“ऑपरेशन विजय दिवस 2021” कारगिल विजय दिवस कब, क्यों, कैसे मनाया जाता है ? इस युद्ध का इतिहास

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"ऑपरेशन विजय दिवस 2021" कारगिल विजय दिवस कब, क्यों, कैसे मनाया जाता है ? इस युद्ध का इतिहास

भारत वीरो की भूमि है, जिसने हमेशा दुश्मनो को धूल चटाकर उनके छक्के छुड़ा दीए हैं भारतीय सेना हर समय भारत की सीमा पर तैनात रहती है। लेकिन हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान हमेशा घुपैठ की कौशिश में लगा रहता है। ऐसी ही एक घटना साल 1999 में कश्मीर में हुई, जब पाकिस्तान ने कारगिल की चोटियो पर कब्ज़ा कर लिया।

हर साल 26 जुलाई के दिन सम्पूर्ण भारत में कारगिल विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है। जिसे ऑपरेशन विजय के नाम से भी जाना जाता है। कारगिल युद्ध 60 दिनों तक लड़ा गया और 26 जुलाई 1999 को समाप्त हुआ। कारगिल युद्ध में पाकिस्तान के हजारो सैनिक मरे गए, जबकि भारत के 527 भारतीय सैनिक शहीद हुए। कारगिल का युद्ध जम्मू-कश्मीर के कारगिल जिले में नियंत्रण रेखा पर हुआ, जिसे LOC कहते हैं। इस युद्ध के लिए पाकिस्तान ने अपनी सेना को सर्दियो में घुसपैठी बनाकर भेज दिया जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय सीमा पर तनाव पैदा करना था।

कारगिल युद्ध विजय का 22 वा सालगिरह 

कारगिल का युद्ध साल 1999 में 26 जुलाई को भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था। यह ऐतिहासिक युद्ध जिसमें भारत ने पाकिस्तान को हरायाकश्मीर के कारगिल में हुआ था और इसीलिए इस ऐतिहासिक युद्ध को कारगिल युद्ध कहा जाता है।

जिसमें भारत को विजय प्राप्ति हुई। तभी से हर साल भारत में इस जीत को कारगिल विजय दिवस के रूप में हर साल मनाने का फैसला लिया गया। भारत के इस ऐतिहासिक विजय को साल 2021 में पूरे 22 साल पूरे हो चुके हैं यानी कि इस साल हमारा देश भारतवर्ष 26 जुलाई को अपनी जीत यानि कारगिल विजय का 22 वा सालगिरह मनाएगा।

कैसे मनाया जाता है कारगिल विजय दिवस

कारगिल के उच्च सम्मान को मनाने के लिए हीरो कारगिल दिवस भी मनाया जाता है। भारत के प्रधान मंत्री और भारतीय सेना द्वारा दिल्ली गेट पर अमर जवान पर युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिको को श्रद्धांजलि दी जाती है। कॉलेजो और सरकारी संस्थानो में विभिन्न समारोह का आयोजन किया जाता हैं, ध्वजारोहण होता है।

इस दिन हर जगह तिरंगा दिखई देता है देश के प्रति अपने प्यार को बयान करने के लिए बच्चे जेब पर पिन किए हुए बैज पहनते हैं। इस अवसर पर स्कूलो कॉलेज में वाद-विवाद, भाषण और भी विभिन्न प्रकार गतिविधियो जैसे निबंध प्रतियोगिताओ का आयोजन होता है ताकि देशभक्ति की भावना को दर्शाया जाए। 

इस दिन का एक मुख्य कार्यक्रम होता है परेड और सेना के अधिकारियो द्वारा किए जाने वाले स्टंट जिसे देखने के लिए लोग इंतजार करते हैं। इस दिन देश भर की ऐतिहासिक धरोहरे भारतीय ध्वज के रंगों से जगमगाती हैं, इस दिन हर जगह देश के हर कोने में देशभक्ति की लहर महसूस की जाती है।

कारगिल युद्ध का इतिहास

साल 1999 में हुई कारगिल की लड़ाई ऐसे ही नहीं थी बल्कि यह भारत के योद्धाओ के वीरता का उदाहरण है। क्या आप जानते हैं कि कारगिल युद्धक्षेत्र दुनिया के सबसे ऊंचे और खतरनाक युद्धक्षेत्रो में से एक है। यह युद्ध श्रीनगर से 205 किमी दूर कारगिल शहर में स्थित टाइगर हिल क्षेत्र में लड़ा गया था। जहां की राते लंबी होती हैं और तापमान -48 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता था। पाकिस्तानी सेना लद्दाख और कश्मीर के बीच संबंध तोड़ना चाहते थे और बाद में धीरे-धीरे कश्मीर पर कब्जा जमाना चाहते थे। 

साल 1998-99 की सर्दियो के दौरान, पाकिस्तानी सेना ने गुप्त तौर से सियाचिन ग्लेशियर पर दावा करने के लक्ष्य के साथ इस क्षेत्र पर हावी होने के लिए कारगिल के पास सैनिकों को प्रशिक्षण देने लगी साथ ही वहां अपने सैनिकोंको भेजना शुरू कर दिए। उस समय घुसपैठिए शीर्ष पर थे और भारतीय सेना की चौकी ढलान पर थी, जिस कारण से भारत पर हमला करना आसान था।

और अंखिरी में दोनो पक्षों के बीच युद्ध छिड़ गया 3 मई साल 1999 को पाकिस्तान के लगभग 5 हजार सैनिको ने कारगिल के पहाड़ी क्षेत्र में घुसपैठ की और भारत की चौकियो पर कब्जा कर लिया। करीब एक सप्ताह बाद जब भारत को इसकी जानकारी मिली हालाकि पाकिस्तानी सैनिको ने कहा कि वे पाकिस्तानी सैनिक नहीं है बल्कि वह मुजाहिदीन हैं। 

“ऑपरेशन विजय दिवस 2021” कारगिल विजय दिवस कब, क्यों, कैसे मनाया जाता है ? इस युद्ध का इतिहास

शुरूआत में पाकिस्तानी सैनिको ने नियंत्रण रेखा को पार किया जिसे एलओसी(LOC) कहा जाता है और भारत-नियंत्रित क्षेत्र में प्रवेश किया। बाद में स्थानीय चरवाहो ने LOC पार करने वाले संदिग्ध लोगो के बारे में भारतीय सेना को सतर्क कर दिया। 

गहराई से देखने के लिए, भारतीय सेना ने लद्दाख से अतिरिक्त सैनिको को कारगिल क्षेत्र में भेजा तो उन्हें पता चला कि पाकिस्तानी सेना ने LOC को पार कर भारत नियंत्रित क्षेत्र में प्रवेश कर लिया है। फिर दोनो सिपाहियो ने जमीन पर अपना कब्जा जमाने के लिए फायरिंग शुरू कर दी। और फिर बाद में भारतीय वायु सेना घाटी से सभी घुसपैठियों को साफ करने के लिए युद्ध में उतरी।

लगभग दो महीनों तक भारत और पाकिस्तान के बीच घमासान युद्ध हुआ। और फिर 26 जुलाई साल 1999 को कश्मीर के कारगिल में भारत ने पाकिस्तान को पूर्ण रूप से हरा दिया। युद्ध का मैदान ऊंचाई पर होने के कारण भारतीयो के लिए हथियार और अन्य सामग्री ले जाना एक तार्किक समस्या था, लेकिन फिर भी भारतीय सेना ने हार न मानते हुए पाकिस्तानी सेना को धूल चटाकर उल्टे पांव दौरा दिए। 

पाकिस्तान चाहता था कि इस विवाद पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान दिया जाए ताकि भारत पर सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र से अपनी सेना वापस बुलाने और भारत को कश्मीर विवाद पर बातचीत करने के लिए मजबूर करने का दबाव डाला जाए, लेकिन बाद में पता चला कि इसमें कश्मीरी आतंकी भी शामिल थे।

दरअसल युद्ध के पीछे की कहानी की शुरुआत साल 1971 में ही हो गई थी, जब भारत-पाक युद्ध के बाद कई सैन्य संघर्ष हुए। दोनों देशो ने साल 1998 में परमाणु परीक्षण किए, जिस कारण दोनो देशो के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। मामला जब आगे बड़ा तो फरवरी 1999 में स्थिति को शांत करने के लिए दोनो देशो ने लाहौर घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। ताकि कश्मीर संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाए, लेकिन पाकिस्तान ने ऐसा होने नहीं दिया।

क्योंकि पाकिस्तानी सशस्त्र बलो ने अपने सैनिको और अर्धसैनिक बलो को नियंत्रण रेखा के पार भारतीय क्षेत्र में भेजना शुरू कर दिया था और उस घुसपैठ का कोड नाम ऑपरेशन बद्र था। भारतीय वायुसेना ने जमीनी हमले के लिए “मिग-2आई”, “मिग-23एस”, “मिग-27”, “जगुआर” और “मिराज-2000” लड़ाकू विमानो का उपयोग किया। इस युद्ध में मिग -21 का निर्माण किया गया था जिसने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जमीन पर लक्ष्य पर हमला करने के लिए, मिग-23 और 27 को अनुकूलित किया गया। पाकिस्तान के कई ठिकानों पर हमले किये गए और इस युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर में “मिग-21” और “मिराज 2000” को सबसे ज्यादा उपयोग में लाया गया। भारत पाकिस्तान के इस युद्ध में बड़ी संख्या में रॉकेट और बमो का इस्तेमाल किया गया। दो लाख से भी ज्यादा गोले, बम और रॉकेट दागे गए। 

कारगिल का वह युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद एकमात्र ऐसा युद्ध था, जिसमें सबसे ज्यादा बमबारी की गई। लगभग दो सप्ताह बाद जब भारत सरकार को इसकी जानकारी मिली तो भारतीय सेना ने “ऑपरेशन विजय” के नाम से एक योजना बनाई और पाकिस्तानी सेना को खदेड़ दिया। अंत में भारत ने पाकिस्तान पर जीत हासिल की और ऑपरेशन विजय को सफल बनाया।

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