Homeहिन्दीस्वास्थ्यये काढ़ा बचाएगा कोरोना से, 800 साल पुराना नुस्खा

ये काढ़ा बचाएगा कोरोना से, 800 साल पुराना नुस्खा

राजस्थान के चूरु जिले के गांधी विद्या मंदिर की श्री भंवर लाल दूगड़ विश्वभारती केमिकल लैब में बना रोग प्रतिरोधक काढ़ा कोरोना वायरस (कोविड-19) के इलाज में काफी कारगर साबित हो रहा है.  सरदारशहर का गांधी विद्या मंदिर संस्थान का दावा है कि आयुर्वेदिक औषधि के काढ़े की मांग अब राजस्थान के अलावा पंजाब, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, बंगाल के साथ दर्जनभर राज्यों से आ रही है.

सरदारशहर का गांधी विद्या मंदिर संस्थान का दावा है कि उनका आयुर्वेदिक काढ़ा कोरोना वायरस में कारगर साबित हो रहा है. जिसको लेकर संस्थान काढ़े की रोग प्रतिरोधक क्षमता को देखते हुए हर रोज एक लाख पैकेट तैयार कर रहा है, लेकिन मांग ज्यादा आने के कारण अब जल्द ही इन काढ़े के पैकेटों के उत्पादन की संख्या 1 लाख प्रतिदिन से बढ़ाकर तीन लाख प्रतिदिन करेगी.यह पैकेट पूरे देश भर में निशुल्क भेजे जाएंगे.

गांधी विद्या मंदिर में रोग प्रतिरोधक काढ़ा बनाने वाले उपकरण लगातार कार्य कर रहे हैं. संस्थान के अध्यक्ष हिमांशु दुगड़ का कहना है, ‘कोरोना वायरस के इलाज में आयुर्वेदिक काढ़ा कारगर साबित हो रहा है. जिसको देखते हुए गांधी विद्या मंदिर की ओर से हर रोज 1 लाख पैकेट तैयार किए जाएंगे, जिसका एक उपकरण हर रोज 30 हजार पैकेट तैयार करेगा. गांधी विद्या मंदिर में 6 उपकरण लगवाए गए हैं जो रोज लगभग दो से तीन लाख तक पैकेट निर्माण करेगा. हिमांशु दूगड़ ने बताया कि देश की सभी राज्य सरकारों को यह काढ़ा निशुल्क उपलब्ध करवाया जाएगा.’

हिमांशु दूगड़ ने आगे बताया,  ‘श्री भंवरलाल दूगड़ विश्वभारती रसायनशाला ने सर्व ज्वरहर चूर्ण बनाया है. इसकी राजस्थान और गुजरात के अहमदाबाद में काफी मांग है. चुरु जिले के गांधी विद्या मंदिर, सरदार शहर में स्थित इस रसायनशाला के चूर्ण को राजस्थान आयुर्वेद की मान्यता प्राप्त है. उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर रसायनशाला के अधिकारी इस चूर्ण को हर तरह के विषाणु (वायरस) से होने वाले ज्वर का नाशक बता रहे हैं. आयुष मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि कई राज्यों में इस तरह के अलग-अलग प्रयोग चल रहे हैं.’

गांधी विद्या मंदिर के अध्यक्ष हिमांशु दुगड़ का दावा है, ‘कुछ राज्य इसे दवा के रुप में अपनाने लगे हैं, लेकिन भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और आयुष पद्धति के विशेषज्ञों, आईसीएमआर तथा सीएसआर की निगरानी में अब इसके प्रमाणिक ईलाज पर मुहर लगने जा रही है. आईसीएमआर के सहयोग से आयुष विशेषज्ञों ने आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग कोविड-19 के संक्रमितों पर किया है. इसके बहुत उत्साहजनक नतीजे आए हैं. इसके बाद आईसीएमआर ने भी इस पर अपनी सहमती जताई है.’

संस्थान का दावा है कि इस इलाज के कारगर रूप में सामने आने के बाद पूरी दुनिया में आयुष पद्धति का डंका बज सकता है. दुगड़ ने बताया, ‘गुजरात पुलिस से फोन आया कि वहां हालात बहुत खराब हैं तथा उनको सर्व ज्वरहर चूर्ण की तुरंत आवश्यकता है. वहीं, सीआरपीएफ के सभी जवानों के लिए 20 हजार पैकेट मंगवाये गये हैं.’

अध्यक्ष हिमांशु दुगड़ ने बताया, ‘काढ़ा एक 800 साल पुरानी आयुर्वेदिक परंपरा है. उस परंपरा को श्री ए. नागराज जी के द्वारा हमें यह नुस्खा दिया गया है. उनके ही परिवार की परंपरा का नुस्खा है. यह नुस्खा हमने सब लोगों को खुलेआम बताया हुआ है. इसमें 10 चीजें पड़ती है जो ज्यादातर चीजें घर पर मिल जाती है सोंठ, काली मिर्च, पीपल, जावित्री, जायफल, लॉन्ग, छोटी इलायची, बड़ी इलायची और तुलसी पत्र ऐसे करके 10 चीजें इसमें शामिल हैं.’

हिमांशु दुगड़ का दावा है कि काढ़े का जबरदस्त रिजल्ट हमने देखे हैं. हाल ही में 7 लोग सरदारशहर में पॉजिटिव पाए गए थे. उनके परिवार के 103 लोग क्वारनटीन में भर्ती हैं. वह सब के सब नेगेटिव हो गए हैं और उसका कारण हमने काढ़े का सेवन पाया है.

GR Newsdesk
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