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“National Endangered Species Day 2021″अवसर पर आइए जानते हैं प्रजातियो के विलुप्त होने के कारण, परिणाम और कुछ बचाव के बारे में।

हर साल मई महीने के तीसरे शुक्रवार के दिन राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस के तौर पर मनाया जाता है इस साल 2021 में यह दिवस 21 मई को मनाया गया। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य इस धरती पर व्याप्त वन्यजीवो और लुप्तप्राय प्रजातियो के संरक्षण के लिए लोगो में जागरूकता पैदा किया जा सके। भारत में कुछ प्रजाति व पक्षी तो अब विलुप्त भी हो चुके हैं जैसे कि मैंग्रोव पिट्टा, रेड जंगल फाउल, येलो वीवर, अलेक्जेंड्रीन पैराकीट, नीलगिरि फ्लाईकैचर, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, ऑस्टन ब्राउन हॉर्नबिल इत्यादि। 

लुप्तप्राय दिवस मनाने की शुरुआत 

इस धरती पर मानव के उत्पत्ति से पहले ऐसे ऐसे जीव जंतु और पशु पक्षी थे, जो अब केवल तस्वीर और किताबो में ही देखने को मिलती है।जीव जंतु हमारी परिस्थितिकी तंत्र को संतुलित करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन हम व्यक्ति इस सब से बेफिक्र होकर केवल अपने उन्नति पर ध्यान दे रहे हैं जो कि भविष्य में मनुष्य के लिए बहुत ही घातक साबित हो सकता है। पेड़ पौधे, जंगल की कटाई, जानवरो व पशु पक्षियो का शिकार, पर्यावरण में हो रहे हैं बदलावो ने पशु पक्षियो के अस्तित्व को पूरी तरह से खतरे में डाल दिया है। जिसे देखते हुए राष्ट्रीय लुप्तप्राय दिवस मनाने की शुरुआत की गई थी।

लुप्तप्राय प्रजाति दिवस का थीम

साल हर साल राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस अलग-अलग टीम के साथ मनाया जाता है इस साल 2021में राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस का थीम रखा गया था “वाइल्ड लाइफ विदाउट बॉर्डर। और पिछले साल 2020 में भी इस दिवस का थीम रखा गया था “पृथ्वी पर सभी जीवन को बनाए रखना” साल 2019 में इस दिवस का थीम रखा गया था “लोगों और ग्रह के लिए पानी के नीचे जीवन”।

राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस का इतिहास   

वैश्विक स्तर पर पहली बार लुप्तप्राय शब्द का उपयोग साल 1960 और साल 1970 के दशक में पर्यावरण संरक्षण के साथ ही जानवरो की लुप्त होती प्रजातियो पर विचार करने के लिए किया गया था। उस समय पर्यावरण में मौजूद वन्यजीवो की रक्षा और भलाई एक चिंता का विषय बन गया था। यूएस लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम साल 1972 अमेरिका में लुप्तप्राय प्रजातियो की रक्षा के लिए कई कानून और नियम बनाए गए। और उन्हे कानूनो के साथ जोड़ा गया जो कि लुप्तप्राय प्रजातियो की रक्षा के लिए कुछ नियम निर्धारित करते हैं। 

कहा जाता है कि साल 2006 में संयुक्त राष्ट्र संघ में यूनाइटेड स्टेट्स ने एक राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस अधिनियम पारित करके लुप्तप्राय प्रजाति दिवस मनाने पर जोर दिया। जिसके बाद से ही हर साल मई महीने के तीसरे शुक्रवार को राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस के तौर पर मनाया जाने लगा। मानव जीवन के विकास और अस्तित्व के लिए सभी प्रजातियो का संरक्षण जरूरी होता है और राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस इस और लोगो को जागरूक करने के लिए बेहद कारगर कदम है।

राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस का महत्व 

इस संसार में जन्म लेने वाले सभी प्राणियो की मृत्यु निश्चित होती है हालांकि पर्यावरण में असंतुलन होने के कारण धरती से कई प्रजातिया विलुप्त भी हो रही है यानी कि विलुप्त की अवस्था में है। इनके संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर लुप्तप्राय प्रजाति दिवस के तौर पर मनाया जाता है जो कि एक सराहनीय कदम है। यह दिन दुनिया भर से खत्म होने की कगार पर पहुंचे और वन्यजीवो के संरक्षण में हर साल मई महीने के तीसरे शुक्रवार को मनाया जाता है। जैसे जैसे पेड़ धरती पर मनुष्य का साम्राज्य बढ़ रहा है वैसे-वैसे जीव जंतु धीरे-धीरे विलुप्त हो रहे हैं और कहीं ना कहीं तो यह हो भी चुका है। जिसमें से एक उदाहरण है गौरैया सुबह-सुबह घर के आंगन और छत में दिखाई देने वाली गौरैया चिड़िया अब मुश्किल से ही कभी कभार देखी जाती है।

“National Endangered Species Day 2021″अवसर पर आइए जानते हैं प्रजातियो के विलुप्त होने के कारण, परिणाम और कुछ बचाव के बारे में।

दुनिया में अगर हर एक व्यक्ति इस प्रकार विलुप्त होती प्रजातियो पर ध्यान देने लगे और कुछ महत्वपूर्ण प्रयासो को अपनाकर चले तो शायद आने वाले समय में विलुप्त होती प्रजातियों की संख्या में कमी आने लगेगी और आने वाले समय में मानव भी खतरे में नहीं रहेंगे। लुप्तप्राय प्रजातियो को बचाने के लिए हम लोगो को इन बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। 

लुप्त हो रहे प्रजातियो के लिए आम व्यक्ति भी करें प्रयास

  • भारत से लुप्त हो रहे प्रजातियो को बचाने के लिए कुछ स्तर पर आम व्यक्ति भी कुछ पहल करके सुधार करने में अपना योगदान दे सकते हैं। लुप्त हो रहे प्रजातियो के विभिन्न समूहो के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी प्राप्त करें और ज्यादा से ज्यादा इस बारे में लोगो से बात करके उन्हें जागरूक बनाए। लुप्तप्राय प्रजाति दिवस कार्यक्रम में भाग ले और इसके महत्व को जानने का प्रयास करें कि किस तरह यह परिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। अपने साथ-साथ दोस्त और परिवार के साथ लुप्तप्राय दिवस के बारे में बताएं और वन्य जीव संदेश के साथ लोग उन्हें बचाने के लिए क्या क्या कर रहे हैं इसकी भी जानकारियां लोगों से साझा करें। 
  • लुप्तप्राय प्रजातियो को बचाने के लिए ग्लोबल वार्मिंग और मौसम में परिवर्तन पर ध्यान देने की बेहद जरूरत है।
  • बढ़ते हुए प्रदूषण को कंट्रोल करने की आवश्यकता है। 
  • जंगलो में जानवरो की तस्करी और शिकार पर भी पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने की जरूरत है।
  • लुप्तप्राय प्रजातियो के प्रजनन पर भी ध्यान देना जरूरी है इससे लुप्तप्राय प्रजातियो को बचाया जाना संभव है।
  • लुप्तप्राय प्रजातियो को उनके जीवन शैली के अनुरूप आदर्श स्थिति बनाने की आवश्यकता है।
  • बच्चो को जैव विविधता और संरक्षण के बारे में जानने में मदद करें। 
  • अपने आसपास के पौधो और जानवरो पर अत्याचार देखने पर उन्हें रोकने का प्रयास करें। 
  • संरक्षण समूह या वन्यजीव संगठन को डोनेट करें। 
  • अपने आसपास के पशु पक्षियो पर हो रहे कई प्रकार अत्याचारो को रोकने के लिए जितना हो सके अपनी तरफ से उन्हें प्यार और संरक्षण प्रदान करें।

ब्रिटिश सरकार ने वन्यजीवो की सुरक्षा के लिए सबसे पहले साल 1879 में “वाइल्ड एलिफेंट्स प्रोटेक्शन एक्ट” के नाम से पारित किया था। इन उल्लेखित अधिनियमो का व्यापक प्रभाव पड़ा लेकिन वनो की सुरक्षा के लिए किसी भी प्रकार के प्रभावी प्रयास ना होने के कारण अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। साल 1927 में वनो की सुरक्षा, वैज्ञानिक प्रबंध और विदोहन तथा वन्य जीव के हितार्थ में “भारतीय वन अधिनियम” के रूप में एक निश्चित अधिनियम पारित किया गया। जिसके अंतर्गत वन और वन्य जीवो से संबंधी होने वाले अपराधो को रोकने के लिए आर्थिक और शारीरिक दंड की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई थी। हाल ही में देश में बाघो की संख्या में भी बेहद कमी आई थी जिसके बाद सरकार ने इस पर खास ध्यान दिया और बाघो के संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास किए गए। इस अथक प्रयास के परिणाम स्वरुप आज देश में बाघो की संख्या दुगनी हो गई।

लुप्तप्राय प्रजाति दिवस मनाने का उदेश्य 

इस दिन के दौरान कई ऐसी प्रजाति के बारे में जानकारी पढ़ने और जानकारी हासिल करने का मौका मिलता है जो कि अब लगभग विलुप्त भी हो चुके हैं और होने की कगार पर है। इस कार्यक्रम से लुप्तप्राय प्रजातियो की रक्षा के महत्व पर जागरूकता पैदा करने में काफी हद तक मदद मिलती है। राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस लोगो को लुप्तप्राय प्रजातियो की सुरक्षा के महत्व के बारे में जानने का अवसर प्रदान करती है। इस दिन हमें मिलकर वन्य जैव विविधता लुप्तप्राय प्रजातियो के संरक्षण के महत्व के बारे में जनता के बीच जागरूकता पैदा करने की दिशा में काम करना चाहिए। 

प्रजातियो के विलुप्त होने का कारण

आज के समय में विकास के नाम पर अपनी सुख-सुविधाओ के लिए लोगो ने प्रकृति को पूरी तरह से दोहन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। जिसके परिणाम स्वरूप आज लगातार जीव जंतुओ और वनस्पति प्रजातिया कम होने के साथ ही विलुप्त होती जा रही है साथ ही जैव विविधता पर गंभीर संकट आ चुका है। जीव जंतुओ के विलुप्त होने से अब मानव प्रजाति ही खतरे के चपेट में नजर आ रही है। लोग अपनी सुविधा के लिए वनस्पति और प्रकृति की बलि तो चढ़ा देते हैं लेकिन यह सोचते भी नहीं की इसके परिणाम स्वरूप मानव प्रजाति भी धीरे-धीरे खत्म होने लगेगी।

ऐसे में हम मनुष्यो तक लुप्तप्राय प्रजाति दिवस के अवसर पर लोगो तक इन प्रजातियो की जानकारी पहुंचाकर, उनके आवासो की सुरक्षा करके, उनके प्राकृतिक महत्व के बारे में लोगो में ज्यादा से ज्यादा जानकारी देकर लुप्तप्राय प्रजाति दिवस को अपनी तरफ से सफल और सकारात्मक बनाने में अपना योगदान दे सकते हैं।

BRDS के द्वारा लुप्तप्राय प्रजातियो के निर्धारण का मानक तय है वह प्रजातिया जिनकी जनसंख्या 50% से 70% घट जाती है। 5 हजार वर्ग किलोमीटर से कम का कुल भौगोलिक क्षेत्र 500 वर्ग किलोमीटर से कम का स्थानीय जनसंख्या क्षेत्र वाली प्रजाति है। जिन प्रजातियो की जनसंख्या में वयस्क 2,500 से कम हैं उन्हे विलुप्तप्राय श्रेणी के अंतर्गत रखा जाता है। पक्षियो, वन्यजीवो की प्रजातियो के विलुप्त होने की ओर ले जाने वाले कारको में मानवीय गुणो की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। सूखते और सिकुड़ते वेटलैंड्स हेविटाट खराब होना पर्यावरण में विदेशी प्रजातियो की घुसपैठ, लोगो द्वारा किया गया अंधाधुन शिकार, पर्यावरण प्रदूषण, वनो की कटाई, अनुवांशिक कारण और बीमारी, जलवायु परिवर्तन इत्यादि सभी प्रमुख है।

Jhuma Ray
नमस्कार! मेरा नाम Jhuma Ray है। Writting मेरी Hobby या शौक नही, बल्कि मेरा जुनून है । नए नए विषयों पर Research करना और बेहतर से बेहतर जानकारियां निकालकर, उन्हों शब्दों से सजाना मुझे पसंद है। कृपया, आप लोग मेरे Articles को पढ़े और कोई भी सवाल या सुझाव हो तो निसंकोच मुझसे संपर्क करें। मैं अपने Readers के साथ एक खास रिश्ता बनाना चाहती हूँ। आशा है, आप लोग इसमें मेरा पूरा साथ देंगे।

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