Wednesday, May 18, 2022
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अफगान सरकार के गिरने के बाद तालिबान का सम्पूर्ण अफगानिस्तान पर कब्जा

मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करने का प्रयास

अफगानिस्तान और तालिबान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करने के लिए चीन, पाकिस्तान पहुंचे अफगानिस्तान के नेताओ से इमरान खान की बैठक हुई। अफगानिस्तान में अमेरिका के साथ नाटो देशो की सेनाओ की वापसी होते ही जिस प्रकार से अफगानिस्तान में आतंकी संगठन ने हैरत मन तरीका से देश पर कब्जा कर लिया है। उसी प्रकार जब दुनिया के देश आतंकी संगठन की तालिबान की नई सरकार को मान्यता तक देने को तैयार नहीं है तब कम्युनिस्ट देश चीन ने कट्टरपंथी मुस्लिम आतंकी संगठन तालिबान के साथ गलिया करने के लिए अपनी मंशा को खुले तौर पर जता दिया है। न्यूज़ एजेंसी ने ट्वीट करके कहा है कि चीन का कहना है कि वह अफगानिस्तान के तालिबान के साथ फ्रेंडली रिलेशन यानी मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करने के लिए तैयार है। तो वहीं पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाने की बात कही है।

सुरक्षा समिति की बैठक 

काबुल में तालिबान द्वारा सत्ता पर कब्जा करने और राष्ट्रपति अशरफ गनी के युद्ध ग्रस्त देश छोड़ने के 1 दिन बाद अफगानिस्तान में उभरती स्थिति पर चर्चा करने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में पाकिस्तान की सुरक्षा समिति की बैठक होने जा रही है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सोमवार को कहा कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफगानिस्तान के संपर्क में रहना चाहिए। इसके अलावा पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने जोड़ दिया है कि युद्ध ग्रस्त पड़ोसी देश में राजनीतिक समाधान लाने का प्रयास में पाकिस्तान अपना सहयोग जारी रखेगा। ताजा घटनाक्रम को लेकर कोई पाकिस्तानी नेता का निशान में तालिबान से बातचीत के लिए पहुंच चुके हैं ताकि आने वाले रणनीति पर काम किया जा सके।

अफगान नेताओ का प्रतिनिधिमंडल बैठक

अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद यूनुस कानूनी के नेतृत्व में अफगान नेताओ के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक होने के बाद विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने ट्वीट करके कहा है कि पाकिस्तान का रुख स्पष्ट है। हमारा यह मानना है कि आगे के लिए एकमात्र राहत वार्ता से राजनीतिक समाधान निकालना है। 

हम लगातार गृह युद्ध नहीं देखना चाहते, हम चाहते हैं कि अफगानिस्तान के लोग बचे रहे  साथ साथ उनकी उन्नति भी हो वे पहले से आगे बड़े। विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने उम्मीद जताई है कि अफगानिस्तान के सभी नेता अपने देश के राष्ट्रीय हित में मिलकर काम करेंगे और पाकिस्तान अफगानिस्तान में सकारात्मक और सहयोगी की भूमिका निभाता रहेगा। 

अफगान प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंचे

कुरैशी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफगानिस्तान के संपर्क में रहना चाहिए। यह जरूरी है कि हम अपने अगले कदम समन्वय के साथ उठाए ताकि अफगानिस्तान को फायदा हो। राष्ट्रपति गणी के अफगानिस्तान से भागने के दिन ही अफगान प्रतिनिधि मंडल पाकिस्तान पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में साल 2001 में तालिबान के सत्ता से हटने के बाद विभिन्न सरकारी हिस्सा रहे नेता शामिल है। 

अफगान सरकार के गिरने के बाद तालिबान का सम्पूर्ण अफगानिस्तान पर कब्जा

कुरैशी प्रधानमंत्री खान के साथ अलग से भी एक बैठक करेंगे और क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा करने वाले हैं। प्रधानमंत्री इमरान खान ने कुरैशी से अगले हफ्ते अफगानिस्तान के पड़ोसी देशो से संपर्क स्थापित करने को कहा है। पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में अफगानिस्तान की स्थिति पर बैठक होगी। 

विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा

काबुल में तालीबान के द्वारा सत्ता पर कब्जा करने और अफ़गान राष्ट्रपति अशरफ गनी के द्वारा युद्ध ग्रस्त देश को छोड़ने के एक दिन बाद अफगानिस्तान में उभरती स्थिति पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में पाकिस्तान की सुरक्षा समिति की बैठक होने जा रही है। विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एक बयान में कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक में विचार विमर्श करने के बाद पाकिस्तान मौजूदा स्थिति पर अपने रुख की पेशकश करेगा। बैठक में सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा और विदेश मंत्री कुरैशी के साथ वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य नेता भी शामिल होंगे। और साथ ही एक और महत्‍वपूर्ण बैठक अफगान शिष्‍टमंडल के साथ विदेश कार्यालय में भी होगी।

राजधानी काबुल में फंसे कई देशो के नागरिक

इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण बैठक विदेश कार्यालय में अफगान शिष्टमंडल के साथ भी होगी।अमरीका से समर्थित अफगान सरकार के गिर जाने के बाद तालिबान के आतंकवादियो ने काबुल पर तो कब्जा जमा ही लिया है। इससे अमेरिका और उसके सहयोगी द्वारा युद्ध प्रभावित देश में सुधार लाने के दो दशक लंबा प्रयास भी खत्म हो गया। अभी भी अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अमेरिका के साथ कई देशो के दूतावास के कर्मचारी व नागरिक फंसे हुए हैं।

तालिबान के साथ चीन और पाकिस्तान का रिश्ता

तालिबान पहले भी चीन के साथ अच्छे रिश्ते की बात करते थे साथ ही पाकिस्तानी सरकार पर पहले से भी यह आरोप लग चुके हैं कि पाकिस्तान और चीन दोनो पीछे से अफगानिस्तान पर तालिबान को पीछे से सपोर्ट करते हैं। लगातार 20 साल अफगानिस्तान में सत्ता से दूर रहे आतंकी संगठन को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी और सैन्य एजेंसीया उनको ट्रेनिंग से लेकर हथियारो तक मदद करती रही है। और तभी उसके ताकत में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि हुआ है। 

Jhuma Ray
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नमस्कार! मेरा नाम Jhuma Ray है। Writting मेरी Hobby या शौक नही, बल्कि मेरा जुनून है । नए नए विषयों पर Research करना और बेहतर से बेहतर जानकारियां निकालकर, उन्हों शब्दों से सजाना मुझे पसंद है। कृपया, आप लोग मेरे Articles को पढ़े और कोई भी सवाल या सुझाव हो तो निसंकोच मुझसे संपर्क करें। मैं अपने Readers के साथ एक खास रिश्ता बनाना चाहती हूँ। आशा है, आप लोग इसमें मेरा पूरा साथ देंगे।
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