भारत की परंपरा और सोने का महत्व

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भारत अपनी विभिन्न  रीति रिवाज़ ,सांस्कृतिक परम्पराओ के लिए लोकप्रिय है। भारत अपनी सांस्कृतिक परम्पराओ के लिए पूरे विश्व भर में जाना जाता है। इस देश में लोग विभिन्न प्रकार की  भाषाएं बोलते है और सबकी अपनी विशेष परंपरा है। यह परम्पराएं पीढ़ीओं से चली आ रही है। भारत को पहले सोने की चिड़िया कहा जाता था। भारतीय इतिहास में सोने का गहरा महत्व है जो दुनिया के विभिन्न हिस्सों से लोगो को अपनी ओर आकर्षित करता है। सोने की भारतीय परम्पराओ ,रीति रिवाज़ो में अपनी अलग ही पहचान है। भारत में हज़ारो शादियों से  सोने के आभूषणों का आदान प्रदान होता आ रहा  है। आप  अपने पसंद और समार्थ्य के अनुसार 22 ,24  और 18  कैरट का सोना खरीद सकते है।

भारत की परंपरा और सोने का महत्व
sona sab ko akarshit karta hai.

पिछले कुछ वर्षो में भारत में लोगो के दिलो में सोने की चाहत बढ़ रही है। भारत के खाते में दुनिया भर में सोने की सबसे अधिक खपत है। सांस्कृतिक रूप से सोना एक महत्वपूर्ण धातु है जिसके बैगर भारतीयों की परम्पराएं अधूरी है। सोने जैसे धातु ने भारतीयों के दिलों और घरो में एक महत्वपूर्ण स्थान पाया है। भारतीय आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा संसाधनों पर जीवित है लेकिन इन सबके बावजूद वो सोना खरीदने के हर संभव तरीके ढूँढ़ते है। सोना इनके ज़िन्दगी और भारतीय परंपरा का अभिन्न अंग है। दिल्ली से चेन्नई और अहमदाबाद से कोलकाता तक सोने की मांग हमेशा दिखती है। देशवासियों में सोने को लेकर दीवानगी हमेशा देखी जाती है। सोने की कीमत ज़्यादा हो या कम इसके खरीदार हमेशा मौजूद है।

सोने को खरीदने और जिसके पास जितना अधिक सोना वह समाज में अंहकार के साथ जीता है। सोने का उनके पास होना जैसे उनके रुतबे का उनके पास होना। भारतीय शादी तो जैसे सोने के बिना अधूरी और फीकी है। शादी में दुल्हन हमेशा सोने के आभूषणों से लदी हुयी पायी जाती है। अक्षय तृतीया और धनतेरस में सोना खरीदना भारतीयों की ख़ास परंपरा है। धनतेरस में सोना खरीदने के लिए लोगो की  लम्बी कतारे देखी जा सकती है।

सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार सोना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। सास अपने बहु को गृह प्रवेश के वक़्त सोना उसके नए जीवन की शुरुआत के लिए देती है। सोना परम्पराओ के अनुसार शुभ वस्तु है जो हर रस्मो रिवाज़ो को पावन बना देती है। महिलाओं को सोना से बेहतर कोई उपहार नहीं लगता है। महिलाएं हर महीने थोड़े पैसे बचाती है ताकि वह सोना खरीद सके। सोने की कीमत पीढयों दर चली आ रही है।

सोने की मांग हमेशा से देश में थी और हमेशा रहेगी। भारत में हर धर्म के लोग चाहे हिन्दू , सिख ,ईसाई सभी के लिए सोना प्रमुख सम्पत्ति है। सम्पन्न धनवान  लोग मंदिरो में अपने सुखद जीवन के आगमन की प्राथना के लिए सोने का दान देते है। विभिन्न धार्मिक अवसरों पर लोगो के लिए सोना खरीदना आम बात है। सोना हर भारतीय घर का हिस्सा है जिससे लोग जुड़े रहते है। यह देश के हर घर पर पारिवारिक विरासत के रूप में माना जाता है। पारिवारिक विरासत को जीवित रखने हेतु सोने के आभूषण पढ़ी दर पीढ़ी चले आ रहे है।

ज़्यादातर घरो में शादियों में दुल्हन की माँ दुल्हन को गहने पहनाकर विदा करती है। सोना परम्पराओं का एक अत्यंत भावुक हिस्सा है। सोने को उपहार में देना भारतीय रीति रिवाज़ो के अनुसार शुभ माना जाता है। सोना ना केवल महत्वपूर्ण धन  का स्रोत है बल्कि सोना भारतीयों के लिए भाग्यशाली होता है ऐसी मान्यता है। शादियों के दौरान अक्सर रिश्तेदार उपहार में दुल्हन को सोना देते है। दुल्हन भारी मात्रा में सोना अपने नए घरो में लाती है जिसे परम्पराओ के अनुसार शुभ माना जाता है।

भारत की परंपरा और सोने का महत्व
kya app jante hai …ek dulhan wida hote waqt 1 kg tak sona phene rahte hai.

सोने का एक उपहार शायद देश में उपहार देने का एक सर्वोच्च रूप है। शहरों में जन्मदिन और बच्चे के जन्म होने पर परिवार अक्सर सोने के उपहार देते है। भारत में सोने से बड़ा कोई स्टेटस सिंबल नहीं है। राजनेता ,व्यवसायी ,अभिनेता ,बड़े अधिकारी सभी को अपना सोना दिखाना बेहद पसंद है। सोना एक प्रतिष्ठित होने का चिह्न है और भारत में युगों से चला आ रहा एक समाजिक स्थिति का प्रतीक है।

सोना के दिन प्रतिदिन बढ़ती हुयी दरों के बावजूद लोग सोना खरीदने की क्षमता रखते है। सोने को भारतीय परंपरा के अनुसार एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। ज़्यादातर भारतीय लोग इसी भावना को पीढ़ियों से मानते हुए चले आ रहे है।भारतीय लोग सोने को अपनी सम्पति समझते है जो उनके बुरे वक़्त में काम आता है। सोने का निवेश करना हर एक भारतीय की चाह होती है।

सोना लोगो को दिखाना बेहद अच्छा लगता है। हर बड़े छोटे अवसर पर महिलाएं खासकर  सोने के गहने दिखाए बिना रह नहीं सकती है।  सोने का दक्षिण भारत में अपना महत्व होता है। 2017 को एक रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण भारत में दुल्हन अपने विवाह में जो  गहने पहनती है उनका वजन सामान्यत 320  ग्राम होता है। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में दुल्हन लगभग 300 ग्राम सोना पहनती है। भारत सोने के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाज़ारो में से एक है। भारतीय परम्पराओं के अनुसार नागरिक सोने के सिक्के और सोने के आभूषण खरीदना बेहद पसंद करते है। सोना भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

भारत में अधिकांश अनुष्ठान को सोने से जोड़कर देखा जाता है। इसमें सबसे प्रमुख है शादी। दुनिया भर की कई संस्कृतियों का मानना है कि सोना सूरज का प्रतिनिधत्व करता है।  सोने को शुभ और पवित्र माना जाता है। सोना शादियों से जुड़े संस्कारों और अनुष्ठानो का एक अभिन्न हिस्सा है। नयी यात्रा की शुरुआत के लिए और सम्पति के रूप में सोने को देखा जाता है। सोने की मान्यता पीढ़ियों से चली आ रही है और भविष्य में भी सोने के दबदबे से कोई इंकार नहीं कर सकता है।

शादी के समय परिवार वाले गहने के दुकानों पर  सोना खरीदने के लिए कतारे लगा देते है। एक अलग ही दृश्य जैसे देखने को मिलता है। लोग अलग अलग तरीके के नक्काशी वाले आभूषण पहनना पसंद करते है। चाहे कोई अमीर हो या मध्यमवर्गीय परिवार सोना खरीदने में किसी को परेशानी नहीं होती है। सोने से जड़ी हुयी दुल्हन को लक्ष्मी के रूप में देखा जाता है। सोना एक लम्बे वक़्त का निवेश बन जाता है जो रिटायरमेंट के बाद और बुरे समय में बेहद काम आता है।

निष्कर्ष

लोग भविष्य में बच्चे की शादी के लिए बहुत पहले से किश्तों में सोने के आभूषणों की खरीदारी कर लेते है। सोने की कीमत दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है।  इसलिए लोग भविष्य के बारे में सोचकर पहले से ही सोने की खरीदारी करना पसंद करते है। सोने की बढ़ती कीमत की वैल्यू बच्चे की शादी के वक़्त आपको मुनाफे में रखेगी। सोने के यूनिवर्सल वैल्यू को हम सब जानते है और उसे झुटलाया नहीं जा सकता है। सोने के दिन प्रतिदिन बढ़ते हुए दरों के बावजूद लोगो के दिलो में इसकी विशेष जगह है।

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