Tuesday, November 29, 2022
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महाभारत प्राचीन काल का सबसे बड़ा युद्ध जानिए कौन थे इस युद्ध के 15 सबसे बड़े योद्धा 

भारत के मुख्य युद्धो में से एक महाभारत प्राचीन काल का सबसे बड़ा युद्ध था और अब यह एक ऐतिहासिक गाता है।महाभारत नाम की ऐतिहासिक लड़ाई बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इस युद्ध में राजनीतिक, नैतिक और धर्म के तत्व शामिल है। इस लड़ाई में स्वयं भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण जी ने बिना अस्त्र-शस्त्र के भाग लिया था। दरअसल महाभारत के दौरान श्री कृष्ण जी ने अर्जुन से कहा है कि इस धरती पर जब-जब धर्म की हानि होगी तब तब वह अवतार लेंगे और इस धरती को अधर्मी लोगो से बचाएंगे।

महाभारत की लड़ाई में कौरवो की पूरी वंश खत्म हो गई थी इस युद्ध में इतने लोग मरे थे और इतना रक्त बहा था कि वहां की भूमि रंग आज भी लाल है। इस युद्ध में सबसे शक्तिशाली योद्धाओ ने भी भाग लिया और जो अपराज्य माने जाते थे यही नहीं महाभारत के इस लड़ाई में सबसे शक्तिशाली हथियारो का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन कुछ लोग यह जानना चाहते होंगे कि इतने महान योद्धाओ में से सबसे शक्तिशाली कौन था। तो आइए जानते हैं महाभारत के महान योद्धाओ में से कौन कौन थे सबसे महान शक्तिशाली योद्धा।

दुर्योधन 

दुर्योधन कौड़व सेना केे भाईयो में सबसे बड़े भाई थे और एक बहुत बड़े योद्धा भी थे जिनको गदा चलाने की कला में महारत हासिल थी। असल में उस जमाने में गधा चलाने वालो में दुर्योधन सर्वश्रेष्ठ थे इनके पास गजब की शारीरिक शक्ति थी और छोटी मोटी चोटो का उन पर कोई असर नहीं होता था। कहा जाता है कि दुर्योधन में अकेले हजार आदमियो की शक्ति निहित थी। दुर्योधन अपनी युद्ध कला  गुरु कृपाचार्य और द्रोणाचार्य से सीखी थी जिसके बाद उन्होंने बलराम से गधा चलाने की कला सीखी। वह पूरे भारतवर्ष के सबसे क्रूर शासक थे और महाभारत जैसा विशाल युद्ध शुरू करने के पीछे सबसे बड़ा कारण वही थेे।

भीम

महाभारत प्राचीन काल का सबसे बड़ा युद्ध जानिए कौन थे इस युद्ध के 15 सबसे बड़े योद्धा 

भीम पांचो पांडव भाइयो में से दूसरे बड़े भाई थे जो कुंती और वायु देव के पुत्र थे इनका नाम भीम था। भीम अपने पिता की तरह ही काफी शक्तिशाली थे उन्हें इंद्रदेव और वायु देव के जितना ही बलवान माना जाता था। पांचो पांडवो में ये सबसे ज्यादा बलवान माने जाते थे यही नहीं पूरे महाभारत के युद्ध में कोई भी इनके जैसा बलवान नहीं था। कहा जाता है भीम में एक लाख हाथियो का बल था भीम ने गदा और तलवार चलाने की कला बलराम से सीखी थी। एक बार बचपन में भीम अपनी मां की गोद से पहार के नीचे गिर गए थे लेकिन एक बड़ी चोटी से गिरने के बाद भी भीम को एक खरोच तक नहीं आई थी और जिस चट्टान पर वह गिरे थे वह चट्टान चूर-चूर हो गई थी। इस घटना से आप भीम की शक्ति का अंदाजा लगा सकते हैं और यह भी समझ चुके होंगे कि भीम कैसे प्रतिष्ठित पहलवान रह थे।

अभिमन्यु

अभिमन्यु महान योद्धा अर्जुन के पुत्र थे अभिमन्यु ने अपना बचपन द्वारका में श्री कृष्ण जी के आचरण में निकाला। उन्होंने युद्ध की कला अपने पिता अर्जुन और श्री कृष्ण जी के पुत्र प्रद्युमन से सीखा था। अभिमन्यु में सीखने की काफी ज्यादा क्षमता थी इसलिए उनकी शिक्षा उनके मां के गर्भ में रहने के समय से ही शुरू हो गई थी। जब अभिमन्यु अपने माता के गर्भ में थे इस दौरान अर्जुन अभिमन्यु की माता को युद्ध नीतियो के बारे में बताते थे, तब अभिमन्यु ने गर्भ में रहकर ही उन नीतियो को सीख लिया था। जब अर्जुन चक्रव्यूह बनाने और तोड़ने का ज्ञान दे रहे थे, उस समय उनकी माता आधे शिक्षा में ही सो गई थी और ऐसा होने के कारण अभिमन्यु ने चक्रव्यूह में घुसना तो सीख लिया लेकिन उसे भेद कर बाहर आना नहीं सीख पाए। जिस कारण महाभारत के युद्ध में अभिमन्यु चक्रव्यूह में घुस गए लेकिन बाहर नहीं आ सके और उनका वध हो गया अभिमन्यु 16 साल के कम उम्र में ही महाभारत के युद्ध का हिस्सा बने थे।

घटोत्कच

महाभारत प्राचीन काल का सबसे बड़ा युद्ध जानिए कौन थे इस युद्ध के 15 सबसे बड़े योद्धा 

घटोत्कच भीम और राक्षसी हिडिंबा के पुत्र थे, क्योंकि वह आधे क्षत्रिय और आधा राक्षस थे तो उनमें दोनो की दिव्य शक्तिया मौजूद थी। हिडिंबा के पुत्र होने के कारण थे घटोत्कच में राक्षसो की सारी शक्तिया थी और वह एक क्षत्रिय के पुत्र भी दे तो इसीलिए उनमें क्षत्रियो का ज्ञान और बल भी मौजूद था। घटोत्कच के पास कई दिव्य शक्तिया भी थी जिस कारण वह अपनी मर्जी से आकार बदल लेते थे। इसीलिए महाभारत के अच्छे-अच्छे योद्धा उनके सामने हार मान लेते थे घटोत्कच ने एक ही रात में पूरी की पूरी कौड़व सेना को खत्म कर दिया था।

अश्वथामा

अश्वत्थामा गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र थे अश्वत्थमा का जन्म शिव जी के आशीर्वाद के साथ हुआ था। दरअसल द्रोणाचार्य जो अश्वथामा के पिता थे उन्होने काफी सालो तक शिव जी की तपस्या करके उनको प्रसन्न किया था और उनसे यह वरदान मांगा था कि उनका पुत्र शिव जी की तरह ही शक्तिमान हो। इसीलिए अश्वत्थामा के जन्म के समय उनके सर पर एक मणि थी और इस मणि के कारण अश्वथामा को ना तो भूख लगती थी और ना ही प्यास लगती थी। यही नहीं इस मणि के सहारे अश्वत्थमा हर प्रकार के जीव जंतुओ को अपने वश में कर सकते थे। अश्वत्थामा एक चरंजीवी थे और उन्हें अस्त्र-शस्त्र चलाने में महारत हासिल थी। अश्वत्थामा के पास बहुमूल्य ब्रह्मास्त्र भी था अश्वत्थामा के बारे में भीम ने कहा था कि अश्वत्थामा से क्रोधित रूप में लड़ना नामुमकिन था क्योंकि वह शिव जी के जैसे ही भयानक रूप ले लेता है। 

द्रोणाचार्य

कौड़व और पांडव के गुरु द्रोणाचार्य ने दोनो तरफ के योद्धाओ को ज्ञान दिया था। द्रोणाचार्य के पास हर प्रकार का शस्त्र चलाने का ज्ञान था जिसमें प्रशुपतास्त्र, नारायणाअस्त्र, ब्रह्मास्त्र भी शामिल है। द्रोणाचार्य को कभी सीधे पराजित नहीं किया जा सकता था तब श्री कृष्ण ने भीम से कहकर अश्वथामा नाम के एक हाथी को मरवा दिया और हर तरफ खबर फैला दी कि अश्वत्थामा मारा गया। यह सुनकर द्रोणाचार्य ने अपने हथियार डाल दिए और ऐसे में छल से द्रोणाचार्य का वध किया गया। द्रोणाचार्य परशुराम के शिष्य थे और अपने वचन के कारण उन्होंने कौड़वो के तरफ से महाभारत का युद्ध लड़ा था कौड़वो की तरफ से महाभारत की अच्छी और बड़ी रणनीतिया द्रोणाचार्य ने ही बनाई थी।

भीष्म

महामहिम भीष्म को हराना असंभव था क्योंकि उन्हें यह वरदान मिला था कि उनकी जान उनकी इच्छा के बगैर नहीं ली जा सकती। युद्ध के 10 दिन बीत जाने के बाद पांडव समझ चुके थे कि भीष्म को हराना असंभव है। भीष्म ने महर्षि परशुराम को भी हराया था जो कि विष्णु के अवतार थे। तब शिखंडी को आगे करके अर्जुन ने भीष्म पर अनेको बाण चलाए और फिर भीष्म अर्जुन द्वारा चलाए गए बाण के बिच में फस गए लेकिन उन्होंने अपना प्राण अपनी मर्जी से ही त्याग किया था।

अर्जुन

अर्जुनकुंती और इंद्र देव के पुत्र थे अर्जुन के पास कई अस्त्रो का ज्ञान था। महाभारत युद्ध की शुरुआत से पहले श्री कृष्ण जी ने स्वयं अर्जुन को चुनाव का मौका दिया कि वह या तो कृष्ण की नारायणी सेना को चुने या फिर स्वयं श्रीकृष्ण को चुने तब अर्जुन ने बिना अस्त्र-शस्त्र धारी श्री कृष्ण को चुना। अर्जुन का यह फैसला महाभारत के युद्ध में अधर्म पर धर्म की विजय होने में अमृत के समान रखी । भगवान श्रीकृष्ण तो पहले से ही जानते थे कि क्या होने वाला है ऐसे में उन्होंने अर्जुन के आगे यह प्रस्ताव रखा कि अगर तुम्हें सही लगे तो तुम मुझे सारथी के रूप में चुन सकते हो लेकिन मैं इस लड़ाई में अस्त्र शास्त्र का उपयोग नहीं करूंगा।

महाभारत प्राचीन काल का सबसे बड़ा युद्ध जानिए कौन थे इस युद्ध के 15 सबसे बड़े योद्धा 

ठीक उसी प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने युद्ध में केवल रणनीतिया ही बनाई और पांडव पक्ष का मार्गदर्शन किया। महाभारत के युद्ध में अर्जुन के सबसे बड़ी भूमिका थी भगवान श्रीकृष्ण पर उनका विश्वास जिस कारण उन्होंने सेना के बदले श्री कृष्ण का चुनाव किया। महाभारत के युद्ध में सारथी रूप में मौजूद कृष्ण के मार्गदर्शन से ही अर्जुन ने कौड़वो की आधी से ज्यादा सेना को मारा और जिसमें भीष्म पितामह और कर्ण भी शामिल थे।

दानवीर कर्ण

दानवीर कर्ण को अंगराज कर्ण भी कहा जाता है अंगराज कर्ण सूर्यपुत्र थे जिन्होंने कुंती माता से जन्म दिया था। लेकिन इनका पालन-पोषण छोटे जात के लोगो ने किया था जिस कारण महान योद्धा, शक्तिशाली और दानवीर होने के बावजूद भी जीवन भर इनके साथ भेदभाव होता रहा दानवीर कर्ण अर्जुन से भी महान धनुर्धर थे। दानवीर कर्ण को उनके कवच और उनके कुंडल के साथ कभी भी हराया नहीं जा सकता था। पहले तो कर्ण से उनके कवच और कुंडल निकलवाया गया लेकिन उसके बाद भी कर्ण से युद्ध जीतना असंभव था तब अर्जुन ने कर्ण का वध किया।

कर्ण ने युद्ध में नकुल, सहदेव, युधिस्टर और भीम को भी हराया था लेकिन उन्हें मारा नहीं। क्योंकि कर्ण ने यह प्रतिज्ञा ली थी कि वह अपने भाइयो को नहीं मारेगा और आखिरी में कर्ण को भी भगवान श्री कृष्ण ने छलके सहारे ही वध करवाया था। परशुराम के श्राप के कारण आखिरी समय में इनकी विद्या भी खो गई थी और इनके रथ के पहिए को मिट्टी में अंदर समा दिए जिसे निकालने के लिए जब कर्ण रथ से उतरे तो उनका वध किया गया था।

भगवान श्री कृष्ण

महाभारत के सबसे शक्तिशाली योद्धा भगवान श्री कृष्ण थे जो विष्णु के अवतार थे। भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत में कोई भी हथियार का प्रयोग नहीं किया था केवल रणनीति बनाकर ही इतने महान योद्धाओ को मात दे पाए थे। इसके विपरीत अगर श्री कृष्ण जी हथियार उठा लेते तो केवल अपने सुदर्शन चक्र से ही पूरे कौड़वो सेना को खत्म कर देते और ऐसे में महाभारत की लड़ाई की तो कोई आवश्यकता ही नहीं होती।

लेकिन तब इसे महाभारत की लड़ाई नहीं कही जाती और ना ही अधर्म पर धर्म की जीत कही जाती। इसीलिए भगवान श्री कृष्ण ने रणनीति बनाकर पांडवो के हाथो से कौड़वो का वध करवाया था। महाभारत के समय ही भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को अपना विराट रूप दिखाया था कृष्ण ने धर्म के सभी बातें महाभारत में कही थी। 

ऐसे में महाभारत देखने और पढ़नेे से आज के समय में भी लोग धर्म अधर्म सेेेे जुड़े ज्ञानो से अवगत हो सकते हैं, उन्हें सही मार्ग मिल सकता है और फैसला करने की शक्ति मिल सकती हैं।

Jhuma Ray
Jhuma Ray
नमस्कार! मेरा नाम Jhuma Ray है। Writting मेरी Hobby या शौक नही, बल्कि मेरा जुनून है । नए नए विषयों पर Research करना और बेहतर से बेहतर जानकारियां निकालकर, उन्हों शब्दों से सजाना मुझे पसंद है। कृपया, आप लोग मेरे Articles को पढ़े और कोई भी सवाल या सुझाव हो तो निसंकोच मुझसे संपर्क करें। मैं अपने Readers के साथ एक खास रिश्ता बनाना चाहती हूँ। आशा है, आप लोग इसमें मेरा पूरा साथ देंगे।
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