकोच मुझसे संपर्क करें। मैं अपने Readers के साथ एक खास रिश्ता बनाना चाहती हूँ। आशा है, आप लोग इसमें मेरा पूरा साथ देंगे।

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