“World rose Day 2021” के अवसर पर चलिए जानते हैं किस प्रकार कैंसर मरीज के जीवन में भरे खुशियां

1
"World rose Day 2021" के अवसर पर चलिए जानते हैं किस प्रकार कैंसर मरीज के जीवन में भरे खुशियां

क्या आप लोग सितंबर महीने में आने वाले रोज डे के बारे में जानते हैं ? अगर नहीं जानते तो आज के इस पोस्ट को पढ़ने के बाद जान जाएंगे 22 सितंबर के दिन दुनिया भर में वर्ल्ड रोज डे के तौर पर मनाया जाता है।

यह दिन कैंसर पीड़ितो के साथ मानवीय व्यवहार करने, उनका दुख बांटने, उन्हें खुशियां देने के लिए मनाया जाता है। आज के इस पोस्ट में हम जानेंगे कि वर्ल्ड रोज डे की शुरुआत कैसे हुई और किस तरह हम इस दिन कैंसर पीड़ितो को साहसदें और उन्हें खुश रखें। वर्ल्ड रोज डे हर साल 22 सितंबर को सेलिब्रेट होता है दरअसल यह एक ऐसा दिन है जो एक खास मकसद से सेलिब्रेट किया जाता है। 

इस दिन कैंसर के मरीजो को गुलाब का फूल देकर उनके आत्मविश्वास और उत्साह को बढ़ाता है। क्योंकि गुलाब का फूल प्यार अपनापन और केयर का प्रतीक माना जाता है इसलिए इस दिन का नाम रोज डे रखा गया है। दरअसल यह कैंसर पीड़ितों से मानवीय व्यवहार करने और उनका दुख बांटने के लिए हर साल 22 सितंबर को मनाया जाता हैै। इस दिन का मकसद होता है कैंसर से लड़ने वाले लोगो को जिंदगी सही ढंग से जीने के लिए प्रेरणा देना जीवन में अंधेरे के बीच खुशिया बिखेरना। 

दरअसल यह दिवस एक बच्ची मेलिंडा की याद में मनाया जाता है जो केवल 12 साल की थी। और तब डॉक्टर ने भी जवाब दे दिया था साल 1994 में मेलिंडा को ब्लड कैंसर हुआ था तब डॉक्टर ने कहा कि बच्ची 10-15 दिन से ज्यादा नहीं जी पाएगी। लेकिन इस बच्ची ने हार नहीं मानी और वह कैंसर के साथ 6 महीने तक लड़ती रही। बच्ची ने डॉक्टर को गलत साबित कर दिया और ऐसे में जब सितंबर महीने में बच्चे की मौत हुई तो इसे कैंसर के खिलाफ जंग के तौर पर मनाने की शुरुआत हुई।

वर्ल्ड रोज डे के दिन रोज देकर कैंसर मरीजो को यह बताया जाता है कि कैंसर जिंदगी का अंत नहीं बल्कि एक शुरुआत है। क्योंकि उम्मीद और जज्बे से कई लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने में कामयाब हो जाते हैं। मेलिंडा ने कैंसर के साथ 6 महीने तक जीवित ही नहीं रही बल्कि उसने दूसरे कैंसर मरीजो से मिलकर उनके जीवन में खुशियां भरी। उन्हें कविताए, ईमेल, चिट्टियां भेजकर हमेशा खुश करने की कोशिश करती रही।

और उस बच्ची के इस हिम्मत ने 5 सितंबर के दिन को वर्ल्ड रोज डे के रूप में मनाने का प्रोत्साहन दिया। इस दिन उस बच्ची द्वारा किए गए महत्वपूर्ण प्रयास ने दुनिया के सभी लोगो को मेलिंडा नाम की उस बच्ची के याद में उसके इस साहस के काम को करने का सबक दे दिया। यह एक ऐसी बीमारी है जिसका पता चलते ही पूरे परिवार को हिम्मत की जरूरत होती है। अगर किसी को कैंसर होता है तो उसे सबसे ज्यादा व्यक्ति के साथ और प्यार की जरूरत होती है। 

कैंसर मरीजो की केयर करने के साथ उसके प्रति सामने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारिया और बढ़ जाती है। क्योंकि मरीज के लिए हमेशा पॉजिटिव रहना बहुत जरूरी है और इसके लिए आपका पॉजिटिव रहना बहुत जरूरी है। आप को सबसे ज्यादा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कैंसर के मरीज कई तरह के मोशन से गुजरते हैं वे कभी चिरचिरा होते हैं, कभी खुश रहते हैं, कभी दवाई खा खा कर निराश हो जाते हैं। 

“World rose Day 2021” के अवसर पर चलिए जानते हैं किस प्रकार कैंसर मरीज के जीवन में भरे खुशियां

उनसे हमेशा पॉजिटिव रहने के लिए जोर ना डालें उन्हें जैसा फील हो रहा है जो भी फील हो रहा है उन्हें उसी परिस्थिति में सुने उसी परिस्थिति में संभाले। और हर समय उनके साथ होने का एहसास करवाए हमेशा प्रयास करें कि वे जितने दिन भी आपके साथ हैं वो इस दुनिया में उनके सबसे अच्छे दिन हो। उन्हें हंसाए, उन्हें घूमए, उन्हें किसी बात का दुख या कमी ना महसूस होने दें।

12 साल की कैंसर पीड़ित मेलिंडा ने पूरी दुनिया को यह सबक दिया कि कैंसर नामक घातक बीमारी भले ही व्यक्ति के जीवन का अंत कर सकती है लेकिन बचे हुए दिनों को बिगाड़ नहीं सकती। व्यक्ति का सकारात्मक स्वभाव जिंदगी की खुशियो को नहीं छीन सकती। कैंसर जीवन को भले ही छोटा बना सकती है लेकिन इस जिंदगी को खराब नहीं कर सकती। बल्कि अगर कैंसर मरी चाहे तो बचे हुए जिंदगी को और मजे से जीकर खुशी मना सकती है।

वर्ल्ड कैंसर डे के दिन हमें अस्पतालो में जाकर उन लोगो की परेशानियो को कुछ हद तक कम करना चाहिए जो इस बीमारी का सामना कर रहे हैं। इस दिनलोग कैंसर पीड़ितो को गुलाब फूल देकर उनसे जिंदगी जीने की तमन्ना रखने की अपील करते हैं। क्योंकि यह जरूरी नहीं है कि जिंदगी लंबी हो जिंदगी छोटी हो लेकिन जिंदगी खुशी से भरी होनी चाहिए। इसीलिए हर एक व्यक्ति का यह कर्तव्य बनता है कि इस दिन गुलाब देकर कैंसर मरीजों को यह संदेश देने की कोशिश करें कि कैंसर किसी के जीवन अंत नहीं बल्कि बचे हुए जीवन को खुशी से जीने का नाम है।

12 वर्षीय बहादुर मेलिंडा रोज इस दुर्लभ कैंसर बीमारी के साथ 6 महीने तक खुशी से जंग लड़ती रही। डॉक्टर ने जिसे केवल 2 हफ्ते का मेहमान बताया था बहादुर मेलिंडा रोज ने उसे भी झुठला दिया और 6 महीने तक जीवित रही। मेलिंडा केवल खुद ही नहीं बल्कि बाकी कैंसर पीड़ितों को भी जीवन जीने की लिए प्रेरणा देती रही और एक मिसाल बन गई। क्योंकि जिंदगी छोटी हो या बड़ी हमेशा बहादुरी और हिम्मत के साथ जीना ही जीवन होता है। 

महान लेखक सेक्स्पीयर ने भी कहा है कि एक बहादुर अपने सम्पूर्ण जीवन काल में केवल एक बार मरता है जबकि कायर अपनी मौत से पहले कई बार मरता है।जिस प्रकार के केवल 12 वर्षीय में मेलिंडा खुद कैंसर पीड़ित होते हुए भी दूसरे कैंसर पीड़ितो से जीवन जीने की प्रेरणा देती रही और उन्हें खुश रखने का प्रयास किया, उनका दुख बांटा यह दुनिया में हर किसी के लिए बहुत बड़ी बात है हमें हर एक कैंसर मरीज को मेलिंडा के साहस के बारे में बताना चाहिए ताकि उनको भी मेलिंडा की तरह जिंदगी को जीने का साहस मिले।

तो चलिए वर्ल्ड रोज डे के इस अवसर पर हम कैंसर के मरीजो से मिलने जाए उन्हें गुलाब देकर उनका हौसला और हिम्मत बढ़ाए ताकि वह जिंदगी के जंग को जीत सके। जिस प्रकार गुलाब का फूल डाल से टूट कर भी खुशबू भी बिखेरता है उसी प्रकार जिंदगी के मोड़ पर कितनी भी मुसीबतें क्यों ना आए लेकिन व्यक्ति को हमेशा जिंदा रहने का जज्बा रखना चाहिए।

इस दिन कैंसर के मरीजो को रोल कार्ड गिफ्ट देकर खुश करने की कोशिश करें, उनके साथ बैठे उनसे प्रेरणादायक बातें करें। जैसे कि व्यक्ति को बहादुर होना होना चाहिए, कोई बहादुर जंग जीते या हारे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उसकी बहादुरी सदियों तक अमर रहती है और लोगो के दिलों में जिंदा रहती हैं जिस प्रकार आज मेलिंडा दुनिया भर में जिंदा है।  

Leave a Reply