तालिबानी हुकूमत तले काबुल एयरपोर्ट पर हुए ब्लास्ट में 170 लोगो की मौत।

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तालिबानी हुकूमत तले काबुल एयरपोर्ट पर हुए ब्लास्ट में 170 लोगो की मौत।
तालिबानी हुकूमत तले काबुल एयरपोर्ट पर हुए ब्लास्ट में 170 लोगो की मौत।

काबुल एयरपोर्ट पर गुरुवार को हुए धमाके में अब तक 170 लोगो की जान जा चुकी है। न्यूज के अनुसार पता चला है कि इन हमलो में 13 अमेरिकी सैनिक और 2 ब्रिटिश नागरिक भी मारे जा चुके है वहीं 1276 से भी ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं। दूसरी और अफगानिस्तान में फिदायीन हमलो से ज्यादा लोगो में तालिबान का पुुरी तरह बैठ गया है।  

घायल लोग अपने इलाज के लिए पानी में पड़े तरप रहे थे लेकिन आज उसी नाले की तस्वीर कुछ और ही थी वहा लोगो का फिर से हुजूम उमड़ पड़ा है। तालिबान के प्रति लोगो के मन में इतना खोफ बैठ गया है कि वह किसी भी हाल में देश छोड़कर जाना चाहते है उन्हें ना ब्लास्ट की परवाह है ना ही अपनी जान की फिक्र।

शुक्रवार के दिन हजारो की संख्या में लोग नाले के ऊपर और अंदर खड़े होकर किसी प्रकार अपने डॉक्यूमेंट वेरीफाई करवाने में लगे हुए थे। ताकि तालिबानी हुकूमत के साए से दूर जा सके और इसी बीच ब्लास्ट के 16 घंटे बाद ही करीब 12 बजे उड़ाने फिर से शुरू कर दी गई है। यहां शुक्रवार शाम को पिया दिन हमले हुए थे मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 155 लोग हमले में मारे गए हैं उनमें 28 तालिबानी थे जो कि काबुली एयरपोर्ट के बाहर तैनात थे। इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन ISIS के खुरासान ग्रुप ने ली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हुए इस हमले के बाद PM नरेंद्र मोदी ने को इटली के PM मारियो ड्रैगन से अफगानिस्तान के हालात पर चर्चा की दोनो नेताओ ने काबुली एयरपोर्ट पर हुए इस ब्लास्ट में जान गंवाने वाले लोगो के परिवारो के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए आतंकी हमले की निंदा की और साथ ही वहां पर फंसे लोगों को वापस अपने अपने देश बुलाने के लिए आवश्यक कामों पर भी छोड़ दिया।

इन दोनो नेताओ ने अफगानिस्तान के विकास में उत्पन्न हुए इस मानवीय संकट और दीर्घकालीन सुरक्षा के चिंताओ को दूर करने के लिए G -20 के स्तर के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। दोनो देशों के नेताओ ने G -20 के साथ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दो पर भी चर्चा की है। साथ ही उन्होंने COP 26 जैसे आने वाले आगामी बहुपक्षीय कार्यक्रमो पर भी जोड़ दिया है। दोनो नेताओं ने द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर खासतौर से अफगानिस्तान की स्थिति पर संपर्क में रहने पर अपनी सहमति व्यक्त की है।

तालिबानी हुकूमत तले काबुल एयरपोर्ट पर हुए ब्लास्ट में 170 लोगो की मौत।

काबुल में हुए इस हमले के बाद तालिबान ने महिला स्वास्थ्य कर्मियो को काम पर लौटने को कहा है। अस्पताल में स्टाफ की कमी के कारण तालिबान ने महिलाओ को यह आदेश दिया है कि तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया के द्वारा कहा है कि इस्लामी अमीरात के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी महिला कर्मचारियो को केंद्र और प्रांतो में नियमित रूप से अपने काम पर लौटने को कहा है।

कहा है कि इस्लामिक अमीरात उनके काम में कोई बाधा नहीं डालेगी। ब्रिटेन सरकार ने इसकी पुष्टि की हैकबूल एयरपोर्ट पर हुए इस हमले में ब्रिटेन के दो नागरिको की मौत हुई है। ब्रिटिश सरकार ने अफगानिस्तान में काम कर चुके 8 हजार अफगानियो को एअरलिफ्ट किया है। ब्रिटिश सरकार ने शरणार्थी का दर्जा देकर 5 साल तक का वीजा भी उपलब्ध कराएगी। इसके बाद अफगानी न्याय नागरिकता के लिए स्थाई नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे।

वहीं अमेरिका ने भी कबूल ब्लास्ट की जांच करने की बात कही अमेरिका ने कहा है कि हम जितना हो सके हमले के पीछे का कारण जानने की कोशिश करेंगे। क्योंकि हम अफगानिस्तान को भी युद्ध से टूटते हुए नहीं देखना चाहते। व्हाइट हाउस के जानकारी के मुताबिक पता चला है कि काबुल एयरपोर्ट पर हुए फिदायीन हमले से पहले 24 घंटे में 12 हजार 500 लोगो को निकाला गया है। 14 अगस्त से अब तक 1 लाख 5 हजार लोगो को रेस्क्यू किया जा चुका है। 

वही जुलाई से अब तक 1 लाख 10 हजार 600  लोगो को एअरलिफ्ट किया जा चुका है। काबुल एयरपोर्ट पर हुए इस ब्लास्ट में एक फिदायीन हमलावर शामिल था। पेंटागन ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की है कि इससे पहले दो आत्मघाती हमलो की जानकारी सामने आ रही हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया है कि अफगानिस्तान में नई सरकार के गठन होने के कारण भारत इंतजार कर रहा है इसके बाद ही बातचीत को लेकर रणनीति तय की जाएगी।

अमेरिका ने कहा है कि काबुल से लोगो को निकालने का मिशन अभी भी जारी है। अमेरिका ने काबुल में हुए लोगो के मौत सम्मान में अमेरिका का झंडा 30 अगस्त शाम तक आधा झुका हुआ रखने की बात कही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने एयरपोर्ट पर हुए हमलो की निंदा करते हुए कहा कि अमेरिकी सैनिको की मौत बेहद दुखद है। दूसरो की जान बचाने में अमेरिकी सैनिको का बलिदान हम कभी नहीं भूल सकते और ना ही हमलावरो को माफ किया जा सकता है हम आतंकवादियो को ढूंढ कर मारेंगे। सैनिको के परिवारो के साथ हमारी संवेदनाएं हैं हम अफगानिस्तान से अमेरिकी नागरिको को निकाल लेंगे और अपने सहयोगियो को भी बाहर निकालेंगे। हमारा मिशन जारी रहेगा और आवश्यकता होने पर अतिरिक्त फौजी भेजी जाएगी।

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