“Corona Vaccination” आइए जानते हैं देश में कोरोना की क्या है स्थिति और कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर लोगो की गलतफहमी

0
"Corona Vaccination" आइए जानते हैं देश में कोरोना की क्या है स्थिति और कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर लोगो की गलतफहमी

कोरोना संक्रमण के दूसरे लहर में पिछले कुछ दिनो से देश में कोरोना मरीजों के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। लेकिन बीते तीन-चार दिनों में मामले थोड़े कम होते नजर आए। हालांकि फिर भी हर दिन आंकड़ा 3 लाख के पार ही दिखाई दे रहा है। इसी बीच कोरोना टीकाकरण अभियान भी काफी तेजी से चलाए जा रहे हैं। देश में अब तक 15 करोड़ 72 लाख से भी ज्यादा टीके लगाए जा चुके हैं और अब तो कई राज्यो में 18 से 44 साल के लोगो को भी टीके लगाए जा रहे हैं।

किसी भी व्यक्ति का लैब रिपोर्ट और मानव शरीर पर उसका असर अलग अलग होता है जहां तक स्पूतनिक का है कि इसे 91% प्रभावी बताया जा रहा है। लेकिन यह भारत के अलग-अलग लोगो में कितने प्रतिशत प्रभावी होती है इसका पता वेक्सिन के प्रयोग होने के बाद ही चलेगा। लेकिन 100 प्रतिशत तो वैसे भी कोई दवाई प्रभावी नहीं होती वर्तमान देश में कोविशिल्ड और कोवैक्सीन ही लगाई जा रही है। ऐसे में यह ना सोचें कि कौन सा वैक्सीन लगाएंगे बस सेंटर पर जाकर देश के हर एक व्यक्ति को वैक्सीन लगवानी है। चाहे वह कोविशील्ड वैक्सीन हो या कोवैक्सीन हर एक व्यक्ति हर एक वैक्सीन का अलग-अलग असर हो सकता है। 

Covid vaccine Registration 

कोविड वेक्सिनेशन के रजिस्ट्रेशन की बात करें तो अगर किसी को रजिस्ट्रेशन नहीं करने आ रहा है या उसके पास स्मार्टफोन, कंप्यूटर डिवाइसेज नहीं है तो उनके पास कई और तरीके हैं। इसके लिए वे सेंटर के नोडल ऑफिसर से संपर्क करके अपनी समस्या बताएं वह आपको बताएंगे कि इसका रजिस्ट्रेशन कैसे करना है। वह रजिस्ट्रेशन कराकर वैक्सीन लगवा देंगे, वैसे रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आरोग्य सेतु एप और कोविड पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैंं।

लेकिन लोग इस महामारी के बीच भी नहीं समझ रहें हैं। खासकर के ग्रामीण क्षेत्रो की बात करें, तो वे लोग पूरी बात सुनते और समझते भी नहीं है और पहले ही आकलन लगा लेते हैं। वैक्सीन की पहली डोस शरीर को इस बात के लिए तैयार करती है और जब शरीर को दूसरा डोस मिलता है तो उसके कम से कम 2 हफ्ते बाद शरीर में एंटीबॉडी बनाना शुरू करते हैं। अब इस बीच जो लोग बाहर जाते हैं वह संक्रमण हो जाते हैं और उन्हें लगता है कि वैक्सीन काम नहीं कर रही है। इसीलिए कहा जाता है कि वैक्सीन लगवाने के बाद भी नियमो को पालन ही करते रहें। इसके अलावा 2 हफ्ते के बाद भी अगर किसी को संक्रमण हुआ है तो आप देखेंगे कि बीमारी गंभीर नहीं है।

कुछ दिन पहले कोरोना से लड़ने के लिए केवल मास्क लगाना, हाथ धोना और आपसी बचाव ही एकमात्र उपाय बताया जा रहा था। लेकिन अब वैक्सीनेशन आ गया है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम लापरवाही बरते। अभी भी जब तक वैक्सीन की पूरी डोज नहीं मिल जाती तब तक हर एक व्यक्ति को पूरी सावधानियो के साथ ही चलना जरूरी है। लेकिन लोगो ने लापरवाही करना छोड़ा ही कहां है पहले भी लोग आपसी दूरी का ध्यान नहीं रखते थे। कुछ लोग मास्क ना पहनना जैसी लापरवाही करते थे और आज भी लोग वैक्सीनेशन के क्षेत्र में लापरवाही कर रहें हैं जो बिल्कुल सही नहीं है।

इसीलिए धैर्य के साथ काम लें और नंबर आने पर जल्दी जाकर बिना डरे वैक्सीन लगवाए। जब देश में  50% से ज्यादा टीकाकरण हो जाएगा तो कहीं ना कहीं जरूर इस कोरोना महामारी से लोगो को राहत मिलेगी। वैक्सीनेशन के क्षेत्र में भी लोग लापरवाही कर रहे हैं।और अपने आप में ही अफवाह बनाकर हर जगह बात फैला रहे हैं, कि वैक्सीनेशन के बाद भी बीमारी फैल रही है। आज हम सब को हम सब की जरूरत है और साथ मिल कर वैक्सीन लगवाना है। लेकिन इसमें जरूर समय लगेगा इसीलिए हमें सब्र के साथ चलना होगा। 

दरअसल कोरोना वायरस के दूसरे लहर में लोगो में नकारात्मकता का माहौल ज्यादा हावी हो चुका है। पिछले साल भी कोरोना का लहर इस तरह छाया की लोग पूरी तरह से घबरा गए और इस साल फिर से दूसरी लहर आने पर लोगो में नकारात्मकता और अधैर्य पहले से भी ज्यादा बढ़ गया है। रोजाना कोरोना के बढ़ते मामले आसपास के लोग और प्रियजनो के संक्रमित होने की खबरे, लॉकडाउन का माहौल लोगो के मानसिक स्वास्थ्य को भी काफी नुकसान पहुंचा रहा है। विशेषज्ञो के अनुसार कोरोना की दूसरी लहर ना केवल गंभीर है बल्कि इस बार लोग तेजी से संक्रमित भी हो रहे हैं।

ऐसी भारी समस्या तब वापस लौटी जब ऐसा लगने लगा था कि अब सब कुछ ठीक हो रहा है। इस तरह की परिस्थितियो ने लोगो को कई तरह से प्रभावित किया है। जिसका असर खास तौर पर लोगो में तनाव, चिरचिरापन, अवसाद के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञो के अनुसार ऐसे समय में लोगो को अपने शारीरिक और मानसिक दोनो का पूरी तरह से ध्यान रखना बहुत जरूरी है। और ऐसे में लोग वैक्सीन पर भी भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि जब पहली बार कोरोना की लहर आई थी उसके बाद कुछ हद तक यह थम गई थी उस समय लोगो में इतना भय का माहौल नहीं था। 

लेकिन अब फिर से इस साल उसी स्थिति को देखकर लोगो में ज्यादा नेगेटिव विचार भर गए हैं और लोग पॉजिटिव चीजो को भी नेगेटिव नजरिए से देखना शुरू कर चुके हैं।लाजमी है कि व्यक्ति के प्रतिकूल परिस्थितियो में उदास होना भयभीत होना एक साधारण मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है। लेकिन ऐसे में जरूरी है कि आप घर में या आसपास ऐसी दिक्कतो का सामना कर रहे लोगो को पहचाने और उनकी मदद करें। यह समय एक दूसरे का साथ देने एक दुसरे का मनोबल बढ़ाने का समय है। एक-दूसरे को इस कोरोना से लड़ने और वैक्सीन लगवाने के प्रति जागरूक करने का समय है।

Leave a Reply