“World Hmeopathy Day” होम्योपैथी एक साधारण इलाज, जानिए कब और कैसे मानते हैं होम्योपैथी दिवस।

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"World Hmeopathy Day" होम्योपैथी एक साधारण इलाज, जानिए कब और कैसे मानते हैं होम्योपैथी दिवस।

होम्योपैथी आसान, कम लागत और दुष्परिणाम रहित होने के साथ ही कम खर्चीली पद्धति है। इन दवाओ से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है साथ ही यह बीमारी को जड़ से होम्योपैथि एक पुरानी पद्धति है और यह बीमारी को जड़ से खत्म करने में भी कारगर है। 

होम्योपैथी क्या है 

होम्योपैथी एक चिकित्सा प्रणाली है, जो इस भरोशे पर आधारित है, कि शरीर खुद को ठीक कर सकता है। होम्योपैथी चिकित्सा की एक प्रणाली है, जो शरीर को अपने उपचार प्रतिक्रियाओ को ट्रिगर करने के सिद्धांत पर आधारित होता है। होम्योपैथी चिकित्सा का ही एक वैकल्पिक रूप है, जो “सम: समम् शमयति” या “समरूपता” दवा सिद्धांत पर आधारित है। केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के अनुसार, यह दवाओ द्वारा रोगी का उपचार करने की एक ऐसी विधि है, जिसमें किसी स्वस्थ व्यक्ति में प्राकृतिक रोग का अनुरूपण करके समान लक्षण उत्पन्न किया जाता है, जिससे रोगग्रस्त व्यक्ति का उपचार किया जा सकता है। इस पद्धति में रोगियों का उपचार न केवल होलिस्टिक दृष्टिकोण के माध्यम से, बल्कि रोगी के व्यक्तिवादी विशेषताओ को समझ कर किया जाता है। होम्योपैथिक दवाएं लागत प्रभावी, रुचिकर होती है, इनका कोई साइड अफेक्ट नहीं होता और ना ही इनका आसानी से सेवन किया जा सकता है।

विश्व होम्योपैथी दिवस क्यों और कैसे मनाया जाता है    

विश्व होम्योपैथी दिवस (World Homeopathy Day) के अवसर पर, विभिन्न प्रकार के सम्मेलनो का आयोजन किया जाताा हैं, जिसमें होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली के प्रसार और इसकी विशेषताओ को विकसित करने के बारे में चर्चा की जाती है। होम्योपैथी चिकित्सा आज दुनिया में सबसे लोकप्रिय वैकल्पिक उपचारो में से एक है। विश्व होम्योपैथी दिवस मानाने का उद्देश्य होम्योपैथी के बारे में बेहतर जागरूकता पैदा करना, इसकी पहुंच में सुधार करना और चिकित्सा प्रणाली को आधुनिक बनाना है। विश्व होम्योपैथी दिवस समाज को एक साथ लाने, चिकित्सा प्रणाली को मजबूत करने और आधुनिक बनाने का प्रयास करता है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो को फायदा मिल सके। 

“World Hmeopathy Day” होम्योपैथी एक साधारण इलाज, जानिए कब और कैसे मानते हैं होम्योपैथी दिवस।

World Homeopathy Day को केवल डॉ. हैनिमैन की जयंती के उपलक्ष्य के उद्देश्य से ही नहीं मनाते बल्कि होम्योपैथी को आगे ले जाने की चुनौतियो और भविष्य की रणनीतियो को समझने के लिए भी मनाया जाता है। इसका उद्देश्य यही है कि चिकित्सा के इस अलग प्रणाली के बारे में जागरूकता पैदा की जाए और आसानी से सभी तक इसकी सफलता पूर्ण पहुंच बनाई जाए। विश्व होम्योपैथी दिवस समुदाय को चिकित्सा की प्रणाली को स्थापित करने, सुदृढ़ करने और आधुनिकीकरण करने के लिए एक साथ लाने का प्रयास करता है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ ले सके।

होम्योपैथी चिकित्सा में ज्यादा परहेज की आवश्यकता नहीं होती 

होम्योपैथी में ज्यादा परहेज की आवश्यकता नहीं होती केवल उन्हीं चीजो को मना किया जाता है जो मरीज परेशानी को बढ़ा देती है। व्यक्ति में होने वाले मासिक चक्र की गड़बड़ी, हार्मोनल समस्या, श्वेत प्रदर, बांझपन, मेनोपाज के समश्या का इलाज होम्योपैथिक चिकित्सा में उपलब्ध है। इस सब के अलावा मानसिक बीमारियो के साथ ही नरवस सिस्टम से जुड़ी समस्याओ में भी इन दवाओ से बेहतर इलाज संभव है। साथ ही पान, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, शराब की लत भी छुड़ाई जा सकती। आयुर्वेद, एलोपैथ और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियो की तरह ही होम्योपैथी की भी अपनी ही विषेशता है। हर साल 10 अप्रैल को सैमुअल हैनीमैन की याद में विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। होम्योपैथी के जनक माने जाने वाले जर्मन मूल के ईसाई फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन का जन्म 10 अप्रैल को ही हुआ था। 

हर एक व्यक्ति पर होम्योपैथी अलग तरीके से काम करती है और इसका असर भी अलग-अलग व्यक्तियो पर अलग प्रकार का होता है। होम्योपैथी में डाइट कंट्रोल की ज्यादा आवश्यकता नहीं होती, लेकिन  होम्योपैथी  दवाई खाने पर लहसुन, कच्चा प्याज, अदरक इत्यादि नही खानी चाहिए। जो लोग इसे मानते हैं वे कम मात्रा में पौधो और खनिजो जैसे प्राकृतिक पदार्थो का उपयोग करते है। आज दुनिया के 100 से भी ज्यादा देशो में होम्योपैथी के दवाई से ही ईलाज किया जा रहा है।

विश्व होम्योपैथी दिवस का थीम   


इस साल 2021 में उनकी 266 वी जयंती मनाई जाएगी। हर साल आयुष मंत्रालय इसकी थीम निर्धारित करती है और देशभर में यह विशेष दिवस के रूप में मनाया जाता है। बीते साल 2020 में  होम्योपैथी दिवस का थीम रखा गया था “Linking research with education and clinical practice: Advancing scientific collaborations”। हर साल भारत में, विश्व होम्योपैथी दिवस आयुष मंत्रालय व भारत सरकार के तत्वावधान में मनाया जाता है। विश्व होम्योपैथी दिवस या विश्व होम्योपैथी जागरूकता सप्ताह हर साल 10 अप्रैल से 16 अप्रैल तक मनाया जाता है। होम्योपैथी सप्ताह के दौरान, दुनिया भर में सार्वजनिक तौर पर फ्री में कार्यक्रमो का आयोजन होता है। इस पोस्ट में हम आपको होम्योपैथी दिवस के बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं।

10 अप्रैल को क्यों मनाई जाती है विश्व होम्योपैथी दिवस


10 अप्रैल को दुनिया भर में “विश्व होम्योपैथी दिवस” के रूप में मनाया जाता है। 10 अप्रैल की तारीख को इस आयोजन की शुरुआत के लिए चुना गया था, क्योंकि यह जर्मन चिकित्सक डॉ सैमुअल हैनिमैन का जन्मदिन (Dr. Samuel Hahnemann’s Birthday) है, जिन्हें होम्योपैथी बनाने का श्रेय दिया जाता है। डॉ हैनिमैन को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि देने के लिए विश्व होम्योपैथी दिवस का आयोजन किया जाता है। डॉ सैमुअल हैनिमैन जर्मनी के प्रसिद्ध चिकित्सक वैद्य doctor थे। उन्होंने ही होम्योपैथी का आविष्कार किया था। उनका जन्म साल 1755 में जर्मनी के मीसेन में हुआ था और उनका निधन साल 1843 में फ्रांस के पेरिस में हो गया।

होम्योपैथी शब्द का अर्थ 

विश्व होम्योपैथी दिवस का उद्देश्य होम्योपैथी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और होम्योपैथी की पहुंच में सुधार करना है। डॉ. हैनिमैन के जन्मदिन के एक सप्ताह बाद के समय को विश्व होम्योपैथी सप्ताह के रूप में जाना जाता है। इस दिन होम्योपैथी से जुड़े कई विषयो पर चर्चा होती है। होम्योपैथी शब्द यूनानी शब्द (homeopathy meaning) होमो से निकला है, जिसका मतलब है समान और पैथोस और इसका अर्थ है दुःख या बीमारी। इन बीमारियो में होम्योपैथी है कारगर 

“World Hmeopathy Day” होम्योपैथी एक साधारण इलाज, जानिए कब और कैसे मानते हैं होम्योपैथी दिवस।

होम्योपैथी को वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में भी जाना जाता है। भले ही इसकी दवाओ का असर धीरे होता है, लेकिन यह रोगो को जड़ से खत्म करता है। और सबसे खास बात तो यह है कि होम्योपैथी दवाओ के साइडइफेक्ट बिल्कुल भी नहीं होते। एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने, कार्डियोवैस्कुलर बीमारी की रोकथाम करने और याद दाश बढ़ाने में अन्य दवाओ की तुलना में होम्योपैथी की दवाएं ज्यादा कारगर होती हैं। होम्यापैथी बच्चो में वंशानुगत बीमारियो की संभावना को दूर करती है। इससे साइनस, टांसलाइटिस, ट्यूमर, सिस्ट, फाइब्राइट, प्रोलेप्स ऑफ यूटेरस, गुदा द्वार का बाहर निकलना, पाइल्स, फिस्चुला आदि का इलाज संभव है। चर्म रोग में भी दवा काफी असरदार साबित होती है। लेकिन अगर शरीर में किसी विटामिन की कमी हो जाए, तो होम्योपैथी से उनका ज्यादा इलाज नहीं किया जा सकता। 


डायरिया, सर्दी-जुकाम, बुखार जैसी बीमारियों में होम्योपैथी की दवा एलोपैथी की तरह ही तेजी से काम करती है। गठिया, आस्थमा, त्वचा संबंधी रोग आदि को ठीक करने में होम्योपैथी पूरा समय लेती है लेकिन इसे जड़ से खत्म करने का काम भी करती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, किसी भी तरह के तनाव और दर्द में होम्योपैथी की दवा बेहतर साबित हुई है। इसकी डोज जल्दी काम करती है और किसी प्रकार साइडइफेक्ट बी भी नहीं होता। शुरुआत से ही होम्योपैथी की आदत लगाने वाले लोग माइग्रेन जैसी परेशानियो से दूर रहते हैं। गठिया जैसी बीमारी को होम्योपैथी की दवाए तक कम रकता है। वहीं नींद से जुड़ी समस्याओ में भी होम्योपैथी की दवा बहुत हद तक काम करती  है। होम्योपैथी की दवाएं दिखने में एक जैसी लगती है, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में चार हजार से ज्यादा तरह की होम्योपैथी की दवाएं हैं।

इस पोस्ट में  हमने आपको “World Homeopathy Day” के बारे में पूरी जानकारी दी है। हम उम्मीद करते हैं की विश्व होम्योपैथी दिवस के बारे में हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको अच्छी लगी होगी अगर आपको यह पोस्ट अच्छा लगा तो इस पोस्ट को लाइक करें और ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

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