इस्लाम धर्म का प्रमुख त्यौहार बकरीद से जुड़े सभी महत्वपूर्ण जानकारी

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इस्लाम धर्म का प्रमुख त्यौहार बकरीद से जुड़े सभी महत्वपूर्ण जानकारी
इस्लाम धर्म का प्रमुख त्यौहार बकरीद से जुड़े सभी महत्वपूर्ण जानकारी

 बकरीद एक कुर्बानी का पर्व होता है जिसे इस्लाम धर्म के लोग एक जश्न के त्यौहार के रूप में मनाते हैं। इस साल 2021 में यह बकरीद का त्यौहार 19 जुलाई के दिन मनाया जाएगा। तो चलिए इस अवसर पर हम जानते हैं इस्लाम धर्म के महत्वपूर्ण त्यौहार बकरीद से जुड़े सभी महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में। जैसे कि इस त्यौहार के पीछे का इतिहास, महत्व, कहानी इन सभी के बारे में।

बकरीद कैसे मनाते हैं

बकरीद के अवसर पर बाजारो में भारी भीड़ जमती है विभिन्न प्रकार की सामग्री मिलते हैं। जिससे वह अपने जश्न को और धूमधाम से मनाते हैं लेकिन इन सबके अलावा बकरीद का त्यौहार कुर्बानी के लिए याद रखा जाता है। 

 इस्लाम धर्म के नियम के अनुसार मान्यता है कि इस दिन इस्लाम धर्म से जुड़ा हर शख्स अपने खुदा के सामने अपने सबसे करीबी को कुर्बान करता है जिसे ईद-उल-जुहा के नाम से जाना जाता है।

 इसे खास तौर पर हज यात्रा के बाद इस्लामिक संकृति में किया जाता हैं। इस्लामिक कैलंडर के अनुसार इसकी शुरुवात 10 धू-अल-हिज्जाह से हो कर हैं और 13 धू-अल-हिज्जाह पर खत्म होगी। इस तरह यह इस्लामिक कैलंडर के 12 वे महीने के 10 वे दिन मनाए जाते हैं।

बकरीद का महत्व  और बकरीद का अर्थ 

इस्लाम धर्म में बकरीद नामक यह कुर्बानी का त्यौहार रमजान के 2 महीने बाद आता है जिसमें कुर्बानी का महत्व भी बताया गया है।

बकरीद का दिन फर्ज-ए-कुर्बान का दिन होता हैं फर्ज-ए-कुर्बान का मतलब यह होता है कि इस्लाम धर्म में सभी लोग बकरीद के दिन बकरे की कुर्बानी देते हैं। मुस्लिम समाज के लोग इस कुर्बानी के लिए एक बकरे को अपने हैसियत के अनुसार अच्छे से पाल पोस कर बड़ा करते हैं और फिर बकरीद के दिन उसी पाले हुए बकरे को अल्लाह के नाम पर कुर्बान कर देते हैं। इसे ही इस्लाम धर्म में फर्ज-ए-कुर्बान के नाम से जानते हैं। इस्लाम धर्म में बकरीद के अवसर पर केवल बकरा ही नहीं बल्कि इस्लामी लोग गाय, भैंस, ऊंट, बकरी इत्यादि की भी कुर्बानी देते हैं।

इस अवसर पर कुर्बान किए जाने वाले किसी भी जानवर को सही से देख परे की जाती है। क्योंकि कुर्बान किए जाने वाले जानवर के सभी अंग सलामत होना जरूरी होता है उन्हें किसी प्रकार बीमारी नहीं होनी चाहिए। इसीलिए कुर्बान किए जाने वाले कुर्बानी को पहले से ही संभाल कर रखा जाता है।

इस्लाम धर्म का प्रमुख त्यौहार बकरीद से जुड़े सभी महत्वपूर्ण जानकारी

कुर्बान करने के बाद मांस के एक तिहाई हिस्सा खुद रखा जाता है, एक तिहाई रिश्तेदारो और दोस्तो को दिया जाता है और आख़री एक तिहाई हिस्से को गरीबो में बांट दिया जाता हैं।

इसके अलावा इस्लाम धर्म में हज करने को भी जिंदगी का सबसे जरूरी भाग बताया जाता है। जब वह हज करके वापस लौटते हैं तब बकरीद के अवसर पर अपने अजीज को कुर्बान करते हैं। इस्लाम धर्म में यह एक जरूरी नियम होता है जिसके लिए बकरे को पाला पोसा जाता है। ना चाहते हुए भी कुछ दिनो में बकरे के साथ भावनाओ का संगम हो जाता है और कुछ समय बाद उस बकरे को कुर्बान करना कठिन लगता है।लेकिन फिर भी यह किया जाता है इस्लाम धर्म के अनुसार कहा जाता है कि ऐसा करने से कुर्बान हो जाने की भावना बढ़ती है इसीलिए इस प्रकार का रिवाज मनाया जाता है। तो चलिए जानते हैं कि इस इस्लाम धर्म में बकरीद और कुर्बानी का यह नियम किस प्रकार शुरू हुआ।

बकरीद का इतिहास 

इस्लामिक त्यौहार बकरीद के पीछे एक ऐतिहासिक कहानी छुपा हुआ है। बकरीद नामक इस त्यौहार के पीछे दिल दुखाने वाली एक कहानी छिपी है जिसे सुनकर हर किसी का दिल कांप उठता है, तो चलिए जानते हैं इस पर्व के पीछे की कहानी क्या है।

दरअसल बात उन हजरत इब्राहिम की है जिन्हें अल्लाह का बंदा कहा जाता है। जिनके इबादत पैगंबर के तौर पर की जाती है हजरत इब्राहीम को हर एक इस्लामिक अल्लाह का दर्जा देते हैं क्योंकि इस शख्स को खुदा ने खुद इम्तिहान लिया था।

दरअसल कहां जाता है कि खुदा ने हजरत मुहम्मद साहब का इम्तिहान लेने के लिए उन्हें आदेश दिया कि अगर वह अपने बेइंतेहा अज़ीज़ को अल्लाह उनके सामने कुर्बान करते हैं तभी अल्लाह प्रसन्न होंगे।

अल्लाह का यह आदेश सुनकर हजरत इब्राहिम ने कुछ देर सोचा और फिर अपने अजीज को कुर्बान करने का फैसला किया। फिर सब ने यह जानना चाहा कि वह ऐसी क्या चीज है जो हजरत इब्राहिम की सबसे चहेती है, और जिसे अल्लाह कुर्बान में मांग रहे हैं।

तब उन्हें पता चला कि वो अनमोल चीज़ कुछ और नहीं बल्कि हजरत इब्राहिम का खुद का बेटा हजरत इस्माइल हैं जिसे वो आज अल्लाह के लिए कुर्बान करने जा रहे हैं।

यह बात जानकर सभी के रोंगटे खड़े हो गए कुर्बानी का समय भी करीब आ गया इस कुर्बानी के लिए उन्होंने अपने बेटे को तैयार किया जो बिल्कुल भी आसान नहीं था। जिस कारण उन्होंने अपनी आंखो पर पट्टी बाँध ली और अपने बेटे को कुर्बान कर दिया। और जब उन्होंने अपने आंखो से पट्टी हटाई तो उन्होंने अपने बेटे को आंखो के सामने सुरक्षित देखा। क्योंकि अल्लाह ने उनके बेटे के जगह अजीज बकरे की कुर्बानी कुबूल कर लि थी।

हज़रत इब्राहीम के कुर्बानी देने के जस्बे को देखकर अल्लाह खुश हुए और उन्होंने हजरत इब्राहीम के बच्चे की जान बक्श दी और उसकी जगह बकरे की कुर्बानी कुबूल कि। तब ही से बकरीद नामक त्यौहार और इस त्योहार पर कुर्बानी का यह नियम चला आ रहा हैं जिसे “बकरीद ईद-उल-जुहा” के नाम से जाना जाता हैं।

कैसे मनाया जाता है बकरीद का त्यौहार

बकरीद के दिन इस्लामी लोग सबसे पहले ईदगाह में जाकर ईद सलत पेश करते हैंं ईद की प्रार्थना नमाज अदा की जाती है। इस त्योहार को संपूर्ण परिवार व परिजनों के साथ मिलकर मनाया जाता है सभी मिलकर एक साथ भोजन करते हैंं। नए नए कपड़े खरीदकर पहनते हैं एक दूसरे को तोहफे देते हैं अपने से छोटे को ईदी देते हैं। इस दिन अमीर लोग गरीबो के लिए खाने का आयोजन करते हैं भूखे भोजन कराते हैं, पहनने के लिए नए कपड़े देते हैं।  

इस्लाम धर्म में इसी प्रकार बकरीद नामक इस कुर्बानी के त्यौहार को मनाया जाता हैं। दुनिया में जिस प्रकार हर एक त्यौहार प्रेम और शांति का प्रतीक होता हैं उसी प्रकार इस्लाम धर्म में बकरीद का पर्व कुर्बानी यानि त्याग का प्रतीक होता हैं।

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