Thursday, May 19, 2022
Homeहिन्दीलोकप्रिय1 April अप्रेल फूल डे (All Fools' Day) जानिए अप्रैल फूल डे...

1 April अप्रेल फूल डे (All Fools’ Day) जानिए अप्रैल फूल डे के बारे में आखिर क्यों मनाया जाता है यह दिन

केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में हर साल अप्रैल फूल डे मनाया जाता है। इस दिन कई देशो में तो छुट्टी भी रहती है। इस दिन लोग एक-दूसरे से मस्ती मजाक भी करते हैं। इस दिन लोग मैसेज भेजकर, प्रैंक करने के अलावा और भी कई तरीको को अपनाकर एक दूसरे के साथ मजाक करते हैं। कुछ जगहो पर तो इसे ‘ऑल फूल्स डे’ (All Fools’ Day)  के नाम से भी जाना जाता है। लोग इन मजाकों का बुरा भी नहीं मानते बल्कि इस सबसेखुश  होते हैं, और होना भी चाहिए। क्या आप जानते हैं, कि इस दिन को कब से कैसे और क्यों मनाया जाता है, इसकी शुरुआत कैसे हुई। तो इस पोस्ट में आज आप इसके बारे में सब जान जाएंगे।

विभिन्न देशो के विभिन्न तरीके 

अलग-अलग देशो में अलग-अलग तरीको से अप्रैल फूल  मनाया जाता है। जैसे की ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका और ब्रिटेन में अप्रैल फूल डे केेेवल दोपहर तक ही मनाया जाता है। जबकि कुछ और देशो में जैसे कि जापान, रूस, इटली,  फ़्रांस, दक्षिण कोरिया, नीदरलैण्ड, जर्मनी, कनाडा, अमेरिका, आयरलैंड और ब्राजील जैसे देशो में पूरा दिन अप्रैल फूल डे मनातेे हैं। इस दिन दोस्त,रिश्तेदार, शिक्षक, पड़ोसि, सहकर्मिय आदि के साथ अनेक प्रकार की शरारतपूर्ण हरकतें और अन्य मजाक किए जाते हैं। 

1 April अप्रेल फूल डे (All Fools’ Day) जानिए अप्रैल फूल डे के बारे में आखिर क्यों मनाया जाता है यह दिन

इस दौरान लोगो को झूटी बात कही जाती है मज़ाक किया जाता है और जो व्यक्ति हंसी मजाक पर विश्वास  कर लेता है उसे अप्रैल फूल कहा जाता है। अप्रैल फूल दिवस की शुरुआत के बारे में कोई साफ जानकारी तो नहीं है। लेकिन कहा जाता है कि फ्रेंच कैलेंडर में होने वाले बदलाव के कारण अप्रैल फूल डे मनाने की शुरुआत हुई है और इसे लोग बड़ी संख्या में मानते हैं। 

कहा जाता है कि पहला अप्रैल फूल डे साल 1381 में मनाया गया था। और इसके पीछे एक मजेदार बात भी बताई जाती है  और वह बात यह है कि इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय और बोहेमिया की रानी एनी ने सगाई का ऐलान किया था और सगाई के लिए 32 मार्च साल 1381 का दिन चुना गया है। यह बात सुनकर लोग बहुत खुश हो गए और जश्न मनाने लगे। लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि यह दिन तो साल में आता ही नहीं है। और इसीलिए तभी से 31 मार्च के बाद 1 अप्रैल को मूर्ख दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हो गई।

कहानी नए कैलेंडर की

17वी सदी में युरोप के करीब सभी देशो में एक कैलेंडर प्रचलन में था, जिसके अनुसार हर साल पहली अप्रैल से नया साल शुरु होता था। लेकिन साल 1564 में वहां के राजा चार्ल्स-9 ने एक अच्छा और मार्डन कैलेंडर को उपयोग करने का आदेश दिया। इस नए कैलेंडर के अनुसार एक जनवरी से नए साल की शुरुआत मानी गयी थी लेकिन कुछ पुरातनपंथियों ने नये कैलेंडर को न मानते हुए, अप्रैल महिनें के पहले दिन को ही नववर्ष मनाते रहे। और इन्हें ही रास्ते पर लाने के लिए नया कैलैंडर बनाने वालो ने उन्हें मूर्ख साबित करते हुए उनके खिलाफ विभिन्न मजाक भरी बाते, प्रहसन, झूठे तोहफ़े और मूर्खतापूर्ण अंदाज से बधाइयां देनी शुरु कर दी है धीरे-धीरे सभी ने नए कैलेंडर को मान्यता देना शुरु कर दिया, लेकिन 1 अप्रैल के दिन लोगो को मूर्ख बनाने का चलन बंद नहीं हुआ और आज भी इसी प्रकार लोगो को मूर्ख बनाने का प्रयास किया जाता है।

और एक कहानी के अनुसार कहा जाता है कि चीन में सनंती नाम का एक संत रहा करते थे। उस संत की दाढ़ी इतनी लंबी थी कि उनकी दाढ़ी जमीन छूती थी। एक दिन जब वह कहीं से गुजर रहे थे तो उनकी दाढ़ी में आग लग गई और वह बचाओ-बचाओ करके चीखते हुए अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इस तरह उन्हें जलती दाढ़ी के साथ उछलते देखकर बच्चे ताली बजाकर हंसने लगे। संत ने कहा कि मैं मर रहा हूं, लेकिन तुम आज के दिन हमेशा किसी न किसी पर यूं ही हंसते रहोगे। ऐसा कहते हुए उनकी मृत्यु हो गयी. संयोगवश वह 1 अप्रैल का ही दिन था.

गधो के स्नान को लेकर फैली थी अफवाह

1 April अप्रेल फूल डे (All Fools’ Day) जानिए अप्रैल फूल डे के बारे में आखिर क्यों मनाया जाता है यह दिन

इतिहास में 1860 की 1 अप्रैल खासी मशहूर रही है. लंदन में हजारों लोगों के पास डाक कार्ड से पोस्ट कार्ड द्वारा एक सूचना पहुंची कि आज शाम टॉवर ऑफ लंदन में सफेद गधों के स्नान का कार्यक्रम होगा. इस कार्यक्रम को  देखने के लिए आप आमंत्रित हैं. कृपया साथ में कार्ड अवश्य लाएं. मालूम हो कि उस समय टॉवर ऑफ लंदन में आम जनता का प्रवेश वर्जित था. शाम होते टावर के आसपास हजारों लोगों की भीड़ जमा होने लगी और अंदर प्रवेश के लिए धक्का-मुक्की होने लगा लगी. लोगों को जब पता चला कि उन्हें मूर्ख बनाया गया है तो वो किसी आकर अपने घर लौट गए। 

इस प्रकार लोग एक दूसरे के साथ हँसी मजाक करके इस दिन को मनाते हैं और खुश रहने का एक बहाना भी उन्हें मिल जाता है। आजकल लोग खुश रहने के लिए भी बहाने खोजने लगे हैं, ऐसे में यह एक अच्छा अवसर है लोगो के खुश रहने का। आजकल बिजी भरी दुनिया में लोग हंसी मजाक तो क्या बोलने के लिए भी समय नहीं रखते। लेकिन यह एक ऐसा दिन है जब लोग एक दूसरे से हंसी मजाक करने के लिए मजबूर हो जाते हैं और उन्हें करना पड़ता है। उम्मीद है इस दिन के बारे में जानकारी आपको अच्छी लगी होगी और इस दिन को आप अच्छे से मनाते भी होंगे। खास करके यह एक ऐसा दिन है जब लोग अपने किसी भी रिश्तेदार, दोस्त या किसी के भी साथ मज़ाक कर सकते है बेवकूफ बनाकर मजे लूट सकते हैं।  

Jhuma Ray
Jhuma Ray
नमस्कार! मेरा नाम Jhuma Ray है। Writting मेरी Hobby या शौक नही, बल्कि मेरा जुनून है । नए नए विषयों पर Research करना और बेहतर से बेहतर जानकारियां निकालकर, उन्हों शब्दों से सजाना मुझे पसंद है। कृपया, आप लोग मेरे Articles को पढ़े और कोई भी सवाल या सुझाव हो तो निसंकोच मुझसे संपर्क करें। मैं अपने Readers के साथ एक खास रिश्ता बनाना चाहती हूँ। आशा है, आप लोग इसमें मेरा पूरा साथ देंगे।
RELATED ARTICLES

Leave a Reply

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

error: Content is protected !!
%d bloggers like this: